निजी विद्यालयों पर अनावश्यक आरोप या शिक्षा व्यवस्था पर हमला? सच को समझने की जरूरत है। सबसे पहली बात आप सभी के लिए यह है कि नीचे आप जो पढ़ने जा रहे हैं यह उन निजी स्कूल के लिए है जिसका स्कूल के व्यापार से कोई ताल्लुक नही है। आज के समय में कुछ तथाकथित समाजसुधारक, निजी विद्यालयों और उनसे जुड़े शिक्षकों व संचालकों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। यह न केवल अनुचित है, बल्कि हमारे शिक्षा तंत्र पर सीधा आघात भी है। प्रश्न यह उठता है कि क्या किसी निजी विद्यालय ने अभिभावकों को मजबूर किया है कि वे अपने बच्चों का नामांकन वहीं कराएं? क्या किसी को डराकर या दबाव डालकर शिक्षा दिलाई जा रही है? नामांकन के समय क्या शुल्क और सुविधाओं की पूरी जानकारी नहीं दी जाती? यदि इन सभी प्रश्नों का उत्तर "नहीं" है, तो फिर यह अनावश्यक विरोध और अपमान क्यों? निजी विद्यालय केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संस्कार और प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण भी प्रदान करते हैं। यदि किसी अभिभावक को शुल्क देने में कठिनाई होती है, तो सरकार द्वारा संचालित निःशुल्क एवं सुविधायुक्त विद्यालयों का विकल्प सदैव उपलब्ध है। वहाँ शिक्षा, भोजन, पुस्तकें और अन्य सुविधाएं भी निःशुल्क दी जाती हैं। लेकिन जब कुछ अभिभावक पूरे सत्र की पढ़ाई के बाद भी शुल्क का भुगतान नहीं करते और शिक्षकों व विद्यालय प्रबंधन के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, तब ये तथाकथित समाजसेवी मौन क्यों हो जाते हैं? यह दोहरी मानसिकता समाज के लिए घातक है। इसके अतिरिक्त, जब सरकारी व्यवस्थाओं में कमियाँ उजागर होती हैं—चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या अन्य सेवाएं—तब ये आवाजें क्यों नहीं उठतीं? जब बाजार में पुस्तकों के मूल्य असामान्य रूप से बढ़ाए जाते हैं, तब इन मुद्दों पर चुप्पी क्यों साध ली जाती है? वर्तमान स्थिति यह है कि विद्यालय प्रबंधन, जो सत्र की शुरुआत में बच्चों की शिक्षा और विकास पर ध्यान केंद्रित करता था, अब अपना बहुमूल्य समय भ्रांतियों को दूर करने में व्यतीत कर रहा है। इसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों और अभिभावकों को हो रहा है। यदि इन निरंतर आरोपों और अपमान से आहत होकर सभी निजी विद्यालय बंद करने का निर्णय ले लें, तो क्या ये तथाकथित समाजसुधारक उन हजारों बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी उठा पाएंगे? क्या प्रशासन इतनी बड़ी व्यवस्था को तुरंत संभाल पाएगा? यह भी सत्य है कि निजी विद्यालयों के उत्कृष्ट परिणामों से न केवल अभिभावकों, बल्कि पूरे क्षेत्र और प्रशासन का नाम रोशन होता है। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनका योगदान निस्संदेह महत्वपूर्ण है। अतः सभी अभिभावकों से विनम्र अपील है कि वे किसी के बहकावे में आकर अपने बच्चों के भविष्य के साथ समझौता न करें। तथ्यों को समझें, विवेक से निर्णय लें और शिक्षा के वास्तविक हित में खड़े हों। आइए, हम सब मिलकर एक सकारात्मक, सम्मानजनक और सशक्त शैक्षिक वातावरण का निर्माण करें MTF news स्कूलों की मनमानी पर अभिभावकों का वार! DM को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई की मांग तेज
निजी विद्यालयों पर अनावश्यक आरोप या शिक्षा व्यवस्था पर हमला? सच को समझने की जरूरत है। सबसे पहली बात आप सभी के लिए यह है कि नीचे आप जो पढ़ने जा रहे हैं यह उन निजी स्कूल के लिए है जिसका स्कूल के व्यापार से कोई ताल्लुक नही है। आज के समय में कुछ तथाकथित समाजसुधारक, निजी विद्यालयों और उनसे जुड़े शिक्षकों व संचालकों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। यह न केवल अनुचित है, बल्कि हमारे शिक्षा तंत्र पर सीधा आघात भी है। प्रश्न यह उठता है कि क्या किसी निजी विद्यालय ने अभिभावकों को मजबूर किया है कि वे अपने बच्चों का नामांकन वहीं कराएं? क्या किसी को डराकर या दबाव डालकर शिक्षा दिलाई जा रही है? नामांकन के समय क्या शुल्क और सुविधाओं की पूरी जानकारी नहीं दी जाती? यदि इन सभी प्रश्नों का उत्तर "नहीं" है, तो फिर यह अनावश्यक विरोध और अपमान क्यों? निजी विद्यालय केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संस्कार और प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण भी प्रदान करते हैं। यदि किसी अभिभावक को शुल्क देने में कठिनाई होती है, तो सरकार द्वारा संचालित निःशुल्क एवं सुविधायुक्त विद्यालयों का विकल्प सदैव उपलब्ध है। वहाँ शिक्षा, भोजन, पुस्तकें और अन्य सुविधाएं भी निःशुल्क दी जाती हैं। लेकिन जब कुछ अभिभावक पूरे सत्र की पढ़ाई के बाद भी शुल्क का भुगतान नहीं करते और शिक्षकों व विद्यालय प्रबंधन के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, तब ये तथाकथित समाजसेवी मौन क्यों हो जाते हैं? यह दोहरी मानसिकता समाज के लिए घातक है। इसके अतिरिक्त, जब सरकारी व्यवस्थाओं में कमियाँ उजागर होती हैं—चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या अन्य सेवाएं—तब ये आवाजें क्यों नहीं उठतीं? जब बाजार में पुस्तकों के मूल्य असामान्य रूप से बढ़ाए जाते हैं, तब इन मुद्दों पर चुप्पी क्यों साध ली जाती है? वर्तमान स्थिति यह है कि विद्यालय प्रबंधन, जो सत्र की शुरुआत में बच्चों की शिक्षा और विकास पर ध्यान केंद्रित करता था, अब अपना बहुमूल्य समय भ्रांतियों को दूर करने में व्यतीत कर रहा है। इसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों और अभिभावकों को हो रहा है। यदि इन निरंतर आरोपों और अपमान से आहत होकर सभी निजी विद्यालय बंद करने का निर्णय ले लें, तो क्या ये तथाकथित समाजसुधारक उन हजारों बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी उठा पाएंगे? क्या प्रशासन इतनी बड़ी व्यवस्था को तुरंत संभाल पाएगा? यह भी सत्य है कि निजी विद्यालयों के उत्कृष्ट परिणामों से न केवल अभिभावकों, बल्कि पूरे क्षेत्र और प्रशासन का नाम रोशन होता है। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनका योगदान निस्संदेह महत्वपूर्ण है। अतः सभी अभिभावकों से विनम्र अपील है कि वे किसी के बहकावे में आकर अपने बच्चों के भविष्य के साथ समझौता न करें। तथ्यों को समझें, विवेक से निर्णय लें और शिक्षा के वास्तविक हित में खड़े हों। आइए, हम सब मिलकर एक सकारात्मक, सम्मानजनक और सशक्त शैक्षिक वातावरण का निर्माण करें MTF news स्कूलों की मनमानी पर अभिभावकों का वार! DM को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई की मांग तेज
- मथुरा वृंदावन में भीषण हादसा MTF news के बन रहे आगे की अपडेट वीडियो1
- उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में आस्था का एक ऐसा अनोखा केंद्र मौजूद है, जो अपनी परंपराओं के चलते दूर-दूर तक चर्चा में रहता है। मटसेना क्षेत्र के गांव बिलहना में स्थित नगरसेन महाराज का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है, लेकिन यहां पूजा करने का तरीका आम मंदिरों से बिल्कुल अलग है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भक्त पारंपरिक प्रसाद या नारियल नहीं, बल्कि अंडा चढ़ाकर अपनी मनोकामना मांगते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में अंडा चढ़ाने और उसे फोड़ने से बच्चों और परिवार पर आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं और उनकी सलामती बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। खासकर छोटे बच्चों की सुरक्षा और बीमारी से बचाव के लिए लोग यहां अंडा चढ़ाते हैं। कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं, जो अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा मंदिर पहुंचकर धन्यवाद स्वरूप अंडा चढ़ाते हैं।1
- एसपी ग्रामीण ने शिकोहाबाद में चलाया चेकिंग अभियान, SHO संग किया पैदल मार्च* संदिग्ध वाहनों-व्यक्तियों की जांच, व्यापारियों से की शांति व्यवस्था में सहयोग की अपील* *शिकोहाबाद (फिरोजाबाद), जनपद में शांति व्यवस्था और कानून का राज बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार सतर्क है। इसी क्रम में शुक्रवार शाम एसपी ग्रामीण अनुज चौधरी ने शिकोहाबाद नगर में चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने थाना प्रभारी शिकोहाबाद अनुज कुमार राणा के साथ बाजारों में पैदल मार्च भी किया। अभियान के तहत पुलिस टीम ने मुख्य चौराहों, बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की सघन जांच की। बिना नंबर प्लेट और ट्रिपलिंग कर रहे वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई। एसपी ग्रामीण ने खुद रुक-रुक कर संदिग्धों से पूछताछ की और वाहन के कागजात चेक किए। पैदल मार्च के दौरान एसपी ग्रामीण ने व्यापारियों और आम लोगों से बातचीत की। उन्होंने सभी से शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की। साथ ही दुकानदारों से अपने प्रतिष्ठानों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने को कहा। एसपी ग्रामीण अनुज चौधरी ने बताया कि त्योहारों और जयंती कार्यक्रमों के मद्देनजर जनपद में सतर्कता बढ़ाई गई है। अराजक तत्वों पर नजर रखने के लिए नियमित रूप से चेकिंग और पैदल मार्च किया जा रहा है। उन्होंने थाना पुलिस को रात्रि गश्त बढ़ाने और बाजारों में लगातार भ्रमणशील रहने के निर्देश भी दिए। अभियान के दौरान पुलिस की सक्रियता देख स्थानीय लोगों ने संतोष जताया।1
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- Post by देवेंद्र सिंह पत्रकार2
- Post by लक्ष्यसीमा पत्रिका (LSNNEWS)1
- फिरोजाबाद के थाना टूण्डला क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। चुल्हावली के पास रेलवे ट्रैक पर नेताजी एक्सप्रेस ट्रेन से गिरकर एयरफोर्स में तैनात एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा इतना भयानक था कि जवान के हाथ और पैर कट गए और उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। घायल जवान को तुरंत सरकारी ट्रोमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि जवान कानपुर के लक्ष्मणपुर तिलक का रहने वाला है और ड्यूटी से घर लौट रहा था। मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।1
- फिरोजाबाद सिरसागंज में बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर 28 अप्रैल शाम 6 बजे भव्य 'नगर शोभा यात्रा' निकलेगी। यात्रा अंबेडकर नगर, कुंजपुरा तिराहा से शुरू होकर नगर भ्रमण करेगी। मुख्य अतिथि भंते आनंद रत्न रहेंगे। बैठक में समिति अध्यक्ष राधाकृष्ण व संरक्षक सेठ राम सिंह ने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी। समिति ने सभी क्षेत्रवासियों से शोभा यात्रा में शामिल होकर बाबा साहेब के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। #AmbedkarJayanti #Sirsaganj #ShobhaYatra #Firozabad1