झारखंड विधानसभा परिसर में सोमवार को राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस विधायकों ने एनडीए समर्थित राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को खारिज करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि नाथवानी का नामांकन नियमों के अनुरूप नहीं है और इसकी वैधता की जांच होनी चाहिए। इसी मांग पर पार्टी के विधायक विधानसभा परिसर में धरने और नारेबाजी पर उतर आए, साथ ही निर्वाचन अधिकारियों से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए हस्तक्षेप की अपील की। हैरानी की बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस को अपने ही गठबंधन के सहयोगी दलों, जैसे झामुमो और राजद, का खुला समर्थन नहीं मिला। वे इस कार्यक्रम से दूरी बनाते नजर आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक न होने की चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्षी दलों ने भी इस स्थिति को लेकर महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के भीतर समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के चलते कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे कुछ मंत्रियों और विधायकों को भी निर्धारित मार्गों से गुजरने में परेशानी हुई। कुछ मंत्रियों को तो सुरक्षा कर्मियों ने आगे बढ़ने से रोक दिया, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। हालांकि, मंत्रियों की नाराजगी और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया, और प्रशासन अपनी व्यवस्था पर कायम रहा। कांग्रेस की मांग पर तत्काल कोई निर्णय भी नहीं लिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिस मुद्दे को कांग्रेस ने गंभीरता से उठाया, उस पर सहयोगी दलों की चुप्पी ने कई राजनीतिक संकेत दिए हैं। कई पर्यवेक्षकों ने टिप्पणी की कि कांग्रेस का रुख सरकार के एक घटक दल के बजाय विपक्षी दल जैसा प्रतीत हो रहा था। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के लिए आवाज उठा रहे हैं, और यह मुद्दा किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा है। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपने रुख पर कितनी मजबूती से कायम रहती है और महागठबंधन के अन्य दल इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
झारखंड विधानसभा परिसर में सोमवार को राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस विधायकों ने एनडीए समर्थित राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को खारिज करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि नाथवानी का नामांकन नियमों के अनुरूप नहीं है और इसकी वैधता की जांच होनी चाहिए। इसी मांग पर पार्टी के विधायक विधानसभा परिसर में धरने और नारेबाजी पर उतर आए, साथ ही निर्वाचन अधिकारियों से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए हस्तक्षेप की अपील की। हैरानी की बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस को अपने ही गठबंधन के सहयोगी दलों, जैसे झामुमो और राजद, का खुला समर्थन नहीं मिला। वे इस कार्यक्रम से दूरी बनाते नजर आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक न होने की चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्षी दलों ने भी इस स्थिति को लेकर महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के भीतर समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के चलते कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे कुछ मंत्रियों और विधायकों को भी निर्धारित मार्गों से गुजरने में परेशानी हुई। कुछ मंत्रियों को तो सुरक्षा कर्मियों ने आगे बढ़ने से रोक दिया, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। हालांकि, मंत्रियों की नाराजगी और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया, और प्रशासन अपनी व्यवस्था पर कायम रहा। कांग्रेस की मांग पर तत्काल कोई निर्णय भी नहीं लिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिस मुद्दे को कांग्रेस ने गंभीरता से उठाया, उस पर सहयोगी दलों की चुप्पी ने कई राजनीतिक संकेत दिए हैं। कई पर्यवेक्षकों ने टिप्पणी की कि कांग्रेस का रुख सरकार के एक घटक दल के बजाय विपक्षी दल जैसा प्रतीत हो रहा था। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के लिए आवाज उठा रहे हैं, और यह मुद्दा किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा है। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपने रुख पर कितनी मजबूती से कायम रहती है और महागठबंधन के अन्य दल इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
- झारखंड विधानसभा परिसर में सोमवार को राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस विधायकों ने एनडीए समर्थित राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को खारिज करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि नाथवानी का नामांकन नियमों के अनुरूप नहीं है और इसकी वैधता की जांच होनी चाहिए। इसी मांग पर पार्टी के विधायक विधानसभा परिसर में धरने और नारेबाजी पर उतर आए, साथ ही निर्वाचन अधिकारियों से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए हस्तक्षेप की अपील की। हैरानी की बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस को अपने ही गठबंधन के सहयोगी दलों, जैसे झामुमो और राजद, का खुला समर्थन नहीं मिला। वे इस कार्यक्रम से दूरी बनाते नजर आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक न होने की चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्षी दलों ने भी इस स्थिति को लेकर महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के भीतर समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के चलते कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे कुछ मंत्रियों और विधायकों को भी निर्धारित मार्गों से गुजरने में परेशानी हुई। कुछ मंत्रियों को तो सुरक्षा कर्मियों ने आगे बढ़ने से रोक दिया, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। हालांकि, मंत्रियों की नाराजगी और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया, और प्रशासन अपनी व्यवस्था पर कायम रहा। कांग्रेस की मांग पर तत्काल कोई निर्णय भी नहीं लिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिस मुद्दे को कांग्रेस ने गंभीरता से उठाया, उस पर सहयोगी दलों की चुप्पी ने कई राजनीतिक संकेत दिए हैं। कई पर्यवेक्षकों ने टिप्पणी की कि कांग्रेस का रुख सरकार के एक घटक दल के बजाय विपक्षी दल जैसा प्रतीत हो रहा था। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के लिए आवाज उठा रहे हैं, और यह मुद्दा किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा है। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपने रुख पर कितनी मजबूती से कायम रहती है और महागठबंधन के अन्य दल इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बुधवार को धनबाद में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विशेष पूजा-अर्चना की। धनबाद विधायक राज सिन्हा के नेतृत्व में जगजीवन नगर स्थित मानस मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए, जिन्होंने देश की समृद्धि तथा प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। इस अवसर पर धनबाद विधायक राज सिन्हा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने विकास, गरीब कल्याण और जनविश्वास के आधार पर 12 वर्षों का सफल कार्यकाल पूरा किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले प्रधानमंत्रियों में शामिल हो चुके हैं और उनके नेतृत्व में महिलाओं, किसानों, युवाओं व गरीबों के उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक योजनाएं लागू की गई हैं। सिन्हा ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु मिले, ताकि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र और विश्व गुरु बनाने का उनका संकल्प साकार हो सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्र सरकार भारत को 'सोने की चिड़िया' और 'विश्व गुरु' के रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। वहीं, समाजसेवी नित्यानंद मंडल ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने की खुशी में मानस मंदिर में पूजा-अर्चना कर एक उत्सव मनाया गया, जिसमें देश की उन्नति और समृद्धि की कामना की गई।1
- वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र के अखरी स्थित सौरव विहार कॉलोनी के पास बाइक सवार बदमाशों ने एक युवक को गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल युवक को पुलिस ने उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया था, जहाँ रविवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान जितेंद्र सिंह के रूप में हुई है। बताया गया कि सोमवार देर रात वह अपने घर जा रहा था, तभी सौरव विहार कॉलोनी के पास मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने उसे निशाना बनाया और गोली मार दी। गोली जितेंद्र की पीठ में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपियों की तलाश के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।1
- धनबाद के झरिया स्थित घानूडीह में ओ बी (ओवरबर्डन) गिरने के एक मामले को लेकर ग्रामीणों और एक आउटसोर्सिंग कंपनी के बीच सीधा टकराव सामने आया है। इस पूरे प्रकरण में धनबाद के मेयर संजीव सिंह का भी उल्लेख किया गया है, जो इस खबर का मुख्य विषय है।1
- धनबाद उपायुक्त के निर्देशानुसार, बाघमारा प्रखंड के अंतर्गत आने वाली 12 पंचायत भवनों में एसआईआर (SIR) से संबंधित मामलों के निष्पादन हेतु शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में संबंधित पंचायतों के बीएलओ (BLO), सुपरवाइजर (Supervisor) और नोडल पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने मौके पर आए लोगों के एसआईआर संबंधी मामलों का समाधान किया।1
- झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा में विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस ने शिकंजा कसा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुलिस निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर रही है।1
- आज बोकारो स्थित शिबू शेरेण टाउन हॉल में आजसू पार्टी का एक मिलन समारोह आयोजित किया गया।1
- झारखंड के धनबाद में ओबी डंपिंग को लेकर ग्रामीणों ने अपना विरोध दर्ज कराया है।1