उत्तर प्रदेश के चंदौली स्थित चहनिया क्षेत्र के मां खण्डवारी महिला महाविद्यालय में बुधवार को वित्तविहीन शिक्षक महासभा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने हिस्सा लिया। महासभा में वित्तविहीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रताप सिंह ने ऐलान किया कि शिक्षकों की मांगों को लेकर शुरू की गई 'शिक्षक अधिकार यात्रा' अब पूरे उत्तर प्रदेश में निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा 21 जुलाई से बलिया जिले से शुरू हो चुकी है और क्रमवार राज्य के हर जनपद में पहुंचेगी। प्रत्येक जिले में संघ के पदाधिकारी मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे और वित्तविहीन शिक्षकों की समस्याओं से अवगत कराएंगे। डॉ. सिंह ने मांग रखी कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को समान वेतन, मानदेय में वृद्धि, पेंशन और सेवा सुरक्षा दी जाए, साथ ही उन्हें नियमित कर सम्मानजनक जीवन दिया जाए। कार्यक्रम में मौजूद सभी शिक्षकों ने एक स्वर में संकल्प जताया कि जब तक उनकी ये मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
उत्तर प्रदेश के चंदौली स्थित चहनिया क्षेत्र के मां खण्डवारी महिला महाविद्यालय में बुधवार को वित्तविहीन शिक्षक महासभा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने हिस्सा लिया। महासभा में वित्तविहीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रताप सिंह ने ऐलान किया कि शिक्षकों की मांगों को लेकर शुरू की गई 'शिक्षक अधिकार यात्रा' अब पूरे उत्तर प्रदेश में निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा 21 जुलाई से बलिया जिले से शुरू हो चुकी है और क्रमवार राज्य के हर जनपद में पहुंचेगी। प्रत्येक जिले में संघ के पदाधिकारी मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे और वित्तविहीन शिक्षकों की समस्याओं से अवगत कराएंगे। डॉ. सिंह ने मांग रखी कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को समान वेतन, मानदेय में वृद्धि, पेंशन और सेवा सुरक्षा दी जाए, साथ ही उन्हें नियमित कर सम्मानजनक जीवन दिया जाए। कार्यक्रम में मौजूद सभी शिक्षकों ने एक स्वर में संकल्प जताया कि जब तक उनकी ये मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
- वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र अंतर्गत चोलापुर विकास खंड की ग्राम सभा कौवापुर और कादीपुर स्टेशन बस्ती में सरकार की महत्वाकांक्षी 'हर-घर-जल' योजना पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। पिछले कई हफ्तों से नलों में पानी नहीं पहुंचने के कारण स्थानीय लोग गंगा के बढ़े जलस्तर और हैंडपंप का बालू युक्त गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी टंकी, पाइपलाइन और अन्य उपकरण केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं, जबकि धरातल पर योजना ठप पड़ी है। योजना में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। बारिश और ठंड के मौसम में सोलर पैनल काम नहीं कर रहे हैं और बैकअप के लिए ट्रांसफार्मर या जनरेटर की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पानी की टंकी के चारों तरफ मिट्टी भराई और बाउंड्री तक का निर्माण अधूरा है। गर्मियों के दौरान 4 इंच की जगह ढाई इंच की पाइपलाइन बिछाई गई थी, जो ओवरब्रिज निर्माण के समय भारी वाहनों के गुजरने से दब गई। इसके अलावा, टंकी पर कोई ऑपरेटर तैनात नहीं रहता और मौसम का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है। समस्या को लेकर ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी चोलापुर शिवनारायण सिंह और अजगरा विधायक त्रिभुवन राम को कई बार अवगत कराया, लेकिन केवल देखवाने का आश्वासन ही मिला। वहीं जलनिगम के ठेकेदार ने दूरी का हवाला देकर बात टाल दी। महीनों बीत जाने के बाद भी समाधान न होने से कौवापुर और कादीपुर स्टेशन बस्ती के लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामवासियों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि योजना की जमीनी जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।1
- दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का विरोध अब बनारस में भी देखने को मिल रहा है। इस घटना के खिलाफ अधिवक्ता समाज बेहद आक्रोशित है और छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आ गया है। जंतर मंतर पर हुई लाठीचार्ज की कार्रवाई के विरोध में बनारस में अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है।1
- सरकारी योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी नल पूरी तरह सूखे पड़े हैं। जलापूर्ति न होने के कारण लोग मजबूरी में हैंडपंप का गंदा पानी पीने को विवश हैं।1
- देश की बर्बादी के लिए हर वह इंसान जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार जैसे बुनियादी मुद्दों पर आवाज़ उठाने वाला व्यक्ति देशद्रोही है।1
- चंदौलीचकरा गांव में पेयजल पाइपलाइन फटने के कारण हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। पाइपलाइन टूटने से हो रहे पानी के भारी नुकसान को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ गया है और ग्रामीणों ने इसके विरोध में आंदोलन करने की चेतावनी दी है। जनता न्यूज़ टीवी के ब्यूरो चीफ राजमणी पाण्डेय के मुताबिक, गांव में पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी लगातार व्यर्थ बह रहा है।1
- चंदौली जिले के नियामताबाद ब्लॉक स्थित भरछा सहकारी समिति पर सचिव और अन्य अधिकारियों द्वारा DAP खाद की खुलेआम मनमानी और कालाबाजारी करने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि समिति के अधिकारी 100-100 बोरी DAP खाद ब्लैक में बेच रहे हैं और धांधली कर रहे हैं। दूसरी ओर, छोटे किसान खाद लेने के लिए 4 घंटे से लगातार कतार में लगे हुए हैं, फिर भी उन्हें यह कहकर लौटाया जा रहा है कि खाद उपलब्ध नहीं है। किसानों का कहना है कि अधिकारियों ने पहले से ही पर्ची बनाकर रख ली है और आम किसानों को खाद नहीं दी जा रही है। इस पूरी अनिमियतता पर अधिकारियों के खिलाफ तत्काल जांच की मांग की गई है।2
- चन्दौली के चहनियां स्थित कैथी पश्चिमपुरा गांव को जोड़ने वाला एकमात्र कच्चा मार्ग लंबे समय से बदहाल पड़ा है। कई बार शिकायत करने और पत्रक देने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो नाराज ग्रामीणों ने बुधवार को अधिवक्ता संदीप सिंह रघुवंशी के नेतृत्व में खुद ही श्रमदान कर रास्ता दुरुस्त किया। बार-बार मिले आश्वासनों के बाद भी सुनवाई न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने फावड़ा और कुदाल उठाकर गड्ढों को पाटा और रास्ते को आवागमन के लायक बनाया। इस दौरान ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी भी की। ग्रामीणों का कहना है कि इसी रास्ते से रोजाना स्कूली बच्चे, मरीज, बुजुर्ग और महिलाएं गुजरते हैं, लेकिन बरसात के दिनों में कीचड़ और गड्ढों के कारण पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। इससे मरीजों को अस्पताल ले जाने और बच्चों को स्कूल भेजने में भारी परेशानी होती है। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता संदीप सिंह रघुवंशी ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो गांव में 'रोड नहीं तो वोट नहीं' अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास का दावा करने वाले लोग इस बुनियादी समस्या को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं।1
- "नहीं रुके हैं, नहीं रुकेंगे" और "इंकलाब ज़िंदाबाद" के बुलंद नारों के साथ आंदोलन लगातार जारी है और पूरा माहौल इन नारों की गूंज से सराबोर है। प्रदर्शन स्थल पर हाथों में तिरंगा, बैनर और पोस्टर थमे युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की भारी भीड़ देखी जा रही है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी, यह संघर्ष थमेगा नहीं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया है कि दमन और दबाव से इस लड़ाई को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यह हक की लड़ाई है और इसे अंतिम सांस तक लड़ा जाएगा। अपनी आगे की रणनीति का ऐलान करते हुए नेताओं ने बताया कि आंदोलन को और तेज करने के लिए गांव-गांव और गली-गली में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाई जा सके। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह नारा सिर्फ एक आवाज नहीं, बल्कि व्यवस्था को झकझोर कर रख देने वाली बदलाव की चिंगारी है। इस आंदोलन ने साबित कर दिया है कि जब जनता एकजुट हो जाती है तो कोई भी दीवार उसे रोक नहीं सकती।1