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मजबूरी भी और मशहूरी भी कादीपुर क्षेत्र के वायरल कलाकारों की आपबीती चौपालों और खेतों तक मोबाइल कैमरा व सोशल मीडिया का प्रभाव दिख रहा है। ग्रामीण महिलाएं अब सोशल मीडिया पर रील बनाकर अपनी पहचान और आर्थिक आत्मनिर्भरता तलाश रही हैं, जो पहले घर और खेत तक सीमित थीं। इन दिनों गांवों में रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। हर दूसरे दिन सोशल मीडिया पर नए कॉमेडी वीडियो, डांस या व्यंग्य से भरे कंटेंट देखने को मिल जाते हैं। कुछ इसे अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मानते हैं, तो कुछ इसे आर्थिक मजबूरी का जरिया बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर रील बनाने वाली खुश्बू माही ने बताया कि उनके लिए रील बनाना केवल शौक नहीं, बल्कि एक मजबूरी भी है। वह घर की जिम्मेदारियों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए वीडियो बनाती हैं। उनके अनुसार, वीडियो वायरल होने पर अच्छी कमाई की संभावना रहती है। लोकगायिका ज्योति शैलेश का मानना है कि सोशल मीडिया की भीड़ में अलग पहचान बनाने के लिए कुछ अनूठा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अब साधारण वीडियो से काम नहीं चलता; वायरल होने के लिए लीक से हटकर सामग्री बनानी पड़ती है। हालांकि, गांव के बुजुर्ग इस नए चलन को व्यंग्यात्मक दृष्टि से भी देखते हैं। उनका कहना है कि पहले गांवों में लोकगीत और चौपाल की परंपरा थी, लेकिन अब हर हाथ में मोबाइल और हर आंगन में "कैमरा-एक्शन" का माहौल बन गया है। यह सच है कि सोशल मीडिया ने गांव की महिलाओं को एक नया मंच प्रदान किया है। यह कुछ के लिए मनोरंजन का साधन है, तो कुछ के लिए कमाई और पहचान बनाने का एक नया मार्ग।

17 hrs ago
user_ई-रेडियो अवध
ई-रेडियो अवध
Local News Reporter कादीपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
17 hrs ago

मजबूरी भी और मशहूरी भी कादीपुर क्षेत्र के वायरल कलाकारों की आपबीती चौपालों और खेतों तक मोबाइल कैमरा व सोशल मीडिया का प्रभाव दिख रहा है। ग्रामीण महिलाएं अब सोशल मीडिया पर रील बनाकर अपनी पहचान और आर्थिक आत्मनिर्भरता तलाश रही हैं, जो पहले घर और खेत तक सीमित थीं। इन दिनों गांवों में रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। हर दूसरे दिन सोशल मीडिया पर नए कॉमेडी वीडियो, डांस या व्यंग्य से भरे कंटेंट देखने को मिल जाते हैं। कुछ इसे अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मानते हैं, तो कुछ इसे आर्थिक मजबूरी का जरिया बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर रील बनाने वाली खुश्बू माही ने बताया कि उनके लिए रील बनाना केवल शौक नहीं, बल्कि एक मजबूरी भी है। वह घर की जिम्मेदारियों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए वीडियो बनाती हैं। उनके अनुसार, वीडियो वायरल होने पर अच्छी कमाई की संभावना रहती है। लोकगायिका ज्योति शैलेश का मानना है कि सोशल मीडिया की भीड़ में अलग पहचान बनाने के लिए कुछ अनूठा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अब साधारण वीडियो से काम नहीं चलता; वायरल होने के लिए लीक से हटकर सामग्री बनानी पड़ती है। हालांकि, गांव के बुजुर्ग इस नए चलन को व्यंग्यात्मक दृष्टि से भी देखते हैं। उनका कहना है कि पहले गांवों में लोकगीत और चौपाल की परंपरा थी, लेकिन अब हर हाथ में मोबाइल और हर आंगन में "कैमरा-एक्शन" का माहौल बन गया है। यह सच है कि सोशल मीडिया ने गांव की महिलाओं को एक नया मंच प्रदान किया है। यह कुछ के लिए मनोरंजन का साधन है, तो कुछ के लिए कमाई और पहचान बनाने का एक नया मार्ग।

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  • चौपालों और खेतों तक मोबाइल कैमरा व सोशल मीडिया का प्रभाव दिख रहा है। ग्रामीण महिलाएं अब सोशल मीडिया पर रील बनाकर अपनी पहचान और आर्थिक आत्मनिर्भरता तलाश रही हैं, जो पहले घर और खेत तक सीमित थीं। इन दिनों गांवों में रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। हर दूसरे दिन सोशल मीडिया पर नए कॉमेडी वीडियो, डांस या व्यंग्य से भरे कंटेंट देखने को मिल जाते हैं। कुछ इसे अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मानते हैं, तो कुछ इसे आर्थिक मजबूरी का जरिया बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर रील बनाने वाली खुश्बू माही ने बताया कि उनके लिए रील बनाना केवल शौक नहीं, बल्कि एक मजबूरी भी है। वह घर की जिम्मेदारियों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए वीडियो बनाती हैं। उनके अनुसार, वीडियो वायरल होने पर अच्छी कमाई की संभावना रहती है। लोकगायिका ज्योति शैलेश का मानना है कि सोशल मीडिया की भीड़ में अलग पहचान बनाने के लिए कुछ अनूठा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अब साधारण वीडियो से काम नहीं चलता; वायरल होने के लिए लीक से हटकर सामग्री बनानी पड़ती है। हालांकि, गांव के बुजुर्ग इस नए चलन को व्यंग्यात्मक दृष्टि से भी देखते हैं। उनका कहना है कि पहले गांवों में लोकगीत और चौपाल की परंपरा थी, लेकिन अब हर हाथ में मोबाइल और हर आंगन में "कैमरा-एक्शन" का माहौल बन गया है। यह सच है कि सोशल मीडिया ने गांव की महिलाओं को एक नया मंच प्रदान किया है। यह कुछ के लिए मनोरंजन का साधन है, तो कुछ के लिए कमाई और पहचान बनाने का एक नया मार्ग।
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    चौपालों और खेतों तक मोबाइल कैमरा व सोशल मीडिया का प्रभाव दिख रहा है। ग्रामीण महिलाएं अब सोशल मीडिया पर रील बनाकर अपनी पहचान और आर्थिक आत्मनिर्भरता तलाश रही हैं, जो पहले घर और खेत तक सीमित थीं।
इन दिनों गांवों में रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। हर दूसरे दिन सोशल मीडिया पर नए कॉमेडी वीडियो, डांस या व्यंग्य से भरे कंटेंट देखने को मिल जाते हैं। कुछ इसे अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मानते हैं, तो कुछ इसे आर्थिक मजबूरी का जरिया बता रहे हैं।
सोशल मीडिया पर रील बनाने वाली खुश्बू माही ने बताया कि उनके लिए रील बनाना केवल शौक नहीं, बल्कि एक मजबूरी भी है। वह घर की जिम्मेदारियों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए वीडियो बनाती हैं। उनके अनुसार, वीडियो वायरल होने पर अच्छी कमाई की संभावना रहती है।
लोकगायिका ज्योति शैलेश का मानना है कि सोशल मीडिया की भीड़ में अलग पहचान बनाने के लिए कुछ अनूठा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अब साधारण वीडियो से काम नहीं चलता; वायरल होने के लिए लीक से हटकर सामग्री बनानी पड़ती है।
हालांकि, गांव के बुजुर्ग इस नए चलन को व्यंग्यात्मक दृष्टि से भी देखते हैं। उनका कहना है कि पहले गांवों में लोकगीत और चौपाल की परंपरा थी, लेकिन अब हर हाथ में मोबाइल और हर आंगन में "कैमरा-एक्शन" का माहौल बन गया है।
यह सच है कि सोशल मीडिया ने गांव की महिलाओं को एक नया मंच प्रदान किया है। यह कुछ के लिए मनोरंजन का साधन है, तो कुछ के लिए कमाई और पहचान बनाने का एक नया मार्ग।
    user_ई-रेडियो अवध
    ई-रेडियो अवध
    Local News Reporter कादीपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • सुलतानपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पटीदारों के बीच चल रहा पुराना विवाद अचानक हिंसक हो गया। दोनों पक्षों के बीच हुई फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और आरोपी की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। सुलतानपुर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के जनऊपुर गांव में गुरुवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब पटीदारों के बीच विवाद ने खूनी रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि गांव के होमगार्ड वीरेंद्र प्रताप सोनकर और रमेश सोनकर के परिवारों के बीच लंबे समय से आपसी विवाद चल रहा था। जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह वीरेंद्र प्रताप के छोटे बेटे और रमेश सोनकर के परिवार के लोगों के बीच कहासुनी हो गई थी। हालांकि उस समय गांव के लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों में समझौता करा दिया था और मामले की सूचना पुलिस तक नहीं पहुंची थी। लेकिन शाम होते-होते विवाद एक बार फिर भड़क गया। आरोप है कि रमेश सोनकर के परिवार की महिलाएं और उनका बेटा भोलू सोनकर वीरेंद्र प्रताप के घर पहुंच गए। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ गई और मामला इतना बढ़ गया कि भोलू सोनकर ने कथित तौर पर करीब पांच राउंड फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में मोहित सोनकर नाम के युवक के सीने में दो गोलियां लग गईं। गंभीर हालत में परिजन उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल बन गया। वहीं फायरिंग की इस घटना में मंगल सोनकर भी घायल हो गए। उन्हें गोली लगने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और उन्हें आगे की जांच के लिए सीटी स्कैन कराया जा रहा है। घटना के दौरान होमगार्ड वीरेंद्र प्रताप को भी मामूली चोटें आई हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और पीआरवी टीम मौके पर पहुंच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। सुलतानपुर की पुलिस अधीक्षक चारू निगम भी जिला अस्पताल पहुंचीं और घायलों का हालचाल लिया। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली और पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी भोलू सोनकर की गिरफ्तारी के लिए एसओजी और स्थानीय पुलिस की टीमों का गठन कर दिया गया है। आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और मामले में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और गांव में एहतियातन पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति दोबारा न पैदा हो।
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    सुलतानपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पटीदारों के बीच चल रहा पुराना विवाद अचानक हिंसक हो गया। दोनों पक्षों के बीच हुई फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और आरोपी की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।
सुलतानपुर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के जनऊपुर गांव में गुरुवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब पटीदारों के बीच विवाद ने खूनी रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि गांव के होमगार्ड वीरेंद्र प्रताप सोनकर और रमेश सोनकर के परिवारों के बीच लंबे समय से आपसी विवाद चल रहा था।
जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह वीरेंद्र प्रताप के छोटे बेटे और रमेश सोनकर के परिवार के लोगों के बीच कहासुनी हो गई थी। हालांकि उस समय गांव के लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों में समझौता करा दिया था और मामले की सूचना पुलिस तक नहीं पहुंची थी।
लेकिन शाम होते-होते विवाद एक बार फिर भड़क गया। आरोप है कि रमेश सोनकर के परिवार की महिलाएं और उनका बेटा भोलू सोनकर वीरेंद्र प्रताप के घर पहुंच गए। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ गई और मामला इतना बढ़ गया कि भोलू सोनकर ने कथित तौर पर करीब पांच राउंड फायरिंग कर दी।
इस फायरिंग में मोहित सोनकर नाम के युवक के सीने में दो गोलियां लग गईं। गंभीर हालत में परिजन उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल बन गया।
वहीं फायरिंग की इस घटना में मंगल सोनकर भी घायल हो गए। उन्हें गोली लगने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और उन्हें आगे की जांच के लिए सीटी स्कैन कराया जा रहा है। घटना के दौरान होमगार्ड वीरेंद्र प्रताप को भी मामूली चोटें आई हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और पीआरवी टीम मौके पर पहुंच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। सुलतानपुर की पुलिस अधीक्षक चारू निगम भी जिला अस्पताल पहुंचीं और घायलों का हालचाल लिया। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली और पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी भोलू सोनकर की गिरफ्तारी के लिए एसओजी और स्थानीय पुलिस की टीमों का गठन कर दिया गया है। आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और मामले में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और गांव में एहतियातन पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति दोबारा न पैदा हो।
    user_जनता की आवाज
    जनता की आवाज
    Voice of people लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के बारे में बताया गया
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    प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के बारे में बताया गया
    user_Kushbhawanpur_voice
    Kushbhawanpur_voice
    Local News Reporter मोतीगरपुर•
    14 hrs ago
  • लम्भुआ (सुल्तानपुर) फूलों की होली के पावन अवसर पर क्षेत्र के प्रसिद्ध बाबा जनवारी नाथ धाम में आस्था, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर में फाग गायक मंडली द्वारा पारंपरिक फाग गीतों की मधुर प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है।फाग गायक मंडली की पूरी टोली मंदिर के गर्भगृह के समीप एकत्र होकर पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ फाग गीत गा रही है। ढोलक, मंजीरा और झांझ की मधुर धुनों के बीच गूंजते फाग गीतों से मंदिर परिसर भक्ति रस में सराबोर हो गया। गायक मंडली ने कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले बाबा जनवारी नाथ को प्रणाम कर उनके आशीर्वाद के साथ की, जिसके बाद पारंपरिक फाग गीतों का सिलसिला शुरू हुआ।फाग गीतों में भगवान शिव, माता पार्वती और होली की लोक परंपराओं का सुंदर वर्णन सुनने को मिल रहा है। जैसे ही गर्भगृह के समीप फाग के सुर गूंजे, वहां मौजूद श्रद्धालु भी भक्ति और उल्लास में झूम उठे। मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। भक्तों ने बाबा के दर्शन कर फाग गीतों का आनंद लिया।पूरे वातावरण में ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो भक्ति, संस्कृति और लोक परंपरा एक साथ जीवंत हो उठी हो। बाबा जनवारी नाथ धाम में होली के अवसर पर फाग गाने की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो हर वर्ष भक्तों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है। फिलहाल मंदिर परिसर में फाग गीतों का दौर जारी है। वहीं सायंकाल से यहां फूलों की होली का भव्य आयोजन भी होना है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
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    लम्भुआ (सुल्तानपुर)
फूलों की होली के पावन अवसर पर क्षेत्र के प्रसिद्ध बाबा जनवारी नाथ धाम में आस्था, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर में फाग गायक मंडली द्वारा पारंपरिक फाग गीतों की मधुर प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है।फाग गायक मंडली की पूरी टोली मंदिर के गर्भगृह के समीप एकत्र होकर पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ फाग गीत गा रही है। ढोलक, मंजीरा और झांझ की मधुर धुनों के बीच गूंजते फाग गीतों से मंदिर परिसर भक्ति रस में सराबोर हो गया। गायक मंडली ने कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले बाबा जनवारी नाथ को प्रणाम कर उनके आशीर्वाद के साथ की, जिसके बाद पारंपरिक फाग गीतों का सिलसिला शुरू हुआ।फाग गीतों में भगवान शिव, माता पार्वती और होली की लोक परंपराओं का सुंदर वर्णन सुनने को मिल रहा है। जैसे ही गर्भगृह के समीप फाग के सुर गूंजे, वहां मौजूद श्रद्धालु भी भक्ति और उल्लास में झूम उठे। मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। भक्तों ने बाबा के दर्शन कर फाग गीतों का आनंद लिया।पूरे वातावरण में ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो भक्ति, संस्कृति और लोक परंपरा एक साथ जीवंत हो उठी हो। बाबा जनवारी नाथ धाम में होली के अवसर पर फाग गाने की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो हर वर्ष भक्तों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।
फिलहाल मंदिर परिसर में फाग गीतों का दौर जारी है। वहीं सायंकाल से यहां फूलों की होली का भव्य आयोजन भी होना है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
    user_जितेन्द्र श्रीवास्तव
    जितेन्द्र श्रीवास्तव
    Local News Reporter लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • Post by S S
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    Post by S S
    user_S S
    S S
    news लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • Post by पंडित विनोद द्विवेदी बाबा
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    Post by पंडित विनोद द्विवेदी बाबा
    user_पंडित विनोद द्विवेदी बाबा
    पंडित विनोद द्विवेदी बाबा
    Farmer जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • सुलतानपुर जिले के लंभुआ कस्बे से पवित्र रमजान महीने में आपसी भाईचारे और सौहार्द की एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। यहां अंजुमन गुलशने मदीना के आयोजक खुर्शीद अहमद फारूकी ने अपने आवास पर एक अज़ीम-ओ-शान रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में रोजेदारों और गणमान्य लोगों ने शिरकत की। रमजान के इस पाक महीने में आयोजित इस इफ्तार कार्यक्रम में लंभुआ और आसपास के क्षेत्रों से आए रोजेदारों ने एक साथ बैठकर रोजा खोला। जैसे ही मगरिब की अजान हुई, सभी लोगों ने खजूर और पानी के साथ रोजा इफ्तार किया। इस दौरान पूरे माहौल में भाईचारे, एकता और धार्मिक आस्था की झलक साफ दिखाई दी। इफ्तार के बाद विशेष दुआ का आयोजन भी किया गया। रोजेदारों ने खुदा की बारगाह में हाथ उठाकर देश और प्रदेश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। साथ ही समाज में प्रेम, शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की गई। इस मौके पर क्षेत्र की कई गणमान्य हस्तियां भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से गुलाम दस्तगीर कादरी, सिराजुद्दीन सिद्दीकी, आलम इदरीसी, गुलाम गौस फारुकी, जाविद अंसारी, फारूक अहमद, सद्दाम हुसैन, फिरोज अहमद फारुकी, इमरान फारूकी, अली अशरफ, बेलाल फारूकी, असगर अली सिद्दीकी, राशिद अली इदरीस, जितेंद्र कुमार समेत कई सम्मानित लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के आयोजक खुर्शीद अहमद फारूकी ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए उनका दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना आपसी भाईचारे, सब्र और इबादत का महीना होता है। ऐसे आयोजनों से समाज में प्रेम, एकता और सौहार्द की भावना मजबूत होती है और लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं। लंभुआ कस्बे में आयोजित इस इफ्तार पार्टी को लोगों ने साम्प्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं और लोगों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं।
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    सुलतानपुर जिले के लंभुआ कस्बे से पवित्र रमजान महीने में आपसी भाईचारे और सौहार्द की एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। यहां अंजुमन गुलशने मदीना के आयोजक खुर्शीद अहमद फारूकी ने अपने आवास पर एक अज़ीम-ओ-शान रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में रोजेदारों और गणमान्य लोगों ने शिरकत की।
रमजान के इस पाक महीने में आयोजित इस इफ्तार कार्यक्रम में लंभुआ और आसपास के क्षेत्रों से आए रोजेदारों ने एक साथ बैठकर रोजा खोला। जैसे ही मगरिब की अजान हुई, सभी लोगों ने खजूर और पानी के साथ रोजा इफ्तार किया। इस दौरान पूरे माहौल में भाईचारे, एकता और धार्मिक आस्था की झलक साफ दिखाई दी।
इफ्तार के बाद विशेष दुआ का आयोजन भी किया गया। रोजेदारों ने खुदा की बारगाह में हाथ उठाकर देश और प्रदेश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। साथ ही समाज में प्रेम, शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की गई।
इस मौके पर क्षेत्र की कई गणमान्य हस्तियां भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से गुलाम दस्तगीर कादरी, सिराजुद्दीन सिद्दीकी, आलम इदरीसी, गुलाम गौस फारुकी, जाविद अंसारी, फारूक अहमद, सद्दाम हुसैन, फिरोज अहमद फारुकी, इमरान फारूकी, अली अशरफ, बेलाल फारूकी, असगर अली सिद्दीकी, राशिद अली इदरीस, जितेंद्र कुमार समेत कई सम्मानित लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम के आयोजक खुर्शीद अहमद फारूकी ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए उनका दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना आपसी भाईचारे, सब्र और इबादत का महीना होता है। ऐसे आयोजनों से समाज में प्रेम, एकता और सौहार्द की भावना मजबूत होती है और लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं।
लंभुआ कस्बे में आयोजित इस इफ्तार पार्टी को लोगों ने साम्प्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं और लोगों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं।
    user_जनता की आवाज
    जनता की आवाज
    Voice of people लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
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