बैलाडीला क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता रवि सरकार ने अपनी 28 वर्षों की निस्वार्थ सेवा के बावजूद पार्टी में उपेक्षित महसूस करने की गहरी पीड़ा व्यक्त की है। उनका कहना है कि इतने वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी की पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा करने के बाद भी वे आज स्वयं को अकेला और अनदेखा महसूस कर रहे हैं। रवि सरकार ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही भाजपा को अपनी माँ के समान माना और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को अपना आदर्श मानते हुए राजनीति में कदम रखा। अटल जी की विचारधारा से प्रेरित होकर ही उन्होंने अपना पहला वोट भाजपा को दिया था और तब से उन्होंने तन, मन और धन से पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्य किया। उन्होंने कभी किसी पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत लाभ की इच्छा नहीं रखी, बल्कि हमेशा एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में संगठन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उनका पूरा परिवार भी वर्षों से भाजपा का समर्थक रहा है और हर चुनाव में पूरी निष्ठा से पार्टी के लिए काम करता रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने चार बूथों पर दिन-रात मेहनत करके अधिकतम मतदान सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, यहाँ तक कि बुजुर्गों और असहाय लोगों को गोद में उठाकर मतदान केंद्रों तक पहुँचाया। उस समय उनकी निष्ठा की सराहना भी की गई थी। हालांकि, रवि सरकार का कहना है कि वर्षों की इस निष्ठा और समर्पण के बावजूद उन्हें वह सम्मान कभी नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। कठिन समय में उन्हें संगठन और नेतृत्व से अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिला, और किसी ने उनकी पीड़ा तथा संघर्ष को समझने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने माँ का दर्जा दिया, उसी में आज वे स्वयं को अकेला और अनदेखा महसूस कर रहे हैं, और यह पीड़ा उनके मन में एक ऐसे गहरे घाव की तरह है जो समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। इस दर्द के बावजूद, रवि सरकार ने स्पष्ट किया कि उनका विश्वास आज भी भाजपा की विचारधारा और संगठन में बना हुआ है, क्योंकि पार्टी उनके संस्कारों का हिस्सा है और वे आज भी संगठन के प्रति समर्पित हैं। लेकिन वे चाहते हैं कि उनके जैसे हजारों जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के त्याग, समर्पण और भावनाओं का सम्मान किया जाए ताकि उनका विश्वास और मनोबल बना रहे। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक दलों की वास्तविक शक्ति बड़े पदों पर बैठे लोग नहीं, बल्कि वे जमीनी कार्यकर्ता होते हैं जो वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के संगठन के लिए काम करते हैं। उनका मानना है कि यदि ऐसे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा जारी रही, तो संगठन की नींव कमजोर होने का खतरा बढ़ जाएगा, और यह केवल उनकी नहीं, बल्कि हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं की आवाज है जो संघर्ष के बाद उपेक्षित महसूस करते हैं।
बैलाडीला क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता रवि सरकार ने अपनी 28 वर्षों की निस्वार्थ सेवा के बावजूद पार्टी में उपेक्षित महसूस करने की गहरी पीड़ा व्यक्त की है। उनका कहना है कि इतने वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी की पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा करने के बाद भी वे आज स्वयं को अकेला और अनदेखा महसूस कर रहे हैं। रवि सरकार ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही भाजपा को अपनी माँ के समान माना और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को अपना आदर्श मानते हुए राजनीति में कदम रखा। अटल जी की विचारधारा से प्रेरित होकर ही उन्होंने अपना पहला वोट भाजपा को दिया था और तब से उन्होंने तन, मन और धन से पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्य किया। उन्होंने कभी किसी पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत लाभ की इच्छा नहीं रखी, बल्कि हमेशा एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में संगठन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उनका पूरा परिवार भी वर्षों से भाजपा का समर्थक रहा है और हर चुनाव में पूरी निष्ठा से पार्टी के लिए काम करता रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने चार बूथों पर दिन-रात मेहनत करके अधिकतम मतदान सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, यहाँ तक कि बुजुर्गों और असहाय लोगों को गोद में उठाकर मतदान केंद्रों तक पहुँचाया। उस समय उनकी निष्ठा की सराहना भी की गई थी। हालांकि, रवि सरकार का कहना है कि वर्षों की इस निष्ठा और समर्पण के बावजूद उन्हें वह सम्मान कभी नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। कठिन समय में उन्हें संगठन और नेतृत्व से अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिला, और किसी ने उनकी पीड़ा तथा संघर्ष को समझने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने माँ का दर्जा दिया, उसी में आज वे स्वयं को अकेला और अनदेखा महसूस कर रहे हैं, और यह पीड़ा उनके मन में एक ऐसे गहरे घाव की तरह है जो समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। इस दर्द के बावजूद, रवि सरकार ने स्पष्ट किया कि उनका विश्वास आज भी भाजपा की विचारधारा और संगठन में बना हुआ है, क्योंकि पार्टी उनके संस्कारों का हिस्सा है और वे आज भी संगठन के प्रति समर्पित हैं। लेकिन वे चाहते हैं कि उनके जैसे हजारों जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के त्याग, समर्पण और भावनाओं का सम्मान किया जाए ताकि उनका विश्वास और मनोबल बना रहे। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक दलों की वास्तविक शक्ति बड़े पदों पर बैठे लोग नहीं, बल्कि वे जमीनी कार्यकर्ता होते हैं जो वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के संगठन के लिए काम करते हैं। उनका मानना है कि यदि ऐसे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा जारी रही, तो संगठन की नींव कमजोर होने का खतरा बढ़ जाएगा, और यह केवल उनकी नहीं, बल्कि हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं की आवाज है जो संघर्ष के बाद उपेक्षित महसूस करते हैं।
- यह एक भावात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें एक व्यक्ति अपने सँवरिया (प्रिय या ईश्वर) को किसी भी तरह से मनाने और अपनी बात मनवाने की गहरी इच्छा और प्रतिबद्धता व्यक्त कर रहा है।1
- एक अकेले झूठ ने इस देश को 200 साल की गुलामी की तरफ धकेल दिया था, जिसने एक साम्राज्य को नैतिक आधार प्रदान किया। उस समय इस शक्तिशाली झूठ को फैलाने में महीनों का समय लगता था, क्योंकि इसे जहाजों के माध्यम से समुद्र पार पहुंचाया जाता था। आज वही काम महज 30 सेकंड में हो जाता है, और यह हम अपनी ही उंगलियों से करते हैं। यह एक अकाट्य सत्य है कि 20 जून 1756 की वह ऐतिहासिक रात आज भी हर रोज़ दोहराई जा रही है, बस अब वह 'कमरा' जहाँ यह सब घटित होता है, बदल गया है और आपकी जेब में सिमट गया है। इस पूरी कहानी को समझने के लिए, दर्शकों से एक 5 मिनट का वीडियो देखने, उस पर सोचने और फिर अपना निर्णय लेने का आग्रह किया गया है, ताकि वे 'तीसरी आंख' खोलकर सच्चाई को पहचान सकें।1
- नारायणपुर जिले में शुक्रवार को कथित धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर जनजातीय समाज के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के इन लोगों ने रैली निकालकर धर्मांतरण के खिलाफ अपना जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से इस विषय पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में धर्मांतरण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे उनकी जनजातीय संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। रैली के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने नारायणपुर मुख्यालय में एकत्र होकर अपनी विभिन्न मांगों से संबंधित एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस बल भी तैनात रहा। जनजातीय समाज के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए भविष्य में जागरूकता अभियान भी चलाएंगे। दूसरी ओर, प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त करने के बाद मामले का परीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।1
- संत रामपाल जी महाराज 'सनातनी पूजा के पतन की कहानी' के छठे भाग के रूप में एक विशेष वीडियो प्रस्तुत करने जा रहे हैं। यह प्रस्तुति 'गोवर्धन परिक्रमा के अनसुने रहस्य' पर केंद्रित होगी, जिसमें सनातनी पूजा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को संत रामपाल जी महाराज की जुबानी उजागर किया जाएगा। यह विशेष वीडियो 20 जून 2026, शनिवार को दोपहर 12:00 बजे से 'Factful Debates' YouTube Channel पर अवश्य देखा जा सकता है।1
- थाना आमाबेड़ा पुलिस ने हाल ही में एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से 7.94 लीटर शराब के साथ-साथ नकदी भी जब्त की है।1
- योग दिवस के अवसर पर अधिक से अधिक लोगों से भागीदारी निभाने की अपील की गई है। यह अपील गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के प्रयास के तहत की गई है। इस पहल के लिए, इच्छुक व्यक्ति एक टोल फ्री नंबर पर मिस्ड कॉल देकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।1
- कोतवाली थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है, जहाँ ठगों ने खुद को स्कूल प्राचार्य बताकर 90 हजार रुपये ऐंठ लिए। इस संबंध में पीड़ित महिला द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।1
- कोंडागांव जिले के फरसगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बड़े डोंगर में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। पिकअप और मोटरसाइकिल के बीच हुई आमने-सामने की भीषण टक्कर में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से एक घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और 108 एम्बुलेंस सेवा पर समय पर इलाज व वाहन न मिलने का गंभीर आरोप लगाते हुए भारी आक्रोश व्यक्त किया है। यह हादसा शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे ग्राम बड़े डोंगर में सरपंच आवास के पास हुआ। एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन और मोटरसाइकिल के बीच हुई भिड़ंत इतनी भीषण थी कि बाइक सवार दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना मिलते ही बड़े डोंगर पुलिस मौके पर पहुंची और तत्परता दिखाते हुए दोनों घायलों को 102 महतारी एक्सप्रेस वाहन की मदद से तुरंत फरसगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।1