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लुप्त होती विरासत के बीच केदारेश्वर से निकलकर नगर में गूंजे लोकगीतों के स्वर रामपुरा) सोशल मीडिया की चकाचौंध में , हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक उल्लास की यादें धुंधली होती जा रही हैं। कभी नगर में अमावस्या का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक उत्सव हुआ करता था। आज के दिन केदारेश्वर से उठती थी गैर की गूंज पुराने जानकारों की मानें तो अमावस्या के अवसर पर नगर का माहौल भक्ति और उत्साह से सराबोर रहता था। केदारेश्वर से शुरू होने वाली गैर पारंपरिक जुलूस नगर की पहचान थी। डबली वादक जब लोकगीतों के माध्यम से अपनी खास धुन छेड़ते थे, तो पूरा नगर उनके साथ थिरक उठता था। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक था। आज स्थिति यह है कि 'गैर' का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है। नई पीढ़ी को तो शायद इस परंपरा का आभास तक नहीं है। सामुदायिक भावना कम हुई है; लोग अब सामूहिक उत्सवों की बजाय व्यक्तिगत जीवन में सीमित हो गए हैं। विरासत को बचाने की जरूरत अमावस्या की गैर एवं लोकगीतों का गायन केवल मनोरंजन नहीं थे, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा थे। यदि इन्हें समय रहते पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल कहानियों और पुस्तकों में ही जान पाएंगी। कल का शोर आज की खामोशी में बदल चुका है। डबली की वह थाप अब केवल यादों में गूंजती है।

2 hrs ago
user_Mukesh rathor
Mukesh rathor
Bangle Shop रामपुरा, नीमच, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

लुप्त होती विरासत के बीच केदारेश्वर से निकलकर नगर में गूंजे लोकगीतों के स्वर रामपुरा) सोशल मीडिया की चकाचौंध में , हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक उल्लास की यादें धुंधली होती जा रही हैं। कभी नगर में अमावस्या का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक उत्सव हुआ करता था। आज के दिन केदारेश्वर से उठती थी

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गैर की गूंज पुराने जानकारों की मानें तो अमावस्या के अवसर पर नगर का माहौल भक्ति और उत्साह से सराबोर रहता था। केदारेश्वर से शुरू होने वाली गैर पारंपरिक जुलूस नगर की पहचान थी। डबली वादक जब लोकगीतों के माध्यम से अपनी खास धुन छेड़ते थे, तो पूरा नगर उनके साथ थिरक उठता था। यह केवल एक

आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक था। आज स्थिति यह है कि 'गैर' का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है। नई पीढ़ी को तो शायद इस परंपरा का आभास तक नहीं है। सामुदायिक भावना कम हुई है; लोग अब सामूहिक उत्सवों की बजाय व्यक्तिगत जीवन में सीमित हो गए हैं। विरासत को बचाने की जरूरत अमावस्या की गैर एवं

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लोकगीतों का गायन केवल मनोरंजन नहीं थे, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा थे। यदि इन्हें समय रहते पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल कहानियों और पुस्तकों में ही जान पाएंगी। कल का शोर आज की खामोशी में बदल चुका है। डबली की वह थाप अब केवल यादों में गूंजती है।

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  • रामपुरा) सोशल मीडिया की चकाचौंध में , हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक उल्लास की यादें धुंधली होती जा रही हैं। कभी नगर में अमावस्या का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक उत्सव हुआ करता था। आज के दिन केदारेश्वर से उठती थी गैर की गूंज पुराने जानकारों की मानें तो अमावस्या के अवसर पर नगर का माहौल भक्ति और उत्साह से सराबोर रहता था। केदारेश्वर से शुरू होने वाली गैर पारंपरिक जुलूस नगर की पहचान थी। डबली वादक जब लोकगीतों के माध्यम से अपनी खास धुन छेड़ते थे, तो पूरा नगर उनके साथ थिरक उठता था। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक था। आज स्थिति यह है कि 'गैर' का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है। नई पीढ़ी को तो शायद इस परंपरा का आभास तक नहीं है। सामुदायिक भावना कम हुई है; लोग अब सामूहिक उत्सवों की बजाय व्यक्तिगत जीवन में सीमित हो गए हैं। विरासत को बचाने की जरूरत अमावस्या की गैर एवं लोकगीतों का गायन केवल मनोरंजन नहीं थे, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा थे। यदि इन्हें समय रहते पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल कहानियों और पुस्तकों में ही जान पाएंगी। कल का शोर आज की खामोशी में बदल चुका है। डबली की वह थाप अब केवल यादों में गूंजती है।
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    रामपुरा)  सोशल मीडिया की चकाचौंध में , हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक उल्लास की यादें धुंधली होती जा रही हैं। कभी नगर में अमावस्या का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक उत्सव हुआ करता था। आज के दिन 
केदारेश्वर से उठती थी गैर की गूंज
पुराने जानकारों की मानें तो अमावस्या के अवसर पर नगर का माहौल भक्ति और उत्साह से सराबोर रहता था। केदारेश्वर से शुरू होने वाली गैर पारंपरिक जुलूस नगर की पहचान थी। डबली वादक  जब लोकगीतों के माध्यम से अपनी खास धुन छेड़ते थे, तो पूरा नगर उनके साथ थिरक उठता था। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक था। आज स्थिति यह है कि 'गैर' का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है। नई पीढ़ी को तो शायद इस परंपरा का आभास तक नहीं है।
सामुदायिक भावना कम हुई है; लोग अब सामूहिक उत्सवों की बजाय व्यक्तिगत जीवन में सीमित हो गए हैं।
विरासत को बचाने की जरूरत
अमावस्या की गैर एवं लोकगीतों का गायन केवल मनोरंजन नहीं थे, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा थे। यदि इन्हें समय रहते पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल कहानियों और पुस्तकों में ही जान पाएंगी।
कल का शोर आज की खामोशी में बदल चुका है। डबली की वह थाप अब केवल यादों में गूंजती है।
    user_Mukesh rathor
    Mukesh rathor
    Bangle Shop रामपुरा, नीमच, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by Sanjay Kumar yati
    1
    Post by Sanjay Kumar yati
    user_Sanjay Kumar yati
    Sanjay Kumar yati
    गरोठ, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • गरोठ थाना क्षेत्र के ग्राम मलकाना में एक 42 वर्षी युवक ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली देखिए विस्तृत खबर
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    गरोठ थाना क्षेत्र के ग्राम मलकाना में एक 42 वर्षी युवक ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली देखिए विस्तृत खबर
    user_यशस्वी दुनिया साप्ताहिक
    यशस्वी दुनिया साप्ताहिक
    पत्रकार शामगढ़, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    36 min ago
  • रामप्रसाद धनगर कि रिपोर्ट भारत में आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाए गए 5 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को एनआईए ने पकड़ा, लेकिन मीडिया की चुप्पी छाई रही। 0 बहस 0 प्राइम टाइम शो ANI गिरफ्तार लोगों की राष्ट्रीयता लिखने से भी डर रहा है। यह एक गंभीर और चिंताजनक मामला है
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    रामप्रसाद धनगर कि रिपोर्ट 
भारत में आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाए गए 5 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को एनआईए ने पकड़ा, लेकिन मीडिया की चुप्पी छाई रही।
0 बहस
0 प्राइम टाइम शो
ANI गिरफ्तार लोगों की राष्ट्रीयता लिखने से भी डर रहा है।
यह एक गंभीर और चिंताजनक मामला है
    user_Ramprasad dhangar
    Ramprasad dhangar
    Photographer शामगढ़, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • Post by Mangal Dev rathore
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    Post by Mangal Dev rathore
    user_Mangal Dev rathore
    Mangal Dev rathore
    मंदसौर नगर, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    51 min ago
  • रामगंजमंडी क्षेत्र के न्यामतखेड़ी में एक सड़क हादसा हो गया। कवरपुरा में आयोजित बैरवा समाज की भानपुर मंडल की बैठक से लौटते समय न्यामतखेड़ी के पास एक बाइक अनियंत्रित होकर पुलिया से नीचे जा गिरी। हादसे में भवानीमंडी के आवली कला निवासी वृद्ध नन्दलाल बैरवा घायल हो गए।
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    रामगंजमंडी क्षेत्र के न्यामतखेड़ी में एक सड़क हादसा हो गया। कवरपुरा में आयोजित बैरवा समाज की भानपुर मंडल की बैठक से लौटते समय न्यामतखेड़ी के पास एक बाइक अनियंत्रित होकर पुलिया से नीचे जा गिरी। हादसे में भवानीमंडी के आवली कला निवासी वृद्ध नन्दलाल बैरवा घायल हो गए।
    user_Aajam Choudhary
    Aajam Choudhary
    Riportar रामगंज मंडी, कोटा, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • उत्तम नगर हिंदू तरुण खटीक को काठमांडू ने मारा था इसलिए इन जिहादियों को मार रहे हैं
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    उत्तम नगर हिंदू तरुण खटीक को काठमांडू ने मारा था इसलिए इन जिहादियों को मार रहे हैं
    user_भारत कि सान
    भारत कि सान
    Farmer रावतभाटा, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • गरोठ में बुधवार को ईदगाह की तरफ जाने वाले रास्ते को लेकर पुराने विवाद में पुलिस थाना एवं एसडीएम को ज्ञापन दिया गया
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    गरोठ में बुधवार को ईदगाह की तरफ जाने वाले रास्ते को लेकर पुराने विवाद में पुलिस थाना एवं एसडीएम को ज्ञापन दिया गया
    user_यशस्वी दुनिया साप्ताहिक
    यशस्वी दुनिया साप्ताहिक
    पत्रकार शामगढ़, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
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