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संजीत नाका पर मारपीट का VIDEO वायरल, दो लोगों ने युवक को पकड़कर पीटा मंदसौर। शहर के संजीत नाका क्षेत्र स्थित पेट्रोल पंप के सामने मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दो लोग एक व्यक्ति को पकड़कर उसके बाल खींचते और मारपीट करते नजर आ रहे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मारपीट में शामिल बताए जा रहे लोगों को थाने ले जाया गया। हालांकि, विवाद की असली वजह क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है।

21 hrs ago
user_मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
Carpenter Neemuch Nagar, Madhya Pradesh•
21 hrs ago

संजीत नाका पर मारपीट का VIDEO वायरल, दो लोगों ने युवक को पकड़कर पीटा मंदसौर। शहर के संजीत नाका क्षेत्र स्थित पेट्रोल पंप के सामने मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दो लोग एक व्यक्ति को पकड़कर उसके बाल खींचते और मारपीट करते नजर आ रहे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मारपीट में शामिल बताए जा रहे लोगों को थाने ले जाया गया। हालांकि, विवाद की असली वजह क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है।

More news from Neemuch and nearby areas
  • परमाणु ठिकानों पर हमले सही नहीं', BRICS ने अमेरिका-इजरायल को दिया सख्त संदेश, ईरान मुद्दे पर जताई चिंता नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव को लेकर सदस्य देशों ने गंभीर चिंता जताई है। शनिवार को जारी नई दिल्ली घोषणा में BRICS नेताओं ने नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों का विरोध किया। घोषणा में किसी देश का सीधे नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसका संदेश अमेरिका और इजरायल की ईरान से जुड़ी सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में देखा जा रहा है। परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने पर जताई गंभीर चिंता BRICS नेताओं ने कहा कि IAEA के पूर्ण सुरक्षा उपायों के तहत आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं और नागरिक बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। समूह ने इस बात पर जोर दिया कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा और संरक्षा के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि लोगों और पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके। BRICS की घोषणा में संबंधित देशों से तनाव कम करने और बातचीत एवं कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान खोजने की अपील भी की गई। इस रुख से साफ है कि समूह पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव को और बढ़ने से रोकने पर जोर दे रहा है। अमेरिका का सीधे नाम नहीं, लेकिन संदेश स्पष्ट BRICS की संयुक्त घोषणा में अमेरिका का नाम लेकर उसकी आलोचना नहीं की गई। यही बात इस बयान को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। घोषणा में शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों और एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध किया गया है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका का नाम लिए बिना भी यह संदेश काफी हद तक वॉशिंगटन की नीतियों की आलोचना के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई और उसके खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों का समर्थन किया है। हालांकि, BRICS के सभी सदस्य इस मुद्दे को लेकर एक जैसी भाषा इस्तेमाल नहीं करते हैं, इसलिए घोषणा में सीधे किसी देश को निशाना बनाने से बचा गया। ईरान के परमाणु ठिकाने बने विवाद का केंद्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका, इजरायल और तेहरान के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर सैन्य हमलों के बाद परमाणु सुरक्षा और IAEA की निगरानी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई। BRICS ने इसी व्यापक संदर्भ में शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर अपना रुख सामने रखा है। समूह का कहना है कि परमाणु प्रतिष्ठानों को सैन्य संघर्ष का निशाना बनाना बेहद गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। SIPRI के अनुसार, ईरान में परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों ने वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं और परमाणु सुविधाओं की सैन्य संघर्ष के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
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    परमाणु ठिकानों पर हमले सही नहीं', BRICS ने अमेरिका-इजरायल को दिया सख्त संदेश, ईरान मुद्दे पर जताई चिंता


नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव को लेकर सदस्य देशों ने गंभीर चिंता जताई है। शनिवार को जारी नई दिल्ली घोषणा में BRICS नेताओं ने नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों का विरोध किया। घोषणा में किसी देश का सीधे नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसका संदेश अमेरिका और इजरायल की ईरान से जुड़ी सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में देखा जा रहा है।
परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने पर जताई गंभीर चिंता
BRICS नेताओं ने कहा कि IAEA के पूर्ण सुरक्षा उपायों के तहत आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं और नागरिक बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। समूह ने इस बात पर जोर दिया कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा और संरक्षा के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि लोगों और पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।
BRICS की घोषणा में संबंधित देशों से तनाव कम करने और बातचीत एवं कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान खोजने की अपील भी की गई। इस रुख से साफ है कि समूह पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव को और बढ़ने से रोकने पर जोर दे रहा है।
अमेरिका का सीधे नाम नहीं, लेकिन संदेश स्पष्ट
BRICS की संयुक्त घोषणा में अमेरिका का नाम लेकर उसकी आलोचना नहीं की गई। यही बात इस बयान को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। घोषणा में शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों और एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध किया गया है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका का नाम लिए बिना भी यह संदेश काफी हद तक वॉशिंगटन की नीतियों की आलोचना के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई और उसके खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों का समर्थन किया है। हालांकि, BRICS के सभी सदस्य इस मुद्दे को लेकर एक जैसी भाषा इस्तेमाल नहीं करते हैं, इसलिए घोषणा में सीधे किसी देश को निशाना बनाने से बचा गया।
ईरान के परमाणु ठिकाने बने विवाद का केंद्र
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका, इजरायल और तेहरान के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर सैन्य हमलों के बाद परमाणु सुरक्षा और IAEA की निगरानी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई।
BRICS ने इसी व्यापक संदर्भ में शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर अपना रुख सामने रखा है। समूह का कहना है कि परमाणु प्रतिष्ठानों को सैन्य संघर्ष का निशाना बनाना बेहद गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
SIPRI के अनुसार, ईरान में परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों ने वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं और परमाणु सुविधाओं की सैन्य संघर्ष के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
    user_राठौड़ न्यूज एजेंसी
    राठौड़ न्यूज एजेंसी
    Jawad, Neemuch•
    11 hrs ago
  • NEWS:-नीमच में महू रोड पर गणेश मूर्तिकार रात से लापता, कारखाने पर भारी भीड़ और पुलिस बल तैनात मनासा ।गणेश चतुर्थी पर्व से ठीक पहले शहर के महू रोड स्थित मूर्ति कारखाने से मूर्तिकार (गोविंद पाल) के अचानक लापता हो जाने से हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही नीमच शहर सहित राजस्थान के नाथद्वारा, निम्बाहेड़ा और आसपास के कई अन्य क्षेत्रों से गणेश उत्सव समितियों के सदस्य भारी संख्या में कारखाने पर जमा हो गए। विवाद और हाथापाई के बाद गायब हुआ मूर्तिकार प्रत्यक्षदर्शियों और आयोजकों के अनुसार, मूर्तिकार गोविंद पाल और उसके कर्मचारियों के साथ बीती रात प्रतापगढ़/भीलवाड़ा क्षेत्र के कुछ आयोजकों द्वारा मारपीट और हाथापाई की गई थी। बताया जा रहा है कि मूर्तियों की समय पर डिलीवरी न होने और काम अधूरा रहने की वजह से विवाद हुआ। इस घटना के बाद से ही मूर्तिकार अचानक गायब हो गया और उसका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। आयोजकों की चिंता और हंगामा कारखाने पर पहुंचे आयोजक मुकेश (निम्बाहेड़ा) ने बताया कि समितियों ने कई महीने पहले हजारों रुपये एडवांस देकर मूर्तियां बुक कराई थीं। मूर्तिकार के गायब होने और आधी-अधूरी बनी मूर्तियों को देखकर लोग आक्रोशित हो गए। कारखाने के बाहर भीड़ जमा होने और रोड जाम की स्थिति बनने पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा। पुलिस ने संभाला मोर्चा केंट पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस की मौजूदगी में आयोजकों अपनी-अपनी बुक की गई मूर्तियां ले जा रहे है, और लापता मूर्तिकार की तलाश की जा रही है।
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    NEWS:-नीमच में महू रोड पर गणेश मूर्तिकार रात से लापता, कारखाने पर भारी भीड़ और पुलिस बल तैनात
मनासा ।गणेश चतुर्थी पर्व से ठीक पहले शहर के महू रोड स्थित मूर्ति कारखाने से मूर्तिकार (गोविंद पाल) के अचानक लापता हो जाने से हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही नीमच शहर सहित राजस्थान के नाथद्वारा, निम्बाहेड़ा और आसपास के कई अन्य क्षेत्रों से गणेश उत्सव समितियों के सदस्य भारी संख्या में कारखाने पर जमा हो गए।
विवाद और हाथापाई के बाद गायब हुआ मूर्तिकार
प्रत्यक्षदर्शियों और आयोजकों के अनुसार, मूर्तिकार गोविंद पाल और उसके कर्मचारियों के साथ बीती रात प्रतापगढ़/भीलवाड़ा क्षेत्र के कुछ आयोजकों द्वारा मारपीट और हाथापाई की गई थी। बताया जा रहा है कि मूर्तियों की समय पर डिलीवरी न होने और काम अधूरा रहने की वजह से विवाद हुआ। इस घटना के बाद से ही मूर्तिकार अचानक गायब हो गया और उसका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है।
आयोजकों की चिंता और हंगामा
कारखाने पर पहुंचे आयोजक मुकेश (निम्बाहेड़ा) ने बताया कि समितियों ने कई महीने पहले हजारों रुपये एडवांस देकर मूर्तियां बुक कराई थीं। मूर्तिकार के गायब होने और आधी-अधूरी बनी मूर्तियों को देखकर लोग आक्रोशित हो गए। कारखाने के बाहर भीड़ जमा होने और रोड जाम की स्थिति बनने पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
केंट पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस की मौजूदगी में आयोजकों अपनी-अपनी बुक की गई मूर्तियां ले जा रहे है, और लापता मूर्तिकार की तलाश की जा रही है।
    user_MANISH PRAJAPATI
    MANISH PRAJAPATI
    Me Press Reporter मनासा, नीमच, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • साँप का रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया - डेलवास गाँव डेलवास के रेगर मोहल्ले में अचानक साँप के दिखाई देने से आसपास के लोग एकत्रित हुए ओर मोहल्ले के एक व्यक्ति द्वारा साँप का सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया!
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    साँप का रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया - डेलवास
गाँव डेलवास के रेगर मोहल्ले में अचानक साँप के दिखाई देने से आसपास के लोग एकत्रित हुए ओर मोहल्ले के एक व्यक्ति द्वारा साँप का सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया!
    user_Laxman Lal
    Laxman Lal
    Salesperson भादेसर, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • चित्तौडगढ जिले में सालवी समाज द्वारा भादवी बीज पर डि.जे.के साथ निकला जुलूस
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    चित्तौडगढ जिले में सालवी समाज द्वारा भादवी बीज पर  डि.जे.के साथ निकला  जुलूस
    user_(GTV न्यूज राजस्थान)Laxman
    (GTV न्यूज राजस्थान)Laxman
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ में समाजसेवा, प्रतिभा सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ कई सामाजिक आयोजन #चित्तौड़गढ़ #सामाजिकसमाचार #सालवीसमाज #बाबारामदेवजी #शोभायात्रा #प्रतिभासम्मान #भामाशाह #ईकोफ्रेंडलीगणपति #पर्यावरणसंरक्षण #मीणासमाज #बेगूं #रविदासप्रकाशोत्सव #मेधावीविद्यार्थी #राणापूंजाजयंती #समाजसेवा #HelloChittorgarh सालवी समाज की भव्य बाबा रामदेव शोभायात्रा से लेकर ईको-फ्रेंडली गणपति कार्यशाला तक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के आयोजनों में शिक्षा, प्रतिभा सम्मान, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
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    चित्तौड़गढ़ में समाजसेवा, प्रतिभा सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ कई सामाजिक आयोजन
#चित्तौड़गढ़ #सामाजिकसमाचार #सालवीसमाज #बाबारामदेवजी #शोभायात्रा #प्रतिभासम्मान #भामाशाह #ईकोफ्रेंडलीगणपति #पर्यावरणसंरक्षण #मीणासमाज #बेगूं #रविदासप्रकाशोत्सव #मेधावीविद्यार्थी #राणापूंजाजयंती #समाजसेवा #HelloChittorgarh
सालवी समाज की भव्य बाबा रामदेव शोभायात्रा से लेकर ईको-फ्रेंडली गणपति कार्यशाला तक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के आयोजनों में शिक्षा, प्रतिभा सम्मान, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • जिला अस्पताल के औचक निरीक्षण में मिलीं कमियां, तत्काल सुधार के निर्देश नीमच जिला चिकित्सालय में डिप्टी कलेक्टर सुश्री श्रुति भयड़िया ने रात्रि में मातृत्व इकाई समेत विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति, प्रसूति वार्ड में सफाई व्यवस्था की कमी और कुछ मरीजों को बेडशीट नहीं मिलने जैसी कमियां सामने आईं। दवा वितरण केंद्र में सामान अव्यवस्थित मिला, जबकि ट्रॉमा यूनिट में सुरक्षा कर्मी अनुपस्थित पाया गया। मेडिकल वार्ड में बायो-वेस्ट बिन क्षमता से अधिक भरा था। लैब में कुछ नई मशीनों के रिएजेंट की सप्लाई नहीं होने की जानकारी मिली। डिप्टी कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा, स्वच्छता और मरीज सुविधाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
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    जिला अस्पताल के औचक निरीक्षण में मिलीं कमियां, तत्काल सुधार के निर्देश
नीमच जिला चिकित्सालय में डिप्टी कलेक्टर सुश्री श्रुति भयड़िया ने रात्रि में मातृत्व इकाई समेत विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति, प्रसूति वार्ड में सफाई व्यवस्था की कमी और कुछ मरीजों को बेडशीट नहीं मिलने जैसी कमियां सामने आईं। दवा वितरण केंद्र में सामान अव्यवस्थित मिला, जबकि ट्रॉमा यूनिट में सुरक्षा कर्मी अनुपस्थित पाया गया। मेडिकल वार्ड में बायो-वेस्ट बिन क्षमता से अधिक भरा था। लैब में कुछ नई मशीनों के रिएजेंट की सप्लाई नहीं होने की जानकारी मिली। डिप्टी कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा, स्वच्छता और मरीज सुविधाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
    user_मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
    मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
    Carpenter Neemuch Nagar, Madhya Pradesh•
    21 hrs ago
  • BRICS घोषणा पर सुबह 4 am तक चली बैठक, ईरान-रूस-चीन की आपत्तियों के बीच भारत ने कैसे साधा संतुलन? विस्तारित BRICS समूह के बीच नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाना भारत के लिए सिर्फ एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया नहीं थी। इसके पीछे कई महीनों से चल रही जटिल कूटनीतिक बातचीत थी, जिसमें अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय हित और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं सामने थीं। ईरान और UAE के बीच पश्चिम एशिया को लेकर मतभेद थे, सऊदी अरब की अपनी क्षेत्रीय चिंताएं थीं, रूस यूक्रेन से जुड़े किसी सीधे संदर्भ को लेकर सतर्क था और चीन BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा था। इसके बावजूद अंतिम दौर की बातचीत रात करीब 4 बजे तक चली और सभी सदस्य देश घोषणा पर सहमत हो गए। पश्चिम एशिया बना सबसे मुश्किल मुद्दा नई दिल्ली घोषणा पर बातचीत में सबसे कठिन मुद्दा पश्चिम एशिया की स्थिति रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चाहता था कि उसके क्षेत्र पर हुए हमलों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के कथित उल्लंघन का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। वहीं UAE की प्राथमिकता थी कि ईरानी हमलों को उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर दर्ज किया जाए। भारत ने किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराने वाली भाषा के बजाय साझा सिद्धांतों पर जोर दिया। अंतिम दस्तावेज में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और खराब कर सकते हैं। ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुख’ ने निकाला रास्ता घोषणा में ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुखों को स्मरण’ करने वाली भाषा महत्वपूर्ण मानी गई। इस फॉर्मूले ने सदस्य देशों को अपने अलग-अलग विचार बनाए रखते हुए साझा दस्तावेज पर सहमति बनाने का रास्ता दिया। यही संतुलन BRICS के लिए अहम रहा, क्योंकि संगठन में शामिल देशों की पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति को लेकर प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं। रूस ने यूक्रेन संदर्भ वाली भाषा पर जताई सावधानी रूस भी घोषणा पत्र की भाषा को लेकर सतर्क था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉस्को ऐसी शब्दावली से बचना चाहता था जिसे यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में सीधे पढ़ा जा सके। इसी वजह से दस्तावेज में रूस-यूक्रेन युद्ध का सीधा उल्लेख नहीं किया गया। इसके बजाय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीति जैसे व्यापक सिद्धांतों को जगह दी गई। इस भाषा ने BRICS के भीतर अलग-अलग राष्ट्रीय रुखों को एक साझा ढांचे में रखने में मदद की। चीन के एजेंडे को भी मिली जगह चीन की प्राथमिकता BRICS और ग्लोबल साउथ की भूमिका को और मजबूत करने की रही। नई दिल्ली घोषणा में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को समर्थन दिया गया। घोषणा में एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों, टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों को लेकर भी चिंता जताई गई। हालांकि, इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया। इस संतुलित भाषा के जरिए चीन और रूस की कुछ प्राथमिकताओं को जगह मिली, जबकि दस्तावेज किसी एक देश के खिलाफ राजनीतिक घोषणापत्र बनने से बचा रहा।
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    BRICS घोषणा पर सुबह 4 am तक चली बैठक, ईरान-रूस-चीन की आपत्तियों के बीच भारत ने कैसे साधा संतुलन?
विस्तारित BRICS समूह के बीच नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाना भारत के लिए सिर्फ एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया नहीं थी। इसके पीछे कई महीनों से चल रही जटिल कूटनीतिक बातचीत थी, जिसमें अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय हित और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं सामने थीं। ईरान और UAE के बीच पश्चिम एशिया को लेकर मतभेद थे, सऊदी अरब की अपनी क्षेत्रीय चिंताएं थीं, रूस यूक्रेन से जुड़े किसी सीधे संदर्भ को लेकर सतर्क था और चीन BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा था। इसके बावजूद अंतिम दौर की बातचीत रात करीब 4 बजे तक चली और सभी सदस्य देश घोषणा पर सहमत हो गए।
पश्चिम एशिया बना सबसे मुश्किल मुद्दा
नई दिल्ली घोषणा पर बातचीत में सबसे कठिन मुद्दा पश्चिम एशिया की स्थिति रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चाहता था कि उसके क्षेत्र पर हुए हमलों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के कथित उल्लंघन का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। वहीं UAE की प्राथमिकता थी कि ईरानी हमलों को उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर दर्ज किया जाए।
भारत ने किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराने वाली भाषा के बजाय साझा सिद्धांतों पर जोर दिया। अंतिम दस्तावेज में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और खराब कर सकते हैं।
‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुख’ ने निकाला रास्ता
घोषणा में ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुखों को स्मरण’ करने वाली भाषा महत्वपूर्ण मानी गई। इस फॉर्मूले ने सदस्य देशों को अपने अलग-अलग विचार बनाए रखते हुए साझा दस्तावेज पर सहमति बनाने का रास्ता दिया।
यही संतुलन BRICS के लिए अहम रहा, क्योंकि संगठन में शामिल देशों की पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति को लेकर प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं।
रूस ने यूक्रेन संदर्भ वाली भाषा पर जताई सावधानी
रूस भी घोषणा पत्र की भाषा को लेकर सतर्क था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉस्को ऐसी शब्दावली से बचना चाहता था जिसे यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में सीधे पढ़ा जा सके। इसी वजह से दस्तावेज में रूस-यूक्रेन युद्ध का सीधा उल्लेख नहीं किया गया।
इसके बजाय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीति जैसे व्यापक सिद्धांतों को जगह दी गई। इस भाषा ने BRICS के भीतर अलग-अलग राष्ट्रीय रुखों को एक साझा ढांचे में रखने में मदद की।
चीन के एजेंडे को भी मिली जगह
चीन की प्राथमिकता BRICS और ग्लोबल साउथ की भूमिका को और मजबूत करने की रही। नई दिल्ली घोषणा में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को समर्थन दिया गया।
घोषणा में एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों, टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों को लेकर भी चिंता जताई गई। हालांकि, इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया। इस संतुलित भाषा के जरिए चीन और रूस की कुछ प्राथमिकताओं को जगह मिली, जबकि दस्तावेज किसी एक देश के खिलाफ राजनीतिक घोषणापत्र बनने से बचा रहा।
    user_राठौड़ न्यूज एजेंसी
    राठौड़ न्यूज एजेंसी
    Jawad, Neemuch•
    11 hrs ago
  • MP -; मन्दसौर संजीत नाका क्षेत्र में पेट्रोल पंप के सामने 2 पक्षों में मारपीट, मौके पर जुटी लोगों की भीड़ ।। विवाद के चलते मौके पर कुछ देर हंगामे की स्थिति बनी रही।
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    MP -; मन्दसौर संजीत नाका क्षेत्र में पेट्रोल पंप के सामने 2 पक्षों में मारपीट, मौके पर जुटी लोगों की भीड़ ।।
विवाद के चलते मौके पर कुछ देर हंगामे की स्थिति बनी रही।
    user_MP - Nandkishor Rathore
    MP - Nandkishor Rathore
    Newspaper publisher मंदसौर नगर, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • MP - मन्दसौर जिला चिकित्सालय की, जहां अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि मरीजों के उपचार के लिए डॉक्टर तो मौजूद हैं, लेकिन मरीजों को संभालने और उनकी देखभाल में सहयोग करने वाले कर्मचारियों की कमी दिखाई दे रही है। ऐसे में मरीजों के साथ अस्पताल पहुंचने वाले परिजनों को खुद ही मरीज की देखभाल करनी पड़ रही है। इलाज के दौरान मरीज को संभालने से लेकर अन्य जरूरी व्यवस्थाओं तक की जिम्मेदारी कई बार परिजनों पर आ जाती है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सवाल यह है कि जिला चिकित्सालय में जब बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, तो उनकी देखभाल और आवश्यक सहयोग के लिए पर्याप्त कर्मचारी क्यों मौजूद नहीं रहते? मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या जिम्मेदार अधिकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नियमित निगरानी नहीं रखते? तस्वीरें खुद अस्पताल की व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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    MP - मन्दसौर जिला चिकित्सालय की, जहां अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि मरीजों के उपचार के लिए डॉक्टर तो मौजूद हैं, 
लेकिन मरीजों को संभालने और उनकी देखभाल में सहयोग करने वाले कर्मचारियों की कमी दिखाई दे रही है।
ऐसे में मरीजों के साथ अस्पताल पहुंचने वाले परिजनों को खुद ही मरीज की देखभाल करनी पड़ रही है। इलाज के दौरान मरीज को संभालने से लेकर अन्य जरूरी व्यवस्थाओं तक की जिम्मेदारी कई बार परिजनों पर आ जाती है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सवाल यह है कि जिला चिकित्सालय में जब बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, तो उनकी देखभाल और आवश्यक सहयोग के लिए पर्याप्त कर्मचारी क्यों मौजूद नहीं रहते?
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या जिम्मेदार अधिकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नियमित निगरानी नहीं रखते?
तस्वीरें खुद अस्पताल की व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
    user_MP - Nandkishor Rathore
    MP - Nandkishor Rathore
    Newspaper publisher मंदसौर नगर, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
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