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शनिवार को शिवाड़ सारसोप क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे तेज अंधड़ और धूलभरी हवाएं चलने लगीं। इस अचानक आए अंधड़ के कारण बाजारों और सड़कों पर लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं, और दुकानदारों को अपना सामान सुरक्षित करने के लिए भागदौड़ करनी पड़ी। अंधड़ के दौरान दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में रखी कृषि सामग्री और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। तेज हवाओं के कारण कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। हालांकि, अंधड़ के बाद मौसम सुहावना हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संभावित नुकसान का सर्वे कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, मौसम विभाग ने भी आगामी दिनों में मौसम में और बदलाव की संभावना जताई है।

14 hrs ago
user_Ravi  Dainik bhaskar
Ravi Dainik bhaskar
Photographer चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
14 hrs ago
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शनिवार को शिवाड़ सारसोप क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे तेज अंधड़ और धूलभरी हवाएं चलने लगीं। इस अचानक आए अंधड़ के कारण बाजारों और सड़कों पर लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर

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पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं, और दुकानदारों को अपना सामान सुरक्षित करने के लिए भागदौड़ करनी पड़ी। अंधड़ के दौरान दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में रखी कृषि

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सामग्री और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। तेज हवाओं के कारण कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। हालांकि, अंधड़ के बाद मौसम सुहावना हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को

भीषण गर्मी से राहत मिली। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संभावित नुकसान का सर्वे कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, मौसम विभाग ने भी आगामी दिनों में मौसम में और बदलाव की संभावना जताई है।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • राजस्थान के मलारना डूंगर उपखंड के कोथाली गांव में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत चल रहे कार्यों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि यह काम केवल कागजों में चल रहा है, जबकि धरातल पर एक भी श्रमिक मौजूद नहीं है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्थिति पिछले कई दिनों से बनी हुई है। पिछले पखवाड़े में 140 श्रमिकों के नाम दर्ज थे, लेकिन मौके पर किसी ने भी काम नहीं किया और कार्यस्थल पर एक भी श्रमिक नहीं पहुंचा। बताया गया कि सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई। इस चालू पखवाड़े में भी 1 जून से 70 श्रमिकों की मस्टरोल जारी हुई है, पांच दिन बीत जाने के बावजूद न तो काम शुरू हुआ है और न ही कोई श्रमिक कार्यस्थल पर मौजूद मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 12 महीनों से सिर्फ तीन आदमी फिक्स कर रखे हैं और उनके अलावा किसी अन्य श्रमिक को काम पर नहीं लगाया जाता। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर पंचायत सेक्रेटरी अंकित गुप्ता और पंचायत नरेगा सेक्रेटरी बाबूलाल गुर्जर से शिकायत भी की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायत के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ और दोषी श्रमिकों को हटाकर दूसरों को काम पर नहीं लगाया गया, जिससे मेट और पंचायत सेक्रेटरी के बीच मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। दैनिक भास्कर द्वारा संपर्क किए जाने पर पंचायत सेक्रेटरी अंकित कुमार गुप्ता ने नरेगा से संबंधित किसी भी जानकारी से अनभिज्ञता जताई और नरेगा सेक्रेटरी बाबूलाल गुर्जर से बात करने को कहा। जब बाबूलाल गुर्जर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनका काम केवल मस्टरोल जारी करना है। उन्होंने काम करवाने और श्रमिकों को रोके रखने की सारी जिम्मेदारी मेट पर डाल दी और स्वीकार किया कि वे आज तक कार्यस्थल पर गए ही नहीं हैं। इस तरह, दोनों ही सेक्रेटरी अपनी-अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आए। इसके बाद, पंचायत समिति के जेईएन नरेंद्र मीणा को इस बारे में सूचित किया गया, जिन्होंने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही, एसडीएम संदीप कुमार बैहरड़ ने भी मामले की जांच के लिए अधिकारी भेजने की बात कही है।
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    राजस्थान के मलारना डूंगर उपखंड के कोथाली गांव में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत चल रहे कार्यों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि यह काम केवल कागजों में चल रहा है, जबकि धरातल पर एक भी श्रमिक मौजूद नहीं है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्थिति पिछले कई दिनों से बनी हुई है।

पिछले पखवाड़े में 140 श्रमिकों के नाम दर्ज थे, लेकिन मौके पर किसी ने भी काम नहीं किया और कार्यस्थल पर एक भी श्रमिक नहीं पहुंचा। बताया गया कि सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई। इस चालू पखवाड़े में भी 1 जून से 70 श्रमिकों की मस्टरोल जारी हुई है, पांच दिन बीत जाने के बावजूद न तो काम शुरू हुआ है और न ही कोई श्रमिक कार्यस्थल पर मौजूद मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 12 महीनों से सिर्फ तीन आदमी फिक्स कर रखे हैं और उनके अलावा किसी अन्य श्रमिक को काम पर नहीं लगाया जाता।

ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर पंचायत सेक्रेटरी अंकित गुप्ता और पंचायत नरेगा सेक्रेटरी बाबूलाल गुर्जर से शिकायत भी की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायत के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ और दोषी श्रमिकों को हटाकर दूसरों को काम पर नहीं लगाया गया, जिससे मेट और पंचायत सेक्रेटरी के बीच मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

दैनिक भास्कर द्वारा संपर्क किए जाने पर पंचायत सेक्रेटरी अंकित कुमार गुप्ता ने नरेगा से संबंधित किसी भी जानकारी से अनभिज्ञता जताई और नरेगा सेक्रेटरी बाबूलाल गुर्जर से बात करने को कहा। जब बाबूलाल गुर्जर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनका काम केवल मस्टरोल जारी करना है। उन्होंने काम करवाने और श्रमिकों को रोके रखने की सारी जिम्मेदारी मेट पर डाल दी और स्वीकार किया कि वे आज तक कार्यस्थल पर गए ही नहीं हैं। इस तरह, दोनों ही सेक्रेटरी अपनी-अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आए। इसके बाद, पंचायत समिति के जेईएन नरेंद्र मीणा को इस बारे में सूचित किया गया, जिन्होंने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही, एसडीएम संदीप कुमार बैहरड़ ने भी मामले की जांच के लिए अधिकारी भेजने की बात कही है।
    user_दैनिक भास्कर संवाददाता
    दैनिक भास्कर संवाददाता
    Video Creator मलारना डूंगर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    54 min ago
  • बार-बार 'सब चोर हैं!' का आरोप लगाते हुए, गहरा असंतोष और आक्रोश व्यक्त किया गया है। यह जोरदार और लगातार दोहराया गया बयान लोगों के बीच व्याप्त भारी नाराजगी और व्यापक निराशा को दर्शाता है।
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    बार-बार 'सब चोर हैं!' का आरोप लगाते हुए, गहरा असंतोष और आक्रोश व्यक्त किया गया है। यह जोरदार और लगातार दोहराया गया बयान लोगों के बीच व्याप्त भारी नाराजगी और व्यापक निराशा को दर्शाता है।
    user_राजू काँकोरिया खण्डार
    राजू काँकोरिया खण्डार
    Contractor खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है कि विकास और जनकल्याण की प्रत्येक योजना का लाभ पारदर्शिता एवं प्रभावी क्रियान्वयन के साथ गाँव-ढाणी के अंतिम छोर तक पहुंचे। इसी उद्देश्य के साथ, भीलवाड़ा जिले की लाम्बा ग्राम पंचायत में एक 'ग्राम विकास चौपाल' का आयोजन किया गया। इस चौपाल में ग्रामीण भाई-बहनों, मातृशक्ति, युवाओं, अन्नदाताओं और बुजुर्गों के साथ आत्मीय संवाद किया गया, जिससे उनकी आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और बहुमूल्य सुझावों को निकटता से जानने का अवसर मिला। चौपाल में प्राप्त हुए इस स्नेह, विश्वास और सुझाव से 'विकसित राजस्थान' के संकल्प को नई शक्ति और सही दिशा मिलेगी।
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    सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है कि विकास और जनकल्याण की प्रत्येक योजना का लाभ पारदर्शिता एवं प्रभावी क्रियान्वयन के साथ गाँव-ढाणी के अंतिम छोर तक पहुंचे।

इसी उद्देश्य के साथ, भीलवाड़ा जिले की लाम्बा ग्राम पंचायत में एक 'ग्राम विकास चौपाल' का आयोजन किया गया। इस चौपाल में ग्रामीण भाई-बहनों, मातृशक्ति, युवाओं, अन्नदाताओं और बुजुर्गों के साथ आत्मीय संवाद किया गया, जिससे उनकी आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और बहुमूल्य सुझावों को निकटता से जानने का अवसर मिला।

चौपाल में प्राप्त हुए इस स्नेह, विश्वास और सुझाव से 'विकसित राजस्थान' के संकल्प को नई शक्ति और सही दिशा मिलेगी।
    user_जनहित आवाज न्यूज़
    जनहित आवाज न्यूज़
    Newsagent खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • देश में आम आदमी को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है, जहाँ पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब रसोई गैस भी महंगी हो गई है। सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में ₹29 की बढ़ोतरी की है, जिसकी नई दरें कल आधी रात से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं। यह पिछले तीन महीनों के भीतर दूसरी बार है जब एलपीजी के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे गृहणियों का मासिक बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। इस मूल्य वृद्धि के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर अब ₹913 की जगह ₹942 में मिलेगा। इससे पहले इसी वर्ष 7 मार्च को सिलेंडर के दामों में ₹60 की भारी बढ़ोतरी की गई थी। आँकड़ों के अनुसार, पिछले 14 महीनों में घरेलू गैस की कीमतों में कुल ₹139 का इजाफा हो चुका है, जिसे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा डाका बताया जा रहा है। देश के मुख्य शहरों में भी घरेलू एलपीजी के नए दाम बढ़ गए हैं, जिनमें कोलकाता में ₹968, चेन्नई में ₹957.50, मुंबई में ₹941.50, पटना में ₹1040.00 और जयपुर में ₹945.50 शामिल हैं। घरेलू रसोई गैस के साथ-साथ दिल्ली में अन्य श्रेणियों के सिलेंडर भी ऊंचे स्तर पर हैं, जहाँ कमर्शियल सिलेंडर (19 किलोग्राम) ₹3113.50 और 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर ₹821.50 में मिल रहा है। दिल्ली की एक गृहणी सुनीता शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले ही सब्जियों और तेल के दाम बढ़े हुए हैं, और अब गैस भी महंगी कर दी गई है, जिससे हर महीने बजट बनाना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने सरकार से आम जनता को राहत देने की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों और सूत्रों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक कारण हैं। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और युद्ध जैसी स्थिति के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर भारत के घरेलू बाजार पर पड़ा है। गैस पाइपलाइन और सप्लाई चेन बाधित होने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है।
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    देश में आम आदमी को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है, जहाँ पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब रसोई गैस भी महंगी हो गई है। सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में ₹29 की बढ़ोतरी की है, जिसकी नई दरें कल आधी रात से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं। यह पिछले तीन महीनों के भीतर दूसरी बार है जब एलपीजी के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे गृहणियों का मासिक बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है।

इस मूल्य वृद्धि के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर अब ₹913 की जगह ₹942 में मिलेगा। इससे पहले इसी वर्ष 7 मार्च को सिलेंडर के दामों में ₹60 की भारी बढ़ोतरी की गई थी। आँकड़ों के अनुसार, पिछले 14 महीनों में घरेलू गैस की कीमतों में कुल ₹139 का इजाफा हो चुका है, जिसे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा डाका बताया जा रहा है।

देश के मुख्य शहरों में भी घरेलू एलपीजी के नए दाम बढ़ गए हैं, जिनमें कोलकाता में ₹968, चेन्नई में ₹957.50, मुंबई में ₹941.50, पटना में ₹1040.00 और जयपुर में ₹945.50 शामिल हैं। घरेलू रसोई गैस के साथ-साथ दिल्ली में अन्य श्रेणियों के सिलेंडर भी ऊंचे स्तर पर हैं, जहाँ कमर्शियल सिलेंडर (19 किलोग्राम) ₹3113.50 और 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर ₹821.50 में मिल रहा है।

दिल्ली की एक गृहणी सुनीता शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले ही सब्जियों और तेल के दाम बढ़े हुए हैं, और अब गैस भी महंगी कर दी गई है, जिससे हर महीने बजट बनाना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने सरकार से आम जनता को राहत देने की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों और सूत्रों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक कारण हैं। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और युद्ध जैसी स्थिति के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर भारत के घरेलू बाजार पर पड़ा है। गैस पाइपलाइन और सप्लाई चेन बाधित होने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है।
    user_Ramsingh Meena
    Ramsingh Meena
    Local News Reporter तालावारा, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    36 min ago
  • एक मामले में पत्थर की ट्रॉली की कीमत को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। ट्रैक्टर चालक का कहना है कि वे एक ट्रॉली पत्थर ₹2000 में डालते हैं, जबकि पत्थर के बिल पर इसी ट्रॉली की कीमत ₹3000 लगाई गई है। यह विरोधाभास ₹1000 प्रति ट्रॉली के दाम में सीधा अंतर दर्शाता है, जिससे कीमत को लेकर स्पष्ट विसंगति उजागर हुई है।
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    एक मामले में पत्थर की ट्रॉली की कीमत को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। ट्रैक्टर चालक का कहना है कि वे एक ट्रॉली पत्थर ₹2000 में डालते हैं, जबकि पत्थर के बिल पर इसी ट्रॉली की कीमत ₹3000 लगाई गई है। यह विरोधाभास ₹1000 प्रति ट्रॉली के दाम में सीधा अंतर दर्शाता है, जिससे कीमत को लेकर स्पष्ट विसंगति उजागर हुई है।
    user_Meera gadriya
    Meera gadriya
    श्योपुर, श्योपुर, मध्य प्रदेश•
    53 min ago
  • एक संदेश में 'अच्छे दिन आ गये!' का उद्घोष लगातार चार बार दोहराया गया है। यह पंक्ति पूरी शक्ति और जोर के साथ बार-बार कही गई है, जिसमें 'अच्छे दिन आ गये!' की भावना को प्रमुखता से व्यक्त किया गया है।
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    एक संदेश में 'अच्छे दिन आ गये!' का उद्घोष लगातार चार बार दोहराया गया है। यह पंक्ति पूरी शक्ति और जोर के साथ बार-बार कही गई है, जिसमें 'अच्छे दिन आ गये!' की भावना को प्रमुखता से व्यक्त किया गया है।
    user_राजू काँकोरिया खण्डार
    राजू काँकोरिया खण्डार
    Contractor खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय के गणेश नगर बी में बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियां सुबह 4:00 बजे से ही तेज रफ्तार में आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरती हैं, जिस पर शासन-प्रशासन की कार्रवाई मात्र खानापूर्ति नजर आती है। आज सुबह लगभग 5:00 बजे इसी तरह की एक तेज रफ्तार बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली एक मकान से जा टकराई, गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले दिनों रणथंबोर रोड पर भी बजरी से भरी एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्रॉली ने एक दूध डेयरी की पिकअप को टक्कर मार दी थी। हालांकि, उस घटना के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। अब यह देखने वाली बात है कि क्या शासन-प्रशासन अंततः तेज रफ्तार और बिना नंबर वाली बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई करता है या नहीं, जिस पर स्थानीय निवासी लगातार सवाल उठा रहे हैं।
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    सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय के गणेश नगर बी में बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियां सुबह 4:00 बजे से ही तेज रफ्तार में आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरती हैं, जिस पर शासन-प्रशासन की कार्रवाई मात्र खानापूर्ति नजर आती है। आज सुबह लगभग 5:00 बजे इसी तरह की एक तेज रफ्तार बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली एक मकान से जा टकराई, गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले दिनों रणथंबोर रोड पर भी बजरी से भरी एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्रॉली ने एक दूध डेयरी की पिकअप को टक्कर मार दी थी। हालांकि, उस घटना के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।

अब यह देखने वाली बात है कि क्या शासन-प्रशासन अंततः तेज रफ्तार और बिना नंबर वाली बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई करता है या नहीं, जिस पर स्थानीय निवासी लगातार सवाल उठा रहे हैं।
    user_Rakesh Agarwal
    Rakesh Agarwal
    पत्रकारिता Sawai Madhopur, Rajasthan•
    39 min ago
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