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सुरेंद्र कोली की मौत पर उठे सवाल, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका | हरिद्वार निठारी कांड से चर्चा में आए सुरेंद्र कोली की मौत के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। शव मिलने के बाद परिजन हरिद्वार पहुंचे। शनिवार को सुरेंद्र कोली का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। #सुरेंद्रकोली #हरिद्वार #उत्तराखंड #BreakingNews #ShraddhaTVnetwork

9 hrs ago
user_SHRADDHA TV NETWORK
SHRADDHA TV NETWORK
Local News Reporter लक्सर, हरिद्वार, उत्तराखंड•
9 hrs ago

सुरेंद्र कोली की मौत पर उठे सवाल, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका | हरिद्वार निठारी कांड से चर्चा में आए सुरेंद्र कोली की मौत के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। शव मिलने के बाद परिजन हरिद्वार पहुंचे। शनिवार को सुरेंद्र कोली का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। #सुरेंद्रकोली #हरिद्वार #उत्तराखंड #BreakingNews #ShraddhaTVnetwork

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  • नीलकंठ-लक्ष्मणझूला मार्ग पर गुफा के समीप एक युवती सड़क से नीचे खड़ी पहाड़ी ढलान पर गिरकर फंस गई। सूचना पर पौड़ी पुलिस एवं SDRF टीम मौके पर पहुंची और दुर्गम ढलान से सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर युवती को सुरक्षित बाहर निकाला। नीलकंठ-लक्ष्मणझूला मार्ग पर गुफा के समीप एक युवती सड़क से नीचे खड़ी पहाड़ी ढलान पर गिरकर फंस गई। सूचना पर पौड़ी पुलिस एवं SDRF टीम मौके पर पहुंची और दुर्गम ढलान से सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर युवती को सुरक्षित बाहर निकाला।
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    नीलकंठ-लक्ष्मणझूला मार्ग पर गुफा के समीप एक युवती सड़क से नीचे खड़ी पहाड़ी ढलान पर गिरकर फंस गई। सूचना पर पौड़ी पुलिस एवं SDRF टीम मौके पर पहुंची और दुर्गम ढलान से सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर युवती को सुरक्षित बाहर निकाला।
नीलकंठ-लक्ष्मणझूला मार्ग पर गुफा के समीप एक युवती सड़क से नीचे खड़ी पहाड़ी ढलान पर गिरकर फंस गई। सूचना पर पौड़ी पुलिस एवं SDRF टीम मौके पर पहुंची और दुर्गम ढलान से सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर युवती को सुरक्षित बाहर निकाला।
    user_DIGITALभारत
    DIGITALभारत
    Photographer लक्सर, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    2 hrs ago
  • लक्सर के भुरनी खतिरपुर में घर में घुसा विशालकाय मगरमच्छ, वन विभाग ने किया रेस्क्यू लक्सर के भुरनी खतिरपुर गांव में रात के समय एक विशालकाय मगरमच्छ ग्रामीण के घर में घुस गया। मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू किया। वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र गिरी ने बरसात के मौसम में वन्यजीवों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव दिखाई देने पर घबराएं नहीं, उचित दूरी बनाए रखें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें। #लक्सर #मगरमच्छ #वनविभाग #उत्तराखंड #ShraddhaTVnetwork
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    लक्सर के भुरनी खतिरपुर में घर में घुसा विशालकाय मगरमच्छ, वन विभाग ने किया रेस्क्यू
लक्सर के भुरनी खतिरपुर गांव में रात के समय एक विशालकाय मगरमच्छ ग्रामीण के घर में घुस गया। मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू किया।
वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र गिरी ने बरसात के मौसम में वन्यजीवों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव दिखाई देने पर घबराएं नहीं, उचित दूरी बनाए रखें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
#लक्सर #मगरमच्छ #वनविभाग #उत्तराखंड #ShraddhaTVnetwork
    user_SHRADDHA TV NETWORK
    SHRADDHA TV NETWORK
    Local News Reporter लक्सर, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    8 hrs ago
  • लोकेशन हरिद्वार से है (पत्रकार राजेश लाम्बा) खबर हरिद्वार से है लक्सर रोड जगजीतपुर स्थित होप सुपरस्पेशलिटी एंड कैंसर हॉस्पिटल में आज कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई। अस्पताल के अत्याधुनिक ऑन्कोलॉजी विभाग का भव्य उद्घाटन किया गया।यह नया विभाग डिजिटल लीनियर एक्सेलेरेटर और PET CT स्कैन जैसी एशिया की सबसे उन्नत तकनीकों से लैस है, जो कैंसर के सटीक निदान और बेहतर उपचार परिणामों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इस सुविधा के शुरू होने से उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीजों को अब कैंसर के उन्नत इलाज के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे श्री विनय शंकर पाण्डेय, IAS, सचिव मुख्यमंत्री एवं सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा,उत्तराखंड सरकार ने कहा कि डॉक्टर मिश्रा द्वारा उत्तराखंड के लिए यह गौरव की बात है। उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लिए डॉक्टर मिश्रा के योगदान को सराहा और कहा कि हेल्थ सेक्रेट्री होने के नाते सरकार हर संभव सेवा और सहयोग के लिए उनके साथ है।विशिष्ट अतिथियों ने दी बधाई अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने डॉ. एस.के. मिश्रा जी को बधाई दी और कहा कि आज के समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज हरिद्वार में ही उपलब्ध होना बड़ी बात है।कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के अपर मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती, कुंभ मेला अधिकारी मनीष दत्त,अवधूत आश्रम के महामंडलेश्वर संतोषानंद,महाबलेश्वर सत्यानंद गिरी जी, प्रसिद्ध समाजसेवी जगदीश लाल पाहवा जी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.आर.के. सिंह, गंगा सभा के प्रचारक उज्ज्वल पंडित, पूर्वांचल सभा के आशुतोष पांडे, महेश दुबे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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    लोकेशन हरिद्वार से है
(पत्रकार राजेश लाम्बा)
खबर हरिद्वार से है लक्सर रोड जगजीतपुर स्थित होप सुपरस्पेशलिटी एंड कैंसर हॉस्पिटल में आज कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई। अस्पताल के अत्याधुनिक ऑन्कोलॉजी विभाग का भव्य उद्घाटन किया गया।यह नया विभाग डिजिटल लीनियर एक्सेलेरेटर और PET CT स्कैन जैसी एशिया की सबसे उन्नत तकनीकों से लैस है, जो कैंसर के सटीक निदान और बेहतर उपचार परिणामों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इस सुविधा के शुरू होने से उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीजों को अब कैंसर के उन्नत इलाज के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे श्री विनय शंकर पाण्डेय, IAS, सचिव मुख्यमंत्री एवं सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा,उत्तराखंड सरकार ने कहा कि डॉक्टर मिश्रा द्वारा उत्तराखंड के लिए यह गौरव की बात है। उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लिए डॉक्टर मिश्रा के योगदान को सराहा और कहा कि हेल्थ सेक्रेट्री होने के नाते सरकार हर संभव सेवा और सहयोग के लिए उनके साथ है।विशिष्ट अतिथियों ने दी बधाई अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने डॉ. एस.के. मिश्रा जी को बधाई दी और कहा कि आज के समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज हरिद्वार में ही उपलब्ध होना बड़ी बात है।कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के अपर मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती, कुंभ मेला अधिकारी मनीष दत्त,अवधूत आश्रम के महामंडलेश्वर संतोषानंद,महाबलेश्वर सत्यानंद गिरी जी, प्रसिद्ध समाजसेवी जगदीश लाल पाहवा जी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.आर.के. सिंह, गंगा सभा के प्रचारक उज्ज्वल पंडित, पूर्वांचल सभा के आशुतोष पांडे, महेश दुबे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
    user_Rajesh kumar
    Rajesh kumar
    लक्सर, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    23 hrs ago
  • मसूरी के एक रेस्टोरेंट में घुसकर युवक और उसके साथियों पर लाठी-डंडों से हमला, सीसीटीवी फुटेज वायरल कुछ अज्ञात लोग रेस्टोरेंट में पहुंचे। आरोप है कि वहां पहुंचते ही उन्होंने मनीष और उसके साथियों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। किंग्रेग स्थित एक रेस्टोरेंट में घुसकर कुछ लोगों ने युवक और उसके साथियों पर लाठी-डंडों से हमला करने का मामला सामने आया है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग लाठी-डंडों से हमला करते दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित ने कोतवाली में तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस को दी तहरीर में मनीष ने बताया कि कुछ अज्ञात लोग रेस्टोरेंट में पहुंचे। आरोप है कि वहां पहुंचते ही उन्होंने मनीष और उसके साथियों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। घटना में मनीष और उसके साथियों के चोटिल होने की बात कही गई है।
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    मसूरी के एक रेस्टोरेंट में घुसकर युवक और उसके साथियों पर लाठी-डंडों से हमला, सीसीटीवी फुटेज वायरल
कुछ अज्ञात लोग रेस्टोरेंट में पहुंचे। आरोप है कि वहां पहुंचते ही उन्होंने मनीष और उसके साथियों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। 
किंग्रेग स्थित एक रेस्टोरेंट में घुसकर कुछ लोगों ने युवक और उसके साथियों पर लाठी-डंडों से हमला करने का मामला सामने आया है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग लाठी-डंडों से हमला करते दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित ने कोतवाली में तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस को दी तहरीर में मनीष ने बताया कि कुछ अज्ञात लोग रेस्टोरेंट में पहुंचे। आरोप है कि वहां पहुंचते ही उन्होंने मनीष और उसके साथियों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।  घटना में मनीष और उसके साथियों के चोटिल होने की बात कही गई है।
    user_Dpk Chauhan
    Dpk Chauhan
    Farmer हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    5 hrs ago
  • निठारी कांड के पूर्व आरोपी  सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत: कभी देशभर में छाया नाम, अब लाल माता मंदिर के सामने चाय की दुकान में मिला शव निठारी कांड के पूर्व आरोपी  सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत: कभी देशभर में छाया नाम, अब लाल माता मंदिर के सामने चाय की दुकान में मिला शव डेढ़-दो माह से हरिद्वार में था? पहले सिक्योरिटी गार्ड, फिर चाय की दुकान पर काम—पुलिस सत्यापन पर उठे गंभीर सवाल परिवार से फोन पर कथित विवाद की बात आई सामने, “परेशान मत करो, नहीं तो आत्महत्या कर लूंगा” कहने की बात; मौके से सुसाइड नोट नहीं—मौत की असली वजह जांच और पोस्टमार्टम से होगी साफ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से हरिद्वार। देश को करीब दो दशक तक झकझोरने वाले निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने एक बार फिर उस पुराने और बेहद चर्चित मामले की यादें ताजा कर दी हैं। प्रारंभिक पुलिस जानकारी के मुताबिक कोली का शव सप्त सरोवर रोड पर लाल माता मंदिर के सामने स्थित चाय की दुकान/खोखे में फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से फिलहाल कोई सुसाइड नोट मिलने की बात सामने नहीं आई है। मौत की परिस्थितियों और कारणों की जांच जारी है।  सबसे अहम बात—सुरेंद्र कोली अब निठारी मामले में दोषी नहीं था। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी से जुड़े उसके अंतिम लंबित मामले में उसकी दोषसिद्धि रद्द कर उसे बरी कर दिया था। इससे पहले जुलाई 2025 में शीर्ष अदालत ने उससे जुड़े 12 मामलों में उसकी बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा था। इसलिए वर्तमान रिपोर्टिंग में उसे “निठारी कांड का आरोपी” कहने के बजाय “निठारी कांड से जुड़े मामलों में पूर्व आरोपी रहे और बाद में सभी संबंधित मामलों में बरी हुए सुरेंद्र कोली” कहना अधिक सटीक है। कभी निठारी कांड का नाम सुनते ही देश में मच जाती थी सनसनी, अब हरिद्वार में गुमनाम जिंदगी सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मंगरुखाल क्षेत्र का रहने वाला था। निठारी कांड सामने आने के बाद उसका नाम देशभर में चर्चित हुआ। दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी क्षेत्र में मानव अवशेष मिलने के बाद मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। कोली, कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के यहां घरेलू सहायक के रूप में काम करता था और बाद में इस मामले में गिरफ्तार हुआ। मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया में कोली को अलग-अलग मुकदमों में दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड तक सुनाया गया। लेकिन वर्षों बाद न्यायिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसके अंतिम लंबित मामले में भी दोषसिद्धि रद्द कर उसे बरी कर दिया और तत्काल रिहाई का आदेश दिया।  करीब दो दशक की कानूनी लड़ाई के बाद वह आजाद था—लेकिन जिंदगी ने उसे फिर हरिद्वार की एक छोटी सी चाय की दुकान तक ला खड़ा किया। हरिद्वार में कैसे पहुंचा कोली? सुरक्षा गार्ड से चाय की दुकान तक की कहानी स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और इससे पहले रोशनाबाद/सिडकुल क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने की बात सामने आई है। बाद में वह उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में पहुंचा और चाय की दुकान हाल ही में किराये पर ली थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह यहां सामान्य व्यक्ति की तरह रह रहा था। आसपास के कई लोगों को उसके अतीत की जानकारी नहीं थी। और यहीं से उठता है हरिद्वार की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल। धर्मेंद्र कौशिक ने मदद के लिए दिया काम, लेकिन उन्हें भी नहीं पता था कौन है यह व्यक्ति स्थानीय निवासी धर्मेंद्र कौशिक के अनुसार, कोली ने उनसे काम दिलाने में मदद मांगी थी। धर्मेंद्र ने उसे लाल माता मंदिर के सामने अनिल शर्मा की आंचल दुग्ध की दुकान पर चाय का काम दिलाने में मदद की। धर्मेंद्र के मुताबिक उन्हें उस समय जानकारी नहीं थी कि यह वही सुरेंद्र कोली है, जिसका नाम देश के चर्चित निठारी मामले से जुड़ा रहा है। उनका कहना है कि वह कोली के व्यवहार और बातचीत से सामान्य व्यक्ति लगा और उन्होंने उसकी मदद करने के उद्देश्य से काम दिलाया। स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया कि वह वहां कुछ दिनों से चाय का काम कर रहा था। हालांकि उसके हरिद्वार में रहने और अलग-अलग काम करने की अवधि को लेकर सामने आ रही सूचनाओं में अंतर है, इसलिए इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच से होना बाकी है। मौत से पहले परिवार से फोन पर क्या बातचीत हुई? धर्मेंद्र कौशिक के मुताबिक, घटना से पहले कोली के पास परिवार के किसी सदस्य का फोन आया था। उनके अनुसार फोन पर बातचीत के दौरान कोली काफी परेशान दिखाई दे रहा था और कथित तौर पर कह रहा था— “मुझे परेशान मत करो, नहीं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।” धर्मेंद्र का कहना है कि उन्होंने इसे पारिवारिक मामला समझकर ज्यादा हस्तक्षेप नहीं किया और उसे समझाने की कोशिश की कि छोटी-सी बात पर ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए। यह दावा फिलहाल स्थानीय व्यक्ति के बयान पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच से होना बाकी है। और यही कारण है कि इस बातचीत को मौत का अंतिम कारण मान लेना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन मौत के साथ सबसे बड़ा सवाल—सुरक्षा सत्यापन कहां था? यह घटना अब हरिद्वार की पुलिस वेरिफिकेशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यदि सामने आ रही जानकारी के अनुसार कोली कुछ समय तक सिडकुल/रोशनाबाद क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड का काम कर रहा था, तो सवाल है— क्या उस कंपनी ने उसका पुलिस सत्यापन कराया था? अगर कराया था तो उसका रिकॉर्ड कहां है? अगर नहीं कराया था तो क्यों नहीं? सुरक्षा गार्ड की नौकरी देने से पहले पहचान और पृष्ठभूमि की जांच की प्रक्रिया क्या अपनाई गई? और यदि वह लंबे समय तक हरिद्वार में रह रहा था, तो स्थानीय स्तर पर उसका सत्यापन क्यों नहीं हुआ? एक आधार कार्ड भी मिला—फिर पहचान की जानकारी सिस्टम तक क्यों नहीं पहुंची? घटनास्थल से एक आधार कार्ड मिलने की बात भी सामने आई है, जिस पर नाम सुरेंद्र कोली दर्ज बताया जा रहा है। इससे एक और सवाल सामने आता है— यदि उसके पास उसकी वास्तविक पहचान का दस्तावेज मौजूद था, तो फिर वह अलग नाम से रहने की बात कहां से और क्यों सामने आई? हालांकि किसी व्यक्ति द्वारा किसी जगह अलग नाम बताने की बात को अभी पुलिस रिकॉर्ड के बिना तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता। इसी तरह आधार कार्ड में दर्ज निजी विवरणों को सार्वजनिक करना भी उचित नहीं होगा। अब असली जांच यह होनी चाहिए कि उसके हरिद्वार आने के बाद उसने किन-किन जगहों पर काम किया, किन दस्तावेजों के आधार पर काम मिला और कहीं कोई पुलिस सत्यापन कराया गया था या नहीं। झोपड़ियों का सत्यापन होता है तो सिडकुल और बाजारों में काम करने वालों का क्यों नहीं? हरिद्वार पुलिस समय-समय पर बाहरी लोगों, किरायेदारों, झुग्गी-झोपड़ियों और संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन अभियान चलाती है। ऐसे में सवाल किसी एक व्यक्ति को लेकर नहीं, पूरी व्यवस्था को लेकर है। क्या सत्यापन सिर्फ झुग्गियों तक सीमित है? क्या सिडकुल की कंपनियों में काम करने वाले सुरक्षा गार्डों का नियमित सत्यापन होता है? क्या छोटे दुकानदारों और चाय-खोखे पर काम करने वाले बाहरी लोगों का सत्यापन होता है? क्या धार्मिक क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में काम करने वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड रखा जाता है? क्या मकान मालिक और दुकान मालिकों को अपने यहां काम करने वालों की सूचना पुलिस को देने की व्यवस्था वास्तव में लागू है? अगर व्यवस्था है तो सुरेंद्र कोली का सत्यापन क्यों नहीं हुआ—और अगर हुआ था तो उसकी जानकारी सामने क्यों नहीं आई? यही सवाल अब पुलिस प्रशासन से जवाब मांगते हैं। संत बहुल्य भूपतवाला जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी पहचान की जांच जरूरी भूपतवाला और सप्त सरोवर क्षेत्र हरिद्वार के महत्वपूर्ण धार्मिक क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु, संत, साधु और पर्यटक आते-जाते हैं। ऐसे क्षेत्र में बाहर से आने वाले लोगों की पहचान और सत्यापन व्यवस्था केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ विषय है। सुरेंद्र कोली की मौत के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि— कितने लोग हरिद्वार में बिना स्थानीय सत्यापन के काम कर रहे हैं? कितने सुरक्षा गार्डों की पृष्ठभूमि की जांच हुई है? कितने चाय-खोखे, ढाबे और दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड पुलिस के पास है? निठारी से हरिद्वार तक—करीब दो दशक की कहानी का दर्दनाक अंत निठारी कांड ने सुरेंद्र कोली के परिवार को भी वर्षों तक प्रभावित किया। परिवार के लोग लंबे समय तक उसे निर्दोष मानते रहे और न्याय की लड़ाई लड़ते रहे। उसकी मां कुंती देवी भी अपने बेटे को लेकर न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही थीं। बाद में न्यायिक प्रक्रिया में कोली को निठारी से जुड़े सभी मामलों में बरी कर दिया गया। लेकिन अदालत से बाहर आने के बाद उसकी जिंदगी कैसी रही? एक ऐसा व्यक्ति जिसका नाम दो दशक तक देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में लिया जाता रहा— वही व्यक्ति आखिर में— सुरक्षा गार्ड बना, छोटे-मोटे काम करता रहा, हरिद्वार आया, चाय की दुकान पर बैठा, और फिर उसी चाय की दुकान में उसकी मौत हो गई। यह घटनाक्रम अपने पीछे अनेक सवाल छोड़ गया है। परिवार पीछे छूट गया—पत्नी और बच्चों पर क्या बीतेगी? सुरेंद्र कोली के परिवार में पत्नी शांति देवी और बच्चे हैं। निठारी कांड के बाद परिवार पर सामाजिक और आर्थिक असर पड़ने की बातें लंबे समय से सामने आती रही हैं। अब कोली की मौत के बाद परिवार के सामने एक और दुखद अध्याय खड़ा हो गया है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है— मौत का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस के सामने अब कई सवाल सुरेंद्र कोली की मौत की जांच में पुलिस को कई बिंदुओं पर स्पष्टता लानी होगी— वह हरिद्वार कब आया था? कहां रह रहा था? उसने अपना नाम क्यो बदला था? बदला था तो क्यों? सिडकुल/रोशनाबाद में उसने कब और किस कंपनी में काम किया? क्या उसका पुलिस वेरिफिकेशन हुआ था? क्या दुकान पर काम करने से पहले कोई पहचान-पत्र लिया गया था? परिवार से घटना से पहले हुई कथित बातचीत क्या थी? क्या फोन रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच होगी? घटनास्थल पर कोई संघर्ष या अन्य संदिग्ध परिस्थिति के संकेत मिले या नहीं? पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या कहती है? और सबसे अहम—क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी या मौत की कोई दूसरी वजह भी हो सकती है? जब तक पुलिस जांच और पोस्टमार्टम पूरा नहीं हो जाता, किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। निठारी का आरोपी नहीं—न्यायालय से बरी हुआ व्यक्ति था कोली इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष भी जनता को समझना चाहिए। सुरेंद्र कोली को नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निठारी से जुड़े उसके अंतिम लंबित मामले में भी बरी कर दिया गया था। अदालत ने उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और तत्काल रिहाई का आदेश दिया।  इसलिए उसकी मौत की खबर लिखते समय उसे आज भी “निठारी हत्याकांड का दोषी” कहना न्यायिक स्थिति के विपरीत होगा। उसका नाम निठारी कांड से जुड़ा रहा—लेकिन अदालतों के अंतिम फैसलों के बाद वह उन मामलों में दोषसिद्ध व्यक्ति नहीं था। यही तथ्य इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा है। हरिद्वार की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खुली किताब बन गई यह घटना सुरेंद्र कोली की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की मौत की खबर नहीं है। यह हरिद्वार की वेरिफिकेशन व्यवस्था, किरायेदार सत्यापन, कर्मचारी सत्यापन और औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़ा करती है। यदि कोई व्यक्ति दूसरे शहर से आता है... किसी कंपनी में काम करता है... धार्मिक क्षेत्र में पहुंचता है... दुकान पर काम करता है... और लंबे समय तक स्थानीय लोगों के बीच रहता है... तो क्या उसकी पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी संबंधित तंत्र तक पहुंचती है? या फिर हमारी व्यवस्था किसी बड़ी घटना के बाद ही जागती है? अब पुलिस को सिर्फ मौत की जांच नहीं, सत्यापन तंत्र की भी समीक्षा करनी चाहिए सुरेंद्र कोली की मौत की निष्पक्ष जांच अपनी जगह जरूरी है। लेकिन इसके साथ हरिद्वार पुलिस और प्रशासन को यह भी देखना चाहिए कि— कितने बाहरी कर्मचारी बिना सत्यापन काम कर रहे हैं? कितनी कंपनियां सुरक्षा गार्डों का सत्यापन किए बिना नियुक्ति कर रही हैं? कितने दुकानदार अपने कर्मचारियों का रिकॉर्ड नहीं रखते? कितने धार्मिक क्षेत्रों में अस्थायी रूप से काम करने वाले लोगों का पुलिस सत्यापन नहीं होता? यदि इस घटना से इन सवालों का जवाब खोज लिया गया तो शायद एक दर्दनाक घटना से भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का रास्ता निकल सकता है। करीब दो दशक बाद फिर चर्चा में निठारी—लेकिन इस बार सवाल कुछ और हैं एक समय निठारी कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। फिर अदालतों में लंबी लड़ाई चली। फिर एक-एक करके फैसले बदले। और नवंबर 2025 में सुरेंद्र कोली के खिलाफ निठारी से जुड़ा अंतिम लंबित मामला भी खत्म हो गया। अब सितंबर 2026 में हरिद्वार में उसकी मौत ने उसी कहानी को एक बार फिर सामने ला दिया है। लेकिन इस बार सवाल सिर्फ निठारी के नहीं हैं। सवाल है—हरिद्वार में उसकी पहचान कैसे छिपी रही? सवाल है—सत्यापन व्यवस्था कहां थी? सवाल है—मौत से पहले उसके साथ क्या हुआ? और सबसे बड़ा सवाल—उसकी मौत का सच क्या है? अब जवाब पोस्टमार्टम और पुलिस जांच से मिलेगा सुरेंद्र कोली की मौत को लेकर अभी कई बातें सामने आ रही हैं, लेकिन आत्महत्या की अंतिम पुष्टि, मौत की वजह और परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। हरिद्वार अब सिर्फ यह जानना चाहता है— “निठारी के उस नाम का हरिद्वार में आखिर हुआ क्या?” और उससे भी बड़ा सवाल— “अगर वह इतने समय से हरिद्वार में रह रहा था, तो हमारी सत्यापन व्यवस्था को उसकी पहचान कब और कैसे पता चली?” — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से हरिद्वार
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    निठारी कांड के पूर्व आरोपी  सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत: कभी देशभर में छाया नाम, अब लाल माता मंदिर के सामने चाय की दुकान में मिला शव
निठारी कांड के पूर्व आरोपी  सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत: कभी देशभर में छाया नाम, अब लाल माता मंदिर के सामने चाय की दुकान में मिला शव
डेढ़-दो माह से हरिद्वार में था? पहले सिक्योरिटी गार्ड, फिर चाय की दुकान पर काम—पुलिस सत्यापन पर उठे गंभीर सवाल
परिवार से फोन पर कथित विवाद की बात आई सामने, “परेशान मत करो, नहीं तो आत्महत्या कर लूंगा” कहने की बात; मौके से सुसाइड नोट नहीं—मौत की असली वजह जांच और पोस्टमार्टम से होगी साफ
स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से हरिद्वार।
देश को करीब दो दशक तक झकझोरने वाले निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने एक बार फिर उस पुराने और बेहद चर्चित मामले की यादें ताजा कर दी हैं।
प्रारंभिक पुलिस जानकारी के मुताबिक कोली का शव सप्त सरोवर रोड पर लाल माता मंदिर के सामने स्थित चाय की दुकान/खोखे में फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से फिलहाल कोई सुसाइड नोट मिलने की बात सामने नहीं आई है। मौत की परिस्थितियों और कारणों की जांच जारी है। 
सबसे अहम बात—सुरेंद्र कोली अब निठारी मामले में दोषी नहीं था।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी से जुड़े उसके अंतिम लंबित मामले में उसकी दोषसिद्धि रद्द कर उसे बरी कर दिया था। इससे पहले जुलाई 2025 में शीर्ष अदालत ने उससे जुड़े 12 मामलों में उसकी बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा था।
इसलिए वर्तमान रिपोर्टिंग में उसे “निठारी कांड का आरोपी” कहने के बजाय “निठारी कांड से जुड़े मामलों में पूर्व आरोपी रहे और बाद में सभी संबंधित मामलों में बरी हुए सुरेंद्र कोली” कहना अधिक सटीक है।
कभी निठारी कांड का नाम सुनते ही देश में मच जाती थी सनसनी, अब हरिद्वार में गुमनाम जिंदगी
सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मंगरुखाल क्षेत्र का रहने वाला था। निठारी कांड सामने आने के बाद उसका नाम देशभर में चर्चित हुआ।
दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी क्षेत्र में मानव अवशेष मिलने के बाद मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। कोली, कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के यहां घरेलू सहायक के रूप में काम करता था और बाद में इस मामले में गिरफ्तार हुआ।
मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया में कोली को अलग-अलग मुकदमों में दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड तक सुनाया गया। लेकिन वर्षों बाद न्यायिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसके अंतिम लंबित मामले में भी दोषसिद्धि रद्द कर उसे बरी कर दिया और तत्काल रिहाई का आदेश दिया। 
करीब दो दशक की कानूनी लड़ाई के बाद वह आजाद था—लेकिन जिंदगी ने उसे फिर हरिद्वार की एक छोटी सी चाय की दुकान तक ला खड़ा किया।
हरिद्वार में कैसे पहुंचा कोली? सुरक्षा गार्ड से चाय की दुकान तक की कहानी
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और इससे पहले रोशनाबाद/सिडकुल क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने की बात सामने आई है। बाद में वह उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में पहुंचा और चाय की दुकान हाल ही में किराये पर ली थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वह यहां सामान्य व्यक्ति की तरह रह रहा था।
आसपास के कई लोगों को उसके अतीत की जानकारी नहीं थी।
और यहीं से उठता है हरिद्वार की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल।
धर्मेंद्र कौशिक ने मदद के लिए दिया काम, लेकिन उन्हें भी नहीं पता था कौन है यह व्यक्ति
स्थानीय निवासी धर्मेंद्र कौशिक के अनुसार, कोली ने उनसे काम दिलाने में मदद मांगी थी।
धर्मेंद्र ने उसे लाल माता मंदिर के सामने अनिल शर्मा की आंचल दुग्ध की दुकान पर चाय का काम दिलाने में मदद की।
धर्मेंद्र के मुताबिक उन्हें उस समय जानकारी नहीं थी कि यह वही सुरेंद्र कोली है, जिसका नाम देश के चर्चित निठारी मामले से जुड़ा रहा है।
उनका कहना है कि वह कोली के व्यवहार और बातचीत से सामान्य व्यक्ति लगा और उन्होंने उसकी मदद करने के उद्देश्य से काम दिलाया।
स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया कि वह वहां कुछ दिनों से चाय का काम कर रहा था। हालांकि उसके हरिद्वार में रहने और अलग-अलग काम करने की अवधि को लेकर सामने आ रही सूचनाओं में अंतर है, इसलिए इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच से होना बाकी है।
मौत से पहले परिवार से फोन पर क्या बातचीत हुई?
धर्मेंद्र कौशिक के मुताबिक, घटना से पहले कोली के पास परिवार के किसी सदस्य का फोन आया था।
उनके अनुसार फोन पर बातचीत के दौरान कोली काफी परेशान दिखाई दे रहा था और कथित तौर पर कह रहा था—
“मुझे परेशान मत करो, नहीं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।”
धर्मेंद्र का कहना है कि उन्होंने इसे पारिवारिक मामला समझकर ज्यादा हस्तक्षेप नहीं किया और उसे समझाने की कोशिश की कि छोटी-सी बात पर ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए।
यह दावा फिलहाल स्थानीय व्यक्ति के बयान पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच से होना बाकी है।
और यही कारण है कि इस बातचीत को मौत का अंतिम कारण मान लेना अभी जल्दबाजी होगी।
लेकिन मौत के साथ सबसे बड़ा सवाल—सुरक्षा सत्यापन कहां था?
यह घटना अब हरिद्वार की पुलिस वेरिफिकेशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
यदि सामने आ रही जानकारी के अनुसार कोली कुछ समय तक सिडकुल/रोशनाबाद क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड का काम कर रहा था, तो सवाल है—
क्या उस कंपनी ने उसका पुलिस सत्यापन कराया था?
अगर कराया था तो उसका रिकॉर्ड कहां है?
अगर नहीं कराया था तो क्यों नहीं?
सुरक्षा गार्ड की नौकरी देने से पहले पहचान और पृष्ठभूमि की जांच की प्रक्रिया क्या अपनाई गई?
और यदि वह लंबे समय तक हरिद्वार में रह रहा था, तो स्थानीय स्तर पर उसका सत्यापन क्यों नहीं हुआ?
एक आधार कार्ड भी मिला—फिर पहचान की जानकारी सिस्टम तक क्यों नहीं पहुंची?
घटनास्थल से एक आधार कार्ड मिलने की बात भी सामने आई है, जिस पर नाम सुरेंद्र कोली दर्ज बताया जा रहा है।
इससे एक और सवाल सामने आता है—
यदि उसके पास उसकी वास्तविक पहचान का दस्तावेज मौजूद था, तो फिर वह अलग नाम से रहने की बात कहां से और क्यों सामने आई?
हालांकि किसी व्यक्ति द्वारा किसी जगह अलग नाम बताने की बात को अभी पुलिस रिकॉर्ड के बिना तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता।
इसी तरह आधार कार्ड में दर्ज निजी विवरणों को सार्वजनिक करना भी उचित नहीं होगा।
अब असली जांच यह होनी चाहिए कि उसके हरिद्वार आने के बाद उसने किन-किन जगहों पर काम किया, किन दस्तावेजों के आधार पर काम मिला और कहीं कोई पुलिस सत्यापन कराया गया था या नहीं।
झोपड़ियों का सत्यापन होता है तो सिडकुल और बाजारों में काम करने वालों का क्यों नहीं?
हरिद्वार पुलिस समय-समय पर बाहरी लोगों, किरायेदारों, झुग्गी-झोपड़ियों और संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन अभियान चलाती है।
ऐसे में सवाल किसी एक व्यक्ति को लेकर नहीं, पूरी व्यवस्था को लेकर है।
क्या सत्यापन सिर्फ झुग्गियों तक सीमित है?
क्या सिडकुल की कंपनियों में काम करने वाले सुरक्षा गार्डों का नियमित सत्यापन होता है?
क्या छोटे दुकानदारों और चाय-खोखे पर काम करने वाले बाहरी लोगों का सत्यापन होता है?
क्या धार्मिक क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में काम करने वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड रखा जाता है?
क्या मकान मालिक और दुकान मालिकों को अपने यहां काम करने वालों की सूचना पुलिस को देने की व्यवस्था वास्तव में लागू है?
अगर व्यवस्था है तो सुरेंद्र कोली का सत्यापन क्यों नहीं हुआ—और अगर हुआ था तो उसकी जानकारी सामने क्यों नहीं आई?
यही सवाल अब पुलिस प्रशासन से जवाब मांगते हैं।
संत बहुल्य भूपतवाला जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी पहचान की जांच जरूरी
भूपतवाला और सप्त सरोवर क्षेत्र हरिद्वार के महत्वपूर्ण धार्मिक क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु, संत, साधु और पर्यटक आते-जाते हैं।
ऐसे क्षेत्र में बाहर से आने वाले लोगों की पहचान और सत्यापन व्यवस्था केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ विषय है।
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि—
कितने लोग हरिद्वार में बिना स्थानीय सत्यापन के काम कर रहे हैं?
कितने सुरक्षा गार्डों की पृष्ठभूमि की जांच हुई है?
कितने चाय-खोखे, ढाबे और दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड पुलिस के पास है?
निठारी से हरिद्वार तक—करीब दो दशक की कहानी का दर्दनाक अंत
निठारी कांड ने सुरेंद्र कोली के परिवार को भी वर्षों तक प्रभावित किया।
परिवार के लोग लंबे समय तक उसे निर्दोष मानते रहे और न्याय की लड़ाई लड़ते रहे। उसकी मां कुंती देवी भी अपने बेटे को लेकर न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही थीं।
बाद में न्यायिक प्रक्रिया में कोली को निठारी से जुड़े सभी मामलों में बरी कर दिया गया।
लेकिन अदालत से बाहर आने के बाद उसकी जिंदगी कैसी रही?
एक ऐसा व्यक्ति जिसका नाम दो दशक तक देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में लिया जाता रहा—
वही व्यक्ति आखिर में—
सुरक्षा गार्ड बना,
छोटे-मोटे काम करता रहा,
हरिद्वार आया,
चाय की दुकान पर बैठा,
और फिर उसी चाय की दुकान में उसकी मौत हो गई।
यह घटनाक्रम अपने पीछे अनेक सवाल छोड़ गया है।
परिवार पीछे छूट गया—पत्नी और बच्चों पर क्या बीतेगी?
सुरेंद्र कोली के परिवार में पत्नी शांति देवी और बच्चे हैं। निठारी कांड के बाद परिवार पर सामाजिक और आर्थिक असर पड़ने की बातें लंबे समय से सामने आती रही हैं।
अब कोली की मौत के बाद परिवार के सामने एक और दुखद अध्याय खड़ा हो गया है।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है—
मौत का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस के सामने अब कई सवाल
सुरेंद्र कोली की मौत की जांच में पुलिस को कई बिंदुओं पर स्पष्टता लानी होगी—
वह हरिद्वार कब आया था?
कहां रह रहा था?
उसने अपना नाम क्यो बदला था?
बदला था तो क्यों?
सिडकुल/रोशनाबाद में उसने कब और किस कंपनी में काम किया?
क्या उसका पुलिस वेरिफिकेशन हुआ था?
क्या दुकान पर काम करने से पहले कोई पहचान-पत्र लिया गया था?
परिवार से घटना से पहले हुई कथित बातचीत क्या थी?
क्या फोन रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच होगी?
घटनास्थल पर कोई संघर्ष या अन्य संदिग्ध परिस्थिति के संकेत मिले या नहीं?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या कहती है?
और सबसे अहम—क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी या मौत की कोई दूसरी वजह भी हो सकती है?
जब तक पुलिस जांच और पोस्टमार्टम पूरा नहीं हो जाता, किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
निठारी का आरोपी नहीं—न्यायालय से बरी हुआ व्यक्ति था कोली
इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष भी जनता को समझना चाहिए।
सुरेंद्र कोली को नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निठारी से जुड़े उसके अंतिम लंबित मामले में भी बरी कर दिया गया था। अदालत ने उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और तत्काल रिहाई का आदेश दिया। 
इसलिए उसकी मौत की खबर लिखते समय उसे आज भी “निठारी हत्याकांड का दोषी” कहना न्यायिक स्थिति के विपरीत होगा।
उसका नाम निठारी कांड से जुड़ा रहा—लेकिन अदालतों के अंतिम फैसलों के बाद वह उन मामलों में दोषसिद्ध व्यक्ति नहीं था।
यही तथ्य इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा है।
हरिद्वार की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खुली किताब बन गई यह घटना
सुरेंद्र कोली की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की मौत की खबर नहीं है।
यह हरिद्वार की वेरिफिकेशन व्यवस्था, किरायेदार सत्यापन, कर्मचारी सत्यापन और औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़ा करती है।
यदि कोई व्यक्ति दूसरे शहर से आता है...
किसी कंपनी में काम करता है...
धार्मिक क्षेत्र में पहुंचता है...
दुकान पर काम करता है...
और लंबे समय तक स्थानीय लोगों के बीच रहता है...
तो क्या उसकी पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी संबंधित तंत्र तक पहुंचती है?
या फिर हमारी व्यवस्था किसी बड़ी घटना के बाद ही जागती है?
अब पुलिस को सिर्फ मौत की जांच नहीं, सत्यापन तंत्र की भी समीक्षा करनी चाहिए
सुरेंद्र कोली की मौत की निष्पक्ष जांच अपनी जगह जरूरी है।
लेकिन इसके साथ हरिद्वार पुलिस और प्रशासन को यह भी देखना चाहिए कि—
कितने बाहरी कर्मचारी बिना सत्यापन काम कर रहे हैं?
कितनी कंपनियां सुरक्षा गार्डों का सत्यापन किए बिना नियुक्ति कर रही हैं?
कितने दुकानदार अपने कर्मचारियों का रिकॉर्ड नहीं रखते?
कितने धार्मिक क्षेत्रों में अस्थायी रूप से काम करने वाले लोगों का पुलिस सत्यापन नहीं होता?
यदि इस घटना से इन सवालों का जवाब खोज लिया गया तो शायद एक दर्दनाक घटना से भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का रास्ता निकल सकता है।
करीब दो दशक बाद फिर चर्चा में निठारी—लेकिन इस बार सवाल कुछ और हैं
एक समय निठारी कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
फिर अदालतों में लंबी लड़ाई चली।
फिर एक-एक करके फैसले बदले।
और नवंबर 2025 में सुरेंद्र कोली के खिलाफ निठारी से जुड़ा अंतिम लंबित मामला भी खत्म हो गया।
अब सितंबर 2026 में हरिद्वार में उसकी मौत ने उसी कहानी को एक बार फिर सामने ला दिया है।
लेकिन इस बार सवाल सिर्फ निठारी के नहीं हैं।
सवाल है—हरिद्वार में उसकी पहचान कैसे छिपी रही?
सवाल है—सत्यापन व्यवस्था कहां थी?
सवाल है—मौत से पहले उसके साथ क्या हुआ?
और सबसे बड़ा सवाल—उसकी मौत का सच क्या है?
अब जवाब पोस्टमार्टम और पुलिस जांच से मिलेगा
सुरेंद्र कोली की मौत को लेकर अभी कई बातें सामने आ रही हैं, लेकिन आत्महत्या की अंतिम पुष्टि, मौत की वजह और परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है।
हरिद्वार अब सिर्फ यह जानना चाहता है—
“निठारी के उस नाम का हरिद्वार में आखिर हुआ क्या?”
और उससे भी बड़ा सवाल—
“अगर वह इतने समय से हरिद्वार में रह रहा था, तो हमारी सत्यापन व्यवस्था को उसकी पहचान कब और कैसे पता चली?”
— स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से हरिद्वार
    user_रामेश्वर गौड़ स्वतंत्र पत्रकार
    रामेश्वर गौड़ स्वतंत्र पत्रकार
    हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
  • हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में कल से धर्मगुरु सतपाल महाराज का दो दिवसीय जन्मोत्सव महोत्सव शुरू हो रहा है।इसके लिए निरंतर भक्तों का प्रेमनगर आश्रम पहुंचना जारी है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कल अनेक वीवीआईपी भी आश्रम पहुंचेंगे, जिसके कारण आश्रम के बाहर आज जाम के हालात बनते रहे। जिससे आवागमन बाधित होता रहा लोगों को काफी परेशानी हुई हालांकि प्रेमनगर आश्रम की ओर से निजी सुरक्षा कर्मी व्यवस्था बनाने के लिए लगाए गए हैं लेकिन उनसे व्यवस्था नहीं संभली और लोग उनसे उलझते रहे।
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    हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में कल से धर्मगुरु सतपाल महाराज का दो दिवसीय जन्मोत्सव महोत्सव शुरू हो रहा है।इसके लिए निरंतर भक्तों का प्रेमनगर आश्रम पहुंचना जारी है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कल अनेक वीवीआईपी भी आश्रम पहुंचेंगे, जिसके कारण आश्रम के बाहर आज जाम के हालात बनते रहे। जिससे आवागमन बाधित होता रहा लोगों को काफी परेशानी हुई हालांकि प्रेमनगर आश्रम की ओर से निजी सुरक्षा कर्मी व्यवस्था बनाने के लिए लगाए गए हैं लेकिन उनसे व्यवस्था नहीं संभली और लोग उनसे उलझते रहे।
    user_लोकल न्यूज़ हरिद्वार  शहर की खबर शहर को खबर
    लोकल न्यूज़ हरिद्वार शहर की खबर शहर को खबर
    Journalist हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    11 hrs ago
  • हरिद्वार ब्यूरो रिपोर्ट निठारी कांड से जुड़े मामलों में आरोपी रहे और बाद में सभी मामलों में अदालत में बरी हुए सुरेंद्र कोहली के शव का शनिवार को हरिद्वार जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम किया जाएगा।
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    हरिद्वार ब्यूरो रिपोर्ट निठारी कांड से जुड़े मामलों में आरोपी रहे और बाद में सभी मामलों में अदालत में बरी हुए सुरेंद्र कोहली के शव का शनिवार को हरिद्वार जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम किया जाएगा।
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Hardwar, Haridwar•
    12 hrs ago
  • hridwarहर की पौड़ी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट हर की पौड़ी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट
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    hridwarहर की पौड़ी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट
हर की पौड़ी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट
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    DIGITALभारत
    Photographer लक्सर, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    5 hrs ago
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