नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को दिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश पोरसा,,,, ,,,,,,,महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल, कौथर कला सहित कई गांवों में आयोजित हुए जागरूकता कार्यक्रम पोरसा,,,,,,,,,,महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को बेटियों के महत्व, उनकी शिक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की। यह जागरूकता कार्यक्रम संगीता थापक के मार्गदर्शन में ग्राम कौथर कला, कौथर खुर्द, गढ़िया पोरसा, मटियापुरा सहित अन्य स्थानों पर आयोजित किया गया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने ग्रामीणों के बीच बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और समाज में व्याप्त भेदभाव को दूर करने का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। ‘बेटी है तो कल है’ का दिया संदेश नुक्कड़ नाटक के दौरान बताया गया कि बेटी परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर है। बेटी है तो कल है। बेटियां केवल परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने वाली नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, खेल, विज्ञान, प्रशासन और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के दम पर समाज एवं देश का नाम रोशन कर रही हैं। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को समझाया गया कि बेटियों और बेटों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिस प्रकार बेटों को शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर दिए जाते हैं, उसी प्रकार बेटियों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना समाज की जिम्मेदारी है। शिक्षा से मजबूत होगा बेटियों का भविष्य जागरूकता कार्यक्रम में बताया गया कि बेटी की शिक्षा केवल एक व्यक्ति को शिक्षित करना नहीं, बल्कि पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को मजबूत बनाना है। शिक्षित बेटी अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझने के साथ-साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को बालिकाओं की शिक्षा को बीच में न रोकने, उन्हें विद्यालय भेजने तथा उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखने का संदेश दिया गया। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया गया। बेटियां दो परिवारों की बढ़ाती हैं शान कार्यक्रम में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि बेटियां दो परिवारों की लाज और सम्मान को आगे बढ़ाती हैं। बेटियां अपने संस्कार, शिक्षा और प्रतिभा से माता-पिता का गौरव बढ़ाती हैं तथा समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्रामीणों को बताया गया कि बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता को समाप्त करने की आवश्यकता है। उन्हें जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता तक हर स्तर पर समान अवसर मिलना चाहिए। ग्रामीणों ने लिया जागरूकता का संकल्प कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिए गए संदेश को गंभीरता से सुना और बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच रखने का संकल्प लिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं शिक्षकों ने भी ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने आसपास के परिवारों को बेटियों की शिक्षा एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। महिला एवं बाल विकास विभाग की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करना, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करना और समाज में लैंगिक भेदभाव को कम करना है। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों तक एक स्पष्ट संदेश पहुंचाया गया कि बेटी को बचाना ही नहीं, बल्कि उसे पढ़ाकर शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है,,,,,,
नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को दिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश पोरसा,,,, ,,,,,,,महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल, कौथर कला सहित कई गांवों में आयोजित हुए जागरूकता कार्यक्रम पोरसा,,,,,,,,,,महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को बेटियों के महत्व, उनकी शिक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की। यह जागरूकता कार्यक्रम संगीता थापक के मार्गदर्शन में ग्राम कौथर कला, कौथर खुर्द, गढ़िया पोरसा, मटियापुरा सहित अन्य स्थानों पर आयोजित किया गया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने ग्रामीणों के बीच बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और समाज में व्याप्त भेदभाव को दूर करने का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। ‘बेटी है तो कल है’ का दिया संदेश नुक्कड़ नाटक के दौरान बताया गया कि बेटी परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर है। बेटी है तो कल है। बेटियां केवल परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने वाली नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, खेल, विज्ञान, प्रशासन और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के दम पर समाज एवं देश का नाम रोशन कर रही हैं। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को समझाया गया कि बेटियों और बेटों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिस प्रकार बेटों को शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर दिए जाते हैं, उसी प्रकार बेटियों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना समाज की जिम्मेदारी है। शिक्षा से मजबूत होगा बेटियों का भविष्य जागरूकता कार्यक्रम में बताया गया कि बेटी की शिक्षा केवल एक व्यक्ति को शिक्षित करना नहीं, बल्कि पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को मजबूत बनाना है। शिक्षित बेटी अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझने के साथ-साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को बालिकाओं की शिक्षा को बीच में न रोकने, उन्हें विद्यालय भेजने तथा उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखने का संदेश दिया गया। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया गया। बेटियां दो परिवारों की बढ़ाती हैं शान कार्यक्रम में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि बेटियां दो परिवारों की लाज और सम्मान को आगे बढ़ाती हैं। बेटियां अपने संस्कार, शिक्षा और प्रतिभा से माता-पिता का गौरव बढ़ाती हैं तथा समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्रामीणों को बताया गया कि बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता को समाप्त करने की आवश्यकता है। उन्हें जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता तक हर स्तर पर समान अवसर मिलना चाहिए। ग्रामीणों ने लिया जागरूकता का संकल्प कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिए गए संदेश को गंभीरता से सुना और बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच रखने का संकल्प लिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं शिक्षकों ने भी ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने आसपास के परिवारों को बेटियों की शिक्षा एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। महिला एवं बाल विकास विभाग की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करना, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करना और समाज में लैंगिक भेदभाव को कम करना है। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों तक एक स्पष्ट संदेश पहुंचाया गया कि बेटी को बचाना ही नहीं, बल्कि उसे पढ़ाकर शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है,,,,,,
- शासकीय शिक्षक ने ₹4500 महीने में ‘ठेके’ पर दे रखा विद्यालय हेडमास्टर अमरलाल रावत पर गंभीर आरोप, जिला शिक्षा अधिकारी के औचक निरीक्षण में सामने आई लापरवाही कैलारस। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शासन द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कैलारस ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक विद्यालय पोखर का पूरा की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विद्यालय में पदस्थ हेडमास्टर अमरलाल रावत पर आरोप है कि उन्होंने अपने स्थान पर प्रीति रावत को कथित रूप से ₹4500 प्रतिमाह देकर विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंप रखी है। बताया जा रहा है कि हेडमास्टर अमरलाल रावत स्वयं विद्यालय में आकर उपस्थिति दर्ज कराते हैं और इसके बाद अपने अन्य कार्यों के लिए चले जाते हैं, जबकि विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने और स्कूल की व्यवस्था संभालने का काम प्रीति रावत द्वारा किया जाता है। स्थानीय स्तर पर यह व्यवस्था कथित तौर पर लंबे समय से चलने की बात सामने आ रही है। जिला शिक्षा अधिकारी के औचक निरीक्षण से खुली पोल! मामले की गंभीरता उस समय बढ़ गई जब कैलारस ब्लॉक के जिला शिक्षा अधिकारी इंदौलिया द्वारा शासकीय प्राथमिक विद्यालय पोखर का पूरा का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल सामने आए। आरोप है कि शासकीय शिक्षक द्वारा अपने स्थान पर निजी व्यक्ति से विद्यालय का संचालन करवाना शासन के नियमों और शिक्षा व्यवस्था की गंभीर अवहेलना है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की आवश्यकता बनती है। बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ का आरोप ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय विद्यालय में शिक्षक की नियमित उपस्थिति और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना शिक्षक की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि कोई शिक्षक अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति को मामूली राशि देकर विद्यालय में पढ़ाने के लिए रखता है, तो इससे सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस कथित व्यवस्था की लंबे समय से जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं थी तो विद्यालय की नियमित निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। जांच और कार्रवाई की मांग मामले में स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही यह भी जांच करने की मांग उठ रही है कि हेडमास्टर की विद्यालय में वास्तविक उपस्थिति कितनी रही, उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज समय और मौके की वास्तविक स्थिति में कितना अंतर है तथा कथित रूप से ₹4500 प्रतिमाह पर दूसरे व्यक्ति से विद्यालय में कार्य कराने का मामला सामने आया है गौर करने वाली बातें हैं की प्रीति रावत ना तो अतिथि शिक्षक है और ना ही कोई विद्यालय से विद्यालय संबंधित है प्रीति रावत का कहना है कि मुझे तो 4: 500 रुपए महीने देती है स्कूल में पढ़ने के लिए कहते हैं कि मेरी जगह तुम पढ़ाओ तुम्हें 4500 हर महीने दूंगा अब देखना होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी के औचक निरीक्षण के बाद शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।1
- 🩺 GBS ने छीनी थी चलने-फिरने की ताकत, फिजियोथेरेपी ने लौटाया आत्मविश्वास! 💪 मुरैना जिला चिकित्सालय की फिजियोथेरेपी ने सबलगढ़ निवासी आदित्य बंसल की जिंदगी में फिर से उम्मीद जगाई। गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के कारण आदित्य के हाथ-पैरों में इतनी कमजोरी आ गई थी कि वे चलना-फिरना, उठना-बैठना, सामान पकड़ना और यहां तक कि खुद भोजन करना भी नहीं कर पा रहे थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। जिला चिकित्सालय मुरैना के फिजियोथेरेपी विभाग में नियमित उपचार, लगातार अभ्यास और चिकित्सकीय निगरानी के बाद उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ। आज आदित्य करीब 90 प्रतिशत तक स्वस्थ हो चुके हैं। वे बिना सहारे चल-फिर सकते हैं और अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में सक्षम हैं। 🙏 डॉ. अनिल इंदौलिया एवं डॉ. विकास सविता के मार्गदर्शन में हुए उपचार ने आदित्य को सिर्फ शारीरिक ताकत ही नहीं दी, बल्कि खोया हुआ आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी वापस दिलाई। 🎥 देखिए आदित्य की संघर्ष से स्वस्थ होने तक की पूरी कहानी वायरल वीडियो में।2
- 48 घंटे में हुई पार्षदों की सुनवाई, 10 सूत्रीय मांगों पर आश्वासन के बाद धरना समाप्त अम्बाह। नगर पालिका में पार्षदों द्वारा विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन आखिरकार 48 घंटे बाद समाप्त हो गया। पार्षदों के धरने को अम्बाह 48 घंटे में हुई पार्षदों की सुनवाई, 10 सूत्रीय मांगों पर आश्वासन के बाद धरना समाप्त अम्बाह। नगर पालिका में पार्षदों द्वारा विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन आखिरकार 48 घंटे बाद समाप्त हो गया। पार्षदों के धरने को अम्बाह विधायक देवेंद्र रामनारायण सखवार ने समर्थन दिया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। विधायक के समर्थन के कुछ घंटों बाद एसडीएम प्रतिभा शर्मा और नगर पालिका के सीएमओ शारिव कौसर एक साथ धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने पार्षदों एवं आम जनता की समस्याएं सुनीं और पार्षदों द्वारा रखी गई मांगों को समझा। इस दौरान अधिकारियों ने पार्षदों को उनकी 10 सूत्रीय मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि मांगों से जुड़े कार्यों को जल्द पूरा किया जाएगा और समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद पार्षदों ने अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया। पार्षदों का कहना है कि उनकी मांगों को प्रशासन द्वारा गंभीरता से सुना गया है और अब उन्हें उम्मीद है कि दिए गए आश्वासन के अनुसार सभी कार्य समय पर पूरे किए जाएंगे। इस तरह करीब 48 घंटे तक चले पार्षदों के धरने का समाधान बातचीत और आश्वासन के बाद हुआ।1
- नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को दिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश 📍 पोरसा | कौथर कला सहित कई गांवों में जागरूकता कार्यक्रम 🎭 महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल पर ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को बेटियों के महत्व, शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम संगीता थापक के मार्गदर्शन में ग्राम कौथर कला, कौथर खुर्द, गढ़िया पोरसा, मटियापुरा सहित अन्य स्थानों पर आयोजित किए गए। 🎭 नुक्कड़ नाटक के जरिए कलाकारों ने बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने, बेटा-बेटी में भेदभाव खत्म करने और बालिकाओं को शिक्षा के समान अवसर देने का संदेश दिया। 📚 ‘बेटी है तो कल है’ ग्रामीणों को बताया गया कि शिक्षित बेटी न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बालिकाओं की शिक्षा बीच में न रोकने, उन्हें विद्यालय भेजने, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का ध्यान रखने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने की अपील की गई। 👧 बेटियों को बोझ नहीं, समाज की ताकत समझें। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान को बढ़ावा देने का संकल्प भी लिया। 🎥 देखिए कैसे नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों तक पहुंचाया गया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश।3
- अम्बाह में पत्नी की गोली मारकर हत्या का मामला, फौजी पति समेत तीन आरोपी गिरफ्तार मुरैना/ अम्बाह थाना क्षेत्र में पत्नी की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी फौजी पति समेत तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी सोहन सिकरवार के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद की है। पुलिस के अनुसार, 5 अगस्त को ग्राम करके कापुरा मौजा बड़ी कोथर निवासी सुरेश सिंह तोमर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी रानी सिकरवार की उसके पति सोहन सिकरवार ने अपने माता-पिता के उकसावे में आकर लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारकर हत्या कर दी। रिपोर्ट पर थाना अम्बाह में अपराध क्रमांक 361/26 के तहत धारा 103(1), 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक मुरैना धर्मराज मीना के निर्देश पर आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियार की बरामदगी के लिए टीम गठित की गई। 7 अगस्त को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने मामले में वांछित तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी सोहन सिकरवार ने हत्या करना स्वीकार किया। उसके कब्जे से करीब ₹40 हजार कीमत की लाइसेंसी पिस्टल बरामद की गई। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। अम्बाह में पत्नी की गोली मारकर हत्या का मामला, फौजी पति समेत तीन आरोपी गिरफ्तार मुरैना/ अम्बाह थाना क्षेत्र में पत्नी की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी फौजी पति समेत तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी सोहन सिकरवार के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद की है। पुलिस के अनुसार, 5 अगस्त को ग्राम करके कापुरा मौजा बड़ी कोथर निवासी सुरेश सिंह तोमर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी रानी सिकरवार की उसके पति सोहन सिकरवार ने अपने माता-पिता के उकसावे में आकर लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारकर हत्या कर दी। रिपोर्ट पर थाना अम्बाह में अपराध क्रमांक 361/26 के तहत धारा 103(1), 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक मुरैना धर्मराज मीना के निर्देश पर आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियार की बरामदगी के लिए टीम गठित की गई। 7 अगस्त को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने मामले में वांछित तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी सोहन सिकरवार ने हत्या करना स्वीकार किया। उसके कब्जे से करीब ₹40 हजार कीमत की लाइसेंसी पिस्टल बरामद की गई। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया1