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इसे कहते है आस्था, इसे कहते है सच्ची श्रद्धा, इसे कहते भक्ति भक्ति में भक्त रंगमय हो जाता है
PARUL SIROHI BC MEERUT
इसे कहते है आस्था, इसे कहते है सच्ची श्रद्धा, इसे कहते भक्ति भक्ति में भक्त रंगमय हो जाता है
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- इसे कहते है आस्था, इसे कहते है सच्ची श्रद्धा, इसे कहते भक्ति भक्ति में भक्त रंगमय हो जाता है1
- MP=श्रावण के पहले सोमवार पर विधायक उमाकांत शर्मा ने किए भोलेनाथ के दर्शन, विकास कार्यों की समीक्षा की1
- जिलाधिकारी व एसएसपी ने किया रजवाहा कांवड मार्ग का स्थलीय निरीक्षण मेरठ 03.08.2026 कांवड़ यात्रा को सकुशल, शांतिपूर्ण संपन्न कराए जाने हेतु जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में आज जिलाधिकारी डा0 वी0के0 सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे द्वारा संबंधित अधिकारियो के साथ रजवाहा कांवड मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया गया। उन्होने राडधना का पुल, पाली, कालिंदी, धनवाली खेड़ा कांवड मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने कावड़ शिविरों का निरीक्षण किया। कावड़ शिविर में उन्होंने शिविर संचालकों से वार्ता की तथा व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों को समस्त व्यवस्थाएं दुरुस्त करने जाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर सीडीओ नूपुर गोयल, सीएमओ डॉक्टर राम प्रसाद, एसडीएम सरधना उदित नारायण सेंगर, जिला पंचायत राज अधिकारी वीरेंद्र सिंह सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- कांवड़ यात्रा में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, एक शिवभक्त की पीड़ा बनी सीख हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा करने वाले लाखों शिवभक्त कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। लंबी पैदल यात्रा के दौरान धूल-मिट्टी, तेज धूप, बारिश और लगातार पसीना आने के कारण कई श्रद्धालुओं को त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए तो सामान्य जलन और रगड़ गंभीर घाव का रूप भी ले सकती है। हाल ही में एक शिवभक्त ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा की। उसने बताया कि लगातार पैदल चलने, भीगे कपड़ों और जांघों में रगड़ की वजह से उसके पैरों के बीच गंभीर घाव हो गया। दर्द इतना बढ़ गया कि वह न तो ठीक से चल पा रहा था और न ही अपनी कांवड़ उठा पा रहा था। मजबूरी में उसके साथ चल रहे एक साथी ने उसकी कांवड़ अपने कंधे पर उठाकर यात्रा आगे बढ़ाई। श्रद्धालु ने वीडियो के माध्यम से अन्य कांवड़ियों से ऐसी परेशानी से बचने की अपील भी की। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कांवड़ यात्रा पर निकलने से पहले प्राथमिक उपचार की कुछ आवश्यक दवाइयाँ, एंटीसेप्टिक क्रीम, एंटी-चाफिंग या रैश क्रीम, पट्टियां और अन्य जरूरी चिकित्सा सामग्री साथ रखें। इसके अलावा सूखे और आरामदायक सूती कपड़े पहनें तथा भीग जाने पर जल्द से जल्द कपड़े बदलें। विशेष रूप से अंदरूनी वस्त्र हमेशा सूखे रखें, क्योंकि लगातार नमी और पसीना त्वचा में रगड़, जलन, फंगल संक्रमण और घाव का कारण बन सकते हैं। कांवड़ यात्रा आस्था का पर्व है, लेकिन सुरक्षित और स्वस्थ रहकर ही इस कठिन यात्रा को सफल बनाया जा सकता है। थोड़ी-सी सावधानी श्रद्धालुओं को बड़ी परेशानी से बचा सकती है।1
- मेरठ व्यूरो रिपोर्ट सावन में यूपी की सड़कों पर कांवड़ियों की भीड़ देखने को मिल रही है1