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दरभंगा में राज्यपाल क्यों बोले शिक्षा व्यवस्था बहुत करने की आवश्यकता है? दरभंगा में राज्यपाल क्यों बोले शिक्षा व्यवस्था बहुत करने की आवश्यकता है?
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दरभंगा में राज्यपाल क्यों बोले शिक्षा व्यवस्था बहुत करने की आवश्यकता है? दरभंगा में राज्यपाल क्यों बोले शिक्षा व्यवस्था बहुत करने की आवश्यकता है?
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- Post by 24 Dainik Bihar Gramin1
- Post by Deepak kumar Jha1
- दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय इन दिनों गंभीर विवाद और प्रशासनिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है — विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति या फिर व्यवस्था की धीमी कार्यशैली? मंगलवार को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर उस समय अभूतपूर्व स्थिति बन गई, जब दलित चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेंद्र पासवान के नेतृत्व में कर्मचारियों और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सिंडिकेट के सदस्यों और कुलपति लक्ष्मी निवास पांडे को अंदर जाने से रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी — डॉ. संतोष पासवान को साहित्य विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया जाए कर्मचारियों के लंबित वेतन और पेंशन का जल्द भुगतान किया जाए मौके पर मौजूद बेनीपुर विधायक और सिंडिकेट सदस्य विनय कुमार चौधरी, पूर्व एमएलसी दिलीप चौधरी और सदस्य अजीत चौधरी ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि वरीयता के आधार पर नियुक्ति में देरी और कर्मचारियों के भुगतान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार सड़क पर ही सिंडिकेट की बैठक करनी पड़ी। इसी बैठक में त्वरित निर्णय लेते हुए डॉ. संतोष पासवान को साहित्य विभाग का विभागाध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति बन गई। इसके साथ ही कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का भी आश्वासन दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह नगर विधायक संजय सरावगी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। वहीं दलित चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेंद्र पासवान उर्फ गुरुजी ने इसे संघर्ष की जीत बताते हुए सभी समर्थकों का आभार जताया। इस पूरे विवाद में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती दिख रही है: समय पर निर्णय नहीं लेने और वेतन-पेंशन जैसी मूल समस्याओं को लंबित रखने का आरोप कुलपति की भूमिका नेतृत्व और प्रशासनिक नियंत्रण फैसलों में देरी और दबाव के बाद त्वरित निर्णय सड़क पर बैठक और जनदबाव के बाद फैसला — यह संस्थागत प्रक्रिया पर प्रश्न खड़ा करता है यह घटना केवल एक नियुक्ति का मामला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है। अगर समय रहते समस्याओं का समाधान किया जाता, तो शायद सड़क पर बैठक की नौबत नहीं आती।1
- Hello friends1
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था सहित विभिन्न बिन्दुओं को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित* *नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी होगी और मजबूत, मुख्य सचिव ने किया जयनगर नेपाली रेलवे स्टेशन का निरीक्षण* *मधुबनी-23/04/2026* मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों से संबंधित समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत-नेपाल सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना, अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। समीक्षा के दौरान जाली भारतीय मुद्रा के प्रसार, साइबर फ्रॉड, अवैध दूरसंचार गतिविधियों, म्यूल खातों के बढ़ते उपयोग तथा फर्जी कंपनियों के संचालन जैसे मामलों पर गंभीर चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने इन मामलों की गहन जांच कर त्वरित कार्रवाई करने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में मादक पदार्थों की तस्करी के समीक्षा के क्रम में तस्करी में संलिप्त व्यक्तियों एवं गिरोहों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही अधिकारियों को एनडीपीएस एक्ट को सख्ती से लागू करने एवं मादक पदार्थों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाने का निर्देश दिया गया, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। मुख्य सचिव ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में नियमित निगरानी बढ़ाने तथा प्रशासनिक सतर्कता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच दिनों से सभी प्रकार के मादक पदार्थों विशेषकर सूखा नशा के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया गया जिसके काफी सकारत्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। इसी कड़ी में 1000 किलो गांजा की जब्ती की गई है जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 5 करोड़ रुपए है। मुख्य सचिव ने कहा कि विधि व्यवस्था के दृष्टिकोण से सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। उन्होंने डीएम एसपी को निर्देश दिया कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त एवं अवांछित लोगों को चिन्हित करते हुए स्पीडी ट्रायल चलाकर सजा दिलवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने चिन्हित केसों का सभी दृष्टिकोण से त्वरित अनुसंधान करने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने समीक्षा के क्रम में एसएसबी से बॉर्डर के सुरक्षा की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने एसएसबी के अधिकारियों को बॉर्डर पर पैट्रोलिंग और भी बढ़ाने का निर्देश दिया। वाइब्रेंट विलेज की समीक्षा के क्रम में मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि मधुबनी जिले के सभी 286 वाइब्रेंट विलेज (गांव) में सभी चयनित योजनाओं को त्वरित गति से धरातल पर उतारा जाय ताकि ये भारत के विकसित गांव की श्रेणी में आ सके। उन्होंने सभी गांवों में एसएसबी की सक्रिय भागीदारी का भी निर्देश दिया। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने बताया कि सभी वाइब्रेंट विलेज के पंचायतों की ग्राम सभा में आमंत्रित सदस्य के रूप में एसएसबी के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। मुख्य सचिव ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में सरकारी भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण पर की जा रही कार्रवाई की भी विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा की कड़ी में मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों द्वारा आपसी समन्वय से किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की। बैठक के उपरांत मुख्य सचिव ने वरीय अधिकारियों के साथ नेपाली जयनगर रेलवे स्टेशन पहुंचकर सुरक्षा सहित तमाम संवेदनशील बिन्दुओं का जायजा लिया। निरीक्षण के क्रम में उन्होंने रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे का अधिष्ठापन एवं सीसीटीवी कैमरा कंट्रोल रूम का अवलोकन किया। इसी कड़ी में रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं के अवलोकन के क्रम में संबंधित अधिकारियों को कई आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। बैठक में पुलिस महानिदेशक, बिहार, श्री विनय कुमार,अपर मुख्य सचिव (गृह), श्री अरविंद कुमार चौधरी, श्री कुंदन कृष्णन, पुलिस महानिदेशक, विशेष शाखा, एवं एसटीएफ, आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा, श्री हिमांशु कुमार राय,जिलाधिकारी, मधुबनी, आनंद शर्मा, पुलिस अधीक्षक, योगेंद्र कुमार, सरोज कुमार ठाकुर, उप महानिरीक्षक, भा .पु. से.,स.सी.ब,क्षेत्रक मुख्यालय, मुज़फ्फरपुर, गोविंद सिंह भंडारी, कमांडेंट 48वीं वाहिनी SSB जयनगर, खोजा राम लामोर, कमान अधिकारी, 18वीं वाहिनी SSB, राजनगर, अपर समाहर्ता, मुकेश रंजन, उप निदेशक सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, परिमल कुमार, कोंकण रेलवे के प्रतिनिधि सहित संबंधित विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे।9
- नमस्कार दोस्तों, इस बार बिहार के आम के बगीचों में आम की भरपूर पैदावार हुई थी… पेड़ झुक गए थे फलों से लेकिन कुदरत ने खेल बदल दिया! तेज गर्मी और झुलसाने वाली धूप ने किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया1
- मिथिलांचल के डॉक्टर के कार्य को ब्रिटिश पार्लियामेंट से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तक सराहा, डॉ. सुमित कुमार झा को इंग्लैंड और यूनाइटेड किंगडम में तीन अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड से सम्मानित किया गया मिथिलांचल के लिए उस समय अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय बना जब दरभंगा के प्रख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक, Yours Clinic के संस्थापक एवं CEO डॉ. सुमित कुमार झा को इंग्लैंड और यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तीन महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित किया गया है। डॉ. झा को द ब्रिटिश पार्लियामेंट, लंदन, यूनाइटेड किंगडम में द British Parliament Honour for Global Homoeopathy Award, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड, इंग्लैंड में Global Excellence Award in Homoeopathy तथा नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, लंदन, इंग्लैंड में The International Homoeopathic Visionary Award प्रदान किया गया। डॉ. सुमित कुमार झा की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति के सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मिथिलांचल, बिहार और देश के लिए गौरव का क्षण है। विश्व के इतने प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय होम्योपैथी अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रही है और उसके प्रति सम्मान तथा विश्वास निरंतर बढ़ रहा है। डॉ. झा ने अपने ज्ञान, समर्पण, सेवा-भाव और दूरदर्शी नेतृत्व के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेष रूप से द ब्रिटिश पार्लियामेंट, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, लंदन जैसे विश्वविख्यात स्थलों पर सम्मान प्राप्त करना अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इन सम्मानों ने न केवल डॉ. झा के कार्यों को वैश्विक मान्यता दिलाई है, बल्कि मिथिलांचल की प्रतिभा और भारतीय होम्योपैथी की शक्ति को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित किया है। डॉ. झा की इस सफलता की खबर से दरभंगा सहित पूरे मिथिलांचल में खुशी की लहर है। सामाजिक, चिकित्सा और बुद्धिजीवी वर्गों में इस उपलब्धि को अत्यंत सम्मान के साथ देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और यह बताएगा कि छोटे शहरों और साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भी विश्व मंच पर असाधारण पहचान बनाई जा सकती है।1