सूरत के हालधुरु पाटिया स्थित सिल्वर पॉइंट बिल्डिंग में आज तड़के एक स्टेशनरी की दुकान में भीषण आग लग गई, जिसमें लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई प्राकृतिक दुर्घटना नहीं, बल्कि फायर विभाग और बिल्डिंग के जिम्मेदारों के बीच हुई मिलीभगत का परिणाम है। उल्लेखनीय है कि इस बिल्डिंग को लेकर पहले ही CMO पोर्टल पर शिकायत संख्या 13/2025TS/2026/3831 दर्ज कराई गई थी, जिसमें सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया था। शिकायत के बाद फायर विभाग ने बिल्डिंग के पदाधिकारियों और वहां संचालित कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल को केवल नोटिस थमाकर खानापूर्ति की। आरोप है कि इसके बाद किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर जांच करना उचित नहीं समझा और न ही बिल्डिंग को सील किया गया। इस बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल संचालित है, जहां बड़ी संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं। फायर विभाग की नोटिस के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा संचालन जारी रखना मरीजों की जान को जोखिम में डालने वाला कदम बताया जा रहा है। अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि स्थानीय अधिकारियों ने किस दबाव या लालच में आकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। क्या प्रशासन अब किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, या फिर हमेशा की तरह फाइल बंद करके मामले को दबा दिया जाएगा?
सूरत के हालधुरु पाटिया स्थित सिल्वर पॉइंट बिल्डिंग में आज तड़के एक स्टेशनरी की दुकान में भीषण आग लग गई, जिसमें लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई प्राकृतिक दुर्घटना नहीं, बल्कि फायर विभाग और बिल्डिंग के जिम्मेदारों के बीच हुई मिलीभगत का परिणाम है। उल्लेखनीय है कि इस बिल्डिंग को लेकर पहले ही CMO पोर्टल पर शिकायत संख्या 13/2025TS/2026/3831 दर्ज कराई गई थी, जिसमें सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया था। शिकायत के बाद फायर विभाग ने बिल्डिंग के पदाधिकारियों और वहां संचालित कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल को केवल नोटिस थमाकर खानापूर्ति
की। आरोप है कि इसके बाद किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर जांच करना उचित नहीं समझा और न ही बिल्डिंग को सील किया गया। इस बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल संचालित है, जहां बड़ी संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं। फायर विभाग की नोटिस के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा संचालन जारी रखना मरीजों की जान को जोखिम में डालने वाला कदम बताया जा रहा है। अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि स्थानीय अधिकारियों ने किस दबाव या लालच में आकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। क्या प्रशासन अब किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, या फिर हमेशा की तरह फाइल बंद करके मामले को दबा दिया जाएगा?
- प्रयागराज के मेजा स्थित विकासखंड उरूवा के तरहर क्षेत्र में बेलन नहर में पानी छोड़े जाने के बाद किसानों में खुशी की लहर है। पिछले कई महीनों से नहर के सूखे रहने के कारण किसान सूखे की स्थिति से जूझ रहे थे, जिससे धान की रोपाई का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। अब पानी आने से खेतों में फिर से रौनक लौट आई है और किसान तेजी से रोपाई कार्य में जुट गए हैं। क्षेत्र की रजबहाओं में भी पानी की आपूर्ति सुचारू हो गई है, जिसे किसान अपने खेती कार्य के लिए संजीवनी मान रहे हैं। नीरज शर्मा, साधु शुक्ला, राजबल्लभ, रमाशंकर, जयशंकर और हजारी प्रसाद जैसे ग्रामीणों ने बताया कि पानी की किल्लत के कारण फसल की तैयारी करना मुश्किल हो गया था, लेकिन अब समय पर रोपाई शुरू होने से उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद है। इसके अलावा, नहर में पानी आने से आवारा मवेशियों के लिए भी पेयजल की व्यवस्था सुलभ हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अब यह मांग की है कि नहर में पानी की आपूर्ति को नियमित रखा जाए ताकि भविष्य में खेती कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।1
- प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में पटेल चौराहे से सिरसा चौराहे को जोड़ने वाली सड़क की हालत बेहद खराब है। यह सड़क हर साल बनाई जाती है, लेकिन बरसात के मौसम में टूट जाती है। स्थिति यह है कि बरसात शुरू होने से पहले ही सड़क पर जलभराव हो जाता है, जिससे आम जनता, स्थानीय व्यापारी और स्कूली बच्चे भारी परेशानी का सामना करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मेजा रोड को इस क्षेत्र का राजनीतिक हब माना जाता है, बावजूद इसके व्यवस्था पर किसी का ध्यान नहीं है। लोगों का कहना है कि जिस विधायक को 5 साल तक सत्ता में रहने का मौका मिला, वे स्वयं इसी टूटी हुई सड़क से गुजरते हैं, फिर भी उन्हें इसकी जर्जर हालत दिखाई नहीं देती। जनता ने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसी स्थिति में व्यापारी अपना व्यापार कैसे करें और इस बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार है।1
- BSNL ने नई सैटेलाइट फोन सेवा को पेश किया है, जिसके माध्यम से अब मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध न होने की स्थिति में भी कॉल और SMS करना संभव होगा। यह सुविधा विशेष रूप से उन दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है जहां सामान्य नेटवर्क की पहुंच नहीं है। तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो इस फोन में SOS फीचर के साथ-साथ लंबा बैटरी बैकअप भी दिया गया है। इस सेवा को आपदा प्रबंधन, रक्षा और समुद्री उपयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी माना जा रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के ज्ञानपुर में सड़क की बदतर हालत के कारण बच्चों के गिरने और गंभीर रूप से घायल होने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जर्जर सड़क पर गिरने से कई बच्चों के हाथ-पैर टूट चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे लेकर कोई सुध नहीं ली जा रही है। इस मामले में ओम यादव नामक व्यक्ति ने शिकायत के संदर्भ में जानकारी मांगी थी, जिस पर यह खुलासा हुआ कि सड़क निर्माण कार्य पिछले 50 वर्षों से नहीं हुआ है। व्यवस्था और सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि वोट और नोट लेने के बाद विकास के नाम पर केवल जनता को परेशान किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सड़क की स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिसका नतीजा बच्चों के रूप में मासूमों को भुगतना पड़ रहा है।7
- सूरत के हालधुरु पाटिया स्थित सिल्वर पॉइंट बिल्डिंग में आज तड़के एक स्टेशनरी की दुकान में भीषण आग लग गई, जिसमें लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई प्राकृतिक दुर्घटना नहीं, बल्कि फायर विभाग और बिल्डिंग के जिम्मेदारों के बीच हुई मिलीभगत का परिणाम है। उल्लेखनीय है कि इस बिल्डिंग को लेकर पहले ही CMO पोर्टल पर शिकायत संख्या 13/2025TS/2026/3831 दर्ज कराई गई थी, जिसमें सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया था। शिकायत के बाद फायर विभाग ने बिल्डिंग के पदाधिकारियों और वहां संचालित कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल को केवल नोटिस थमाकर खानापूर्ति की। आरोप है कि इसके बाद किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर जांच करना उचित नहीं समझा और न ही बिल्डिंग को सील किया गया। इस बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल संचालित है, जहां बड़ी संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं। फायर विभाग की नोटिस के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा संचालन जारी रखना मरीजों की जान को जोखिम में डालने वाला कदम बताया जा रहा है। अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि स्थानीय अधिकारियों ने किस दबाव या लालच में आकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। क्या प्रशासन अब किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, या फिर हमेशा की तरह फाइल बंद करके मामले को दबा दिया जाएगा?2