“लम्भुआ में जाम का ‘राज’: पुलिस की नाकामी या सुविधा शुल्क का खेल" लम्भुआ, सुल्तानपुर। लम्भुआ बाजार में लगने वाला रोज़ाना का जाम अब आम लोगों की नियति बन चुका है। “आम के आम, गुठलियों के दाम” वाली कहावत यहां चरितार्थ होती दिख रही है—जहां एक तरफ दुकानदार सड़क तक कब्जा कर मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राहगीर जाम और धूप में पिसने को मजबूर हैं।चौकिया मोड़, दियरा तिराहा और सर्वोदय चौराहा—इन प्रमुख स्थानों पर हालात यह हैं कि “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” की तर्ज पर पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। मोड़ के ठीक पास ऑटो, टैक्सी और बैटरी रिक्शा खड़े रहते हैं, जिससे सड़क संकरी हो जाती है और जाम लगना तय हो जाता है।पत्रकारों द्वारा कई बार खबरें प्रकाशित की गईं, लेकिन “ढाक के तीन पात” वाली स्थिति बनी हुई है—न कोई ठोस कार्रवाई, न ही कोई स्थायी समाधान।सड़क पर दुकान, जिम्मेदार कौन?करीब एक वर्ष पूर्व आदेश जारी हुआ था कि कोई भी दुकानदार नाली के आगे दुकान नहीं लगाएगा, अन्यथा चालान किया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी कार्रवाई भी नहीं हुई।एनएच-56 तक दुकानदारों ने अपना सामान फैला रखा है। स्थाई दुकानदार अपने कमरों से निकलकर सड़क तक कब्जा किए हुए हैं, और जो थोड़ी जगह बचती है, वहां ठेला-खुमचा वाले अपना जीवन यापन कर रहे हैं। *वसूली का खेल?* एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया—“हमसे नियमित वसूली होती है, इसलिए हम जहां चाहें दुकान लगा लेते हैं, कोई कुछ नहीं कहता।”इस बयान के बाद “चोर की दाढ़ी में तिनका” वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। स्थानीय हल्का दरोगा, सिपाही और कथित तौर पर एक व्यक्ति धीरज कुमार संदेह के घेरे में हैं।जनता त्रस्त, पुलिस गायब रविवार को सर्वोदय चौराहे से लेकर चौकिया रोड तक पूरे दिन जाम लगा रहा, लेकिन “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” की तरह एक भी पुलिसकर्मी जाम खुलवाने नहीं पहुंचा। चिलचिलाती धूप में लोग घंटों फंसे रहे।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क पर कब्जा हटाने और वाहनों को व्यवस्थित खड़ा कराने से जाम खत्म हो सकता है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही लोगों ने यह भी कहा कि जिले की सख्त छवि वाली पुलिस अधीक्षक की व्यवस्था भी लम्भुआ में “बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद” जैसी साबित हो रही है।लम्भुआ का जाम अब सिर्फ यातायात की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल है। जब तक “लाठी भी न टूटे और सांप भी मर जाए” की मानसिकता से बाहर निकलकर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम जनता यूं ही जाम में पिसती रहेगी।
“लम्भुआ में जाम का ‘राज’: पुलिस की नाकामी या सुविधा शुल्क का खेल" लम्भुआ, सुल्तानपुर। लम्भुआ बाजार में लगने वाला रोज़ाना का जाम अब आम लोगों की नियति बन चुका है। “आम के आम, गुठलियों के दाम” वाली कहावत यहां चरितार्थ होती दिख रही है—जहां एक तरफ दुकानदार सड़क तक कब्जा कर मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राहगीर जाम और धूप में पिसने को मजबूर हैं।चौकिया मोड़, दियरा तिराहा और सर्वोदय चौराहा—इन प्रमुख स्थानों पर हालात यह हैं कि “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” की तर्ज पर पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। मोड़ के ठीक पास ऑटो, टैक्सी और बैटरी रिक्शा खड़े रहते हैं, जिससे सड़क संकरी हो जाती है और जाम लगना तय हो जाता है।पत्रकारों द्वारा कई बार खबरें प्रकाशित की गईं, लेकिन “ढाक के तीन पात” वाली स्थिति बनी हुई है—न कोई ठोस कार्रवाई,
न ही कोई स्थायी समाधान।सड़क पर दुकान, जिम्मेदार कौन?करीब एक वर्ष पूर्व आदेश जारी हुआ था कि कोई भी दुकानदार नाली के आगे दुकान नहीं लगाएगा, अन्यथा चालान किया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी कार्रवाई भी नहीं हुई।एनएच-56 तक दुकानदारों ने अपना सामान फैला रखा है। स्थाई दुकानदार अपने कमरों से निकलकर सड़क तक कब्जा किए हुए हैं, और जो थोड़ी जगह बचती है, वहां ठेला-खुमचा वाले अपना जीवन यापन कर रहे हैं। *वसूली का खेल?* एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया—“हमसे नियमित वसूली होती है, इसलिए हम जहां चाहें दुकान लगा लेते हैं, कोई कुछ नहीं कहता।”इस बयान के बाद “चोर की दाढ़ी में तिनका” वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। स्थानीय हल्का दरोगा, सिपाही और कथित तौर पर एक व्यक्ति धीरज कुमार संदेह के घेरे में हैं।जनता
त्रस्त, पुलिस गायब रविवार को सर्वोदय चौराहे से लेकर चौकिया रोड तक पूरे दिन जाम लगा रहा, लेकिन “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” की तरह एक भी पुलिसकर्मी जाम खुलवाने नहीं पहुंचा। चिलचिलाती धूप में लोग घंटों फंसे रहे।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क पर कब्जा हटाने और वाहनों को व्यवस्थित खड़ा कराने से जाम खत्म हो सकता है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही लोगों ने यह भी कहा कि जिले की सख्त छवि वाली पुलिस अधीक्षक की व्यवस्था भी लम्भुआ में “बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद” जैसी साबित हो रही है।लम्भुआ का जाम अब सिर्फ यातायात की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल है। जब तक “लाठी भी न टूटे और सांप भी मर जाए” की मानसिकता से बाहर निकलकर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम जनता यूं ही जाम में पिसती रहेगी।
- लम्भुआ, सुल्तानपुर। लम्भुआ बाजार में लगने वाला रोज़ाना का जाम अब आम लोगों की नियति बन चुका है। “आम के आम, गुठलियों के दाम” वाली कहावत यहां चरितार्थ होती दिख रही है—जहां एक तरफ दुकानदार सड़क तक कब्जा कर मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राहगीर जाम और धूप में पिसने को मजबूर हैं।चौकिया मोड़, दियरा तिराहा और सर्वोदय चौराहा—इन प्रमुख स्थानों पर हालात यह हैं कि “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” की तर्ज पर पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। मोड़ के ठीक पास ऑटो, टैक्सी और बैटरी रिक्शा खड़े रहते हैं, जिससे सड़क संकरी हो जाती है और जाम लगना तय हो जाता है।पत्रकारों द्वारा कई बार खबरें प्रकाशित की गईं, लेकिन “ढाक के तीन पात” वाली स्थिति बनी हुई है—न कोई ठोस कार्रवाई, न ही कोई स्थायी समाधान।सड़क पर दुकान, जिम्मेदार कौन?करीब एक वर्ष पूर्व आदेश जारी हुआ था कि कोई भी दुकानदार नाली के आगे दुकान नहीं लगाएगा, अन्यथा चालान किया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी कार्रवाई भी नहीं हुई।एनएच-56 तक दुकानदारों ने अपना सामान फैला रखा है। स्थाई दुकानदार अपने कमरों से निकलकर सड़क तक कब्जा किए हुए हैं, और जो थोड़ी जगह बचती है, वहां ठेला-खुमचा वाले अपना जीवन यापन कर रहे हैं। *वसूली का खेल?* एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया—“हमसे नियमित वसूली होती है, इसलिए हम जहां चाहें दुकान लगा लेते हैं, कोई कुछ नहीं कहता।”इस बयान के बाद “चोर की दाढ़ी में तिनका” वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। स्थानीय हल्का दरोगा, सिपाही और कथित तौर पर एक व्यक्ति धीरज कुमार संदेह के घेरे में हैं।जनता त्रस्त, पुलिस गायब रविवार को सर्वोदय चौराहे से लेकर चौकिया रोड तक पूरे दिन जाम लगा रहा, लेकिन “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” की तरह एक भी पुलिसकर्मी जाम खुलवाने नहीं पहुंचा। चिलचिलाती धूप में लोग घंटों फंसे रहे।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क पर कब्जा हटाने और वाहनों को व्यवस्थित खड़ा कराने से जाम खत्म हो सकता है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही लोगों ने यह भी कहा कि जिले की सख्त छवि वाली पुलिस अधीक्षक की व्यवस्था भी लम्भुआ में “बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद” जैसी साबित हो रही है।लम्भुआ का जाम अब सिर्फ यातायात की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल है। जब तक “लाठी भी न टूटे और सांप भी मर जाए” की मानसिकता से बाहर निकलकर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम जनता यूं ही जाम में पिसती रहेगी।3
- *ट्रैफिक इंचार्ज ने की अभद्रता, होमगार्ड,पीआरडी जवानों ने एसपी से की शिकायत* सुल्तानपुर।जिले में भीषण गर्मी में यातायात व्यवस्था संभाल रहे होमगार्ड व पीआरडी जवानों से यातायात निरीक्षक द्वारा गाली गलौज से बात करने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित जवानों ने एसपी आवास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। बता दे कि नगर क्षेत्र में यातायात की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए यातायात आरक्षियों व उपनिरीक्षको के साथ होम गार्ड व पीआरडी के जवानों की ड्यूटी लगाई जाती है।व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिले के जवान दिन भर कड़ी धूप में सड़कों पर खड़े होकर यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित कराते है।लेकिन आरोप है कि यातायात निरीक्षक राम निरंजन यादव द्वारा सभी प्रांतीय रक्षक बल के जवानों से गाली देकर बात की जाती है। गाली गलौज से नाराज प्रांतीय रक्षक दल के जवान दर्जनों की संख्या में सोमवार को एसपी आवास पहुंचे। जहां पर क्षेत्राधिकारी नगर सौरभ सामंत ने उनकी शिकायत सुनकर कड़ी कार्यवाही का आश्वासन दिया।जवानों ने बताया कि ड्यूटी करने के बाद भी गाली देकर धमकी दी जाती है।1
- लम्भुआ ब्लॉक चौराहे पर भीषण जाम, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल लम्भुआ, सुलतानपुर। विधानसभा लम्भुआ के ब्लॉक चौराहे पर सोमवार को एक बार फिर भीषण जाम की स्थिति देखने को मिली। क्षेत्र में लगभग रोज लगने वाले इस जाम से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार पूरी तरह नदारद नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। चौराहे के आसपास ई-रिक्शा, ठेला और पटरी दुकानदारों का अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है, जिस पर पुलिस की अनदेखी साफ दिखाई देती है। लोगों का कहना है कि इन अवैध खड़े वाहनों और अतिक्रमण के चलते सड़क संकरी हो जाती है, जिससे जाम की समस्या विकराल रूप ले लेती है। आज जाम के दौरान पुलिस की ओर से यह तर्क दिया गया कि होमगार्ड परीक्षा के चलते पर्याप्त फोर्स उपलब्ध नहीं है। हालांकि स्थानीय नागरिक इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यह समस्या कोई एक दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है, जिस पर प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। जाम में फंसे स्कूली बच्चे, मरीज और रोजमर्रा के काम से निकले लोग घंटों परेशान होते रहे। राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि चौराहे पर नियमित पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त अभियान चलाया जाए, ताकि इस समस्या से स्थायी राहत मिल सके।1
- जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत सेमरीबाजार में उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया जब मुख्य मार्ग पर भीषण जाम लग गया देखते-देखते गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा स्थानीय लोगों के अनुसार बाजार में अव्यवस्थित पार्किंग सड़क के किनारें ठेलों की भरमार और बढ़ती भीड़ जाम का मुख्य कारण बना स्थिति इतनी बिगड़ गई की पैदल चलना मुश्किल हो गया कई लोग वैकल्पिक रास्ते खोजते नजर आए व्यापारियों का कहना है कि आए दिन लगने वाले जाम से न केवल आमजन परेशान है बल्कि व्यापारियों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।1
- जयसिंहपुर में निराश्रित गौवंश की बढ़ती समस्या और गौशालाओं की अव्यवस्थाओं को लेकर गुरुकुल वेद वेदांग विद्यापीठ, धनपतगंज के ब्रह्मचारियों ने सोमवार को जयसिंहपुर तहसील परिसर में प्रदर्शन कर तहसीलदार मयंक मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने गौ संरक्षण के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने के साथ गौ माता को राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग की। अभियान का नेतृत्व कर रहे आशुतोष जायसवाल ने कहा कि गौवंश भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम आधार है, लेकिन सड़कों पर घूम रहे निराश्रित पशु दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। विनय त्रिपाठी ने गौशालाओं की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए उनके सुदृढ़ीकरण और स्थायी आश्रय की व्यवस्था की मांग की। डॉ. सौरभ मिश्र ‘विनम्र’ ने इसे पर्यावरण और ग्रामीण जीवन से जुड़ा मुद्दा बताया। इस दौरान ब्रह्मचारिणियों ने स्लोगन लिखकर जागरूकता फैलाई और पंपलेट बांटकर लोगों से अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।4
- जनपद सुल्तानपुर के तहसील कादीपुर क्षेत्र के अंतर्गत कादीपुर में गौ माता के सम्मान में उप जिलाधिकारी महोदय को एक ज्ञापन सोपा गया जिसमें गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाएऔर उनके देखरेख के लिए एक कानून बनाया जाए जिसमें विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड मंत्री / जिला उपाध्यक्ष हिंदू वाहिनी संघ सुल्तानपुर राहुल कुमार सिंह ,गौ रक्षा प्रमुख शिवम दुबे जी सहगौरक्षा प्रमुख आर्यन तिवारी जी और गौ रक्षा संस्थान के कई पदाधिकारी की मौजूदगी रही यह ज्ञापन देश के राष्ट्रपति महोदया प्रधानमंत्री, राज्यपाल महोदया प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के नाम पर उप जिलाधिकारी महोदय को चार पेज की कॉपी सौंपी गई।।3
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- मेरठ में होमगार्ड का एग्जाम देकर लौट रहे युवक का हेलमेट चोरी हो गया वह पहली बार मेरठ आया था इसलिए रास्ता भटककर दिल्ली-मेरठ बाईपास पर पहुंच गया विनोद कुमार दरोगा जितेंद्र सिंह ने बिना किसी कारण के युवक को थप्पड़ मारे, गालियां दीं और बाइक का चालान काटते हुए ₹5000 भी छीन लिए1