BRICS घोषणा पर सुबह 4 am तक चली बैठक, ईरान-रूस-चीन की आपत्तियों के बीच भारत ने कैसे साधा संतुलन? विस्तारित BRICS समूह के बीच नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाना भारत के लिए सिर्फ एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया नहीं थी। इसके पीछे कई महीनों से चल रही जटिल कूटनीतिक बातचीत थी, जिसमें अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय हित और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं सामने थीं। ईरान और UAE के बीच पश्चिम एशिया को लेकर मतभेद थे, सऊदी अरब की अपनी क्षेत्रीय चिंताएं थीं, रूस यूक्रेन से जुड़े किसी सीधे संदर्भ को लेकर सतर्क था और चीन BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा था। इसके बावजूद अंतिम दौर की बातचीत रात करीब 4 बजे तक चली और सभी सदस्य देश घोषणा पर सहमत हो गए। पश्चिम एशिया बना सबसे मुश्किल मुद्दा नई दिल्ली घोषणा पर बातचीत में सबसे कठिन मुद्दा पश्चिम एशिया की स्थिति रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चाहता था कि उसके क्षेत्र पर हुए हमलों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के कथित उल्लंघन का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। वहीं UAE की प्राथमिकता थी कि ईरानी हमलों को उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर दर्ज किया जाए। भारत ने किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराने वाली भाषा के बजाय साझा सिद्धांतों पर जोर दिया। अंतिम दस्तावेज में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और खराब कर सकते हैं। ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुख’ ने निकाला रास्ता घोषणा में ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुखों को स्मरण’ करने वाली भाषा महत्वपूर्ण मानी गई। इस फॉर्मूले ने सदस्य देशों को अपने अलग-अलग विचार बनाए रखते हुए साझा दस्तावेज पर सहमति बनाने का रास्ता दिया। यही संतुलन BRICS के लिए अहम रहा, क्योंकि संगठन में शामिल देशों की पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति को लेकर प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं। रूस ने यूक्रेन संदर्भ वाली भाषा पर जताई सावधानी रूस भी घोषणा पत्र की भाषा को लेकर सतर्क था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉस्को ऐसी शब्दावली से बचना चाहता था जिसे यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में सीधे पढ़ा जा सके। इसी वजह से दस्तावेज में रूस-यूक्रेन युद्ध का सीधा उल्लेख नहीं किया गया। इसके बजाय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीति जैसे व्यापक सिद्धांतों को जगह दी गई। इस भाषा ने BRICS के भीतर अलग-अलग राष्ट्रीय रुखों को एक साझा ढांचे में रखने में मदद की। चीन के एजेंडे को भी मिली जगह चीन की प्राथमिकता BRICS और ग्लोबल साउथ की भूमिका को और मजबूत करने की रही। नई दिल्ली घोषणा में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को समर्थन दिया गया। घोषणा में एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों, टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों को लेकर भी चिंता जताई गई। हालांकि, इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया। इस संतुलित भाषा के जरिए चीन और रूस की कुछ प्राथमिकताओं को जगह मिली, जबकि दस्तावेज किसी एक देश के खिलाफ राजनीतिक घोषणापत्र बनने से बचा रहा।
BRICS घोषणा पर सुबह 4 am तक चली बैठक, ईरान-रूस-चीन की आपत्तियों के बीच भारत ने कैसे साधा संतुलन? विस्तारित BRICS समूह के बीच नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाना भारत के लिए सिर्फ एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया नहीं थी। इसके पीछे कई महीनों से चल रही जटिल कूटनीतिक बातचीत थी, जिसमें अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय हित और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं सामने थीं। ईरान और UAE के बीच पश्चिम एशिया को लेकर मतभेद थे, सऊदी अरब की अपनी क्षेत्रीय चिंताएं थीं, रूस यूक्रेन से जुड़े किसी सीधे संदर्भ को लेकर सतर्क था और चीन BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा था। इसके बावजूद अंतिम दौर की बातचीत रात करीब 4 बजे तक चली और सभी सदस्य देश घोषणा पर सहमत हो गए। पश्चिम एशिया बना सबसे मुश्किल मुद्दा नई दिल्ली घोषणा पर बातचीत में सबसे कठिन मुद्दा पश्चिम एशिया की स्थिति रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चाहता था कि उसके क्षेत्र पर हुए हमलों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के कथित उल्लंघन का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। वहीं UAE की प्राथमिकता थी कि ईरानी हमलों को उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर दर्ज किया जाए। भारत ने किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराने वाली भाषा के बजाय साझा सिद्धांतों पर जोर दिया। अंतिम दस्तावेज में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और खराब कर सकते हैं। ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुख’
ने निकाला रास्ता घोषणा में ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुखों को स्मरण’ करने वाली भाषा महत्वपूर्ण मानी गई। इस फॉर्मूले ने सदस्य देशों को अपने अलग-अलग विचार बनाए रखते हुए साझा दस्तावेज पर सहमति बनाने का रास्ता दिया। यही संतुलन BRICS के लिए अहम रहा, क्योंकि संगठन में शामिल देशों की पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति को लेकर प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं। रूस ने यूक्रेन संदर्भ वाली भाषा पर जताई सावधानी रूस भी घोषणा पत्र की भाषा को लेकर सतर्क था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉस्को ऐसी शब्दावली से बचना चाहता था जिसे यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में सीधे पढ़ा जा सके। इसी वजह से दस्तावेज में रूस-यूक्रेन युद्ध का सीधा उल्लेख नहीं किया गया। इसके बजाय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीति जैसे व्यापक सिद्धांतों को जगह दी गई। इस भाषा ने BRICS के भीतर अलग-अलग राष्ट्रीय रुखों को एक साझा ढांचे में रखने में मदद की। चीन के एजेंडे को भी मिली जगह चीन की प्राथमिकता BRICS और ग्लोबल साउथ की भूमिका को और मजबूत करने की रही। नई दिल्ली घोषणा में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को समर्थन दिया गया। घोषणा में एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों, टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों को लेकर भी चिंता जताई गई। हालांकि, इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया। इस संतुलित भाषा के जरिए चीन और रूस की कुछ प्राथमिकताओं को जगह मिली, जबकि दस्तावेज किसी एक देश के खिलाफ राजनीतिक घोषणापत्र बनने से बचा रहा।
- दो भैंसों ने बदली सुनील की जिंदगी, डेयरी प्लस योजना बनी आत्मनिर्भरता का सहारा नीमच जिले के मनासा विकासखंड के ग्राम चुकनी निवासी सुनील बंजारा ने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का लाभ लेकर डेयरी व्यवसाय को नई ऊंचाई दी। योजना के तहत उन्हें हरियाणा से दो भैंसें मिलीं, जिनकी इकाई लागत 2 लाख 95 हजार रुपये थी और 1 लाख 47 हजार 500 रुपये का अनुदान मिला। दोनों भैंसों से प्रतिदिन करीब 16 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध बिक्री से सुनील को लगभग 800 रुपये प्रतिदिन और 24 हजार रुपये मासिक आय हो रही है। पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से वे नस्ल सुधार पर भी काम कर रहे हैं। सुनील ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया।1
- NEWS:-नीमच में महू रोड पर गणेश मूर्तिकार रात से लापता, कारखाने पर भारी भीड़ और पुलिस बल तैनात मनासा ।गणेश चतुर्थी पर्व से ठीक पहले शहर के महू रोड स्थित मूर्ति कारखाने से मूर्तिकार (गोविंद पाल) के अचानक लापता हो जाने से हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही नीमच शहर सहित राजस्थान के नाथद्वारा, निम्बाहेड़ा और आसपास के कई अन्य क्षेत्रों से गणेश उत्सव समितियों के सदस्य भारी संख्या में कारखाने पर जमा हो गए। विवाद और हाथापाई के बाद गायब हुआ मूर्तिकार प्रत्यक्षदर्शियों और आयोजकों के अनुसार, मूर्तिकार गोविंद पाल और उसके कर्मचारियों के साथ बीती रात प्रतापगढ़/भीलवाड़ा क्षेत्र के कुछ आयोजकों द्वारा मारपीट और हाथापाई की गई थी। बताया जा रहा है कि मूर्तियों की समय पर डिलीवरी न होने और काम अधूरा रहने की वजह से विवाद हुआ। इस घटना के बाद से ही मूर्तिकार अचानक गायब हो गया और उसका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। आयोजकों की चिंता और हंगामा कारखाने पर पहुंचे आयोजक मुकेश (निम्बाहेड़ा) ने बताया कि समितियों ने कई महीने पहले हजारों रुपये एडवांस देकर मूर्तियां बुक कराई थीं। मूर्तिकार के गायब होने और आधी-अधूरी बनी मूर्तियों को देखकर लोग आक्रोशित हो गए। कारखाने के बाहर भीड़ जमा होने और रोड जाम की स्थिति बनने पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा। पुलिस ने संभाला मोर्चा केंट पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस की मौजूदगी में आयोजकों अपनी-अपनी बुक की गई मूर्तियां ले जा रहे है, और लापता मूर्तिकार की तलाश की जा रही है।1
- साँप का रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया - डेलवास गाँव डेलवास के रेगर मोहल्ले में अचानक साँप के दिखाई देने से आसपास के लोग एकत्रित हुए ओर मोहल्ले के एक व्यक्ति द्वारा साँप का सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया!1
- चित्तौडगढ जिले में सालवी समाज द्वारा भादवी बीज पर डि.जे.के साथ निकला जुलूस2
- चित्तौड़गढ़ में समाजसेवा, प्रतिभा सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ कई सामाजिक आयोजन #चित्तौड़गढ़ #सामाजिकसमाचार #सालवीसमाज #बाबारामदेवजी #शोभायात्रा #प्रतिभासम्मान #भामाशाह #ईकोफ्रेंडलीगणपति #पर्यावरणसंरक्षण #मीणासमाज #बेगूं #रविदासप्रकाशोत्सव #मेधावीविद्यार्थी #राणापूंजाजयंती #समाजसेवा #HelloChittorgarh सालवी समाज की भव्य बाबा रामदेव शोभायात्रा से लेकर ईको-फ्रेंडली गणपति कार्यशाला तक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के आयोजनों में शिक्षा, प्रतिभा सम्मान, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश1
- पर्युषण महापर्व पर भगवान की भव्य आंगी रचाई, सतखण्डा में महावीर स्वामी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। दैनिक वीरधरा राजस्थान। निम्बाहेड़ा। पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर सतखण्डा स्थित जैन मंदिर में भगवान की आकर्षक एवं मनमोहक अंगी रचना की गई। मंदिर को फूलों, पत्तियों एवं आकर्षक सजावट से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। पर्युषण पर्व के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। भगवान की भव्य आंगी रचना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा। इसी अवसर पर भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव भी श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जन्मोत्सव के दौरान भगवान महावीर स्वामी के जीवन एवं उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और जीव मात्र के प्रति करुणा के संदेश को याद किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी के जयकारे लगाए तथा सुख-शांति एवं विश्व कल्याण की मंगलकामना की।1
- BRICS घोषणा पर सुबह 4 am तक चली बैठक, ईरान-रूस-चीन की आपत्तियों के बीच भारत ने कैसे साधा संतुलन? विस्तारित BRICS समूह के बीच नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाना भारत के लिए सिर्फ एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया नहीं थी। इसके पीछे कई महीनों से चल रही जटिल कूटनीतिक बातचीत थी, जिसमें अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय हित और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं सामने थीं। ईरान और UAE के बीच पश्चिम एशिया को लेकर मतभेद थे, सऊदी अरब की अपनी क्षेत्रीय चिंताएं थीं, रूस यूक्रेन से जुड़े किसी सीधे संदर्भ को लेकर सतर्क था और चीन BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा था। इसके बावजूद अंतिम दौर की बातचीत रात करीब 4 बजे तक चली और सभी सदस्य देश घोषणा पर सहमत हो गए। पश्चिम एशिया बना सबसे मुश्किल मुद्दा नई दिल्ली घोषणा पर बातचीत में सबसे कठिन मुद्दा पश्चिम एशिया की स्थिति रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चाहता था कि उसके क्षेत्र पर हुए हमलों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के कथित उल्लंघन का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। वहीं UAE की प्राथमिकता थी कि ईरानी हमलों को उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर दर्ज किया जाए। भारत ने किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराने वाली भाषा के बजाय साझा सिद्धांतों पर जोर दिया। अंतिम दस्तावेज में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और खराब कर सकते हैं। ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुख’ ने निकाला रास्ता घोषणा में ‘अपने-अपने राष्ट्रीय रुखों को स्मरण’ करने वाली भाषा महत्वपूर्ण मानी गई। इस फॉर्मूले ने सदस्य देशों को अपने अलग-अलग विचार बनाए रखते हुए साझा दस्तावेज पर सहमति बनाने का रास्ता दिया। यही संतुलन BRICS के लिए अहम रहा, क्योंकि संगठन में शामिल देशों की पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति को लेकर प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं। रूस ने यूक्रेन संदर्भ वाली भाषा पर जताई सावधानी रूस भी घोषणा पत्र की भाषा को लेकर सतर्क था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉस्को ऐसी शब्दावली से बचना चाहता था जिसे यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में सीधे पढ़ा जा सके। इसी वजह से दस्तावेज में रूस-यूक्रेन युद्ध का सीधा उल्लेख नहीं किया गया। इसके बजाय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीति जैसे व्यापक सिद्धांतों को जगह दी गई। इस भाषा ने BRICS के भीतर अलग-अलग राष्ट्रीय रुखों को एक साझा ढांचे में रखने में मदद की। चीन के एजेंडे को भी मिली जगह चीन की प्राथमिकता BRICS और ग्लोबल साउथ की भूमिका को और मजबूत करने की रही। नई दिल्ली घोषणा में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को समर्थन दिया गया। घोषणा में एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों, टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों को लेकर भी चिंता जताई गई। हालांकि, इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया। इस संतुलित भाषा के जरिए चीन और रूस की कुछ प्राथमिकताओं को जगह मिली, जबकि दस्तावेज किसी एक देश के खिलाफ राजनीतिक घोषणापत्र बनने से बचा रहा।2
- नवम राष्ट्रीय पोषण माह में आयुर्वेदिक शिविर, पोषण का दिया संदेश नीमच जिले में नवम राष्ट्रीय पोषण माह के तहत आयुष विभाग द्वारा विभिन्न ग्रामों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा एवं पोषण जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। शिविरों में बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और धात्री माताओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श एवं आयुर्वेदिक औषधियां वितरित की गईं। हितग्राहियों को संतुलित, विविध और प्रोटीनयुक्त आहार के महत्व की जानकारी दी गई। दाल, चना, मूंग, सोयाबीन, दूध-दही, मूंगफली तथा ज्वार-बाजरा जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही योग, स्वच्छता और मलेरिया-डेंगू से बचाव के उपाय भी बताए गए।1
- चित्तौड़गढ़ में देवनारायण मेला और बाबा रामदेव जन्मोत्सव की धूम भक्ति और उत्साह से सराबोर चित्तौड़गढ़ जिला, भगवान देवनारायण के तीन दिवसीय मेले की तैयारियां तेज, वहीं भादवी बीज पर निम्बाहेड़ा में बाबा रामदेवजी की भव्य शोभायात्रा और अखाड़ा प्रदर्शन ने जीता लोगों का दिल1