डीएफओ साहब, AC छोड़िए... नौगढ़ का जंगल संभालिए: भालुओं के आतंक से सहमे ग्रामीण, कब जागेगा वन विभाग? डीएफओ साहब, AC छोड़िए... नौगढ़ का जंगल संभालिए: भालुओं के आतंक से सहमे ग्रामीण, कब जागेगा वन विभाग? चंदौली के नौगढ़ में भालुओं का आतंक चरम पर है। एक साल में आधा दर्जन हमलों के बावजूद वन विभाग ने न पिंजरा लगाया और न ही गश्त बढ़ाई। क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? जानिए ग्राउंड रिपोर्ट। नौगढ़ में भालुओं का जबरदस्त आतंक एक साल में आधा दर्जन घायल वन विभाग की लापरवाही पर आक्रोश पिंजरा और पेट्रोलिंग की उठी मांग दहशत के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण नौगढ़ के जंगल इन दिनों ग्रामीणों के लिए खौफ का दूसरा नाम बनते जा रहे हैं। बीते एक साल के भीतर भालू के हमलों में आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, लगातार हो रहे हमलों से लोगों में दहशत का माहौल है और जंगल की ओर जाना अब जोखिम भरा हो गया है। भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने तथा जंगल में गश्ती बढ़ाने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में आक्रोश भी बढ़ने लगा है। *जंगल में भालू का राज, ग्रामीणों में दहशत* चंद्रप्रभा सेंचुरी से सटे नरकटी, धौठवा, लौवारी कला और हिनौतघाट का जंगल का अब ग्रामीणों के लिए खतरे की घंटी बन चुका है। रोजी-रोटी और जलौनी लकड़ी के लिए जंगल जाने वाले लोग अब हर कदम डर के साये में रख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में भालू की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से न तो निगरानी बढ़ाई गई और न ही सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए गए। हर घटना के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं किया जाता। *झाड़ियों से निकला भालू, युवक पर किया जानलेवा हमला* बीते दो मार्च को मरवटिया गांव का दौलत रोज की तरह घर से जलौनी लकड़ी लेने जंगल गया था। तभी झाड़ियों से अचानक निकले भालू ने उस पर हमला कर दिया। भालू ने अपने नुकीले पंजों से युवक के चेहरे को बुरी तरह जख्मी कर दिया और शरीर के कई हिस्सों को दांतों से नोच डाला। युवक के हाथ, पैर और शरीर पर गहरे घाव हो गए। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ दौड़े और किसी तरह भालू को भगाकर घायल को बचाया। सूचना पर पहुंची 108 एंबुलेंस से युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ पहुंचाया गया, जहां हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। *हमले पर हमला… आखिर कब जागेगा वन विभाग?* नरकटी और आसपास के जंगलों में भालू का आतंक नया नहीं है। पिछले एक साल के दौरान कई लोग इसका शिकार हो चुके हैं। 7 फरवरी को लौवारी कला निवासी लालबरत कोल, 4 मार्च को खेत में सरसों काट रहे रामभवन, पिछले साल चार मई को लकड़ी लेने गई अनीता, 17 जुलाई को बकरी चरा रहे रामकृत कोल और जून महीने में विमलेश पाल पर भी भालू ने हमला किया था। इन सभी घटनाओं में घायलों को गंभीर हालत में ट्रामा सेंटर भेजना पड़ा। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से न तो स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की गई और न ही भालू को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। *हर बार मुआवजा… लेकिन सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?* ग्रामीणों का कहना है कि हर घटना के बाद वन विभाग की ओर से औपचारिक जांच, कागजी कार्रवाई और मुआवजे की घोषणा कर दी जाती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन हमलों को रोकने के लिए कोई ठोस योजना क्यों नहीं बनाई जा रही। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पिंजरा लगाकर भालू को पकड़ा जाता और जंगल में नियमित पेट्रोलिंग की जाती तो शायद इतनी घटनाएं नहीं होतीं। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि नरकटी जंगल में हर दो-तीन महीने में भालू का हमला आम बात बन गया है। *आक्रोश बढ़ा, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी* लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों का आक्रोश भी बढ़ने लगा है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाया गया और गश्ती दल सक्रिय नहीं किए गए तो वे सामूहिक रूप से जंगल जाना बंद कर देंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ी तो वे वन विभाग के खिलाफ आंदोलन और प्रदर्शन भी करेंगे। उनका कहना है कि सिर्फ मुआवजे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए जमीन पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।
डीएफओ साहब, AC छोड़िए... नौगढ़ का जंगल संभालिए: भालुओं के आतंक से सहमे ग्रामीण, कब जागेगा वन विभाग? डीएफओ साहब, AC छोड़िए... नौगढ़ का जंगल संभालिए: भालुओं के आतंक से सहमे ग्रामीण, कब जागेगा वन विभाग? चंदौली के नौगढ़ में भालुओं का आतंक चरम पर है। एक साल में आधा दर्जन हमलों के बावजूद वन विभाग ने न पिंजरा लगाया और न ही गश्त बढ़ाई। क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? जानिए ग्राउंड रिपोर्ट। नौगढ़ में भालुओं का जबरदस्त आतंक एक साल में आधा दर्जन घायल वन विभाग की लापरवाही पर आक्रोश पिंजरा और पेट्रोलिंग की उठी मांग दहशत के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण नौगढ़ के जंगल इन दिनों ग्रामीणों के लिए खौफ का दूसरा नाम बनते जा रहे हैं। बीते एक साल के भीतर भालू के हमलों में आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, लगातार हो रहे हमलों से लोगों में दहशत का माहौल है और जंगल की ओर जाना अब जोखिम भरा हो गया है। भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने तथा जंगल में गश्ती बढ़ाने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में आक्रोश भी बढ़ने लगा है। *जंगल में भालू का राज, ग्रामीणों में दहशत* चंद्रप्रभा सेंचुरी से सटे नरकटी, धौठवा, लौवारी कला और हिनौतघाट का जंगल का अब ग्रामीणों के लिए खतरे की घंटी बन चुका है। रोजी-रोटी और जलौनी लकड़ी के लिए जंगल जाने वाले लोग अब हर कदम डर के साये में रख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में भालू की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से न तो निगरानी बढ़ाई गई और न ही सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए गए। हर घटना के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं किया जाता। *झाड़ियों से निकला भालू, युवक पर किया जानलेवा हमला* बीते दो मार्च को मरवटिया गांव का दौलत रोज की तरह घर से जलौनी लकड़ी लेने जंगल गया था। तभी झाड़ियों से अचानक निकले भालू ने उस पर हमला कर दिया। भालू ने अपने नुकीले पंजों से युवक के चेहरे को बुरी तरह जख्मी कर दिया और शरीर के कई हिस्सों को दांतों से नोच डाला। युवक के हाथ, पैर और शरीर पर गहरे घाव हो गए। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ दौड़े और किसी तरह भालू को भगाकर घायल को बचाया। सूचना पर पहुंची 108 एंबुलेंस से युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ पहुंचाया गया, जहां हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। *हमले पर हमला… आखिर कब जागेगा वन विभाग?* नरकटी और आसपास के जंगलों में भालू का आतंक नया नहीं है। पिछले एक साल के दौरान कई लोग इसका शिकार हो चुके हैं। 7 फरवरी को लौवारी कला निवासी लालबरत कोल, 4 मार्च को खेत में सरसों काट रहे रामभवन, पिछले साल चार मई को लकड़ी लेने गई अनीता, 17 जुलाई को बकरी चरा रहे रामकृत कोल और जून महीने में विमलेश पाल पर भी भालू ने हमला किया था। इन सभी घटनाओं में घायलों को गंभीर हालत में ट्रामा सेंटर भेजना पड़ा। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से न तो स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की गई और न ही भालू को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। *हर बार मुआवजा… लेकिन सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?* ग्रामीणों का कहना है कि हर घटना के बाद वन विभाग की ओर से औपचारिक जांच, कागजी कार्रवाई और मुआवजे की घोषणा कर दी जाती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन हमलों को रोकने के लिए कोई ठोस योजना क्यों नहीं बनाई जा रही। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पिंजरा लगाकर भालू को पकड़ा जाता और जंगल में नियमित पेट्रोलिंग की जाती तो शायद इतनी घटनाएं नहीं होतीं। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि नरकटी जंगल में हर दो-तीन महीने में भालू का हमला आम बात बन गया है। *आक्रोश बढ़ा, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी* लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों का आक्रोश भी बढ़ने लगा है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाया गया और गश्ती दल सक्रिय नहीं किए गए तो वे सामूहिक रूप से जंगल जाना बंद कर देंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ी तो वे वन विभाग के खिलाफ आंदोलन और प्रदर्शन भी करेंगे। उनका कहना है कि सिर्फ मुआवजे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए जमीन पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।
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- 🔴 क्या सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप है? ➡️ सच्चाई: - सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ है। - लेकिन राजनीतिक आरोप जरूर लगे थे। ➡️ आरोप किसने लगाया? - प्रशांत किशोर ने 2025 में आरोप लगाया था। - एक पुराने केस का जिक्र किया गया था। ➡️ सम्राट चौधरी का जवाब: - उन्होंने आरोप को पूरी तरह गलत बताया। - कहा कि कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है। 🟢 वर्तमान स्थिति (2026): - सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। - नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उन्हें चुना गया। ⚠️ ध्यान देने वाली बात: - सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें अधूरी या गलत हो सकती हैं। - आरोप लगना और दोषी साबित होना अलग बात है। 🧠 आसान भाषा में: - आरोप ≠ दोषी - कोर्ट का फैसला ही अंतिम माना जाता है।1
- बनारस के लहरतारा मे विकास के नाम पर लोगों को आज भी धोखा मिला चालीस साल से लोग सीवर का इन्तज़ार कर रहे हैं। varanasi varanasi News varanasi local News Kumar shailendra awaj News1
- Post by आजाद जमावादी1
- Post by R News1
- Post by Sanskar mishra1
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- एटा में शादी, धोखा और साजिश का मामला सामने आया है माधुरी और नीरज की शादी 12 साल पहले हुई थी, शादी के तीन साल बाद माधुरी गांव के ही देवसिंह के साथ भाग गई और उससे शादी कर ली नीरज ने माधुरी के खिलाफ घर से जेवर और नकदी ले जाने का केस दर्ज कराया था, जो अभी भी चल रहा है अब माधुरी के पैर में गोली लगने का मामला सामने आया है, जिसमें आरोप पहले पति नीरज पर लगाया जा रहा है आशंका जताई जा रही है कि यह पूरी घटना नीरज पर केस वापस लेने का दबाव बनाने के लिए रची गई साजिश हो सकती है1
- गाजीपुर जिले के रेवतीपुर थाना पुलिस ने हत्या के प्रयास के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब एक महीने से फरार चल रहे 19 वर्षीय आरोपी सबरू राम को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे ताड़ीघाट-बारा हाईवे स्थित एक ढाबे के पास से उस समय दबोचा, जब वह कहीं भागने के लिए बस का इंतजार कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को थाने लाकर पूछताछ की गई और मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया। पुलिस के मुताबिक इस मामले में पहले ही 12 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। गौरतलब है कि 4 मार्च 2026 को हसनपुरा गांव में पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिसके बाद 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जल्द ही बाकी आरोपी को भी गिरफ्तार करने का दावा किया है।1