बीती रात आए तेज आंधी और चक्रवाती तूफान ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिससे मक्का की फसल को पहले ही हुए नुकसान के बाद अब केले की खेती भी पूरी तरह तबाह हो गई है। किसान लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं, जिससे उनकी कमर टूट गई है। तेज हवा और बारिश के कारण कई गांवों में केले के पेड़ जमीन पर गिर गए, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गई। किसान अभिषेक कुमार महतो ने बताया कि उन्हें अकेले करीब 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “पहले मक्का की फसल खराब हुई थी, अब केला भी पूरी तरह गिर गया। बहुत नुकसान हुआ है। सरकार से मदद की उम्मीद है।” स्थानीय किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे मौसम बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती करना अत्यंत मुश्किल होता जा रहा है। कई किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। फिलहाल, प्रभावित किसान सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, और अब देखना होगा कि उन्हें कब तक सहायता मिल पाती है।
बीती रात आए तेज आंधी और चक्रवाती तूफान ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिससे मक्का की फसल को पहले ही हुए नुकसान के बाद अब केले की खेती भी पूरी तरह तबाह हो गई है। किसान लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं, जिससे उनकी कमर टूट गई है। तेज हवा और बारिश के कारण कई गांवों में केले के पेड़ जमीन पर गिर गए, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गई। किसान अभिषेक कुमार महतो ने बताया कि उन्हें अकेले करीब 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “पहले मक्का की फसल खराब हुई थी, अब केला भी पूरी तरह गिर गया। बहुत नुकसान हुआ है। सरकार से मदद की उम्मीद है।” स्थानीय किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे मौसम बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती करना अत्यंत मुश्किल होता जा रहा है। कई किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। फिलहाल, प्रभावित किसान सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, और अब देखना होगा कि उन्हें कब तक सहायता मिल पाती है।
- बीती रात आए तेज आंधी और चक्रवाती तूफान ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिससे मक्का की फसल को पहले ही हुए नुकसान के बाद अब केले की खेती भी पूरी तरह तबाह हो गई है। किसान लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं, जिससे उनकी कमर टूट गई है। तेज हवा और बारिश के कारण कई गांवों में केले के पेड़ जमीन पर गिर गए, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गई। किसान अभिषेक कुमार महतो ने बताया कि उन्हें अकेले करीब 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “पहले मक्का की फसल खराब हुई थी, अब केला भी पूरी तरह गिर गया। बहुत नुकसान हुआ है। सरकार से मदद की उम्मीद है।” स्थानीय किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे मौसम बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती करना अत्यंत मुश्किल होता जा रहा है। कई किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। फिलहाल, प्रभावित किसान सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, और अब देखना होगा कि उन्हें कब तक सहायता मिल पाती है।1
- बकरीद के अवसर पर, कटिहार के ललियाही ईदगाह में नमाज अदा करने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े, जिससे वहाँ जनसैलाब जैसा दृश्य देखने को मिला। इस मौके पर, संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दिया।1
- जन सुराज पार्टी ने अपना चुनावी मोर्चा खोल दिया है। बताया गया है कि पार्टी पंचायती चुनावों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकती है।1
- एक व्यक्ति ने अपने नेता को संबोधित करते हुए 'मदरचोद' शब्द का प्रयोग किया। इस बयान में नेता के प्रति घोर अपमानजनक और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।1
- एक तेंदुए के गाँव में घुसने से ग्रामीणों में व्यापक दहशत फैल गई है। इस वन्यजीव ने बाद में हमला किया, जिससे कई लोग जख्मी हो गए। इस घटना से ग्रामीण इलाके में साफ तौर पर दहशत का माहौल बन गया है। इस चिंताजनक स्थिति के जवाब में, ग्रामीणों ने उल्लेखनीय सतर्कता और एकजुटता का प्रदर्शन किया। तेंदुए के घुसपैठ और हमले की जानकारी वन विभाग और थाना अध्यक्ष को तुरंत फोन पर दी गई। इसके अतिरिक्त, पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य जन प्रतिनिधियों ने इस संकट को हल करने में सक्रिय भूमिका निभाई है, और स्थिति का संज्ञान लेने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। वन विभाग से तत्काल कार्रवाई करने की अपेक्षा है, जिसमें तेंदुए का बचाव और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था लागू करना शामिल है। समुदाय इस खतरे से निपटते हुए सामूहिक संज्ञान और वन्यजीव सुरक्षा पर जोर दे रहा है।1
- कदवा प्रखंड मुख्यालय के सभागार में आयोजित बाढ़ अनुश्रवण समिति की महत्वपूर्ण बैठक अपेक्षित उपस्थिति न होने के कारण विफल हो गई। प्रखंड प्रमुख मंटू रविदास तो इस बैठक में शामिल हुए, लेकिन उनके साथ कुछ ही विभाग के पदाधिकारी नजर आए, जबकि अधिकांश जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी अनुपस्थित रहे। इस क्षेत्र में बरसात के बाद बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है, जिसके समय पर निपटारे और आमजनों को संकट से बचाने के लिए ऐसी बैठकें अनिवार्य मानी जाती हैं ताकि समय रहते पूरी तैयारी की जा सके। बैठक की यह विफलता क्षेत्र में बाढ़ से निपटने की तैयारियों को लेकर चिंता पैदा करती है।1
- पुलिस ने खनवां गांव से हत्या के प्रयास के एक मामले में फरार चल रहे एक प्राथमिकी अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है।1
- एक विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जहाँ दो शिक्षकों पर इसके विरोध का आरोप लगा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रभारी बीईओ (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) खुद इसकी जाँच के लिए विद्यालय पहुँच गए हैं।1