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दृश्युद्वीयुग को भी दे दिया जाए क्या तरह काम नहीं याद है आप सभी तक
अर्जुन सिंगाड़िया
दृश्युद्वीयुग को भी दे दिया जाए क्या तरह काम नहीं याद है आप सभी तक
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- एक उपयोगकर्ता ने मक्का की फसल लगाने की जानकारी साझा की है। उन्होंने अपनी फसल कैसी लगी है, इस बारे में अन्य लोगों से टिप्पणी मांगी है, विशेषकर यह जानने के लिए कि फसल पकेगी या नहीं।2
- जनसेवा और सामाजिक सरोकार की भावना को आगे बढ़ाते हुए, रोटरी क्लब कुशलगढ़ ने नगर को एक और स्थायी सौगात समर्पित की है। सोमवार, 29 जून 2026 को सायं 4:00 बजे, मुक्तिधाम परिसर में निर्मित "मुक्तिधाम श्रद्धांजलि स्थल" का कार्य पूर्ण होने के उपरांत इसका विधिवत लोकार्पण किया गया, जिसके बाद क्लब सदस्यों द्वारा सामूहिक अवलोकन भी किया गया। क्लब अध्यक्ष रौनक सेठ ने बताया कि इस श्रद्धांजलि स्थल का निर्माण दिवंगत आत्माओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने के उद्देश्य से किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह मुक्तिधाम आने वाले परिजनों को शांत, गरिमामय और प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराएगा। क्लब सचिव अर्पण कटारिया ने इसे कुशलगढ़ की स्थायी जनहितकारी परियोजनाओं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया, जो समाज सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति क्लब की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह परियोजना क्लब सदस्यों के सामूहिक सहयोग, समर्पण और सेवा भावना से ही संभव हो पाई है, जिसे नगरवासियों के लिए एक स्थायी धरोहर के रूप में समाज को समर्पित किया गया है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर, रोटरी क्लब अध्यक्ष रौनक सेठ, सचिव अर्पण कटारिया, वरिष्ठ संस्थापक सदस्य राजेंद्र गादीया, समाजसेवी मनोहरलाल कावड़िया, जोनल कॉर्डिनेटर पथिक मेहता, उद्योगपति एवं समाजसेवी मुकेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष यश खाब्या, अर्पण चोपड़ा, जितेंद्र जैन, पिंकेश चंडालिया, आशीष नाहटा सहित रोटरी क्लब के अन्य सदस्य, गणमान्य नागरिक और समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित सदस्यों ने श्रद्धांजलि स्थल का अवलोकन किया और उसकी उपयोगिता एवं सौंदर्य की सराहना करते हुए इसे रोटरी क्लब कुशलगढ़ द्वारा नगर के लिए एक उल्लेखनीय और जनहितकारी सौगात बताया।1
- सीधी जिले के गोपद बनास में एक युवक ने अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) के चैंबर में अपनी बुलेट मोटरसाइकिल लेकर पहुँचकर हंगामा किया। यह घटना एसडीएम के चैंबर के भीतर हुई।1
- लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बारिश की शुरुआत हो गई है, जिससे धीरे-धीरे जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है। बारिश के इस आगमन से किसान अत्यधिक प्रसन्न हैं और बेसब्री से खुशी मना रहे हैं।1
- बड़वानी शहर की प्रसिद्ध और ऐतिहासिक दरगाहों पर बीती रात एक रूहानी और पाकीज़ा मंज़र देखा गया, जिसने तमाम अकीदतमंदों के दिलों में अकीदत की शम्मा को और ज़्यादा रोशन कर दिया। शहर की प्रमुख दरगाहों—हजरत मुसे ख़ाँ वली, दंगल शाह वली, मलंग शाह वली शाही मस्जिद, कलीमुद्दीन शाह वली इमलीपूरा, मुंगनी शाह वली ईदगाह रोड़ और हुसैनी आस्ताना पानवाड़ी की पवित्र मज़ारों पर बिछी चादरों में अचानक रूहानी हलचल देखी गई। इस हैरतअंगेज और पाकीज़ा वाकये की ख़बर शहर में आग की तरह फैलते ही वलियों की बारगाह में हाज़िरी देने के लिए सैकड़ों की तादाद में अकीदतमंदों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। स्थानीय अकीदतमंदों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मज़ार-ए-मुबारक पर चढ़ी चादर में जो हरकत दिखाई दी, वह मानो साँस लेने जैसा एक अद्भुत और रूहानी मंज़र था। दरगाहों पर पहुंचे आशिकाने औलिया का अटूट मानना है कि यह औलिया-ए-किराम की बारगाह की महान करामत और अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की क़ुदरत का ज़ाहिरी निशान है, जो इंसान के ईमान और मोहब्बत को और मज़बूत करता है। इस मुबारक मौके पर हजरत मूसे खां वली बाबा के आस्थाने पर हाजी अब्दुल रशीद पटेल, फजलुर्रहमान शेख, अनीस कुरैशी, सादिक पटेल, आदिल तिगाले, मुन्ना जोए, सरफ़ू भाया, अब्दुल रहीम तिगाले, पार्षद मुजीब कुरैशी तथा मीडिया प्रभारी अब्दुल सादिक चंदेरी सहित भारी संख्या में अकीदतमंद मुस्तैदी से मौजूद रहे। इस रूहानी जलसे के अंत में मुस्लिम समाज के सदर एड्वोकेट कय्यूम कुरैशी साहब की विशेष मौजूदगी में जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अब्दुल जब्बार नूरी साहब द्वारा मुल्क में अमन-चैन, आपसी भाईचारे, खुशहाली और सलामती के लिए ख़ुसूसी सामूहिक दुआ कराई गई। इस दौरान उपस्थित तमाम अकीदतमंदों ने बेहद अदब के साथ हाथ उठाकर अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ की कि वह अपनी रहमत, बरकत और करम की नज़र हर बंदे पर हमेशा बनाए रखे। इस पूरे रूहानी घटनाक्रम को लेकर अंचल के मुस्लिम समाज और जायरीनों में भारी उत्साह और रूहानी जज़्बा देखा जा रहा है।3
- कुशलगढ़ क्षेत्र में सोमवार को वट सावित्री व्रत अत्यंत श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। विवाहित महिलाओं ने अपने पतियों की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए यह व्रत रखा और वटवृक्ष (बरगद) का विधि-विधान से पूजन किया। सुबह से ही सुहागिनें सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाल के साथ बरगद के वृक्ष के नीचे पहुंचीं, जहाँ उन्होंने जल, अक्षत और कुमकुम अर्पित कर पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात, महिलाओं ने लाल मौली धागे से वटवृक्ष की सात परिक्रमाएं कीं और अपने परिवार के सुख-समृद्धि के साथ-साथ लंबे सुहाग की मंगल कामना की। दोपहर करीब 3 बजे, व्रत करने वाली इन महिलाओं ने सामूहिक रूप से वट सावित्री की कथा का श्रवण भी किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वटवृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास माना जाता है, और सत्यवान-सावित्री की कथा के माध्यम से महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन की मंगल कामना की। यह धार्मिक उल्लास कुशलगढ़ के अलावा छोटी सरवा, मोहकमपुरा, डूंगरा और आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी देखा गया, जहाँ महिलाओं ने विधि-विधान से व्रत रखकर बरगद की पूजा और परिक्रमा करते हुए इस प्राचीन परंपरा का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया। इस वट सावित्री व्रत पर सुहागिनों की गहरी आस्था उमड़ पड़ी, जिसके तहत उन्होंने अखंड सौभाग्य और अपने पति की दीर्घायु के लिए यह विशेष पूजन संपन्न किया।1
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