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ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मूर्ति के पास चलती कार में लगी अचानक आग, मचा हड़कंप ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक मूर्ति के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क पर चलती एक कार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते कार से धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं। गनीमत रही कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते कार रोककर बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

3 hrs ago
user_Jyoti Sharma
Jyoti Sharma
Journalist रोहिणी, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दिल्ली•
3 hrs ago

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मूर्ति के पास चलती कार में लगी अचानक आग, मचा हड़कंप ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक मूर्ति के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क पर चलती एक कार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते कार से धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं। गनीमत रही कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते कार रोककर बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

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  • Post by BCHANDEL
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    Post by BCHANDEL
    user_BCHANDEL
    BCHANDEL
    Social worker पंजाबी बाग, पश्चिम दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
  • ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक मूर्ति के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क पर चलती एक कार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते कार से धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं। गनीमत रही कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते कार रोककर बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
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    ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक मूर्ति के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क पर चलती एक कार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते कार से धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं। गनीमत रही कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते कार रोककर बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
    user_Jyoti Sharma
    Jyoti Sharma
    Journalist रोहिणी, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • बस्ती: महुआ डाबर की राख से जी उठा 1857 का इतिहास। इतिहास के पन्नों में दफन हो चुके 1857 के उस खौफनाक मंजर को, जहाँ अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए पूरे के पूरे महुआ डाबर गाँव को 'गैर-चिरागी' घोषित कर मिट्टी में मिला दिया था, आज एक संग्रहालय के जरिए नई पहचान मिल रही है। यह खंडहर मात्र ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस का गवाह है जिसने कभी ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी। क्रांति की वह चिंगारी: जब मनोरमा का तट बना गवाह 10 जून, 1857 को शहीद पिरई खां के नेतृत्व में स्थानीय क्रांतिकारियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 6 अंग्रेज अफसरों को मनोरमा नदी के तट पर मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना से बौखलाए ब्रिटिश कलेक्टर विलियम पेपे ने बदले की आग में पूरे गाँव को 'गैर-चिरागी' (बिना दीपक वाला) घोषित कर दिया। अंग्रेजों ने न केवल घरों को जलाया और खेती नष्ट की, बल्कि हजारों निर्दोषों का कत्लेआम कर इसे 'जलियांवाला बाग' जैसी वीभत्स त्रासदी में बदल दिया। महुआ डाबर म्यूज़ियम: राष्ट्रवाद की जीवंत पाठशाला वर्ष 1999 में स्थापित यह संग्रहालय आज उन 5000 शहीदों की याद दिलाता है जिन्हें दुनिया भुला चुकी थी। यहाँ सुरक्षित अवशेष आज भी अंग्रेजों की बर्बरता की गवाही देते हैं: यहाँ मौजूद दुर्लभ दस्तावेज़ ब्रिटिश हुकूमत के वे असली फरमान हैं जिनमें गाँव को नेस्तनाबूद करने का काला आदेश दर्ज है। शहीदों की स्मृतियां: क्रांतिकारी पिरई खां और उनके साथियों के पारंपरिक हथियार जैसे किर्च, भाला और ढाल आज भी यहाँ सुरक्षित हैं। स्थापत्य के अवशेष: खंडहरों में बची लखौरी ईंटें और मस्जिद के अवशेष उस समृद्ध समाज की याद दिलाते हैं जिसे मिटाने की कोशिश की गई। इस ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने का श्रेय महुआ डाबर म्यूज़ियम के निदेशक डॉ. शाह आलम राना को जाता है। डॉ. राना ने अपना पूरा जीवन गुमनाम शहीदों को हक दिलाने और उनके इतिहास को खोजने में समर्पित कर दिया है। अन्तर्राष्ट्रीय पहचान: डॉ. राना के इसी समर्पण को देखते हुए अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने उन्हें 'D.Litt' की मानद उपाधि से नवाजा है।इतिहास के प्रति उनके जुनून के कारण जनमानस ने उन्हें 'जिंदा शहीद' के खिताब से सम्मानित किया है। सुनील दूबे की रिपोर्ट
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    बस्ती:
महुआ डाबर की राख से जी उठा 1857 का इतिहास।
इतिहास के पन्नों में दफन हो चुके 1857 के उस खौफनाक मंजर को, जहाँ अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए पूरे के पूरे महुआ डाबर गाँव को 'गैर-चिरागी' घोषित कर मिट्टी में मिला दिया था, आज एक संग्रहालय के जरिए नई पहचान मिल रही है। यह खंडहर मात्र ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस का गवाह है जिसने कभी ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी।
क्रांति की वह चिंगारी: जब मनोरमा का तट बना गवाह
10 जून, 1857 को शहीद पिरई खां के नेतृत्व में स्थानीय क्रांतिकारियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 6 अंग्रेज अफसरों को मनोरमा नदी के तट पर मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना से बौखलाए ब्रिटिश कलेक्टर विलियम पेपे ने बदले की आग में पूरे गाँव को 'गैर-चिरागी' (बिना दीपक वाला) घोषित कर दिया। अंग्रेजों ने न केवल घरों को जलाया और खेती नष्ट की, बल्कि हजारों निर्दोषों का कत्लेआम कर इसे 'जलियांवाला बाग' जैसी वीभत्स त्रासदी में बदल दिया।
महुआ डाबर म्यूज़ियम: राष्ट्रवाद की जीवंत पाठशाला
वर्ष 1999 में स्थापित यह संग्रहालय आज उन 5000 शहीदों की याद दिलाता है जिन्हें दुनिया भुला चुकी थी। यहाँ सुरक्षित अवशेष आज भी अंग्रेजों की बर्बरता की गवाही देते हैं:
यहाँ मौजूद दुर्लभ दस्तावेज़ ब्रिटिश हुकूमत के वे असली फरमान हैं जिनमें गाँव को नेस्तनाबूद करने का काला आदेश दर्ज है।
शहीदों की स्मृतियां: क्रांतिकारी पिरई खां और उनके साथियों के पारंपरिक हथियार जैसे किर्च, भाला और ढाल आज भी यहाँ सुरक्षित हैं।
स्थापत्य के अवशेष: खंडहरों में बची लखौरी ईंटें और मस्जिद के अवशेष उस समृद्ध समाज की याद दिलाते हैं जिसे मिटाने की कोशिश की गई।
इस ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने का श्रेय महुआ डाबर म्यूज़ियम के निदेशक डॉ. शाह आलम राना को जाता है। डॉ. राना ने अपना पूरा जीवन गुमनाम शहीदों को हक दिलाने और उनके इतिहास को खोजने में समर्पित कर दिया है।
अन्तर्राष्ट्रीय पहचान: डॉ. राना के इसी समर्पण को देखते हुए अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने उन्हें 'D.Litt' की मानद उपाधि से नवाजा है।इतिहास के प्रति उनके जुनून के कारण जनमानस ने उन्हें 'जिंदा शहीद' के खिताब से सम्मानित किया है। 
सुनील दूबे की रिपोर्ट
    user_AM NEWS NATIONAL
    AM NEWS NATIONAL
    Media company कंझावला, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • कटरा माता वैष्णो देवी भवन पर हुई आज बर्फबारी से सुंदरता देखते बन रही थी और वहां आए हुए सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया प्रेम से बोलो जय माता दी
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    कटरा माता वैष्णो देवी भवन पर हुई आज बर्फबारी से सुंदरता देखते बन रही थी और वहां आए हुए सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया प्रेम से बोलो जय माता दी
    user_BHARAT TODAY NEWS
    BHARAT TODAY NEWS
    Media house Saraswati Vihar, North West Delhi•
    6 hrs ago
  • #4yearlost #4yearlostbookpublishing #4yearlostartandcraftgalary #4yearlostproduction #authorsujeet #sujeetsaras #saras #sujeet
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    #4yearlost #4yearlostbookpublishing #4yearlostartandcraftgalary #4yearlostproduction #authorsujeet #sujeetsaras #saras #sujeet
    user_4 YEAR LOST
    4 YEAR LOST
    Kanjhawala, North West Delhi•
    7 hrs ago
  • Post by Jaysingh yadav
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    Post by Jaysingh yadav
    user_Jaysingh yadav
    Jaysingh yadav
    Delhi•
    12 hrs ago
  • RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जनजाति संवाद कार्यक्रम में कहा, "...आज हम जिसे हिन्दू धर्म कहते हैं वो शुरू कैसे हुआ? हिन्दू नाम बहुत बाद में आया, धर्म सनातन है। सनातन धर्म भी कैसे आया? उसका मूल जंगल और खेती में ही मिलता है। हमारे यहां जिनको आदिवासी कहा जाता है वो हमारे धर्म संस्कृति का मूल हैं... देखिए राजपथ न्यूज़ पर....
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    RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जनजाति संवाद कार्यक्रम में कहा, "...आज हम जिसे हिन्दू धर्म कहते हैं वो शुरू कैसे हुआ? हिन्दू नाम बहुत बाद में आया, धर्म सनातन है। सनातन धर्म भी कैसे आया? उसका मूल जंगल और खेती में ही मिलता है। हमारे यहां जिनको आदिवासी कहा जाता है वो हमारे धर्म संस्कृति का मूल हैं... देखिए राजपथ न्यूज़ पर....
    user_Rajpath News
    Rajpath News
    Journalist Rohini, North West Delhi•
    16 hrs ago
  • दिल्ली के कूड़े के पहाड़ पर काम करने वाले कर्मचारियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि रोज़ाना सैकड़ों ट्रकों में कूड़ा और मलबा भरकर आसपास के खाली प्लॉटों में डाला जा रहा है। इस अवैध डंपिंग के चलते किराड़ी और मुंडका इलाक़ों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह स्थिति बीजेपी की सरकार आने के बाद शुरू हुई, जब कूड़ा निस्तारण के नाम पर मलबा खुले प्लॉटों में फैलाया जाने लगा। नालियां जाम हो चुकी हैं, बारिश के बाद सड़कों पर पानी भर जाता है और घरों में सीलन व बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इलाक़ेवासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है और सवाल उठाया है कि कूड़ा प्रबंधन के दावों के बावजूद ज़मीनी हालात बद से बदतर क्यों होते जा रहे हैं।
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    दिल्ली के कूड़े के पहाड़ पर काम करने वाले कर्मचारियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि रोज़ाना सैकड़ों ट्रकों में कूड़ा और मलबा भरकर आसपास के खाली प्लॉटों में डाला जा रहा है। इस अवैध डंपिंग के चलते किराड़ी और मुंडका इलाक़ों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह स्थिति बीजेपी की सरकार आने के बाद शुरू हुई, जब कूड़ा निस्तारण के नाम पर मलबा खुले प्लॉटों में फैलाया जाने लगा। नालियां जाम हो चुकी हैं, बारिश के बाद सड़कों पर पानी भर जाता है और घरों में सीलन व बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
इलाक़ेवासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है और सवाल उठाया है कि कूड़ा प्रबंधन के दावों के बावजूद ज़मीनी हालात बद से बदतर क्यों होते जा रहे हैं।
    user_Jyoti Sharma
    Jyoti Sharma
    Journalist रोहिणी, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
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