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श्री राम मंदिर रामपुरिया पिड़ावा कुछ पुराने पल बोलो जय श्री राम
मान सिंह तंवर हिंदू वयम हिन्दू केवलम
श्री राम मंदिर रामपुरिया पिड़ावा कुछ पुराने पल बोलो जय श्री राम
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- Post by Jidi boy jidi boy1
- Post by Shyam pokra1
- चेचट कस्बे में बुधवार क़रीब 2 बजें मैंने मार्केट चेचट रावतभाटा सड़क पर यादव मेडिकल स्टोर के पास एक भयानक हादसा हुआ दरअसल एक व्यक्ति बाइक लेकर अन्दर बाजार से सड़क पर अचानक आ गया तभी बस स्टैंड कि तरफ़ से आ रहा तेज़ रफ़्तार मोटरसाइकिल सवार दोनों कि आपस में भिड़ हों टक्कर इतनी जबरदस्त थी बाइक सवार युवक मोटरसाइकिल के साथ हीं क़रीब 30 फिट तक सड़क पर घिसता हुआं चला गया हादसे में एक मोटरसाइकिल के आगे का हिस्सा पूरी तरह छतिग्रस्त हों गया वहीं हादसे में बाइक युवक और दूसरे बाइक सवार गंभीर चोंट आई जिसके स्थानीय लोगों ने पास हीं डाक्टर पास लेजाकर दोनों का प्राथमिक उपचार करवाया हादसे के बाद लोगों कि भारी भीड़ जमा हो गई6
- सर्व वैश्य समाज का गुड़ी पड़वा हिन्दू नवसंवत्सर के अवसर पर, वैश्य समाज के स्थापना दिवस मनाया गया। खिलचीपुर नगर में आज गुरुवार की सुबह सर्व वैश्य समाज के तत्वाधान में आज गुड़ी पड़वा हिन्दू नवसंवत्सर के अवसर पर वैश्य समाज के स्थापना दिवस को गोवर्द्धन नाथ मंदिर में वैश्य समाजजनों द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया गया । इस पुनीत पर्व पर सभी वैष्णव जनों , वैश्य समाज जनों एवं सनातनी बंधुओ को तिलक लगा कर मुंह मीठा कराया गया तथा नव संवत्सर पर्व की शुभ कामनाएं दी। इस अवसर समाज के वरिष्ठ,युवा साथी एवं महिलाओं की उपस्थिति रही।10
- रामगंजमंडी क्षेत्र के न्यामतखेड़ी में एक सड़क हादसा हो गया। कवरपुरा में आयोजित बैरवा समाज की भानपुर मंडल की बैठक से लौटते समय न्यामतखेड़ी के पास एक बाइक अनियंत्रित होकर पुलिया से नीचे जा गिरी। हादसे में भवानीमंडी के आवली कला निवासी वृद्ध नन्दलाल बैरवा घायल हो गए।1
- आगामी त्योहारों ईद और नवरात्रि को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक (एसपी) अंकित जयसवाल ने रामपुरा पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान पुलिस कप्तान अंकित जयसवाल एडिशनल एसपी नवल सिंह सिसोदिया ने शहर के संवेदनशील क्षेत्रों, प्रमुख बाजारों और धार्मिक स्थलों का दौरा कर तैनात पुलिस बल को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने थाना प्रभारी विपिन मसीह को सतर्क रहने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए। इसी क्रम में नगर में पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च भी निकाला गया। फ्लैग मार्च शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचा, जहां पुलिस ने आमजन को सुरक्षा का भरोसा दिलाया और शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की। पुलिस प्रशासन ने बताया कि त्योहारों के दौरान अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है और लगातार गश्त बढ़ा दी गई है। साथ ही, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर नजर रखने के लिए विशेष टीम सक्रिय है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहें और आपसी भाईचारे के साथ त्योहार मनाएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की बात कही गई है। पुलिस द्वारा निकाला गया फ्लैग मार्च लोगों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करने और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।3
- रामगंजमंडी के खैराबाद मार्ग स्थित नवोदय विद्यालय के समीप एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। साइकिल सवार को बचाने के प्रयास में एक बाइक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।1
- रामपुरा) सोशल मीडिया की चकाचौंध में , हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक उल्लास की यादें धुंधली होती जा रही हैं। कभी नगर में अमावस्या का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक उत्सव हुआ करता था। आज के दिन केदारेश्वर से उठती थी गैर की गूंज पुराने जानकारों की मानें तो अमावस्या के अवसर पर नगर का माहौल भक्ति और उत्साह से सराबोर रहता था। केदारेश्वर से शुरू होने वाली गैर पारंपरिक जुलूस नगर की पहचान थी। डबली वादक जब लोकगीतों के माध्यम से अपनी खास धुन छेड़ते थे, तो पूरा नगर उनके साथ थिरक उठता था। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक था। आज स्थिति यह है कि 'गैर' का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है। नई पीढ़ी को तो शायद इस परंपरा का आभास तक नहीं है। सामुदायिक भावना कम हुई है; लोग अब सामूहिक उत्सवों की बजाय व्यक्तिगत जीवन में सीमित हो गए हैं। विरासत को बचाने की जरूरत अमावस्या की गैर एवं लोकगीतों का गायन केवल मनोरंजन नहीं थे, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा थे। यदि इन्हें समय रहते पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल कहानियों और पुस्तकों में ही जान पाएंगी। कल का शोर आज की खामोशी में बदल चुका है। डबली की वह थाप अब केवल यादों में गूंजती है।4
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