झारखंड के दुमका जिले में ताड़ के पेड़ों की धड़ल्ले से हो रही कटाई को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि ताड़ के पेड़ एक ओर जहाँ प्राकृतिक सौंदर्यता के प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर ये आकाशीय बिजली से जान-माल की रक्षा भी करते हैं। ऐसे में, वे सवाल उठा रहे हैं कि इन पेड़ों की कटाई किस आधार पर की जा रही है। जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के अवैध कारोबारी स्थानीय दलालों के साथ मिलकर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया को पूरा किए, बेखौफ होकर भारी संख्या में ताड़ के बागानों की कटाई कर रहे हैं। इन लकड़ियों को ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा है, और इन लकड़ी माफियाओं को किसी का कोई डर नहीं है। ग्रामीणों ने इस संबंध में प्रशासन से शिकायत भी की है, लेकिन इसके बावजूद पेड़ों की कटाई लगातार जारी है, जो कई सवालों के घेरे में है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी वृक्षारोपण करके पर्यावरण बचाने का “हाईटेक ड्रामा” करते हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर हजारों की संख्या में ताड़ के पेड़ काटे जा रहे हैं और संबंधित विभाग पूरी तरह से मौन है। ग्रामीण सवाल उठाते हैं कि क्या ताड़ के पेड़ पर्यावरण के लिए घातक हैं, या फिर संबंधित विभाग का इस गिरोह के साथ “चोली-दामन का संबंध” है। जिला प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि क्या ताड़ के पेड़ वास्तव में पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं। यदि नहीं, तो हजारों की संख्या में इन पेड़ों की कटाई कैसे हो रही है, यह एक अहम सवाल है।
झारखंड के दुमका जिले में ताड़ के पेड़ों की धड़ल्ले से हो रही कटाई को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि ताड़ के पेड़ एक ओर जहाँ प्राकृतिक सौंदर्यता के प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर ये आकाशीय बिजली से जान-माल की रक्षा भी करते हैं। ऐसे में, वे सवाल उठा रहे हैं कि इन पेड़ों की कटाई किस आधार पर की जा रही है। जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के अवैध कारोबारी स्थानीय दलालों के साथ मिलकर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया को पूरा किए, बेखौफ होकर भारी संख्या में ताड़ के बागानों की कटाई कर रहे हैं। इन लकड़ियों को ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा है, और इन लकड़ी माफियाओं को किसी का कोई डर नहीं है। ग्रामीणों ने इस संबंध में प्रशासन से शिकायत भी की है, लेकिन इसके बावजूद पेड़ों की कटाई लगातार जारी है, जो कई सवालों के घेरे में है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी वृक्षारोपण करके पर्यावरण बचाने का “हाईटेक ड्रामा” करते हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर हजारों की संख्या में ताड़ के पेड़ काटे जा रहे हैं और संबंधित विभाग पूरी तरह से मौन है। ग्रामीण सवाल उठाते हैं कि क्या ताड़ के पेड़ पर्यावरण के लिए घातक हैं, या फिर संबंधित विभाग का इस गिरोह के साथ “चोली-दामन का संबंध” है। जिला प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि क्या ताड़ के पेड़ वास्तव में पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं। यदि नहीं, तो हजारों की संख्या में इन पेड़ों की कटाई कैसे हो रही है, यह एक अहम सवाल है।
- झारखंड के दुमका जिले में ताड़ के पेड़ों की धड़ल्ले से हो रही कटाई को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि ताड़ के पेड़ एक ओर जहाँ प्राकृतिक सौंदर्यता के प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर ये आकाशीय बिजली से जान-माल की रक्षा भी करते हैं। ऐसे में, वे सवाल उठा रहे हैं कि इन पेड़ों की कटाई किस आधार पर की जा रही है। जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के अवैध कारोबारी स्थानीय दलालों के साथ मिलकर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया को पूरा किए, बेखौफ होकर भारी संख्या में ताड़ के बागानों की कटाई कर रहे हैं। इन लकड़ियों को ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा है, और इन लकड़ी माफियाओं को किसी का कोई डर नहीं है। ग्रामीणों ने इस संबंध में प्रशासन से शिकायत भी की है, लेकिन इसके बावजूद पेड़ों की कटाई लगातार जारी है, जो कई सवालों के घेरे में है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी वृक्षारोपण करके पर्यावरण बचाने का “हाईटेक ड्रामा” करते हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर हजारों की संख्या में ताड़ के पेड़ काटे जा रहे हैं और संबंधित विभाग पूरी तरह से मौन है। ग्रामीण सवाल उठाते हैं कि क्या ताड़ के पेड़ पर्यावरण के लिए घातक हैं, या फिर संबंधित विभाग का इस गिरोह के साथ “चोली-दामन का संबंध” है। जिला प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि क्या ताड़ के पेड़ वास्तव में पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं। यदि नहीं, तो हजारों की संख्या में इन पेड़ों की कटाई कैसे हो रही है, यह एक अहम सवाल है।1
- सरकार ने एलपीजी गैस से संबंधित नियमों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस बड़े फैसले के परिणामस्वरूप, आने वाले समय में एलपीजी गैस के मौजूदा नियमों में परिवर्तन किए जाएंगे।1
- जामताड़ा के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त आलोक कुमार ने शनिवार को समाहरणालय सभागार में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम का प्राथमिक लक्ष्य प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना है, साथ ही अपात्र तथा त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची को पूरी तरह से शुद्ध और अद्यतन बनाना है। इस अवसर पर, जामताड़ा डीसी ने सभी पात्र नागरिकों से अपनी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की अपील की।1
- जामताड़ा ज़िले के करमाटांड़ पंचायत में डीडीसी ने अचानक दौरा कर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पंचायत की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को इनमें सुधार करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।1
- झारखंड के देवघर जिले के पाथरोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत गंजेवारी पंचायत के बुढीकुरा गाँव निवासी बबलू कुमार दास ने कानून से इंसाफ की गुहार लगाई है। दास ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना का घर मिलने के बाद से उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने दिलीप दास, सदानंद दास, उनके बेटे देवानंद दास और सदानंद दास के बड़े बेटे सहित उनके पूरे परिवार पर धमकी देने का आरोप लगाया है। बबलू कुमार दास के अनुसार, इन लोगों द्वारा उन्हें 'ब्याज से लेकर' धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मई महीने में एक घटना हुई थी, जिसमें उनके अकाउंट या नंबर पर ₹10,000 भेजने की धमकी दी गई थी, जिसे वे बुढीकुरा में बढ़ते साइबर या अन्य अपराधों से जोड़ते हैं।1
- झारखंड के साहिबगंज और बरहरवा से संबंधित एक गंभीर खबर में, मोस्ताक़िम आलम और उनके पिता याक़ूब आलम 21 जून 2026 से लापता हैं। उनके परिवार की परेशानी बढ़ती जा रही है और वे दोनों की तलाश में हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इस मुश्किल घड़ी में, परिवार ने आम जनता से हृदय से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को इन दोनों के बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत उनसे संपर्क करें। इंसानियत के नाते, इस पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करने का आग्रह किया गया है, ताकि आपकी एक शेयर इस परेशान परिवार की खुशियों को वापस लाने में सहायक हो सके।1
- साधु-संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एक मंदिर में चोरी की घटना के बावजूद प्रधानमंत्री की तरफ से इस विषय पर कोई बयान जारी नहीं किया गया। साधु-संतों ने प्रधानमंत्री की इसी चुप्पी को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।1
- देवघर जिले के पथरोल थाना अंतर्गत बुरहीकुरा गाँव, पंचायत गंजवाडी के निवासी बबलू कुमार दास ने अपने क्षेत्र में साइबर अपराध के बढ़ते आतंक को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, यह समस्या 2010 से शुरू हुई है और अब वे इसे जड़ से खत्म करना चाहते हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए बबलू कुमार दास ने कानून और पुलिस बल की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। उन्होंने अपने साथ न्याय करने की पुरज़ोर अपील करते हुए पुलिस और कानून से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। यह जानकारी अंबेडकर चौक, बुरहीकुरा, पंचायत गंजवाडी, थाना पथरोल, जिला देवघर से पब्लिक न्यूज़ के माध्यम से सामने आई है।1