*तरुण की हत्या करने वाले और उजेन की हत्या करने वालों को फांसी दो निष्पक्ष जांच कर की जाये--गादरे* दिल्ली:-तरुण की हत्या करने वालों को सजा मिलनी चाहिए जरूरी है और मुस्लिमों का घर लूटने और बुलडोजर चलाने वालों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू गादरे ने आए दिन बढ़ते कराईम और शासन प्रशासन का मूकदर्शक होने पर अफसोस जताया और कहा कि आज कुछ असामाजिक प्रवृत्ति के संगठन और उनके अंधभक्त जो कानून को हाथ में लेकर खुद सजा देने वाले बन रहे है। क्या न्यायपालिका पर तले लगवा दीजिए। मरने वाले का बहुत दर्द है हमें भी! उसकी जांच होनी चाहिए कि दहशतगर्द हिंदू हिंदुत्व के नाम पर देश में बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद RSS और इनके सहयोगी संगठन में से किसी ने मारकर मुस्लिमों के नाम लगा दिया जिससे मुस्लिम एस सी एसटी जो मूल निवासी है एक न हो सके।मुस्लिमों पर आए दिन अत्याचार करने वाले षड्यंत्र रचने वाले ने मारा हो हो सकता है? सबको बस तरुण की मां का दर्द दिख रहा, लेकिन दूसरी तरफ उज़ैन के बाप का दर्द किसी को नही दिख रहा। जहां दिल्ली में पुलिस द्वारा मुसलमानो का घर बुल्डोजर से तोड़ दिया गया, हिंदू संघटन पुलिस की मौजूदगी में घर में घुस गए तोड़ फोड़ की सामान फेंक दिया, वही लखनऊ में खुद पुलिस अरविंद त्रिपाठी की घर की सुरक्षा कर रही है। मुस्लिम जोकि एक विचारधारा वाले समता समानता न्याय बंधुता और स्वतंत्रता पर विश्वास करते है देश की आजादी में सबसे बड़ी कुर्बानी देने वाले समाज का कोई बेगुनाह भी है जेलों में डालो अत्याचार करो लूटो क्या यही मानवता इंसानियत है। जहां तरुण की हत्या करने वालों के लिए इनकाउंटर की मांग की जा रही वही 13 साल के मुस्लिम उजैन पर चुप्पी साध ली गई है। अगर किसी धर्म विशेष लोगो के कहने पर तरुण को मरने वाले सभी लोगो को गोली मार देनी चाहिए तो फिर मुस्लिम उजेन को मारने वाले 3 नाबालिग बच्चे, अरविंद त्रिपाठी और उसकी बीवी के साथ भी यही होना चाहिए? कानून और इंसाफ मानो आज खत्म हो गया है।संविधान की कसम खाकर नौकरी पाने वाले पुलिसकर्मियों के सामने ही मुस्लिमों पर अत्याचार होता है उनका घर लूटा जाता है। मुस्लिमों की बहन बेटियों को सताया जाता है? सब तमाशा देख कर खुश होते है कौनसे मजहब के लोग है। देश में कानून की बात करने वाले जांचकर दोषियों को सजा दिलाने की बात करते तो बेहतर होता जो समाज और देश हित में होता।
*तरुण की हत्या करने वाले और उजेन की हत्या करने वालों को फांसी दो निष्पक्ष जांच कर की जाये--गादरे* दिल्ली:-तरुण की हत्या करने वालों को सजा मिलनी चाहिए जरूरी है और मुस्लिमों का घर लूटने और बुलडोजर चलाने वालों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू गादरे ने आए दिन बढ़ते कराईम और शासन प्रशासन का मूकदर्शक होने पर अफसोस जताया और कहा कि आज कुछ असामाजिक प्रवृत्ति के संगठन और उनके अंधभक्त जो कानून को हाथ में लेकर खुद सजा देने वाले बन रहे है। क्या न्यायपालिका पर तले लगवा दीजिए। मरने वाले का बहुत दर्द है हमें भी! उसकी जांच होनी चाहिए कि दहशतगर्द हिंदू हिंदुत्व के नाम पर देश में बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद RSS और इनके सहयोगी संगठन में से किसी ने मारकर मुस्लिमों के नाम लगा दिया जिससे मुस्लिम एस सी एसटी जो मूल निवासी है एक न हो सके।मुस्लिमों पर आए दिन अत्याचार करने वाले षड्यंत्र रचने वाले ने मारा हो हो सकता है? सबको बस तरुण की मां का दर्द दिख रहा, लेकिन दूसरी तरफ उज़ैन के बाप का दर्द किसी को नही दिख रहा। जहां दिल्ली में पुलिस द्वारा मुसलमानो का घर बुल्डोजर से तोड़ दिया गया, हिंदू संघटन पुलिस की मौजूदगी में घर में घुस गए तोड़ फोड़ की सामान फेंक दिया, वही लखनऊ में खुद पुलिस अरविंद त्रिपाठी की घर की सुरक्षा कर रही है। मुस्लिम जोकि एक विचारधारा वाले समता समानता न्याय बंधुता और स्वतंत्रता पर विश्वास करते है देश की आजादी में सबसे बड़ी कुर्बानी देने वाले समाज का कोई बेगुनाह भी है जेलों में डालो अत्याचार करो लूटो क्या यही मानवता इंसानियत है। जहां तरुण की हत्या करने वालों के लिए इनकाउंटर की मांग की जा रही वही 13 साल के मुस्लिम उजैन पर चुप्पी साध ली गई है। अगर किसी धर्म विशेष लोगो के कहने पर तरुण को मरने वाले सभी लोगो को गोली मार देनी चाहिए तो फिर मुस्लिम उजेन को मारने वाले 3 नाबालिग बच्चे, अरविंद त्रिपाठी और उसकी बीवी के साथ भी यही होना चाहिए? कानून और इंसाफ मानो आज खत्म हो गया है।संविधान की कसम खाकर नौकरी पाने वाले पुलिसकर्मियों के सामने ही मुस्लिमों पर अत्याचार होता है उनका घर लूटा जाता है। मुस्लिमों की बहन बेटियों को सताया जाता है? सब तमाशा देख कर खुश होते है कौनसे मजहब के लोग है। देश में कानून की बात करने वाले जांचकर दोषियों को सजा दिलाने की बात करते तो बेहतर होता जो समाज और देश हित में होता।
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- Post by Vijay rathi1
- Post by Local news1
- Post by फरमान इदरीसी1
- मुजफ्फरनगर: शांति और सौहार्द के साथ मनाएं ईद, कानून हाथ में लेने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई शाहपुर (मुजफ्फरनगर): आगामी त्यौहार ईद-उल-फितर को जनपद में शांतिपूर्ण और भाईचारे के साथ संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी क्रम में आज थाना शाहपुर परिसर में एक शांति समिति (पीस कमेटी) की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्यार और मिठास का पर्व है ईद: सीओ बुढ़ाना बैठक को संबोधित करते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) बुढ़ाना, गजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि ईद-उल-फितर आपसी प्रेम, सद्भाव और मेल-मिलाप का त्यौहार है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "यह त्यौहार एक-दूसरे को सेवइयां खिलाकर खुशियां बांटने का दिन है। हम सभी को मिलकर इसे शांतिपूर्ण तरीके से मनाना चाहिए।" साथ ही उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि त्यौहार के दौरान यदि किसी ने भी कानून व्यवस्था भंग करने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, तो पुलिस उसके खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। प्रशासनिक सतर्कता और जनसहयोग पर जोर थाना अध्यक्ष गजेंद्र सिंह ने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। बैठक में नगर पंचायत शाहपुर के अध्यक्ष अकरम कुरैशी और पूर्व अध्यक्ष परमेश सैनी ने भी अपने विचार रखे और प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांवों के ग्राम प्रधान और क्षेत्र के अन्य संभ्रांत व्यक्ति मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में त्यौहार को शांति और आपसी सौहार्द के साथ मनाने का संकल्प लिया।1
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- Post by Vijay rathi1
- बागपत के छोटे से गांव पलड़ा से निकलकर केरल के ग्लैमर और फिर विवादों के केंद्र में आए फरमान खान की कहानी इन दिनों हर जुबान पर है। हीरो बनने का सपना लेकर घर छोड़ने वाले फरमान ने मशहूर अभिनेत्री मोनालिसा से हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह तो कर लिया, लेकिन इस 'फिल्मी' मोड़ ने उनके असल जीवन में उथल-पुथल मचा दी है। पिता की नाराजगी: "घर में नहीं मिलेगी जगह" जहां एक ओर फरमान अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं, वहीं उनके घर पर मातम जैसा माहौल है। उनके पिता, जफर अली, जो पेशे से किसान हैं, इस शादी से बेहद आहत हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें यह रिश्ता किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है। जफर अली का कहना है कि बेटे के इस फैसले ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है और उन्होंने ऐलान किया है कि यदि फरमान और मोनालिसा गांव आते हैं, तो उन्हें घर की दहलीज पार करने नहीं दी जाएगी। धर्म और परंपरा पर छिड़ी बहस शादी के बाद बढ़ते विवाद को देखते हुए मोनालिसा ने खुद केरल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि यह विवाह पूरी तरह से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ है और इसमें किसी भी प्रकार का धर्म परिवर्तन नहीं किया गया है। इसके बावजूद, सोशल मीडिया से लेकर पलड़ा गांव की चौपालों तक इस शादी को लेकर बहस तेज है। गांव के लोग इस अंतर्धार्मिक और हाई-प्रोफाइल विवाह को लेकर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। सपनों की उड़ानः गलियों से ग्लैमर तक का सफर फरमान खान का बचपन बागपत के पलड़ा गांव की धूल भरी गलियों में गिल्ली-डंडा और कबड्डी खेलते हुए बीता। जनता इंटर कॉलेज से पढ़ाई और मेरठ यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद, उनमें अभिनेता बनने का जुनून सवार हुआ। करीब एक दशक पहले वह अपनी किस्मत आजमाने पहले दिल्ली, फिर मुंबई और चेन्नई होते हुए केरल पहुंचे। गांव के लोग उन्हें एक मिलनसार और देसी खेलों के शौकीन युवक के रूप में याद करते हैं, जो साल भर पहले ही गांव आकर अपने दोस्तों से मिला था।1