राजस्थान के उदयपुर जिले के नवानिया में 2 राज आर एंड वी रेजीमेंट एनसीसी ने हेडक्वार्टर डीजी एनसीसी के तत्वावधान में 10 दिवसीय पोलो प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। इस शिविर को एनसीसी के सभी 17 निदेशालयों में अपनी तरह का पहला और अनूठा प्रयास माना जा रहा है। यह विशेष पहल राजस्थान, खासकर मेवाड़ क्षेत्र की घोड़ों को पालने और घुड़सवारी की समृद्ध परंपरा को ध्यान में रखते हुए की गई है। शिविर के दौरान, कैडेटों को पोलो खेल की सभी बारीकियों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। पोलो एक प्रतिस्पर्धी टीम खेल है जिसमें घोड़े पर सवार होकर खिलाड़ी स्टिक की सहायता से गेंद को प्रतिद्वंद्वी टीम के गोल तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं। फुटबॉल की तरह ही, यह खेल भी टीम भावना, सटीक रणनीति और व्यक्तिगत कौशल पर आधारित होता है, जिसमें प्रत्येक टीम से चार-चार खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका रिसालदार राइडर विजय सिंह ने निभाई। नवानिया के इस एनसीसी प्रशिक्षण शिविर में कैडेट्स ने पोलो के घोड़ों पर सवार होकर अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें कई अधिकारी भी मौजूद रहे।
राजस्थान के उदयपुर जिले के नवानिया में 2 राज आर एंड वी रेजीमेंट एनसीसी ने हेडक्वार्टर डीजी एनसीसी के तत्वावधान में 10 दिवसीय पोलो प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। इस शिविर को एनसीसी के सभी 17 निदेशालयों में अपनी तरह का पहला और अनूठा प्रयास माना जा रहा है। यह विशेष पहल राजस्थान, खासकर मेवाड़ क्षेत्र की घोड़ों को पालने और घुड़सवारी की समृद्ध परंपरा को ध्यान में रखते हुए की गई है। शिविर के दौरान, कैडेटों को पोलो खेल की सभी बारीकियों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। पोलो एक प्रतिस्पर्धी टीम खेल है जिसमें घोड़े पर सवार होकर खिलाड़ी स्टिक की सहायता से गेंद को प्रतिद्वंद्वी टीम के गोल तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं। फुटबॉल की तरह ही, यह खेल भी टीम भावना, सटीक रणनीति और व्यक्तिगत कौशल पर आधारित होता है, जिसमें प्रत्येक टीम से चार-चार खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका रिसालदार राइडर विजय सिंह ने निभाई। नवानिया के इस एनसीसी प्रशिक्षण शिविर में कैडेट्स ने पोलो के घोड़ों पर सवार होकर अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें कई अधिकारी भी मौजूद रहे।
- उदयपुर जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने मंगलवार शाम वल्लभनगर क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम पंचायत गोटिपा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर का निरीक्षण किया। कलक्टर अग्रवाल ने शिविर स्थल पर विभिन्न विभागों की स्टाॅल्स पर पहुँचकर उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की जानकारी ली और आमजन से प्राप्त होने वाली परिवेदनाओं के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया को समझा। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि सेवा शिविरों का उद्देश्य राज्य सरकार की मंशा के अनुसार आमजन के राजस्व सहित विभिन्न विभागों से जुड़े कार्यों का हाथों हाथ समाधान कर उन्हें राहत पहुँचाना है। जिला कलक्टर ने इस दौरान आमजन से सीधा संवाद भी किया और उनकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।1
- बड़ी सदड़ी में रेलवे ट्रैक निर्माण कार्य के दौरान भारी मात्रा में क्वेंच स्टूडियो में फंसे लोगों की शिकायतें सामने आई हैं। यहां रेलवे ट्रैक पर स्टोन स्टोन स्टॉकहोम का विरोध भी किया जा रहा है। इस संबंध में, एक ग्रामीण महिला ने रेलवे अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि यदि यह अवशेष तुरंत नहीं हटाया गया, तो गांव के लोग, बकरियां और गाय के बच्चे रेलवे ट्रैक पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। महिला ने रेलवे निर्माण से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की लेबल जांच और जिम्मेदार अधिकारियों तथा दशों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही, महिला ने ट्रैक और आसपास के क्षेत्रों से नारियल के गोले को भी तुरंत हटाने की अपील की है।1
- भारतीय पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर 17 जून को उदयपुर के मोती मगरी स्थित महाराणा प्रताप स्मारक समिति में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं गौरवपूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस विशेष अवसर पर, मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान और महाराणा प्रताप के वंशज श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ की ओर से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जिसके तहत 486 दीप प्रज्ज्वलित किए गए और 486 किलोग्राम लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया। मोती मगरी में स्थापित वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की भव्य अश्वारूढ़ प्रतिमा को इस दौरान पुष्पमालाओं और आकर्षक सज्जा से अलंकृत किया गया। महाराणा प्रताप स्मारक समिति के प्रशासनिक अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि समिति के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ के निर्देशानुसार, जयंती के पावन अवसर पर प्रातः 8 बजे से सायं 6 बजे तक स्मारक पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं दर्शनार्थियों के लिए निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई थी। इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ ने युवाओं का आह्वान करते हुए संदेश दिया कि महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, स्वाभिमान, राष्ट्रनिष्ठा और संघर्ष का अनुपम प्रतीक है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे महाराणा प्रताप के आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण एवं समाजसेवा में सक्रिय भूमिका निभाएं, क्योंकि यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।1
- डूंगला में अरावली पर्वतमाला की ऐलागढ़ पहाड़ी पर स्थित प्राचीन ऐलवा माताजी मंदिर में सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर, लोक न्यास ट्रस्ट एवं ऐलवा माता विकास समिति द्वारा मंदिर का भंडार विधिवत खोला गया। समिति के पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में हुई गणना में भंडार से 1 लाख 52 हजार 360 रुपये की नकद राशि और श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए आभूषण प्राप्त हुए। यह मंदिर क्षेत्र के प्राचीनतम और प्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक है, जहाँ वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं। ग्रामीणों और भक्तों का अटूट विश्वास है कि माता के दरबार में सच्ची श्रद्धा से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इसी आस्था के चलते, मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु माता को नकद, आभूषण और अन्य चढ़ावा अर्पित करने के साथ-साथ मंदिर परिसर में भोजन प्रसादी (भंडारे) का आयोजन भी करवाते हैं, जो यहाँ की वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, भंडार में प्राप्त हुई राशि का उपयोग मंदिर के विकास, धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा। प्राप्त आभूषणों को भी नियमानुसार सुरक्षित रखते हुए अभिलेखों में दर्ज कर लिया गया है। सोमवती अमावस्या पर मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष नारायण लाल व्यास, ओंकार लाल व्यास, पूरणमल अहीर, दुर्गाशंकर शर्मा सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धालुओं के सहयोग और विश्वास के प्रति आभार व्यक्त करते हुए जनसहयोग से मंदिर की धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।2
- Post by फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांद4
- वीरता, शौर्य, स्वाभिमान एवं त्याग के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर चित्तौड़गढ़ में एक पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर एवं ग्रामीण कांग्रेस के तत्वावधान में तथा पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत के नेतृत्व में यह कार्यक्रम बुधवार 17 जून को प्रातः 9:30 बजे जिला कलेक्टर निवास के सामने प्रताप सर्किल स्थित शहीद स्मारक पर सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में उपस्थित कांग्रेस पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित किए। सभी ने उनके अद्वितीय साहस, राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर, पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संघर्ष, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम की एक अमिट गाथा है। उन्होंने जोर दिया कि महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं किया, और उनका जीवन आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत बना हुआ है।1
- चित्तौड़गढ़ की पुण्य एवं वीरभूमि पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गौरव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आदरणीय विधायक महोदय, वरिष्ठजन, युवा साथियों, मातृशक्ति और नन्हे-मुन्ने बच्चों सहित बड़ी संख्या में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने अमर प्रतीक महाराणा प्रताप को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके महान आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। महाराणा प्रताप को केवल एक नाम नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष, आत्मसम्मान, राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की जीवंत मिसाल बताया गया। उनकी जयंती पर यह संदेश दिया गया कि महाराणा प्रताप ने सम्पूर्ण विश्व को सिखाया कि परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों, अपने स्वाभिमान, संस्कृति और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। उन्हें "घास की रोटी खाकर भी जिसने स्वाभिमान बचाया था, मातृभूमि की रक्षा हेतु जिसने जीवन भर संघर्ष निभाया था" कहकर स्मरण किया गया, यह दोहराते हुए कि उनका जीवन इतिहास नहीं, बल्कि हर भारतवासी के हृदय में बसने वाली राष्ट्रभक्ति की चेतना और प्रेरणा है। इस अवसर पर, आयुष हॉस्पिटल (NABH सर्टिफाइड आयुर्वेद हॉस्पिटल), चित्तौड़गढ़, और डॉ. सी. पी. पटेल ने सभी नागरिकों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने महाराणा प्रताप के आत्मबल, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेते हुए अपने जीवन में नित्य योग, आयुर्वेदिक दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया। हॉस्पिटल ने बताया कि योग शरीर, मन और आत्मा को सशक्त बनाता है, जबकि स्वदेशी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद हमारी हजारों वर्षों पुरानी वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है, जो स्वस्थ, निरोग और संतुलित जीवन का आधार है। भारतीय संस्कृति को केवल जीवन जीना सिखाने वाली नहीं, बल्कि स्वस्थ, संस्कारित, अनुशासित और सम्मानपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाने वाली अमूल्य विरासत बताया गया। विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया गया कि वे महाराणा प्रताप के जीवन से साहस, नेतृत्व, राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और संघर्षशीलता की प्रेरणा लेकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। यह भी बल दिया गया कि आज भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो अपने संस्कारों, संस्कृति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानें। इस पावन अवसर पर, "जो अपनी संस्कृति का मान रखे, वही सच्चा वीर कहलाता है, योग, आयुर्वेद और राष्ट्रप्रेम से ही भारत विश्वगुरु बन पाता है" के संकल्प को दोहराया गया। सभी ने महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने और एक स्वस्थ, स्वाभिमानी, संस्कारित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का प्रण लिया, इस विश्वास के साथ कि जब तक सूर्य चंद्र रहेगा, मेवाड़ का गौरव अमर रहेगा।4
- उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर आधी रात के बाद एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, जहाँ देबारी स्थित घाटावाला माताजी मंदिर के सामने एक तेज रफ्तार ऑल्टो कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर पलट गई। इस भीषण हादसे में कार सवार एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त कार में कुल चार लोग सवार थे और वह उदयपुर की तरफ जा रही थी, तभी घाटावाला माताजी मंदिर के पास अचानक अनियंत्रित होकर हाईवे के डिवाइडर से जा टकराई।1