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झुंझुनूं में इटली–मुंबई का रिश्ता बना अंतरराष्ट्रीय मिसाल, वैदिक विवाह में 13 देशों से आए मेहमानों ने खेली फूलों की होली

3 hrs ago
user_Amit Sharma
Amit Sharma
पत्रकार Jhunjhunun, Rajasthan•
3 hrs ago

झुंझुनूं में इटली–मुंबई का रिश्ता बना अंतरराष्ट्रीय मिसाल, वैदिक विवाह में 13 देशों से आए मेहमानों ने खेली फूलों की होली

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  • Post by Amit Sharma
    1
    Post by Amit Sharma
    user_Amit Sharma
    Amit Sharma
    पत्रकार Jhunjhunun, Rajasthan•
    3 hrs ago
  • विराट हिंदू सम्मेलन में परंपरा, पर्यावरण और सामाजिक समरसता का संदेश, झुंझुनूं में कलश यात्रा, श्रीराम समरसता यज्ञ और विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन, झुंझुनूं। परंपरागत भारतीय मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ रविवार को झुंझुनूं की परशुराम बस्ती में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन उत्साह और श्रद्धा के वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज के सानिध्य में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सूर्यमुखी बालाजी मंदिर, मोदियों की जाव से निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक परिधान में चुनरी ओढ़े सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं। महिलाओं की यह सहभागिता कार्यक्रम की विशेष पहचान बनी। यात्रा में घोड़े, ऊंट और डीजे आकर्षण का केंद्र रहे। डीजे पर देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों की गूंज सुनाई दी, वहीं “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से वातावरण राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो गया। कलश यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गाड़िया टाउन हॉल पहुंची। मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। स्थानीय नागरिकों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर श्रद्धालुओं पर फूल बरसाए, जिससे पूरा शहर भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। गाड़िया टाउन हॉल पहुंचने के पश्चात धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। यहां 51 जोड़ों द्वारा विधिवत रूप से श्रीराम समरसता यज्ञ में आहुतियां दी गईं। यज्ञ के माध्यम से समाज में समरसता, सद्भाव और एकता का संदेश दिया गया। यज्ञ स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की सुगंध से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। सम्मेलन के मुख्य अतिथि ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज ने अपने संबोधन में समाज से पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण का संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर आगे बढ़ी है और आज के समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके विकल्प अपनाने का आह्वान किया। ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज ने कहा कि परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें बचाए रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने समाज से अपने दैनिक जीवन में भारतीय संस्कारों को अपनाने और परिवार तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का आग्रह किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कुटुंब प्रमुख राजाराम सुरोलिया रहे। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कुटुंब व्यवस्था और संयुक्त परिवार प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार भारतीय समाज की रीढ़ रहा है, जिसमें संस्कारों का सहज रूप से हस्तांतरण होता है। आधुनिक समय में एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने संयुक्त परिवार व्यवस्था को पुनः सशक्त बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष मिश्राराम झाझडिया ने समाज को “पंच परिवर्तन” का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और परिवार मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से शुरुआत करे। सम्मेलन में विशिष्ट वक्ता डॉक्टर भावना शर्मा, गणेश हलवाई, शशिकांत चनानिया, अनिल अग्रवाल, रूपेश तुलस्यान, रवि गुप्ता, पंकज टेलर, लक्ष्मीकांत पुरोहित एवं डॉ. विद्या पुरोहित, सुधा पंवार, सौरव जोशी, ललित जोशी, संदीप गोयल, पंकज रोहिल्ला उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखते हुए सामाजिक एकता, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन संदीप शर्मा ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए अतिथियों का परिचय कराया और कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखी। सम्मेलन के समापन के पश्चात सर्व समाज द्वारा प्रसाद ग्रहण किया गया। आयोजन में सभी वर्गों की सहभागिता देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समाज में परंपरा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। कुल मिलाकर विराट हिंदू सम्मेलन सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को जागृत करने वाला आयोजन साबित हुआ, जिसने समाज को एकजुट होकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
    1
    विराट हिंदू सम्मेलन में परंपरा, पर्यावरण और सामाजिक समरसता का संदेश,
झुंझुनूं में कलश यात्रा, श्रीराम समरसता यज्ञ और विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन,
झुंझुनूं। परंपरागत भारतीय मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ रविवार को झुंझुनूं की परशुराम बस्ती में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन उत्साह और श्रद्धा के वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज के सानिध्य में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सूर्यमुखी बालाजी मंदिर, मोदियों की जाव से निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक परिधान में चुनरी ओढ़े सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं। महिलाओं की यह सहभागिता कार्यक्रम की विशेष पहचान बनी। यात्रा में घोड़े, ऊंट और डीजे आकर्षण का केंद्र रहे। डीजे पर देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों की गूंज सुनाई दी, वहीं “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से वातावरण राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो गया।
कलश यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गाड़िया टाउन हॉल पहुंची। मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। स्थानीय नागरिकों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर श्रद्धालुओं पर फूल बरसाए, जिससे पूरा शहर भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।
गाड़िया टाउन हॉल पहुंचने के पश्चात धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। यहां 51 जोड़ों द्वारा विधिवत रूप से श्रीराम समरसता यज्ञ में आहुतियां दी गईं। यज्ञ के माध्यम से समाज में समरसता, सद्भाव और एकता का संदेश दिया गया। यज्ञ स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की सुगंध से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज ने अपने संबोधन में समाज से पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण का संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर आगे बढ़ी है और आज के समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके विकल्प अपनाने का आह्वान किया।
ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज ने कहा कि परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें बचाए रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने समाज से अपने दैनिक जीवन में भारतीय संस्कारों को अपनाने और परिवार तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कुटुंब प्रमुख राजाराम सुरोलिया रहे। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कुटुंब व्यवस्था और संयुक्त परिवार प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार भारतीय समाज की रीढ़ रहा है, जिसमें संस्कारों का सहज रूप से हस्तांतरण होता है। आधुनिक समय में एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने संयुक्त परिवार व्यवस्था को पुनः सशक्त बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष मिश्राराम झाझडिया ने समाज को “पंच परिवर्तन” का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और परिवार मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से शुरुआत करे।
सम्मेलन में विशिष्ट वक्ता डॉक्टर भावना शर्मा, गणेश हलवाई, शशिकांत चनानिया, अनिल अग्रवाल, रूपेश तुलस्यान, रवि गुप्ता, पंकज टेलर, लक्ष्मीकांत पुरोहित एवं डॉ. विद्या पुरोहित, सुधा पंवार, सौरव जोशी, ललित जोशी, संदीप गोयल, पंकज रोहिल्ला उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखते हुए सामाजिक एकता, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन संदीप शर्मा ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए अतिथियों का परिचय कराया और कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखी।
सम्मेलन के समापन के पश्चात सर्व समाज द्वारा प्रसाद ग्रहण किया गया। आयोजन में सभी वर्गों की सहभागिता देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समाज में परंपरा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
कुल मिलाकर विराट हिंदू सम्मेलन सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को जागृत करने वाला आयोजन साबित हुआ, जिसने समाज को एकजुट होकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
    user_Jjn good news ( Rakesh Agrawal )
    Jjn good news ( Rakesh Agrawal )
    https://youtube.com/@Jjngoodnews झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • Post by हनुमान प्रसाद गुर्जर
    4
    Post by हनुमान प्रसाद गुर्जर
    user_हनुमान प्रसाद गुर्जर
    हनुमान प्रसाद गुर्जर
    चूरू, चूरू, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • ये लोग क्या है
    1
    ये लोग क्या है
    user_Ravi Banara
    Ravi Banara
    चूरू, चूरू, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • सुमित गुप्ता ने लोगों से प्रताड़ित होकर खा लिया जहरीला पदार्थ और अपने जीवन लीला समाप्त कर ले
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    सुमित गुप्ता ने लोगों से प्रताड़ित होकर खा लिया जहरीला पदार्थ और अपने जीवन लीला समाप्त कर ले
    user_KGB DIGITAL MEDIA
    KGB DIGITAL MEDIA
    Local News Reporter Mahendragarh, Haryana•
    8 hrs ago
  • Post by Pandit Munna Lal Bhargav
    1
    Post by Pandit Munna Lal Bhargav
    user_Pandit Munna Lal Bhargav
    Pandit Munna Lal Bhargav
    Astrologer धोद, सीकर, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • Post by Shiv Kumar
    1
    Post by Shiv Kumar
    user_Shiv Kumar
    Shiv Kumar
    Acupuncture clinic दादरी, चरखी दादरी, हरियाणा•
    2 hrs ago
  • विराट हिंदू सम्मेलन में परंपरा, पर्यावरण और सामाजिक समरसता का संदेश, झुंझुनूं में कलश यात्रा, श्रीराम समरसता यज्ञ और विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन, झुंझुनूं। परंपरागत भारतीय मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ रविवार को झुंझुनूं की परशुराम बस्ती में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन उत्साह और श्रद्धा के वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज के सानिध्य में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सूर्यमुखी बालाजी मंदिर, मोदियों की जाव से निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक परिधान में चुनरी ओढ़े सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं। महिलाओं की यह सहभागिता कार्यक्रम की विशेष पहचान बनी। यात्रा में घोड़े, ऊंट और डीजे आकर्षण का केंद्र रहे। डीजे पर देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों की गूंज सुनाई दी, वहीं “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से वातावरण राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो गया। कलश यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गाड़िया टाउन हॉल पहुंची। मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। स्थानीय नागरिकों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर श्रद्धालुओं पर फूल बरसाए, जिससे पूरा शहर भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। गाड़िया टाउन हॉल पहुंचने के पश्चात धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। यहां 51 जोड़ों द्वारा विधिवत रूप से श्रीराम समरसता यज्ञ में आहुतियां दी गईं। यज्ञ के माध्यम से समाज में समरसता, सद्भाव और एकता का संदेश दिया गया। यज्ञ स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की सुगंध से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। सम्मेलन के मुख्य अतिथि ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज ने अपने संबोधन में समाज से पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण का संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर आगे बढ़ी है और आज के समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके विकल्प अपनाने का आह्वान किया। ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज ने कहा कि परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें बचाए रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने समाज से अपने दैनिक जीवन में भारतीय संस्कारों को अपनाने और परिवार तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का आग्रह किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कुटुंब प्रमुख राजाराम सुरोलिया रहे। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कुटुंब व्यवस्था और संयुक्त परिवार प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार भारतीय समाज की रीढ़ रहा है, जिसमें संस्कारों का सहज रूप से हस्तांतरण होता है। आधुनिक समय में एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने संयुक्त परिवार व्यवस्था को पुनः सशक्त बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष मिश्राराम झाझडिया ने समाज को “पंच परिवर्तन” का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और परिवार मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से शुरुआत करे। सम्मेलन में विशिष्ट वक्ता डॉक्टर भावना शर्मा, गणेश हलवाई, शशिकांत चनानिया, अनिल अग्रवाल, रूपेश तुलस्यान, रवि गुप्ता, पंकज टेलर, लक्ष्मीकांत पुरोहित एवं डॉ. विद्या पुरोहित, सुधा पंवार, सौरव जोशी, ललित जोशी, संदीप गोयल, पंकज रोहिल्ला उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखते हुए सामाजिक एकता, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन संदीप शर्मा ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए अतिथियों का परिचय कराया और कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखी। सम्मेलन के समापन के पश्चात सर्व समाज द्वारा प्रसाद ग्रहण किया गया। आयोजन में सभी वर्गों की सहभागिता देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समाज में परंपरा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। कुल मिलाकर विराट हिंदू सम्मेलन सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को जागृत करने वाला आयोजन साबित हुआ, जिसने समाज को एकजुट होकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
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    विराट हिंदू सम्मेलन में परंपरा, पर्यावरण और सामाजिक समरसता का संदेश,
झुंझुनूं में कलश यात्रा, श्रीराम समरसता यज्ञ और विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन,
झुंझुनूं। परंपरागत भारतीय मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ रविवार को झुंझुनूं की परशुराम बस्ती में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन उत्साह और श्रद्धा के वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज के सानिध्य में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सूर्यमुखी बालाजी मंदिर, मोदियों की जाव से निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक परिधान में चुनरी ओढ़े सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं। महिलाओं की यह सहभागिता कार्यक्रम की विशेष पहचान बनी। यात्रा में घोड़े, ऊंट और डीजे आकर्षण का केंद्र रहे। डीजे पर देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों की गूंज सुनाई दी, वहीं “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से वातावरण राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो गया।
कलश यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गाड़िया टाउन हॉल पहुंची। मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। स्थानीय नागरिकों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर श्रद्धालुओं पर फूल बरसाए, जिससे पूरा शहर भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।
गाड़िया टाउन हॉल पहुंचने के पश्चात धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। यहां 51 जोड़ों द्वारा विधिवत रूप से श्रीराम समरसता यज्ञ में आहुतियां दी गईं। यज्ञ के माध्यम से समाज में समरसता, सद्भाव और एकता का संदेश दिया गया। यज्ञ स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की सुगंध से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज ने अपने संबोधन में समाज से पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण का संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर आगे बढ़ी है और आज के समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके विकल्प अपनाने का आह्वान किया।
ब्रह्मचारी गणेश चैतन्य महाराज ने कहा कि परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें बचाए रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने समाज से अपने दैनिक जीवन में भारतीय संस्कारों को अपनाने और परिवार तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कुटुंब प्रमुख राजाराम सुरोलिया रहे। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कुटुंब व्यवस्था और संयुक्त परिवार प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार भारतीय समाज की रीढ़ रहा है, जिसमें संस्कारों का सहज रूप से हस्तांतरण होता है। आधुनिक समय में एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने संयुक्त परिवार व्यवस्था को पुनः सशक्त बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष मिश्राराम झाझडिया ने समाज को “पंच परिवर्तन” का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और परिवार मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से शुरुआत करे।
सम्मेलन में विशिष्ट वक्ता डॉक्टर भावना शर्मा, गणेश हलवाई, शशिकांत चनानिया, अनिल अग्रवाल, रूपेश तुलस्यान, रवि गुप्ता, पंकज टेलर, लक्ष्मीकांत पुरोहित एवं डॉ. विद्या पुरोहित, सुधा पंवार, सौरव जोशी, ललित जोशी, संदीप गोयल, पंकज रोहिल्ला उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखते हुए सामाजिक एकता, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन संदीप शर्मा ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए अतिथियों का परिचय कराया और कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखी।
सम्मेलन के समापन के पश्चात सर्व समाज द्वारा प्रसाद ग्रहण किया गया। आयोजन में सभी वर्गों की सहभागिता देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समाज में परंपरा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
कुल मिलाकर विराट हिंदू सम्मेलन सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को जागृत करने वाला आयोजन साबित हुआ, जिसने समाज को एकजुट होकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
    user_Jjn good news ( Rakesh Agrawal )
    Jjn good news ( Rakesh Agrawal )
    https://youtube.com/@Jjngoodnews झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    20 hrs ago
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