चलोली में टला बड़ा हादसा: सूझबूझ से बचीं कई जिंदगियां, सड़क की हालत पर उठे सवाल। कृष्ण चंद राणा पांगी न्यूज़ टुडे। जनजातीय क्षेत्र पांगी में सोमवार देर शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अगर जरा सी भी चूक होती, तो कई घरों के चिराग बुझ सकते थे। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बस चलोली गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बच गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब पांच बजे किलाड़ सब डिपो से चलोली रूट के लिए बस रवाना हुई थी। गांव के पास पहुंचने पर सवारियों को उतारने के बाद जैसे ही चालक बस को मोड़ने लगा, तभी बस का पिछला टायर सड़क से बाहर की ओर खिसक गया। इससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत ब्रेक लगाकर बस को रोक लिया और पत्थरों का सहारा देकर बस को स्थिर किया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। मंगलवार को जेसीबी से निकाली गई बस मंगलवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने जेसीबी मशीन की मदद से बस को सुरक्षित बाहर निकाला। एहतियात के तौर पर निगम ने मंगलवार को इस रूट पर बस सेवा बंद रखी। पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर इसी तरह का हादसा होते-होते बचा था। उनका आरोप है कि सड़क किनारे सुरक्षा के लिए डंगा (रिटेनिंग वॉल) नहीं लगाया गया है, जिससे यह स्थान खतरनाक बना हुआ है। सड़क की हालत पर उठे सवाल एचआरटीसी पांगी सब डिपो के अड्डा प्रभारी राम चंद ने बताया कि विभाग को कई बार सड़कों की खराब स्थिति के बारे में अवगत करवाया गया है। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग फिटनेस प्रमाण पत्र तो जारी कर देता है, लेकिन जमीनी हकीकत में कई सड़कों की हालत खराब रहती है। उन्होंने बताया कि तांदी-संसारी नाला सड़क, प्रघवाल, महलू नाला, धरवास पुल सहित कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और डंगे गिर चुके हैं। बारिश और बर्फबारी के बाद इन सड़कों पर कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे बसें फिसलने का खतरा बना रहता है। आठ संवेदनशील स्थानों की सूची विभाग को भेजी निगम द्वारा पूंटो, प्रेग्राम, उडीन, चस्क और हुडान समेत आठ संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर सुधार के लिए विभाग को लिखा गया है। PWD का पक्ष लोक निर्माण विभाग पांगी के अधिशासी अभियंता रवि कुमार ने बताया कि सड़कों का फिटनेस प्रमाण पत्र निरीक्षण के बाद ही जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण कुछ स्थानों पर पानी और मिट्टी जमा होने से फिसलन हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि चलोली में सड़क पर्याप्त चौड़ी है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी व्यक्ति द्वारा सड़क किनारे पत्थर और लकड़ियां रख दी गई थीं, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई। मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील स्थानों पर जल्द डंगे लगाए जाएं और सड़कों की स्थिति को दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
चलोली में टला बड़ा हादसा: सूझबूझ से बचीं कई जिंदगियां, सड़क की हालत पर उठे सवाल। कृष्ण चंद राणा पांगी न्यूज़ टुडे। जनजातीय क्षेत्र पांगी में सोमवार देर शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अगर जरा सी भी चूक होती, तो कई घरों के चिराग बुझ सकते थे। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बस चलोली गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बच गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब पांच बजे किलाड़ सब डिपो से चलोली रूट के लिए बस रवाना हुई थी। गांव के पास पहुंचने पर सवारियों को उतारने के बाद जैसे ही चालक बस को मोड़ने लगा, तभी बस का पिछला टायर सड़क से बाहर की ओर खिसक गया। इससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत ब्रेक लगाकर बस को रोक लिया और पत्थरों का सहारा देकर बस को स्थिर किया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। मंगलवार को जेसीबी से निकाली गई बस मंगलवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने जेसीबी मशीन की मदद से बस को सुरक्षित बाहर निकाला। एहतियात के तौर पर निगम ने मंगलवार को इस रूट पर बस सेवा बंद रखी। पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर इसी तरह का हादसा होते-होते बचा था। उनका आरोप है कि सड़क किनारे सुरक्षा के लिए डंगा (रिटेनिंग वॉल) नहीं लगाया गया है, जिससे यह स्थान खतरनाक बना हुआ है। सड़क की हालत पर उठे सवाल एचआरटीसी पांगी सब डिपो के अड्डा प्रभारी राम चंद ने बताया कि विभाग को कई बार सड़कों की खराब स्थिति के बारे में अवगत करवाया गया है। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग फिटनेस प्रमाण पत्र तो जारी कर देता है, लेकिन जमीनी हकीकत में कई सड़कों की हालत खराब रहती है। उन्होंने बताया कि तांदी-संसारी नाला सड़क, प्रघवाल, महलू नाला, धरवास पुल सहित कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और डंगे गिर चुके हैं। बारिश और बर्फबारी के बाद इन सड़कों पर कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे बसें फिसलने का खतरा बना रहता है। आठ संवेदनशील स्थानों की सूची विभाग को भेजी निगम द्वारा पूंटो, प्रेग्राम, उडीन, चस्क और हुडान समेत आठ संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर सुधार के लिए विभाग को लिखा गया है। PWD का पक्ष लोक निर्माण विभाग पांगी के अधिशासी अभियंता रवि कुमार ने बताया कि सड़कों का फिटनेस प्रमाण पत्र निरीक्षण के बाद ही जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण कुछ स्थानों पर पानी और मिट्टी जमा होने से फिसलन हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि चलोली में सड़क पर्याप्त चौड़ी है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी व्यक्ति द्वारा सड़क किनारे पत्थर और लकड़ियां रख दी गई थीं, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई। मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील स्थानों पर जल्द डंगे लगाए जाएं और सड़कों की स्थिति को दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
- 📰 पांगी (चंबा), 31 मार्च: जनजातीय क्षेत्र पांगी के चलौली गांव में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की एक बस बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई। यह घटना एक बार फिर लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी तंत्र की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के बीचों-बीच बनी सड़क अत्यंत संकरी है और वहां किसी प्रकार की सुरक्षा दीवार भी नहीं लगाई गई है। हैरानी की बात यह है कि ऐसी खतरनाक सड़क को भी विभाग द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है। जब बस इस स्थान से गुजर रही थी, तो कुछ क्षणों के लिए यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। यदि जरा सी चूक हो जाती, तो यह हादसा बेहद भयावह रूप ले सकता था, जिससे न केवल बस सवार लोग बल्कि आसपास के रिहायशी मकान भी इसकी चपेट में आ सकते थे। धरवास पंचायत के उप प्रधान ने इस मामले में सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर ऐसी ही घटना हुई थी और इसकी सूचना विभाग को दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई सुधार कार्य नहीं किया गया। इस वर्ष फिर वही स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे विभाग की लापरवाही साफ झलकती है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि पांगी में तैनात कनिष्ठ अभियंता से लेकर सहायक अभियंता और अधिशाषी अभियंता तक सभी अधिकारी क्षेत्र से ही संबंधित होने के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। उनका ध्यान विकास कार्यों के बजाय निजी स्वार्थों पर अधिक केंद्रित है, जिससे क्षेत्र के लोगों को जोखिम उठाना पड़ रहा है। वहीं, क्षेत्र में अधिशाषी अभियंता की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक गुट विशेष अधिकारी को संरक्षण देकर उसे उच्च पद पर बैठाने की कोशिश में लगा हुआ है, जबकि क्षेत्र को अनुभवी और जिम्मेदार नेतृत्व की आवश्यकता है। गांववासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस सड़क का चौड़ीकरण कर सुरक्षा दीवार नहीं लगाई गई, तो वे लोक निर्माण विभाग के कार्यालय का घेराव करने के साथ-साथ सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस घटना के बाद संबंधित विभाग और सरकार कितनी गंभीरता दिखाते हैं और कब तक इस खतरनाक सड़क का सुधार कार्य किया जाता है।1
- जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के चलौली गांव में आज एक बड़ा हादसा टल गया, जब हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की एक बस खतरनाक मोड़ पर असंतुलित होने से बाल-बाल बच गई। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की जर्जर सड़कों और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चलौली गांव के बीच से गुजरने वाली सड़क बेहद संकरी है और यहां किसी प्रकार की सुरक्षा दीवार (पैरापेट) भी नहीं बनाई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क से रोजाना बसें और अन्य वाहन गुजरते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी जोखिमभरी सड़क को भी विभाग द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया गया है। घटना के दौरान बस जैसे ही गांव के संकरे हिस्से से गुजर रही थी, कुछ क्षणों के लिए उसका संतुलन बिगड़ गया और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि चालक की सूझबूझ से बस संभल गई, अन्यथा यह हादसा बेहद भयावह हो सकता था। अगर बस जरा भी फिसलती, तो न केवल यात्रियों की जान खतरे में पड़ती बल्कि आसपास के रिहायशी मकान भी इसकी चपेट में आ सकते थे। धरवास पंचायत के उप प्रधान ने इस मामले में सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर इसी तरह की घटना हो चुकी है, जिसकी सूचना विभाग को दी गई थी। इसके बावजूद आज तक न तो सड़क का चौड़ीकरण किया गया और न ही सुरक्षा दीवार का निर्माण हुआ, जो विभाग की घोर लापरवाही को दर्शाता है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पांगी में तैनात कनिष्ठ अभियंता से लेकर सहायक अभियंता और अधिशाषी अभियंता तक सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं। विकास कार्यों की अनदेखी कर निजी स्वार्थों को प्राथमिकता देने के कारण क्षेत्र के लोग लगातार खतरे में जीने को मजबूर हैं। वहीं, क्षेत्र में अधिशाषी अभियंता की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक विशेष गुट अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पसंदीदा अधिकारी को उच्च पद पर बैठाने की कोशिश कर रहा है, जबकि क्षेत्र को अनुभवी और जिम्मेदार नेतृत्व की सख्त जरूरत है। गांववासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस सड़क का चौड़ीकरण और सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं किया गया, तो वे लोक निर्माण विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू करेंगे और कार्यालय का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। अब यह देखना अहम होगा कि इस घटना के बाद प्रशासन और सरकार कितनी गंभीरता दिखाते हैं और कब तक इस जानलेवा सड़क की स्थिति में सुधार किया जाता है।1
- Ladange Saathi Theater Garup Patiala Punjab Written by Director Inayat Ali ji1
- Post by Varun Slathia1
- *बिलासपुर का ऐतिहासिक बम्म दंगल 2026 | युवराज अमृतसर बना विजेता | सौरव ने जीता हिमाचल केसरी U21*1
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- सुजानपुर हिमाचल प्रदेश में वाहनों पर प्रवेश कर के मुद्दे पर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर करारा हमला बोला है। राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रवेश कर में बढ़ोतरी से बाहरी राज्यों से हिमाचल में रोजमर्रा का सामान लाने वाले व्यापारियों पर भारी बोझ पड़ेगा, जिसका सीधा असर आम जनता पर होगा और प्रदेश में जरूरत का सामान और महंगा मिलेगा। राजेंद्र राणा ने कहा कि एक तरफ नरेंद्र मोदी द्वारा हिमाचल के लिए वित्तीय सहायता के रूप में ₹3,920 करोड़ जारी किए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ हिमाचल सरकार पेट्रोल और डीजल पर पाँच रुपये बढ़ाने और करों में वृद्धि कर जनता को निचोड़ने की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की जिद के आगे प्रदेश की जनता को नुकसान उठाना पड़ रहा है और प्रवेश कर बढ़ाने का फैसला तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से हिमाचल प्रदेश की छवि पहले ही खराब हो चुकी है और अब बची-खुची कसर भी पूरी हो जाएगी। फर्क केवल आम जनता को पड़ता है, लेकिन यह बात मुख्यमंत्री समझ नहीं पा रहे हैं। राणा ने मुख्यमंत्री सुक्खू से सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली के रेडिसन होटल में कमरा नंबर 411 में 72 घंटे तक वह क्या कर रहे थे। यदि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है तो इस बारे में जनता को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इस मुद्दे पर उनकी खामोशी से जनता के बीच मुख्यमंत्री की छवि और खराब हो रही है और यदि जल्द जवाब नहीं दिया गया तो स्थिति और गंभीर होगी।1
- Post by Varun Slathia1