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मध्य प्रदेश का सबसे खतरनाक वॉटरफॉल जब अपने रौद्र रूप में आता है, तो उसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है।
Abhishek Pandey
मध्य प्रदेश का सबसे खतरनाक वॉटरफॉल जब अपने रौद्र रूप में आता है, तो उसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है।
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- रीवा संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत, जो अपनी शानदार कार्यशैली के लिए चर्चित हैं, से पूरी जानकारी सुनने की बात कही गई है।1
- रीवा नगर निगम परिषद की सभा के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह विरोध विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि खुद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बहुसंख्यक पार्षदों की ओर से सामने आया। सभा में बीजेपी पार्षदों ने नगर निगम कमिश्नर सहित अन्य अधिकारियों को चूड़ियां भेंट कर अपना गहरा आक्रोश व्यक्त किया, जो निगम प्रशासन के प्रति उनकी गहरी नाराजगी को दर्शाता है। इस दौरान सभा अध्यक्ष वेंकटेश पांडे ने भी अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि वार्ड की जनता अब जनप्रतिनिधियों को ही जिम्मेदार ठहरा रही है और उन्हें अपशब्द सुनने पड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तो उसका सीधा असर पार्षदों की छवि पर पड़ता है। पार्षदों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा किए गए वादे केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर कोई काम नजर नहीं आ रहा। करीब 15 दिन पहले कमिश्नर द्वारा पार्षदों की बैठक में कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन हाल ही में हुई कुछ घंटों की बारिश ने उन दावों की पोल खोल दी है। सिविल लाइन क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए खोदे गए मार्ग अब तक अधूरे पड़े हैं, जिससे आम जनता को परेशानी और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, हल्की बारिश में ही कई घरों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिसने नगर निगम की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि जब सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि ही निगम प्रशासन से नाराज हैं, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। आने वाले समय में निगम प्रशासन इस विरोध के बाद क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी।3
- मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों में लाखों पद रिक्त होने के बावजूद केवल आंतरिक पदोन्नति (प्रमोशन) की प्रक्रिया जारी होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह स्थिति युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और राज्य में नई नियुक्तियों की धीमी गति पर सवाल उठाए गए हैं। यह बताया गया है कि आंतरिक पदोन्नति से निचले स्तर पर बड़ी संख्या में पद खाली हो जाएंगे। यदि इन रिक्त पदों पर नई भर्तियां नहीं की गईं, तो सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी और बढ़ेगी, जिससे कामकाज और जनता को मिलने वाली सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा। प्रदेश में वर्षों से लाखों पद रिक्त पड़े हैं, जबकि नई नियुक्तियों की गति बेहद धीमी है और कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त हो रहे हैं। कई सरकारी कार्यालय अब आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं, जिससे दक्षता प्रभावित हो रही है। इसका सबसे अधिक नुकसान मध्य प्रदेश के लाखों योग्य युवाओं को हो रहा है, जो वर्षों से स्थायी रोजगार के अवसरों की तलाश में हैं। आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े रोजगार के वादे किए जाते हैं, लेकिन युवाओं को केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि वास्तविक नियुक्तियों की आवश्यकता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से आग्रह किया गया है कि वे सभी विभागों में रिक्त पदों का पारदर्शी आकलन कराकर शीघ्र ही नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। स्पष्ट किया गया है कि केवल पदोन्नति से व्यवस्था नहीं चल सकती, नई नियुक्तियाँ भी उतनी ही आवश्यक हैं। ऐसा करने से युवाओं को रोजगार मिलेगा, सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और प्रदेश का विकास भी तेजी से होगा। इस पूरे मामले पर सवाल उठाया गया है कि 'युवाओं को अधिकार चाहिए, केवल आश्वासन नहीं', और 'मध्य प्रदेश में रिक्त पदों पर भर्ती कब होगी', यह सवाल प्रदेश का युवा लगातार पूछ रहा है।1
- सिंगरौली हाईकोर्ट से जुड़े एक वीडियो मामले को लेकर सीपीसी आज के एम द्वारा एक महत्वपूर्ण बयान दिया गया है।1
- सतना के कलेक्ट्रेट परिसर से एसडीएम रघुराजनगर ग्रामीण शाखा के बाबू शिवांक त्रिपाठी की स्कूटी चोरी हो गई है। MP19 MJ 9952 नंबर की इस स्कूटी की चोरी की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।1
- रेवा-मऊगंज इलाके को एमडी ड्रग्स का अड्डा बताया गया है, जहाँ से हाल ही में 10 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स की एक बड़ी खेप जब्त की गई है। इस महत्वपूर्ण कार्रवाई के परिणामस्वरूप, एक बड़े ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।1
- सतना जिले के नगर परिषद बिरसिंहपुर के शिवाजी वार्ड क्रमांक 09 में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र एक जर्जर किराए के भवन में चल रहा है, जिससे छोटे-छोटे बच्चों की जान को खतरा बना हुआ है। भवन की स्थिति इतनी खराब है कि बारिश का पानी सीधे अंदर टपकता है, छत का प्लास्टर उखड़ चुका है और लोहे के सरिए तक बाहर निकल आए हैं। इसके बावजूद प्रतिदिन मासूम बच्चों को इसी खतरनाक भवन में बैठाकर आंगनवाड़ी का संचालन किया जा रहा है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या से कई बार अवगत कराने के बावजूद संबंधित परियोजना अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक न तो इस जर्जर भवन का निरीक्षण किया है और न ही केंद्र को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कोई पहल की है। अधिकारियों की इस उदासीनता के कारण मासूमों की जान लगातार जोखिम में बनी हुई है।1