एक व्यक्ति ने यह सुनकर गहरा दुख और मन की भारीपन व्यक्त किया कि उनके ही एक भाई ने कहा, "सिया गोयल पूरी गारंटी के साथ बहुत जल्दी बाहर आ जाएगी, क्योंकि भारत का कानून ही ऐसा बनाया गया है।" इस टिप्पणी से समाज में न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे के कमजोर पड़ने को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है, जिसे एक चिंता का विषय बताया गया है। सवाल उठाया गया है कि क्या पुरुष आयोग और पुरुष अधिकारों की वकालत करने वाले लोग केवल सोशल मीडिया पर ही अपनी आवाज़ उठाते रह जाएंगे, जबकि दूसरी ओर ऐसे मामलों में आरोपित लोगों के हौसले बढ़ते जाएंगे। इस बात का डर व्यक्त किया गया है कि यदि पुरुष अधिकारों के समर्थन में होने वाली लखनऊ की रैली और अन्य जनआंदोलनों में आवश्यक एकजुटता और जोश नहीं दिखता, तो भाई की यह आशंका सच हो सकती है। इस चिंता के बीच, एक न्यायपूर्ण व्यवस्था की पहचान के रूप में हर मामले में निष्पक्ष जांच, दोषी को कानून के अनुसार सजा और निर्दोष को न्याय मिलने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
एक व्यक्ति ने यह सुनकर गहरा दुख और मन की भारीपन व्यक्त किया कि उनके ही एक भाई ने कहा, "सिया गोयल पूरी गारंटी के साथ बहुत जल्दी बाहर आ जाएगी, क्योंकि भारत का कानून ही ऐसा बनाया गया है।" इस टिप्पणी से समाज में न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे के कमजोर पड़ने को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है, जिसे एक चिंता का विषय बताया गया है। सवाल उठाया गया है कि क्या पुरुष आयोग और पुरुष अधिकारों की वकालत करने वाले लोग केवल सोशल मीडिया पर ही अपनी आवाज़ उठाते रह जाएंगे, जबकि दूसरी ओर ऐसे मामलों में आरोपित लोगों के हौसले बढ़ते जाएंगे। इस बात का डर व्यक्त किया गया है कि यदि पुरुष अधिकारों के समर्थन में होने वाली लखनऊ की रैली और अन्य जनआंदोलनों में आवश्यक एकजुटता और जोश नहीं दिखता, तो भाई की यह आशंका सच हो सकती है। इस चिंता के बीच, एक न्यायपूर्ण व्यवस्था की पहचान के रूप में हर मामले में निष्पक्ष जांच, दोषी को कानून के अनुसार सजा और निर्दोष को न्याय मिलने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- चित्तौड़गढ़ जिले की पंचायत समिति भदेसर में पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर "स्वाभिमान बचाओ आंदोलन" शुरू कर कार्य बहिष्कार कर दिया है। कर्मचारियों ने राज्य सरकार से मांगों के शीघ्र समाधान की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को उग्र रूप देने के लिए बाध्य होंगे। इस क्रम में, 29 जून 2026 को आयोजित विशेष ग्राम सभा का भी बहिष्कार किया गया। कर्मचारियों ने सोमवार को विकास अधिकारी अभिषेक शर्मा को ज्ञापन सौंपा, जिसमें बताया गया कि वे वर्ष 2013 से विभिन्न समस्याओं और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि उन पर निर्धारित जॉब प्रोफाइल से हटकर कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे लगातार कार्यभार बढ़ने और विभागीय दबाव के कारण उनमें रोष व्याप्त है। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि विभागीय कार्यों के दबाव के साथ-साथ राजनीतिक दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है। पंचायती राज विभाग के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये और मंत्रालयिक कर्मचारियों की मूलभूत मांगों को लंबित रखने से आक्रोश बढ़ रहा है। मंत्रालयिक कर्मचारियों ने राज्य सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों, ग्रामीण सेवा शिविरों, विशेष ग्राम सभाओं और अन्य योजनाओं से संबंधित कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष नारायण लाल जाट ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार समय रहते कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं करती है, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, जिससे किसानों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में कर्मचारी 6 जुलाई को जयपुर में जल समाधि लेने जैसे बड़े कदम उठाने पर मजबूर होंगे। इस कार्य बहिष्कार के दौरान ब्लॉक अध्यक्ष नारायण लाल जाट, प्रशासनिक अधिकारी भगवान लाल जाट, लाल मोहम्मद, रामेश्वर लाल जाट, कनिष्ठ सहायक करण सिंह चौहान, शैतान सिंह, हजारीलाल मेघवाल, सोहनलाल रेगर, भंवरलाल जाट, सुरेश चंद्र जाट, संपत जाट, मोहन सेन, राजीव गहलोत, साधना कुशवाहा, संगीता दीक्षित, गोपाल दास वैष्णव, विकास मेहता, ललित सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- चित्तौड़गढ़ के आयुष हॉस्पिटल में पंचकर्म थैरेपी के माध्यम से गर्दन के असहनीय दर्द का बिना ऑपरेशन सफल इलाज किया गया है। मरीज ने स्वयं अपने अनुभव साझा करते हुए बताया है कि कैसे उन्हें इस थेरेपी से राहत मिली। आकाशवाणी चौराहा, गांधी नगर स्थित इस अस्पताल में कमर, गर्दन, घुटने, साइटिका, सर्वाइकल और सिरदर्द जैसी विभिन्न समस्याओं का भी इलाज उपलब्ध है। इच्छुक व्यक्ति 8302083835 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- राजस्थान सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पंचायती राज विभाग में ऑनलाइन स्थानांतरण आवेदन की प्रक्रिया शुरू की है। यह आवेदन अब एसएसओ आईडी के माध्यम से ई-पंचायत पोर्टल पर किए जा सकेंगे।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में लोकप्रिय गीत "केसरिया बालम आओ पधारो म्हारे देश" के बहुत ही बढ़िया संगीत गान का उल्लेख किया गया है। पोस्ट में यह भी बताया गया है कि आज कुछ अलग है, और दर्शकों से इस संगीत को साझा करने, चैनल को सब्सक्राइब करने तथा उनके सदस्य बनने का आग्रह किया गया है।1
- यह पोस्ट पुरुषों की दैनिक स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करती है, यह सवाल उठाती है कि रोज़ कितने पुरुष हत्या या आत्महत्या का शिकार होंगे। इसी बीच, एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक पत्नी ने कथित तौर पर अपने सोए हुए पति पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आरोप है कि उसका बॉयफ्रेंड 2 लीटर पेट्रोल लेकर आया था। इसे केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि मानवता पर हमला बताया गया है। पोस्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी वैवाहिक विवाद, रिश्ते या मतभेद का समाधान हिंसा या हत्या का प्रयास कभी नहीं हो सकता। पोस्ट न्याय की मांग करती है कि पीड़ित को न्याय मिले और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष व सख्त कार्रवाई हो, इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि चाहे अपराधी पुरुष हो या महिला, कानून के सामने सभी बराबर होने चाहिए, यही एक न्यायपूर्ण समाज की पहचान है।1
- चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक द्वारा डंप किए गए औद्योगिक अपशिष्ट 'जेरोफिक्स' को हटाने की मांग को लेकर 'जहर मुक्त बड़ीसादड़ी संघर्ष समिति' के बैनर तले चल रहा धरना बुधवार को 35वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों और स्थानीय आमजन ने प्रशासन तथा सरकार के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की, क्योंकि जिला प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद जहरीले अपशिष्ट को पूरी तरह हटाने की कार्रवाई संतोषजनक गति से नहीं हो पाई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अवैध तरीके से डाले गए इस अपशिष्ट के कारण क्षेत्र में आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। आंदोलनकारियों और बड़ीसादड़ी की जनता ने रेलवे व्यवस्था के बहिष्कार का आह्वान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र से जेरोफिक्स जैसा जहरीला अपशिष्ट नहीं हटाया गया, तो उन्हें ऐसे विकास कार्यों की आवश्यकता नहीं है, जिनसे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरा मंडराए; कुछ ग्रामीणों ने पटरियां हटाने तक की बात कही है। आक्रोशित ग्रामीणों ने समस्या का समाधान न होने पर आंदोलन को और तेज करने तथा अपने हक व पर्यावरण की रक्षा के लिए बड़े स्तर पर संघर्ष करने को मजबूर होने की चेतावनी दी। धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने जेरोफिक्स अपशिष्ट के कारण दूषित पानी की बढ़ती समस्या और इसके पशुओं पर पड़ रहे असर पर गंभीर चिंता जताई, आशंका व्यक्त की कि भविष्य में इसका आमजन के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से केवल अपशिष्ट हटाने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभावों की जांच कराने की भी मांग की ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। 'जहर मुक्त बड़ीसादड़ी संघर्ष समिति' के अध्यक्ष रणजीत सिंह झाला ने जेरोफिक्स मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच करवाने की मांग दोहराई है। समिति का कहना है कि अपशिष्ट हटाने के साथ-साथ यह भी तय होना चाहिए कि इतने बड़े स्तर पर औद्योगिक अपशिष्ट क्षेत्र में कैसे पहुंचा और इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं। समिति द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित लगभग 10 हजार पोस्टकार्ड भी भेजे जा चुके हैं, जिनके माध्यम से बड़ीसादड़ी क्षेत्र की पर्यावरणीय समस्या को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक जेरोफिक्स अपशिष्ट पूरी तरह हट नहीं जाता और क्षेत्र की जनता को संतुष्टि नहीं मिलती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।1
- चित्तौड़गढ़ के गंगरार क्षेत्र में पैंथर को लेकर बनी दहशत का अंत हो गया है। हाल ही में एक कुएं में एक मृत पैंथर पाया गया है।1