फतेहगढ़ के ग्राम कोहन में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र (बलराम) एवं बहन देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ निकाली गई। इस पावन आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भाग लिया। रथयात्रा के दौरान पूरे गांव में "जय जगन्नाथ" के जयघोष गूंजते रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस धार्मिक आयोजन का शुभारंभ विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के पूजन-अर्चन से हुआ। इसके बाद आकर्षक ढंग से सुसज्जित भव्य रथ पर विराजमान भगवान की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने भगवान के रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को सौभाग्यशाली माना। यह शोभायात्रा ग्राम कोहन के प्रमुख मार्गों से होकर निकली, जहां जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया और आरती उतारकर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। यात्रा में शामिल श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और धार्मिक धुनों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। आयोजकों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, प्रेम, भाईचारे, सेवा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस आयोजन को सफल बनाने में ग्रामवासियों, मंदिर समिति के सदस्यों, युवाओं और स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। रथयात्रा का समापन महाआरती के साथ हुआ, जिसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
फतेहगढ़ के ग्राम कोहन में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र (बलराम) एवं बहन देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ निकाली गई। इस पावन आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भाग लिया। रथयात्रा के दौरान पूरे गांव में "जय जगन्नाथ" के जयघोष गूंजते रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस धार्मिक आयोजन का शुभारंभ विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ,
भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के पूजन-अर्चन से हुआ। इसके बाद आकर्षक ढंग से सुसज्जित भव्य रथ पर विराजमान भगवान की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने भगवान के रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को सौभाग्यशाली माना। यह शोभायात्रा ग्राम कोहन के प्रमुख मार्गों से होकर निकली, जहां जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया और आरती उतारकर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। यात्रा में शामिल
श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और धार्मिक धुनों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। आयोजकों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, प्रेम, भाईचारे, सेवा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस आयोजन को सफल बनाने में ग्रामवासियों, मंदिर समिति के सदस्यों, युवाओं और स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। रथयात्रा का समापन महाआरती के साथ हुआ, जिसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
- फतेहगढ़ के ग्राम कोहन में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र (बलराम) एवं बहन देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ निकाली गई। इस पावन आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भाग लिया। रथयात्रा के दौरान पूरे गांव में "जय जगन्नाथ" के जयघोष गूंजते रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस धार्मिक आयोजन का शुभारंभ विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के पूजन-अर्चन से हुआ। इसके बाद आकर्षक ढंग से सुसज्जित भव्य रथ पर विराजमान भगवान की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने भगवान के रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को सौभाग्यशाली माना। यह शोभायात्रा ग्राम कोहन के प्रमुख मार्गों से होकर निकली, जहां जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया और आरती उतारकर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। यात्रा में शामिल श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और धार्मिक धुनों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। आयोजकों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, प्रेम, भाईचारे, सेवा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस आयोजन को सफल बनाने में ग्रामवासियों, मंदिर समिति के सदस्यों, युवाओं और स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। रथयात्रा का समापन महाआरती के साथ हुआ, जिसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।3
- दिल्ली के जंतर मंतर के अलावा मध्य प्रदेश में भी एक और आंदोलन चल रहा है। मध्य प्रदेश में चल रहा यह आंदोलन आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार को लेकर किया जा रहा है।1
- दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर एक बड़ा बयान देते हुए सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग उठाई है। अरविंद केजरीवाल का कहना है कि NEET पेपर लीक विवाद के बाद अब शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना बेहद जरूरी हो गया है। केजरीवाल के इस बड़े बयान के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक बहस काफी तेज हो गई है।1
- मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के लटेरी में एक निलंबित उपयंत्री ने बड़ा दावा किया है। निलंबित उपयंत्री का कहना है कि कमीशन नीचे से लेकर ऊपर तक जाता है।1
- सामाजिक संगठन जन चेतना मंच द्वारा लटेरी के मॉडल स्कूल में पर्यावरण संरक्षण पर आधारित हरित ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाले उत्कृष्ट छात्रों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह, पौधा और नगद राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान कालू पेंटर द्वारा प्रदर्शित की गई आकर्षक चित्रकारी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय परिवार का भी उत्कृष्ट सहयोग प्राप्त हुआ।2
- मध्य प्रदेश के दतिया चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच सियासत बेहद तेज हो गई है। बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद भाजपा में एक नया अंदाज देखने को मिल रहा है। नरोत्तम मिश्रा अपने टिकट कटने के गमों को सियासी पारी के रूप में भुलाने की कोशिश कर रहे हैं और मंचों से शायराने अंदाज में कांग्रेस के साथ-साथ अपने ही टिकट काटने वालों पर जमकर बरस रहे हैं। इसी बीच एक कार्यक्रम के दौरान नरोत्तम मिश्रा सीधे तौर पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) को चेतावनी देते नजर आए। उन्होंने एसपी को संबोधित करते हुए स्पष्ट लहजे में कहा कि एसपी साहब, मैं भूलने वाला प्राणी नहीं हूं। उन्होंने पूर्व में चुनाव हारने के बाद कही अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि मैं समंदर हूं, पानी उतरता देख घर मत बना लेना, मेरा वादा है कि मैं लौटकर जरूर आऊंगा। नरोत्तम मिश्रा के इस बयान के बाद दतिया चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ गया है।1
- राजगढ़ के पचोर में कंधे पर अर्थी रखकर कीचड़ भरे रास्ते से गुजरते लोगों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी और पटवारी की टीम ने तुरंत मुक्तिधाम पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया। पटवारी की टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मुक्तिधाम का दौरा किया और वहां तक पहुंचने के रास्ते से अतिक्रमण हटाने को लेकर चर्चा की। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों के समक्ष ही एक पंचनामा तैयार किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बताया कि काकड़ के रास्ते से मुक्तिधाम तक पहुंचने का रास्ता बिल्कुल सीधा है, जिस पर अतिक्रमण किया गया है और इसे हटाया जाना बहुत जरूरी है। पटवारी ने यह पंचनामा बनाकर तहसीलदार को सौंप दिया है। अब राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की टीम इस मुक्तिधाम मार्ग से अतिक्रमण हटाकर रास्ता सुलभ करने का काम करेगी।1
- पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के पहले दिन भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। सभी घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। इस घटना के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है।1