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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का सबसे बड़ा सस्पेंस: क्या चंद्रशेखर आज़ाद बनेंगे सत्ता की चाबी? यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का सबसे बड़ा सस्पेंस: क्या चंद्रशेखर आज़ाद बनेंगे सत्ता की चाबी? उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय एक ऐसा तूफान उठ रहा है जिसके केंद्र में न तो सत्ताधारी दल है और न ही मुख्य विपक्षी दल। यह तूफान है पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उठकर पूरे राज्य में अपनी धमक बनाने वाले नगीना के सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद का। लोकसभा चुनाव में बिना किसी बड़े गठबंधन के, सिर्फ अपने दम पर नगीना सीट को एकतरफा जीतने वाले चंद्रशेखर अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सबसे बड़े 'एक्स-फैक्टर' बनकर उभरे हैं। आइए समझते हैं कि यूपी की 403 विधानसभा सीटों के इस महासमर में चंद्रशेखर आज़ाद का सियासी समीकरण क्या है और वे किसका खेल बनाने या बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। मिशन 55: पश्चिमी उत्तर प्रदेश का चक्रव्यूह राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की लगभग 55 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां चंद्रशेखर आज़ाद और उनकी पार्टी का सीधा और गहरा प्रभाव है। ये सीटें मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, और मुरादाबाद जैसे जिलों में फैली हैं। इन क्षेत्रों में दलित (विशेषकर जाटव) और मुस्लिम मतदाताओं की आबादी निर्णायक भूमिका में है। लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो चंद्रशेखर ने न केवल दलितों बल्कि मुस्लिम युवाओं का भी एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर आकर्षित किया है। यही कारण है कि इन 55 सीटों पर वे किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल के समीकरण को पूरी तरह से बदलने की ताकत रखते हैं। मायावती के ढहते किले पर कब्ज़ा और दलित राजनीति का नया चेहरा इस पूरे समीकरण का सबसे बड़ा पहलू बहुजन समाज पार्टी का सिमटता जनाधार है। पिछले एक दशक में बसपा का ग्राफ लगातार गिरा है, और जो कोर वोटर कभी मायावती का सबसे मजबूत स्तंभ हुआ करता था, वह अब एक नए, आक्रामक और जुझारू विकल्प की तलाश में है। चंद्रशेखर आज़ाद खुद को इसी विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। जमीन पर उतरकर संघर्ष करना, युवाओं के मुद्दों को उठाना और सोशल मीडिया पर आक्रामक उपस्थिति ने उन्हें युवा दलितों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। यदि बसपा का पारंपरिक कोर वोटर पूरी तरह से आजाद समाज पार्टी की तरफ शिफ्ट होता है, तो यह यूपी की राजनीति में सदियों का सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तनकारी बदलाव होगा। इंडिया गठबंधन का आंतरिक द्वंद्व: अखिलेश बनाम कांग्रेस का पेंच चंद्रशेखर आज़ाद की बढ़ती ताकत ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के 'इंडिया गठबंधन' के सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है। • अखिलेश यादव का डर: समाजवादी पार्टी इस समय PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के सहारे आगे बढ़ रही है। अखिलेश यादव जानते हैं कि अगर चंद्रशेखर गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो वे दलित और मुस्लिम मतों के बड़े हिस्से पर अपना दावा ठोकेंगे, जिससे भविष्य में सपा के नेतृत्व को चुनौती मिल सकती है। यही वजह है कि सपा प्रमुख उनके साथ गठबंधन को लेकर बहुत उत्साहित दिखाई नहीं देते। • कांग्रेस की रणनीति: इसके विपरीत, कांग्रेस उत्तर प्रदेश में भाजपा विरोधी वोटों को पूरी तरह एकजुट करना चाहती है। कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि चंद्रशेखर को साथ लेने से दलित और युवा मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा उनके पाले में आ सकता है, जिससे गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत हो जाएगी। अकेले लड़ने बनाम गठबंधन का गणित: किसे होगा फायदा, किसे नुकसान? यदि चंद्रशेखर आज़ाद को इंडिया गठबंधन में जगह नहीं मिलती है और वे अकेले या छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो इसके परिणाम बेहद दिलचस्प होंगे: • विपक्ष को नुकसान: अकेले लड़ने की स्थिति में चंद्रशेखर मुख्य रूप से सपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक (दलित और मुस्लिम) में सेंध लगाएंगे। • भाजपा को परोक्ष लाभ: वोटों का यह बिखराव सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि विपक्ष के मतों के विभाजित होते ही भाजपा विरोधी लहर कमजोर पड़ जाएगी। • गठबंधन होने पर: यदि वे इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो इन 55 सीटों पर विपक्षी गठबंधन एकतरफा बढ़त हासिल कर सकता है, जो लखनऊ की सत्ता के समीकरण को पूरी तरह से पलट देगा। रणनीति का विस्तार: सिर्फ दलित नहीं, अब OBC पर भी नजर चंद्रशेखर अपनी राजनीति को केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रख रहे हैं। उनकी हालिया रणनीतियों और घोषित की जा रही सूचियों से साफ है कि वे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और किसान आंदोलन से जुड़े समुदायों को भी अपनी पार्टी में बड़ा प्रतिनिधित्व दे रहे हैं। यह कदम उनके सामाजिक आधार को व्यापक बनाने और उन्हें एक संपूर्ण प्रादेशिक नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का रास्ता बेहद पेचीदा होने वाला है। चंद्रशेखर आज़ाद भले ही अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में न हों, लेकिन वे उस निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं जहां वे जिसके साथ होंगे, उसकी राह आसान हो जाएगी, और जिसके खिलाफ खड़े होंगे, उसका राजनीतिक खेल बिगड़ना तय है। लखनऊ की गद्दी का फैसला इस बार इस बात से भी तय होगा कि चंद्रशेखर आज़ाद का सियासी ऊंट किस करवट बैठता है।

17 hrs ago
user_E RADIO INDIA
E RADIO INDIA
Media house Meerut, Uttar Pradesh•
17 hrs ago

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का सबसे बड़ा सस्पेंस: क्या चंद्रशेखर आज़ाद बनेंगे सत्ता की चाबी? यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का सबसे बड़ा सस्पेंस: क्या चंद्रशेखर आज़ाद बनेंगे सत्ता की चाबी? उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय एक ऐसा तूफान उठ रहा है जिसके केंद्र में न तो सत्ताधारी दल है और न ही मुख्य विपक्षी दल। यह तूफान है पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उठकर पूरे राज्य में अपनी धमक बनाने वाले नगीना के सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद का। लोकसभा चुनाव में बिना किसी बड़े गठबंधन के, सिर्फ अपने दम पर नगीना सीट को एकतरफा जीतने वाले चंद्रशेखर अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सबसे बड़े 'एक्स-फैक्टर' बनकर उभरे हैं। आइए समझते हैं कि यूपी की 403 विधानसभा सीटों के इस महासमर में चंद्रशेखर आज़ाद का सियासी समीकरण क्या है और वे किसका खेल बनाने या बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। मिशन 55: पश्चिमी उत्तर प्रदेश का चक्रव्यूह राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की लगभग 55 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां चंद्रशेखर आज़ाद और उनकी पार्टी का सीधा और गहरा प्रभाव है। ये सीटें मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, और मुरादाबाद जैसे जिलों में फैली हैं। इन क्षेत्रों में दलित (विशेषकर जाटव) और मुस्लिम मतदाताओं की आबादी निर्णायक भूमिका में है। लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो चंद्रशेखर ने न केवल दलितों बल्कि मुस्लिम युवाओं का भी एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर आकर्षित किया है। यही कारण है कि इन 55 सीटों पर वे किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल के समीकरण को पूरी तरह से बदलने की ताकत रखते हैं। मायावती के ढहते किले पर कब्ज़ा और दलित राजनीति का नया चेहरा इस पूरे समीकरण का सबसे बड़ा पहलू बहुजन समाज पार्टी का सिमटता जनाधार है। पिछले एक दशक में बसपा का ग्राफ लगातार गिरा है, और जो कोर वोटर कभी मायावती का सबसे मजबूत स्तंभ हुआ करता था, वह अब एक नए, आक्रामक और जुझारू विकल्प की तलाश में है। चंद्रशेखर आज़ाद खुद को इसी विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। जमीन पर उतरकर संघर्ष करना, युवाओं के मुद्दों को उठाना और सोशल मीडिया पर आक्रामक उपस्थिति ने उन्हें युवा दलितों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। यदि बसपा का पारंपरिक कोर वोटर पूरी तरह से आजाद समाज पार्टी की तरफ शिफ्ट होता है, तो यह यूपी की राजनीति में सदियों का सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तनकारी बदलाव होगा। इंडिया गठबंधन का आंतरिक द्वंद्व: अखिलेश बनाम कांग्रेस का पेंच चंद्रशेखर आज़ाद की बढ़ती ताकत ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के 'इंडिया गठबंधन' के सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है। • अखिलेश यादव का डर: समाजवादी पार्टी इस समय PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के सहारे आगे बढ़ रही है। अखिलेश यादव जानते हैं कि अगर चंद्रशेखर गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो वे दलित और मुस्लिम मतों के बड़े हिस्से पर अपना दावा ठोकेंगे, जिससे भविष्य में सपा के नेतृत्व को चुनौती मिल सकती है। यही वजह है कि सपा प्रमुख उनके साथ गठबंधन को लेकर बहुत उत्साहित दिखाई नहीं देते। • कांग्रेस की रणनीति: इसके विपरीत, कांग्रेस उत्तर प्रदेश में भाजपा विरोधी वोटों को पूरी तरह एकजुट करना चाहती है। कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि चंद्रशेखर को साथ लेने से दलित और युवा मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा उनके पाले में आ सकता है, जिससे गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत हो जाएगी। अकेले लड़ने बनाम गठबंधन का गणित: किसे होगा फायदा, किसे नुकसान? यदि चंद्रशेखर आज़ाद को इंडिया गठबंधन में जगह नहीं मिलती है और वे अकेले या छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो इसके परिणाम बेहद दिलचस्प होंगे: • विपक्ष को नुकसान: अकेले लड़ने की स्थिति में चंद्रशेखर मुख्य रूप से सपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक (दलित और मुस्लिम) में सेंध लगाएंगे। • भाजपा को परोक्ष लाभ: वोटों का यह बिखराव सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि विपक्ष के मतों के विभाजित होते ही भाजपा विरोधी लहर कमजोर पड़ जाएगी। • गठबंधन होने पर: यदि वे इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो इन 55 सीटों पर विपक्षी गठबंधन एकतरफा बढ़त हासिल कर सकता है, जो लखनऊ की सत्ता के समीकरण को पूरी तरह से पलट देगा। रणनीति का विस्तार: सिर्फ दलित नहीं, अब OBC पर भी नजर चंद्रशेखर अपनी राजनीति को केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रख रहे हैं। उनकी हालिया रणनीतियों और घोषित की जा रही सूचियों से साफ है कि वे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और किसान आंदोलन से जुड़े समुदायों को भी अपनी पार्टी में बड़ा प्रतिनिधित्व दे रहे हैं। यह कदम उनके सामाजिक आधार को व्यापक बनाने और उन्हें एक संपूर्ण प्रादेशिक नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का रास्ता बेहद पेचीदा होने वाला है। चंद्रशेखर आज़ाद भले ही अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में न हों, लेकिन वे उस निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं जहां वे जिसके साथ होंगे, उसकी राह आसान हो जाएगी, और जिसके खिलाफ खड़े होंगे, उसका राजनीतिक खेल बिगड़ना तय है। लखनऊ की गद्दी का फैसला इस बार इस बात से भी तय होगा कि चंद्रशेखर आज़ाद का सियासी ऊंट किस करवट बैठता है।

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    Hashme Alam
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    राजधानी लखनऊ के थाना सहादतगंज में महिला द्वारा लूट की दी हुई सूचना निकली फर्जी!!

महिला द्वारा डायल 112 पर 2 नकाबकोश बाइक सवार बदमाशो द्वारा कुंडल और अंगूठी के लूटे जाने की दी सूचना!!

सूचना पर पहुंची सहादतगंज पुलिस ने शुरू की जांच!!

लगभक 4 घंटे जांच और महिला से पूछताछ के बाद सूचना निकली फर्जी - DCP पश्चिम!!

महिला ऑनलाइन गेम खेलने की थी आदि - DCP पश्चिम!!

ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान महिला को हुआ था भारी नुकसान!!

नुकसान की भरपाई करने के लिए महिला ने रची थी लूट की झूठी कहानी - DCP पश्चिम!!

सहादतगंज पुलिस आगे की कार्यवाही में जुटी!!

राजधानी लखनऊ के थाना सआदतगंज क्षेत्रान्तर्गत महिला द्वारा लूट की झूठी सूचना दिए जाने के प्रकरण में पुलिस उपायुक्त पश्चिमी द्वारा दी गई बाइट!!
    user_Mohd Waseem
    Mohd Waseem
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    14 hrs ago
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    Sandhya Tiwari
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    यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का सबसे बड़ा सस्पेंस: क्या चंद्रशेखर आज़ाद बनेंगे सत्ता की चाबी?
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का सबसे बड़ा सस्पेंस: क्या चंद्रशेखर आज़ाद बनेंगे सत्ता की चाबी?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय एक ऐसा तूफान उठ रहा है जिसके केंद्र में न तो सत्ताधारी दल है और न ही मुख्य विपक्षी दल। यह तूफान है पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उठकर पूरे राज्य में अपनी धमक बनाने वाले नगीना के सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद का। लोकसभा चुनाव में बिना किसी बड़े गठबंधन के, सिर्फ अपने दम पर नगीना सीट को एकतरफा जीतने वाले चंद्रशेखर अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सबसे बड़े 'एक्स-फैक्टर' बनकर उभरे हैं। आइए समझते हैं कि यूपी की 403 विधानसभा सीटों के इस महासमर में चंद्रशेखर आज़ाद का सियासी समीकरण क्या है और वे किसका खेल बनाने या बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं।
मिशन 55: पश्चिमी उत्तर प्रदेश का चक्रव्यूह
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की लगभग 55 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां चंद्रशेखर आज़ाद और उनकी पार्टी का सीधा और गहरा प्रभाव है। ये सीटें मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, और मुरादाबाद जैसे जिलों में फैली हैं। इन क्षेत्रों में दलित (विशेषकर जाटव) और मुस्लिम मतदाताओं की आबादी निर्णायक भूमिका में है। लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो चंद्रशेखर ने न केवल दलितों बल्कि मुस्लिम युवाओं का भी एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर आकर्षित किया है। यही कारण है कि इन 55 सीटों पर वे किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल के समीकरण को पूरी तरह से बदलने की ताकत रखते हैं।
मायावती के ढहते किले पर कब्ज़ा और दलित राजनीति का नया चेहरा
इस पूरे समीकरण का सबसे बड़ा पहलू बहुजन समाज पार्टी का सिमटता जनाधार है। पिछले एक दशक में बसपा का ग्राफ लगातार गिरा है, और जो कोर वोटर कभी मायावती का सबसे मजबूत स्तंभ हुआ करता था, वह अब एक नए, आक्रामक और जुझारू विकल्प की तलाश में है। चंद्रशेखर आज़ाद खुद को इसी विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। जमीन पर उतरकर संघर्ष करना, युवाओं के मुद्दों को उठाना और सोशल मीडिया पर आक्रामक उपस्थिति ने उन्हें युवा दलितों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। यदि बसपा का पारंपरिक कोर वोटर पूरी तरह से आजाद समाज पार्टी की तरफ शिफ्ट होता है, तो यह यूपी की राजनीति में सदियों का सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तनकारी बदलाव होगा।
इंडिया गठबंधन का आंतरिक द्वंद्व: अखिलेश बनाम कांग्रेस का पेंच
चंद्रशेखर आज़ाद की बढ़ती ताकत ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के 'इंडिया गठबंधन' के सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है।
• अखिलेश यादव का डर: समाजवादी पार्टी इस समय PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के सहारे आगे बढ़ रही है। अखिलेश यादव जानते हैं कि अगर चंद्रशेखर गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो वे दलित और मुस्लिम मतों के बड़े हिस्से पर अपना दावा ठोकेंगे, जिससे भविष्य में सपा के नेतृत्व को चुनौती मिल सकती है। यही वजह है कि सपा प्रमुख उनके साथ गठबंधन को लेकर बहुत उत्साहित दिखाई नहीं देते।
• कांग्रेस की रणनीति: इसके विपरीत, कांग्रेस उत्तर प्रदेश में भाजपा विरोधी वोटों को पूरी तरह एकजुट करना चाहती है। कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि चंद्रशेखर को साथ लेने से दलित और युवा मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा उनके पाले में आ सकता है, जिससे गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत हो जाएगी।
अकेले लड़ने बनाम गठबंधन का गणित: किसे होगा फायदा, किसे नुकसान?
यदि चंद्रशेखर आज़ाद को इंडिया गठबंधन में जगह नहीं मिलती है और वे अकेले या छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो इसके परिणाम बेहद दिलचस्प होंगे:
• विपक्ष को नुकसान: अकेले लड़ने की स्थिति में चंद्रशेखर मुख्य रूप से सपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक (दलित और मुस्लिम) में सेंध लगाएंगे।
• भाजपा को परोक्ष लाभ: वोटों का यह बिखराव सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि विपक्ष के मतों के विभाजित होते ही भाजपा विरोधी लहर कमजोर पड़ जाएगी।
• गठबंधन होने पर: यदि वे इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो इन 55 सीटों पर विपक्षी गठबंधन एकतरफा बढ़त हासिल कर सकता है, जो लखनऊ की सत्ता के समीकरण को पूरी तरह से पलट देगा।
रणनीति का विस्तार: सिर्फ दलित नहीं, अब OBC पर भी नजर
चंद्रशेखर अपनी राजनीति को केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रख रहे हैं। उनकी हालिया रणनीतियों और घोषित की जा रही सूचियों से साफ है कि वे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और किसान आंदोलन से जुड़े समुदायों को भी अपनी पार्टी में बड़ा प्रतिनिधित्व दे रहे हैं। यह कदम उनके सामाजिक आधार को व्यापक बनाने और उन्हें एक संपूर्ण प्रादेशिक नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का रास्ता बेहद पेचीदा होने वाला है। चंद्रशेखर आज़ाद भले ही अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में न हों, लेकिन वे उस निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं जहां वे जिसके साथ होंगे, उसकी राह आसान हो जाएगी, और जिसके खिलाफ खड़े होंगे, उसका राजनीतिक खेल बिगड़ना तय है। लखनऊ की गद्दी का फैसला इस बार इस बात से भी तय होगा कि चंद्रशेखर आज़ाद का सियासी ऊंट किस करवट बैठता है।
    user_E RADIO INDIA
    E RADIO INDIA
    Media house Meerut, Uttar Pradesh•
    17 hrs ago
  • मेरठ- बेसमेंट नुमा सुरंग के अंदर एल्युमीनियम का बनाया जा था शुद्ध चाँदी का वर्क … परतापुर में खाद्य विभाग की बढ़ी कार्यवाही
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    मेरठ- बेसमेंट नुमा सुरंग के अंदर एल्युमीनियम का बनाया जा था शुद्ध चाँदी का वर्क … परतापुर में खाद्य विभाग की बढ़ी कार्यवाही
    user_Ziyarat News
    Ziyarat News
    Court reporter मेरठ, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • मेरठ- बेसमेंट नुमा सुरंग के अंदर एल्युमीनियम का बनाया जा था शुद्ध चाँदी का वर्क का आरोप … परतापुर में खाद्य विभाग की बढ़ी कार्यवाही मेरठ- बेसमेंट नुमा सुरंग के अंदर एल्युमीनियम का बनाया जा था शुद्ध चाँदी का वर्क का आरोप … परतापुर में खाद्य विभाग की बढ़ी कार्यवाही
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    मेरठ- बेसमेंट नुमा सुरंग के अंदर एल्युमीनियम का बनाया जा था शुद्ध चाँदी का वर्क का आरोप … परतापुर में खाद्य विभाग की बढ़ी कार्यवाही
मेरठ- बेसमेंट नुमा सुरंग के अंदर एल्युमीनियम का बनाया जा था शुद्ध चाँदी का वर्क का आरोप … परतापुर में खाद्य विभाग की बढ़ी कार्यवाही
    user_अतीक अहमद
    अतीक अहमद
    Photographer मेरठ, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • बदायूं के सहसवान कोतवाली क्षेत्र के अकबराबाद चौराहे पर कपड़े की दुकान में भीषण आग बदायूं ब्रेकिंग... बदायूं के सहसवान कोतवाली क्षेत्र के अकबराबाद चौराहे पर कपड़े की दुकान में भीषण आग लग गई। आग की लपटों से पूरे बाजार में हड़कंप मच गया। बदायूं के सहसवान में शुक्रवार रात करीब 9 बजे अकबराबाद रोड स्थित रेडीमेड कपड़ों की दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। दुकान से उठती आग की लपटों से बाजार में अफरा-तफरी मच गई। आग लगने से आसपास के दुकानदारों में दहशत फैल गई। लोग अपनी-अपनी दुकानें बंद कर सुरक्षित जगहों की ओर भागे। आग की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। प्रभारी निरीक्षक नरेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की। आग से दुकान में रखा रेडीमेड कपड़ों का सारा सामान जलकर राख हो गया। दुकानदार को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और दमकल विभाग आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं।
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    बदायूं के सहसवान कोतवाली क्षेत्र के अकबराबाद चौराहे पर कपड़े की दुकान में भीषण आग
बदायूं ब्रेकिंग...
बदायूं के सहसवान कोतवाली क्षेत्र के अकबराबाद चौराहे पर कपड़े की दुकान में भीषण आग लग गई। आग की लपटों से पूरे बाजार में हड़कंप मच गया।
बदायूं के सहसवान में शुक्रवार रात करीब 9 बजे अकबराबाद रोड स्थित रेडीमेड कपड़ों की दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया।
दुकान से उठती आग की लपटों से बाजार में अफरा-तफरी मच गई। आग लगने से आसपास के दुकानदारों में दहशत फैल गई। लोग अपनी-अपनी दुकानें बंद कर सुरक्षित जगहों की ओर भागे।
आग की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। प्रभारी निरीक्षक नरेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की।
आग से दुकान में रखा रेडीमेड कपड़ों का सारा सामान जलकर राख हो गया। दुकानदार को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।
हालांकि आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और दमकल विभाग आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं।
    user_Gaurav Choudhary
    Gaurav Choudhary
    Non-Governmental Organisation मेरठ, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • घाघरा के कटान से नदी में समा रहा मकान, धराशायी होते घर का वीडियो वायरल बलिया बलिया में घाघरा नदी का कटान लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। नदी के तेज कटान के चलते एक मकान देखते ही देखते नदी में समा गया। मकान के नदी में गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो बांसडीह तहसील क्षेत्र के महाराजपुर नाहर छपरा गांव का बताया जा रहा है। वीडियो में एक मकान नदी के कटान की चपेट में आकर धराशायी होता दिखाई दे रहा है।
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    घाघरा के कटान से नदी में समा रहा मकान, धराशायी होते घर का वीडियो वायरल
बलिया
बलिया में घाघरा नदी का कटान लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। नदी के तेज कटान के चलते एक मकान देखते ही देखते नदी में समा गया। मकान के नदी में गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो बांसडीह तहसील क्षेत्र के महाराजपुर नाहर छपरा गांव का बताया जा रहा है। वीडियो में एक मकान नदी के कटान की चपेट में आकर धराशायी होता दिखाई दे रहा है।
    user_Gaurav Choudhary
    Gaurav Choudhary
    Non-Governmental Organisation मेरठ, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
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