आज पोरसा नगर में धर्म, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला, जहाँ श्री नागाजी सफाई अभियान टीम के सदस्यों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ नगर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष सफाई अभियान चलाया। इस अभियान के तहत श्री नागाजी मंदिर, छोटी जग्गा मंदिर, गिर्राज जी मंदिर और करोली वाली माता मंदिर के परिसरों की बारीकी से सफाई की गई, जिसमें झाड़ू-पोछा और पानी से धुलाई कर संपूर्ण स्थल को स्वच्छ और पवित्र बनाया गया। यह नियमित सफाई न केवल वातावरण को शुद्ध करती है, बल्कि श्रद्धालुओं के मन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। उल्लेखनीय है कि पोरसा शहर के समाजसेवियों द्वारा लगभग नौ वर्ष पूर्व इस टीम का गठन किया गया था, और तब से लेकर आज तक यह टीम हर महीने दंदरौआ मंदिर, शहर के कई अन्य मंदिरों सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नियमित रूप से सफाई अभियान चलाती आ रही है, जो इनकी सेवा भावना और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। आज के इस पुनीत कार्य में बबलू दुबे, रामसनेही सिंह तोमर, गंभीर सिंह तोमर, संजय शर्मा, राममोहन कटारे, मुकेश शर्मा, रवि ओझा, अवधेश शर्मा, अनिल शर्मा, नितिन शर्मा, ओमप्रकाश कुशवाहा, अनुज दुबे, गिर्राज सिंह तोमर, धरमेश शर्मा, धर्मेंद्र कुशवाहा और सनी रजक सहित कई समाजसेवियों ने भाग लेकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से मंदिर की सफाई से अनेक पुण्य लाभ प्राप्त होते हैं। हिंदू धर्म में मंदिर को भगवान का निवास स्थान माना जाता है, और इसकी सफाई ईश्वर की सीधी सेवा के समान है, जिससे आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। निःस्वार्थ सेवा मन और आत्मा को शुद्ध करती है, क्योंकि सफाई करते समय व्यक्ति का ध्यान ईश्वर में लगता है, जिससे मानसिक शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। स्वच्छ और सुव्यवस्थित मंदिर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, जो श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, ऐसे कार्य समाज में स्वच्छता और सेवा का संदेश देकर दूसरों को प्रेरित करते हैं और बीमारियों का खतरा कम करके पूरे समाज को स्वास्थ्य लाभ भी देते हैं। श्री नागाजी सफाई अभियान टीम का यह निरंतर प्रयास इस बात को सिद्ध करता है कि "सेवा ही सच्चा धर्म है।" इन समाजसेवियों की निस्वार्थ भावना न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। पोरसा के नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस तरह के पुण्य कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने धार्मिक स्थलों को स्वच्छ व पवित्र बनाए रखने में सहयोग करें।
आज पोरसा नगर में धर्म, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला, जहाँ श्री नागाजी सफाई अभियान टीम के सदस्यों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ नगर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष सफाई अभियान चलाया। इस अभियान के तहत श्री नागाजी मंदिर, छोटी जग्गा मंदिर, गिर्राज जी मंदिर और करोली वाली माता मंदिर के परिसरों की बारीकी से सफाई की गई, जिसमें झाड़ू-पोछा और पानी से धुलाई कर संपूर्ण स्थल को स्वच्छ और पवित्र बनाया गया। यह नियमित सफाई न केवल वातावरण को शुद्ध करती है, बल्कि श्रद्धालुओं के मन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। उल्लेखनीय है कि पोरसा शहर के समाजसेवियों द्वारा लगभग नौ वर्ष पूर्व इस टीम का गठन किया गया था, और तब से लेकर आज तक यह टीम हर महीने दंदरौआ मंदिर, शहर के कई अन्य मंदिरों सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नियमित रूप से सफाई अभियान चलाती आ रही है, जो इनकी सेवा भावना और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। आज के इस पुनीत कार्य में बबलू दुबे, रामसनेही सिंह तोमर, गंभीर सिंह तोमर, संजय शर्मा, राममोहन कटारे, मुकेश शर्मा, रवि ओझा, अवधेश शर्मा, अनिल शर्मा, नितिन शर्मा, ओमप्रकाश कुशवाहा, अनुज दुबे, गिर्राज सिंह तोमर, धरमेश शर्मा, धर्मेंद्र कुशवाहा और सनी रजक सहित कई समाजसेवियों ने भाग लेकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से मंदिर की सफाई से अनेक पुण्य लाभ प्राप्त होते हैं। हिंदू धर्म में मंदिर को भगवान का निवास स्थान माना जाता है, और इसकी सफाई ईश्वर की सीधी सेवा के समान है, जिससे आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। निःस्वार्थ सेवा मन और आत्मा को शुद्ध करती है, क्योंकि सफाई करते समय व्यक्ति का ध्यान ईश्वर में लगता है, जिससे मानसिक शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। स्वच्छ और सुव्यवस्थित मंदिर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, जो श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, ऐसे कार्य समाज में स्वच्छता और सेवा का संदेश देकर दूसरों को प्रेरित करते हैं और बीमारियों का खतरा कम करके पूरे समाज को स्वास्थ्य लाभ भी देते हैं। श्री नागाजी सफाई अभियान टीम का यह निरंतर प्रयास इस बात को सिद्ध करता है कि "सेवा ही सच्चा धर्म है।" इन समाजसेवियों की निस्वार्थ भावना न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। पोरसा के नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस तरह के पुण्य कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने धार्मिक स्थलों को स्वच्छ व पवित्र बनाए रखने में सहयोग करें।
- पोरसा नगर में श्री नागाजी सफाई अभियान टीम के सदस्यों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया, जिसमें नगर के प्रमुख धार्मिक स्थल—श्री नागाजी मंदिर, छोटी जग्गा मंदिर, गिर्राज जी मंदिर और करोली वाली माता मंदिर—शामिल थे। इस अभियान के दौरान मंदिर परिसरों की बारीकी से झाड़ू-पोछा और पानी से धुलाई की गई, जिससे संपूर्ण परिसर स्वच्छ और पवित्र हो गया। टीम का मानना है कि इस तरह की नियमित सफाई से न केवल वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि श्रद्धालुओं के मन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह टीम लगभग नौ वर्ष पूर्व पोरसा शहर के समाजसेवियों द्वारा गठित की गई थी। तब से लेकर आज तक यह टीम हर महीने दंदरौआ मंदिर, शहर के कई मंदिरों सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर नियमित रूप से सफाई अभियान चलाती आ रही है, जो इनकी निरंतर सेवा भावना और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। आज के इस पुनीत कार्य में मुख्य रूप से बबलू दुबे, रामसनेही सिंह तोमर, गंभीर सिंह तोमर, संजय शर्मा, राममोहन कटारे, मुकेश शर्मा, रवि ओझा, अवधेश शर्मा, अनिल शर्मा, नितिन शर्मा, ओमप्रकाश कुशवाहा, अनुज दुबे, गिर्राज सिंह तोमर, धरमेश शर्मा, धर्मेंद्र कुशवाहा और सनी रजक सहित कई समाजसेवियों ने सक्रिय भूमिका निभाकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से इस सफाई अभियान को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है, मन और आत्मा की शुद्धि होती है, तथा स्वच्छ वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। ऐसे कार्य समाज में स्वच्छता और सेवा का संदेश देते हुए दूसरों को भी सामाजिक व धार्मिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते हैं, साथ ही साफ-सफाई से स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। श्री नागाजी सफाई अभियान टीम का यह प्रयास यह सिद्ध करता है कि “सेवा ही सच्चा धर्म है।” टीम ने पोरसा के नागरिकों से अपील की है कि वे भी इस तरह के पुण्य कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने धार्मिक स्थलों को स्वच्छ व पवित्र बनाए रखने में सहयोग करें।3
- आज पोरसा नगर में धर्म, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला, जहाँ श्री नागाजी सफाई अभियान टीम के सदस्यों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ नगर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष सफाई अभियान चलाया। इस अभियान के तहत श्री नागाजी मंदिर, छोटी जग्गा मंदिर, गिर्राज जी मंदिर और करोली वाली माता मंदिर के परिसरों की बारीकी से सफाई की गई, जिसमें झाड़ू-पोछा और पानी से धुलाई कर संपूर्ण स्थल को स्वच्छ और पवित्र बनाया गया। यह नियमित सफाई न केवल वातावरण को शुद्ध करती है, बल्कि श्रद्धालुओं के मन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। उल्लेखनीय है कि पोरसा शहर के समाजसेवियों द्वारा लगभग नौ वर्ष पूर्व इस टीम का गठन किया गया था, और तब से लेकर आज तक यह टीम हर महीने दंदरौआ मंदिर, शहर के कई अन्य मंदिरों सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नियमित रूप से सफाई अभियान चलाती आ रही है, जो इनकी सेवा भावना और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। आज के इस पुनीत कार्य में बबलू दुबे, रामसनेही सिंह तोमर, गंभीर सिंह तोमर, संजय शर्मा, राममोहन कटारे, मुकेश शर्मा, रवि ओझा, अवधेश शर्मा, अनिल शर्मा, नितिन शर्मा, ओमप्रकाश कुशवाहा, अनुज दुबे, गिर्राज सिंह तोमर, धरमेश शर्मा, धर्मेंद्र कुशवाहा और सनी रजक सहित कई समाजसेवियों ने भाग लेकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से मंदिर की सफाई से अनेक पुण्य लाभ प्राप्त होते हैं। हिंदू धर्म में मंदिर को भगवान का निवास स्थान माना जाता है, और इसकी सफाई ईश्वर की सीधी सेवा के समान है, जिससे आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। निःस्वार्थ सेवा मन और आत्मा को शुद्ध करती है, क्योंकि सफाई करते समय व्यक्ति का ध्यान ईश्वर में लगता है, जिससे मानसिक शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। स्वच्छ और सुव्यवस्थित मंदिर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, जो श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, ऐसे कार्य समाज में स्वच्छता और सेवा का संदेश देकर दूसरों को प्रेरित करते हैं और बीमारियों का खतरा कम करके पूरे समाज को स्वास्थ्य लाभ भी देते हैं। श्री नागाजी सफाई अभियान टीम का यह निरंतर प्रयास इस बात को सिद्ध करता है कि "सेवा ही सच्चा धर्म है।" इन समाजसेवियों की निस्वार्थ भावना न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। पोरसा के नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस तरह के पुण्य कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने धार्मिक स्थलों को स्वच्छ व पवित्र बनाए रखने में सहयोग करें।1
- देश में सरकारी दफ्तर जहाँ सुबह ठीक 6 बजे खुल जाते हैं, वहीं सरकारी स्कूल दोपहर 12 बजे खुलते हैं। यह स्थिति कार्यप्रणाली में एक अजीब विसंगति को उजागर करती है, जिससे व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।1
- आगरा जिले के शमशाबाद क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना हुई, जहाँ कूलर में करंट आ जाने के कारण एक पति और पत्नी की मृत्यु हो गई।1
- आगरा के थाना खंदौली अंतर्गत बास मोहन सहाय स्थित आगरा-जलेसर रोड पर ग्रामीणों ने भीषण जाम लगा दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यह विरोध प्रदर्शन गाँव में पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति न होने के कारण हुआ, जिससे ग्रामीण अत्यधिक परेशान थे। ग्रामीणों का आरोप है कि जेई की लापरवाही के कारण ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया है, वहीं निजी विद्युत कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं और बिना पैसे लिए कोई काम नहीं करते। उनका कहना है कि लगातार शिकायतें करने के बावजूद विद्युत विभाग इस समस्या पर आँखें बंद कर सोया हुआ है। ग्रामीणों के इस हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। इस बीच, क्षेत्रीय विधायक को भी घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने तत्काल विद्युत विभाग के अधिकारियों के कान खींचे और उन्हें तुरंत ट्रांसफार्मर बदलने का आदेश दिया।1
- रावतपुरा थाना पुलिस ने चौरई पर स्थित लला ढाबा पर कार्रवाई करते हुए अवैध शराब का एक बड़ा जखीरा, एक देशी 315 बोर की बंदूक और पाँच जिंदा कारतूस जब्त किए हैं। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में, पुलिस ने ढाबा से 50 देशी शराब सफेद क्वाटर, 50 लाल मशाला शराब क्वाटर और 24 बीयर की केन बरामद की। इस मामले में रामनरेश चौहान उर्फ लला और चिरुली निवासी शैलेन्द्र परिहार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उनके विरुद्ध आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) और आयुध अधिनियम की धारा 25(1-B)(a) व 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी शैलेन्द्र परिहार को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि रामनरेश उर्फ लला की तलाश जारी है।1
- अंबाह नगर के वार्ड क्रमांक 17 स्थित तालाब में एक मगरमच्छ दिखाई देने से क्षेत्र में दहशत फैल गई है। शनिवार को तालाब के पास खेल रहे बच्चों को देखकर मगरमच्छ पानी से निकलकर किनारे तक आ गया। बच्चों ने सूझबूझ और सतर्कता दिखाते हुए तुरंत वहां से भागकर अपनी जान बचाई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि तालाब के आसपास प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं और लोगों का आना-जाना भी लगा रहता है, जिससे मगरमच्छ की मौजूदगी कभी भी किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से तालाब में मगरमच्छ दिखने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में लगातार भय बना हुआ है। लोगों ने बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तालाब के आसपास आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन और वन विभाग से जल्द से जल्द रेस्क्यू अभियान चलाकर मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़कर उपयुक्त स्थान पर छोड़ने की भी मांग की है, ताकि क्षेत्रवासियों को इस भय से राहत मिल सके और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका समाप्त हो सके।1