झारखण्ड TGT 2016 शिक्षक भर्ती: 'साहब! अब और हिम्मत नहीं बची...' धरने पर बैठी महिला अभ्यर्थी रिपोर्टर के सामने रो पड़ीं रांची: झारखण्ड में वर्ष 2016 के TGT (स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक) नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थी एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी रांची में चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने के दौरान उस समय माहौल काफी गमगीन हो गया, जब एक महिला अभ्यर्थी मीडिया रिपोर्टर के सामने अपनी आपबीती सुनाते-सुनाते बिलख-बिलख कर रो पड़ीं। "उम्र बीत रही है, समाज ताने दे रहा है" कैमरे के सामने अपना दर्द साझा करते हुए अभ्यर्थी ने कहा, "2016 से हम सिर्फ तारीखें और आश्वासन गिन रहे हैं। परीक्षा पास की, कागजात सत्यापित (Document Verification) हुए, लेकिन नियुक्ति पत्र आज तक नहीं मिला। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है, उम्र सीमा खत्म हो रही है और समाज के ताने सुनने पड़ रहे हैं। आखिर हमारी गलती क्या है?" क्या है अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग? अंतिम मेधा सूची जारी करना: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आलोक में बची हुई सीटों पर जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। समयबद्ध नियुक्ति: बार-बार दिए जाने वाले मौखिक आश्वासनों के बजाय ठोस लिखित आदेश और नियुक्ति पत्र की तिथि तय हो। व्यवस्था पर उठाए सवाल धरने पर बैठे अन्य अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सालों से मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा सरकारी नौकरियों के लिए समाप्त होने के कगार पर है। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका यह प्रदर्शन जारी रहेगा।
झारखण्ड TGT 2016 शिक्षक भर्ती: 'साहब! अब और हिम्मत नहीं बची...' धरने पर बैठी महिला अभ्यर्थी रिपोर्टर के सामने रो पड़ीं रांची: झारखण्ड में वर्ष 2016 के TGT (स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक) नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थी एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी रांची में चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने के दौरान उस समय माहौल काफी गमगीन हो गया, जब एक महिला अभ्यर्थी मीडिया रिपोर्टर के सामने अपनी आपबीती सुनाते-सुनाते बिलख-बिलख कर रो पड़ीं। "उम्र बीत रही है, समाज ताने दे रहा है" कैमरे के सामने अपना दर्द साझा करते हुए अभ्यर्थी ने कहा, "2016 से हम सिर्फ तारीखें और आश्वासन गिन रहे हैं। परीक्षा पास की, कागजात सत्यापित (Document Verification) हुए, लेकिन नियुक्ति पत्र आज तक नहीं मिला। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है, उम्र सीमा खत्म हो रही है और समाज के ताने सुनने पड़ रहे हैं। आखिर हमारी गलती क्या है?" क्या है अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग? अंतिम मेधा सूची जारी करना: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आलोक में बची हुई सीटों पर जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। समयबद्ध नियुक्ति: बार-बार दिए जाने वाले मौखिक आश्वासनों के बजाय ठोस लिखित आदेश और नियुक्ति पत्र की तिथि तय हो। व्यवस्था पर उठाए सवाल धरने पर बैठे अन्य अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सालों से मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा सरकारी नौकरियों के लिए समाप्त होने के कगार पर है। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका यह प्रदर्शन जारी रहेगा।
- उपायुक्त खूंटी मोहम्मद जावेद हुसैन ने मूरहू और कर्रा प्रखंड का किया दौरा।1
- कस्तूरबा गांधी विद्यालय पंडरानी की कमान शांति उरांव को, शिवनाथपुर की अध्यक्ष बनी जुबी उरांव सिसई प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पंडरानी में शनिवार को विद्यालय प्रबंधन समिति के पुनर्गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। वार्डेन सह प्रधानाध्यापिका मीनू कुमारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सर्वसम्मति से शांति उरांव को समिति का नया अध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही विद्यालय के बेहतर संचालन के लिए 20 सदस्यीय एक मजबूत और सक्रिय समिति का गठन किया गया। समिति के गठन के बाद विद्यालय परिवार की ओर से स्कूली बच्चों द्वारा हस्त निर्मित पुष्प गुच्छ को नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का अनोखे अंदाज में स्वागत किया गया। इस मौके पर नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने कस्तूरबा गांधी विद्यालय के सर्वांगीण विकास और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व बेहतर बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। शिवनाथपुर स्कूल में भी हुआ नई समिति का गठन दूसरी ओर राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय शिवनाथपुर में भी प्रबंधन समिति का पुनर्गठन किया गया। जहां अभिभावकों ने सर्वसम्मति से जुबी उरांव को अध्यक्ष और पूनम देवी को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी। वहीं विद्यालय के प्रधानाध्यापक शैलेश कुजूर को समिति का सचिव मनोनीत किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से अनिता कुमारी, स्वेता निर्मला यू मिंज, शोभा मुक्ता कुल्लू, स्मिता, शिवानी, प्रमिला लकड़ा, शिवानी कुमारी, अनीश उल्लाह सहित दोनों विद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाएं सहित भारी संख्या में अभिभावक और स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे।1
- शुभम हत्या कांड के विरोध में कल 1 अगस्त को बुलाए गए लोहरदगा बंद का शहर में व्यापक और असरदार प्रभाव देखने को मिला। शुभम हटिया कांड के विरोध में कल 1 अगस्त को बुलाए गए लोहरदगा बंद का शहर में व्यापक और असरदार प्रभाव देखने को मिला। घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों के आह्वान पर आयोजित इस बंद को व्यापारी वर्ग का अभूतपूर्व सहयोग मिला।1
- छात्र आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब.😱 #shorts #shortvideo #youtubeshorts #road1
- कार बाइक चलाना तो दूर, पैदल चलना हुआ मुश्किल, जर्जर सड़क के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, की धनरोपनी* गुमला जिला के बसिया प्रखंड अंतर्गत तुकई तानालोया कच्ची सड़क की स्थिति काफी जर्जर हो गई है। कीचड़ से सड़क की स्थिति ऐसी हो गई है कि कार, बाइक या साइकिल चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है। आक्रोशित ग्रामीणों ने दलदल कीचड़ सड़क में धनरोपनी करते हुए विरोध जताया। साथ ही प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क को ठीक करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना हजारों लोगों का आवागमन इस सड़क से होता है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को सूचना दी गई लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय ग्रामीण ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि पिछली बार चुनाव के समय लोगों ने वोट बहिष्कार का ऐलान किया था लेकिन नेताओं के आश्वासन में आ गए। अब तक सड़क नहीं बनी है। खासकर स्कूली बच्चों को ज्यादा परेशानी हो रही है, बारिश होने पर बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि अगर किसी की तबीयत ज्यादा खराब होती है तो गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही है। इस सड़क के कारण करीब 10 गांव के हजारों ग्रामीण परेशान और चिंतित हैं। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क को ठीक करने की मांग उठाई है, अन्यथा चरणबद्ध तरीके से आंदोलन की चेतावनी दी है।2
- झारखंड में नौकरियों की 'रेट लिस्ट'!: तराजू में पोस्ट तौलकर अभ्यर्थियों का अनूठा प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा। रांची। झारखंड में JPSC और JSSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर युवाओं का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। राजधानी रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इस वक्त विरोध-प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बना हुआ है—जहां गुस्साए अभ्यर्थियों ने एक बेहद अनोखे और तीखे अंदाज में हेमन्त सोरेन सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई है। गले में तराजू टांगकर बेची जा रही 'सरकारी नौकरियां' प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे अभ्यर्थियों ने गले में 'तराजू' लटकाकर और उस पर विभिन्न सरकारी पदों का 'रेट चार्ट' (Rate Chart) चिपकाकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। तराजू और बक्से पर विभिन्न सरकारी नौकरियों के दाम की रेट लिस्ट लिखी हुई थी: FRO (फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर): ₹50 लाख माध्यमिक आचार्य: ₹35 लाख लेडीज सुपरवाइजर: ₹20 लाख उत्पाद पुलिस: ₹15 लाख पंचायत सचिव: ₹15 लाख BSO / PGT / TGT / BDO / CO / पुलिस दरोगा: (विभिन्न रेट लिस्ट) प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पोस्टर के जरिए सीधे तौर पर आरोप लगाया कि राज्य में योग्यता की जगह "बोली" लग रही है और नौकरियां बेची जा रही हैं। क्या हैं अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें? CBI और ED से जांच: अभ्यर्थियों ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी विवादित एजेंसियों और संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका की जांच CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए। परीक्षाओं में पारदर्शिता: JPSC और JSSC द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए। कड़ी कार्रवाई: पेपर लीक और धांधली में लिप्त सभी दोषियों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई हो। "मेहनत करने वाले छात्र सड़कों पर हैं और रेट लिस्ट तय करने वाले मौज में हैं!" — धरना स्थल पर मौजूद गुस्साए अभ्यर्थी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में उनका यह आंदोलन और विरोध प्रदर्शन अनिश्चितकालीन रूप से जारी रहेगा।1
- झारखण्ड TGT 2016 शिक्षक भर्ती: 'साहब! अब और हिम्मत नहीं बची...' धरने पर बैठी महिला अभ्यर्थी रिपोर्टर के सामने रो पड़ीं रांची: झारखण्ड में वर्ष 2016 के TGT (स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक) नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थी एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी रांची में चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने के दौरान उस समय माहौल काफी गमगीन हो गया, जब एक महिला अभ्यर्थी मीडिया रिपोर्टर के सामने अपनी आपबीती सुनाते-सुनाते बिलख-बिलख कर रो पड़ीं। "उम्र बीत रही है, समाज ताने दे रहा है" कैमरे के सामने अपना दर्द साझा करते हुए अभ्यर्थी ने कहा, "2016 से हम सिर्फ तारीखें और आश्वासन गिन रहे हैं। परीक्षा पास की, कागजात सत्यापित (Document Verification) हुए, लेकिन नियुक्ति पत्र आज तक नहीं मिला। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है, उम्र सीमा खत्म हो रही है और समाज के ताने सुनने पड़ रहे हैं। आखिर हमारी गलती क्या है?" क्या है अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग? अंतिम मेधा सूची जारी करना: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आलोक में बची हुई सीटों पर जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। समयबद्ध नियुक्ति: बार-बार दिए जाने वाले मौखिक आश्वासनों के बजाय ठोस लिखित आदेश और नियुक्ति पत्र की तिथि तय हो। व्यवस्था पर उठाए सवाल धरने पर बैठे अन्य अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सालों से मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा सरकारी नौकरियों के लिए समाप्त होने के कगार पर है। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका यह प्रदर्शन जारी रहेगा।1