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बार-बार 'सब चोर हैं!' का आरोप लगाते हुए, गहरा असंतोष और आक्रोश व्यक्त किया गया है। यह जोरदार और लगातार दोहराया गया बयान लोगों के बीच व्याप्त भारी नाराजगी और व्यापक निराशा को दर्शाता है।
राजू काँकोरिया खण्डार
बार-बार 'सब चोर हैं!' का आरोप लगाते हुए, गहरा असंतोष और आक्रोश व्यक्त किया गया है। यह जोरदार और लगातार दोहराया गया बयान लोगों के बीच व्याप्त भारी नाराजगी और व्यापक निराशा को दर्शाता है।
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- बार-बार 'सब चोर हैं!' का आरोप लगाते हुए, गहरा असंतोष और आक्रोश व्यक्त किया गया है। यह जोरदार और लगातार दोहराया गया बयान लोगों के बीच व्याप्त भारी नाराजगी और व्यापक निराशा को दर्शाता है।1
- सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है कि विकास और जनकल्याण की प्रत्येक योजना का लाभ पारदर्शिता एवं प्रभावी क्रियान्वयन के साथ गाँव-ढाणी के अंतिम छोर तक पहुंचे। इसी उद्देश्य के साथ, भीलवाड़ा जिले की लाम्बा ग्राम पंचायत में एक 'ग्राम विकास चौपाल' का आयोजन किया गया। इस चौपाल में ग्रामीण भाई-बहनों, मातृशक्ति, युवाओं, अन्नदाताओं और बुजुर्गों के साथ आत्मीय संवाद किया गया, जिससे उनकी आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और बहुमूल्य सुझावों को निकटता से जानने का अवसर मिला। चौपाल में प्राप्त हुए इस स्नेह, विश्वास और सुझाव से 'विकसित राजस्थान' के संकल्प को नई शक्ति और सही दिशा मिलेगी।1
- एक मामले में पत्थर की ट्रॉली की कीमत को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। ट्रैक्टर चालक का कहना है कि वे एक ट्रॉली पत्थर ₹2000 में डालते हैं, जबकि पत्थर के बिल पर इसी ट्रॉली की कीमत ₹3000 लगाई गई है। यह विरोधाभास ₹1000 प्रति ट्रॉली के दाम में सीधा अंतर दर्शाता है, जिससे कीमत को लेकर स्पष्ट विसंगति उजागर हुई है।1
- राजस्थान के मलारना डूंगर उपखंड के कोथाली गांव में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत चल रहे कार्यों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि यह काम केवल कागजों में चल रहा है, जबकि धरातल पर एक भी श्रमिक मौजूद नहीं है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्थिति पिछले कई दिनों से बनी हुई है। पिछले पखवाड़े में 140 श्रमिकों के नाम दर्ज थे, लेकिन मौके पर किसी ने भी काम नहीं किया और कार्यस्थल पर एक भी श्रमिक नहीं पहुंचा। बताया गया कि सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई। इस चालू पखवाड़े में भी 1 जून से 70 श्रमिकों की मस्टरोल जारी हुई है, पांच दिन बीत जाने के बावजूद न तो काम शुरू हुआ है और न ही कोई श्रमिक कार्यस्थल पर मौजूद मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 12 महीनों से सिर्फ तीन आदमी फिक्स कर रखे हैं और उनके अलावा किसी अन्य श्रमिक को काम पर नहीं लगाया जाता। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर पंचायत सेक्रेटरी अंकित गुप्ता और पंचायत नरेगा सेक्रेटरी बाबूलाल गुर्जर से शिकायत भी की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायत के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ और दोषी श्रमिकों को हटाकर दूसरों को काम पर नहीं लगाया गया, जिससे मेट और पंचायत सेक्रेटरी के बीच मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। दैनिक भास्कर द्वारा संपर्क किए जाने पर पंचायत सेक्रेटरी अंकित कुमार गुप्ता ने नरेगा से संबंधित किसी भी जानकारी से अनभिज्ञता जताई और नरेगा सेक्रेटरी बाबूलाल गुर्जर से बात करने को कहा। जब बाबूलाल गुर्जर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनका काम केवल मस्टरोल जारी करना है। उन्होंने काम करवाने और श्रमिकों को रोके रखने की सारी जिम्मेदारी मेट पर डाल दी और स्वीकार किया कि वे आज तक कार्यस्थल पर गए ही नहीं हैं। इस तरह, दोनों ही सेक्रेटरी अपनी-अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आए। इसके बाद, पंचायत समिति के जेईएन नरेंद्र मीणा को इस बारे में सूचित किया गया, जिन्होंने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही, एसडीएम संदीप कुमार बैहरड़ ने भी मामले की जांच के लिए अधिकारी भेजने की बात कही है।1
- श्योपुर के ग्राम उतनवाड में सफाई कर्मचारियों द्वारा गाँव की गलियों और नालियों में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। बरसात के मौसम में संभावित जलभराव और गंदगी की समस्या से निपटने के उद्देश्य से यह कार्य लगातार जारी है। सफाई कर्मचारियों ने नालियों में जमा कचरा और कीचड़ हटाकर रास्तों को साफ किया है, जिससे गाँव में एक स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में मदद मिल रही है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए, गाँव में नियमित और बेहतर सफाई व्यवस्था जारी रखने की मांग की है, ताकि बीमारियों के फैलने का खतरा कम हो और गाँव का वातावरण स्वच्छ बना रहे।1
- श्योपुर जिले के बड़ौदा क्षेत्र में रतोदन रोड पर एक बस अनियंत्रित होकर पलट गई। घटना की खबर मिलते ही बड़ौदा पुलिस मौके पर पहुंची और बस पलटने से घायल हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।1
- एक संदेश में 'अच्छे दिन आ गये!' का उद्घोष लगातार चार बार दोहराया गया है। यह पंक्ति पूरी शक्ति और जोर के साथ बार-बार कही गई है, जिसमें 'अच्छे दिन आ गये!' की भावना को प्रमुखता से व्यक्त किया गया है।1
- शनिवार को शिवाड़ सारसोप क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे तेज अंधड़ और धूलभरी हवाएं चलने लगीं। इस अचानक आए अंधड़ के कारण बाजारों और सड़कों पर लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं, और दुकानदारों को अपना सामान सुरक्षित करने के लिए भागदौड़ करनी पड़ी। अंधड़ के दौरान दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में रखी कृषि सामग्री और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। तेज हवाओं के कारण कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। हालांकि, अंधड़ के बाद मौसम सुहावना हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संभावित नुकसान का सर्वे कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, मौसम विभाग ने भी आगामी दिनों में मौसम में और बदलाव की संभावना जताई है।4