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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 'गौसेवा', लाखों की गौशाला बनी शो-पीस; सड़कों पर तड़पने को मजबूर गोवंश समूह संचालक की कई बार शिकायत करने के बाद भी न जांच न कार्यवाही । -- एक ओर सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहा रही है ।वहीं दूसरी ओर धरातल पर जिम्मेदार अधिकारियों और समूह संचालकों की मिलीभगत इस योजना को पलीता लगा रही है। जनपद पंचायत बड़ामलहरा की ग्राम पंचायत बुदौर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित गौशाला आज खुद बदहाली के आंसू रो रही है। यहाँ सरकारी फाइलों में तो गायों की सेवा हो रही है। लेकिन हकीकत में गौशाला 'शो-पीस' बनकर रह गई है ।और गोवंश दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्राम के राजकिशोर राजा ने जानकारी देते हुए बताया हैं सरकार ने आवारा पशुओं की समस्या से निजात पाने और किसानों की फसलों को बचाने के लिए गौ शाला के नाम पर भारी-भरकम राशि जारी की। ग्राम बुदौर में बनी इस गौशाला पर लगभग 30-40 लाख रुपये खर्च किए गए। ऊँची दीवारें, टीन शेड और पानी की टंकियां बनाई गईं। दस्तावेजों में यह संचालित गौशाला' है, लेकिन धरातल पर यहाँ आठ से दस गाय ही मौजूद है। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला का संचालन केवल अधिकारियों ओर समूह संचालक की जेब भरने के लिए किया जा रहा हैं । गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी बगाज माता स्व सहायता समूह को सौंपी गई है । जिसकी अध्यक्ष वंदना पटेरिया हैं ।समूह संचालक की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। नियमानुसार, प्रति गाय के चारे और रख-रखाव के लिए सरकार प्रतिदिन एक निश्चित राशि प्रदान करती है। लेकिन समूह संचालक उस राशि का बंदरबाट करते हैं नतीजा ग्राम में सैकड़ों की तादात में गाय सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं । ग्रामीणों ने आरोप लगाया हैं कि समूह संचालक ने कागजों पर सैकड़ों गायों की 'टैगिंग' दिखाई है ।जो असल में गौ शाला में मौजूद ही नहीं हैं। गौशाला में काम करने वाले मजदूरों के नाम पर भी फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि निकाली जा रही है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासन की चुप्पी है। स्थानीय सरपंच, पंच और जागरूक ग्रामीणों ने पिछले एक साल में कम से कम एक दर्जन बार लिखित शिकायतें की हैं। जनपद पंचायत के सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा को साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई हैं । लेकिन आज तक न तो कोई जांच टीम गांव पहुंची और न ही समूह संचालक का अनुबंध निरस्त किया गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ऊपर बैठे अधिकारियों को इस भ्रष्टाचार का 'हिस्सा' पहुँच रहा है, इसीलिए समूह संचालक पर हाथ डालने से अधिकारी कतरा रहे है। गौशाला खाली होने का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। सड़कों पर आवारा घूम रहे गोवंश के कारण स्थिति भयावह हो गई है । क्षेत्र का किसान पहले ही मौसम की मार झेल रहा है।ऊपर से लावारिस पशु रात भर खेतों में फसल को चर रहे हैं। किसान अपनी फसल बचाने के लिए पूरी रात जागकर पहरेदारी करने को मजबूर हैं। कई बार गोवंश और किसानों के बीच संघर्ष की स्थिति भी निर्मित होती है । ग्रामीणों ने समूह संचालक के खिलाफ कार्यवाही करवाए जाने की मांग की हैं साथ ही गौशाला का संचालन किसी ईमानदार स्थानीय समिति या सामाजिक संस्था को सौंपे जाने की मांग की हैं । सड़कों पर घूम रहे गोवंश को तत्काल प्रभाव से रेस्क्यू कर गौशाला में शिफ्ट कराए जाने की मांग की हैं । इनका कहना हैं। ग्राम पंचायत बुदौर में बनी गौशाला में समूह संचालक के द्वारा हो रही गड़बड़ियों का मामला आपके द्वारा संज्ञान में आया है। जनपद सी ई ओ को मामले की जांच हेतु निर्देशित कर दिया गया हैं । जांच उपरांत दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी। ओम नमः शिवाय अरजरिया जिला पंचायत सी ई ओ छत्तरपुर।

13 hrs ago
user_मध्य प्रदेश श्रमजीवी संदीप सिंह घोष
मध्य प्रदेश श्रमजीवी संदीप सिंह घोष
Ghuwara, Chhatarpur•
13 hrs ago
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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 'गौसेवा', लाखों की गौशाला बनी शो-पीस; सड़कों पर तड़पने को मजबूर गोवंश समूह संचालक की कई बार शिकायत करने के बाद भी न जांच न कार्यवाही । -- एक ओर सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहा रही है ।वहीं दूसरी ओर धरातल पर जिम्मेदार अधिकारियों और समूह संचालकों की मिलीभगत इस योजना को पलीता लगा रही है। जनपद पंचायत बड़ामलहरा की ग्राम पंचायत बुदौर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित गौशाला आज खुद बदहाली के आंसू रो रही है। यहाँ सरकारी फाइलों में तो गायों की सेवा हो रही है। लेकिन हकीकत में गौशाला 'शो-पीस' बनकर रह गई है ।और गोवंश दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्राम के राजकिशोर राजा ने जानकारी देते हुए बताया हैं सरकार ने आवारा पशुओं की समस्या से निजात पाने और किसानों की फसलों को बचाने के लिए गौ शाला के नाम पर भारी-भरकम राशि जारी की। ग्राम बुदौर में

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बनी इस गौशाला पर लगभग 30-40 लाख रुपये खर्च किए गए। ऊँची दीवारें, टीन शेड और पानी की टंकियां बनाई गईं। दस्तावेजों में यह संचालित गौशाला' है, लेकिन धरातल पर यहाँ आठ से दस गाय ही मौजूद है। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला का संचालन केवल अधिकारियों ओर समूह संचालक की जेब भरने के लिए किया जा रहा हैं । गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी बगाज माता स्व सहायता समूह को सौंपी गई है । जिसकी अध्यक्ष वंदना पटेरिया हैं ।समूह संचालक की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। नियमानुसार, प्रति गाय के चारे और रख-रखाव के लिए सरकार प्रतिदिन एक निश्चित राशि प्रदान करती है। लेकिन समूह संचालक उस राशि का बंदरबाट करते हैं नतीजा ग्राम में सैकड़ों की तादात में गाय सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं । ग्रामीणों ने आरोप लगाया हैं कि समूह संचालक ने कागजों पर सैकड़ों गायों की 'टैगिंग' दिखाई

है ।जो असल में गौ शाला में मौजूद ही नहीं हैं। गौशाला में काम करने वाले मजदूरों के नाम पर भी फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि निकाली जा रही है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासन की चुप्पी है। स्थानीय सरपंच, पंच और जागरूक ग्रामीणों ने पिछले एक साल में कम से कम एक दर्जन बार लिखित शिकायतें की हैं। जनपद पंचायत के सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा को साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई हैं । लेकिन आज तक न तो कोई जांच टीम गांव पहुंची और न ही समूह संचालक का अनुबंध निरस्त किया गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ऊपर बैठे अधिकारियों को इस भ्रष्टाचार का 'हिस्सा' पहुँच रहा है, इसीलिए समूह संचालक पर हाथ डालने से अधिकारी कतरा रहे है। गौशाला खाली होने का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। सड़कों पर आवारा घूम रहे गोवंश के कारण स्थिति भयावह हो गई है । क्षेत्र का किसान

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पहले ही मौसम की मार झेल रहा है।ऊपर से लावारिस पशु रात भर खेतों में फसल को चर रहे हैं। किसान अपनी फसल बचाने के लिए पूरी रात जागकर पहरेदारी करने को मजबूर हैं। कई बार गोवंश और किसानों के बीच संघर्ष की स्थिति भी निर्मित होती है । ग्रामीणों ने समूह संचालक के खिलाफ कार्यवाही करवाए जाने की मांग की हैं साथ ही गौशाला का संचालन किसी ईमानदार स्थानीय समिति या सामाजिक संस्था को सौंपे जाने की मांग की हैं । सड़कों पर घूम रहे गोवंश को तत्काल प्रभाव से रेस्क्यू कर गौशाला में शिफ्ट कराए जाने की मांग की हैं । इनका कहना हैं। ग्राम पंचायत बुदौर में बनी गौशाला में समूह संचालक के द्वारा हो रही गड़बड़ियों का मामला आपके द्वारा संज्ञान में आया है। जनपद सी ई ओ को मामले की जांच हेतु निर्देशित कर दिया गया हैं । जांच उपरांत दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी। ओम नमः शिवाय अरजरिया जिला पंचायत सी ई ओ छत्तरपुर।

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  • Post by Deepak Ahirwar
    1
    Post by Deepak Ahirwar
    user_Deepak Ahirwar
    Deepak Ahirwar
    Farmer बड़गाँव धसान, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    53 min ago
  • आज सुबह से बारिश हो रही है दोस्तो राधे राधे
    1
    आज सुबह से बारिश हो रही है दोस्तो राधे राधे
    user_Ramshu sen
    Ramshu sen
    घुवारा, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 'गौसेवा', लाखों की गौशाला बनी शो-पीस; सड़कों पर तड़पने को मजबूर गोवंश समूह संचालक की कई बार शिकायत करने के बाद भी न जांच न कार्यवाही । -- एक ओर सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहा रही है ।वहीं दूसरी ओर धरातल पर जिम्मेदार अधिकारियों और समूह संचालकों की मिलीभगत इस योजना को पलीता लगा रही है। जनपद पंचायत बड़ामलहरा की ग्राम पंचायत बुदौर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित गौशाला आज खुद बदहाली के आंसू रो रही है। यहाँ सरकारी फाइलों में तो गायों की सेवा हो रही है। लेकिन हकीकत में गौशाला 'शो-पीस' बनकर रह गई है ।और गोवंश दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्राम के राजकिशोर राजा ने जानकारी देते हुए बताया हैं सरकार ने आवारा पशुओं की समस्या से निजात पाने और किसानों की फसलों को बचाने के लिए गौ शाला के नाम पर भारी-भरकम राशि जारी की। ग्राम बुदौर में बनी इस गौशाला पर लगभग 30-40 लाख रुपये खर्च किए गए। ऊँची दीवारें, टीन शेड और पानी की टंकियां बनाई गईं। दस्तावेजों में यह संचालित गौशाला' है, लेकिन धरातल पर यहाँ आठ से दस गाय ही मौजूद है। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला का संचालन केवल अधिकारियों ओर समूह संचालक की जेब भरने के लिए किया जा रहा हैं । गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी बगाज माता स्व सहायता समूह को सौंपी गई है । जिसकी अध्यक्ष वंदना पटेरिया हैं ।समूह संचालक की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। नियमानुसार, प्रति गाय के चारे और रख-रखाव के लिए सरकार प्रतिदिन एक निश्चित राशि प्रदान करती है। लेकिन समूह संचालक उस राशि का बंदरबाट करते हैं नतीजा ग्राम में सैकड़ों की तादात में गाय सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं । ग्रामीणों ने आरोप लगाया हैं कि समूह संचालक ने कागजों पर सैकड़ों गायों की 'टैगिंग' दिखाई है ।जो असल में गौ शाला में मौजूद ही नहीं हैं। गौशाला में काम करने वाले मजदूरों के नाम पर भी फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि निकाली जा रही है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासन की चुप्पी है। स्थानीय सरपंच, पंच और जागरूक ग्रामीणों ने पिछले एक साल में कम से कम एक दर्जन बार लिखित शिकायतें की हैं। जनपद पंचायत के सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा को साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई हैं । लेकिन आज तक न तो कोई जांच टीम गांव पहुंची और न ही समूह संचालक का अनुबंध निरस्त किया गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ऊपर बैठे अधिकारियों को इस भ्रष्टाचार का 'हिस्सा' पहुँच रहा है, इसीलिए समूह संचालक पर हाथ डालने से अधिकारी कतरा रहे है। गौशाला खाली होने का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। सड़कों पर आवारा घूम रहे गोवंश के कारण स्थिति भयावह हो गई है । क्षेत्र का किसान पहले ही मौसम की मार झेल रहा है।ऊपर से लावारिस पशु रात भर खेतों में फसल को चर रहे हैं। किसान अपनी फसल बचाने के लिए पूरी रात जागकर पहरेदारी करने को मजबूर हैं। कई बार गोवंश और किसानों के बीच संघर्ष की स्थिति भी निर्मित होती है । ग्रामीणों ने समूह संचालक के खिलाफ कार्यवाही करवाए जाने की मांग की हैं साथ ही गौशाला का संचालन किसी ईमानदार स्थानीय समिति या सामाजिक संस्था को सौंपे जाने की मांग की हैं । सड़कों पर घूम रहे गोवंश को तत्काल प्रभाव से रेस्क्यू कर गौशाला में शिफ्ट कराए जाने की मांग की हैं । इनका कहना हैं। ग्राम पंचायत बुदौर में बनी गौशाला में समूह संचालक के द्वारा हो रही गड़बड़ियों का मामला आपके द्वारा संज्ञान में आया है। जनपद सी ई ओ को मामले की जांच हेतु निर्देशित कर दिया गया हैं । जांच उपरांत दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी। ओम नमः शिवाय अरजरिया जिला पंचायत सी ई ओ छत्तरपुर।
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    भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 'गौसेवा', लाखों की गौशाला बनी शो-पीस; सड़कों पर तड़पने को मजबूर गोवंश
समूह संचालक की कई बार शिकायत करने के बाद भी न जांच न कार्यवाही । 
-- एक ओर सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहा रही है ।वहीं दूसरी ओर धरातल पर जिम्मेदार अधिकारियों और समूह संचालकों की मिलीभगत इस योजना को पलीता लगा रही है। जनपद पंचायत बड़ामलहरा की ग्राम पंचायत बुदौर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित  गौशाला आज खुद बदहाली के आंसू रो रही है। यहाँ सरकारी फाइलों में तो गायों की सेवा हो रही है। लेकिन हकीकत में गौशाला 'शो-पीस' बनकर रह गई है ।और गोवंश दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्राम के राजकिशोर राजा ने जानकारी देते हुए बताया हैं सरकार ने आवारा पशुओं की समस्या से निजात पाने और किसानों की फसलों को बचाने के लिए गौ शाला के नाम पर  भारी-भरकम राशि जारी की। ग्राम बुदौर में बनी इस गौशाला पर लगभग  30-40 लाख रुपये खर्च किए गए। ऊँची दीवारें, टीन शेड और पानी की टंकियां बनाई गईं। दस्तावेजों में यह संचालित गौशाला' है, लेकिन धरातल पर यहाँ आठ से दस  गाय ही  मौजूद  है। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला का संचालन केवल अधिकारियों ओर  समूह संचालक की जेब भरने के लिए किया जा रहा हैं ।  गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी  बगाज माता स्व सहायता समूह को सौंपी गई है । जिसकी अध्यक्ष वंदना पटेरिया हैं ।समूह संचालक की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। नियमानुसार, प्रति गाय के चारे और रख-रखाव के लिए सरकार प्रतिदिन एक निश्चित राशि  प्रदान करती है। लेकिन समूह संचालक उस राशि का बंदरबाट करते हैं नतीजा ग्राम में सैकड़ों की तादात में गाय सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं । ग्रामीणों ने  आरोप लगाया हैं कि समूह संचालक ने कागजों पर सैकड़ों गायों की 'टैगिंग' दिखाई है ।जो असल में गौ शाला में मौजूद ही नहीं हैं। गौशाला में काम करने वाले मजदूरों के नाम पर भी फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि निकाली जा रही है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासन की चुप्पी है। स्थानीय सरपंच, पंच और जागरूक ग्रामीणों ने पिछले एक साल में कम से कम एक दर्जन  बार लिखित शिकायतें की हैं। जनपद पंचायत के सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा को साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई हैं । लेकिन  आज तक न तो कोई जांच टीम गांव पहुंची और न ही समूह संचालक का अनुबंध निरस्त किया गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ऊपर बैठे अधिकारियों को इस भ्रष्टाचार का 'हिस्सा' पहुँच रहा है, इसीलिए समूह संचालक पर हाथ डालने से अधिकारी कतरा रहे  है। गौशाला खाली होने का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। सड़कों पर आवारा घूम रहे गोवंश के कारण स्थिति भयावह हो गई है । क्षेत्र का किसान पहले ही मौसम की मार झेल रहा है।ऊपर से लावारिस पशु रात भर खेतों में फसल को  चर रहे हैं। किसान अपनी फसल बचाने के लिए पूरी रात जागकर पहरेदारी करने को मजबूर हैं। कई बार गोवंश और किसानों के बीच संघर्ष की स्थिति भी निर्मित होती है । ग्रामीणों ने समूह संचालक के खिलाफ कार्यवाही करवाए जाने की मांग की हैं साथ ही गौशाला का संचालन किसी ईमानदार स्थानीय समिति या सामाजिक संस्था को सौंपे जाने की मांग की हैं । सड़कों पर घूम रहे गोवंश को तत्काल प्रभाव से रेस्क्यू कर गौशाला में शिफ्ट कराए जाने की मांग की हैं ।
इनका कहना हैं।
ग्राम पंचायत बुदौर में बनी गौशाला में समूह संचालक के द्वारा हो रही गड़बड़ियों का मामला आपके द्वारा संज्ञान में आया है। जनपद सी ई ओ को मामले की जांच हेतु निर्देशित कर दिया गया हैं । जांच उपरांत दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।
ओम नमः शिवाय अरजरिया जिला पंचायत सी ई ओ छत्तरपुर।
    user_मध्य प्रदेश श्रमजीवी संदीप सिंह घोष
    मध्य प्रदेश श्रमजीवी संदीप सिंह घोष
    Ghuwara, Chhatarpur•
    13 hrs ago
  • Post by ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)
    1
    Post by ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)
    user_ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)
    ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)
    पत्रकार टीकमगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • मामूली बात पर बवाल: लाठी-डंडों से मारपीट, वीडियो वायरल देहात थाना क्षेत्र के कंचनपुरा कारी गांव से मामला सामने आया है।जहाँ पर पानी को लेकर छोटी सी बात पर विवाद शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले और मारपीट हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है।
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    मामूली बात पर बवाल: लाठी-डंडों से मारपीट, वीडियो वायरल
देहात थाना क्षेत्र के कंचनपुरा कारी गांव से मामला सामने आया है।जहाँ पर पानी को लेकर छोटी सी बात पर विवाद शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले और मारपीट हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है।
    user_Jamil khan
    Jamil khan
    टीकमगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • teekamgad me premi ke sath bhagi ladki 💞❤️‍🩹
    1
    teekamgad me premi ke sath bhagi ladki 💞❤️‍🩹
    user_Rudraa Pratap Singh
    Rudraa Pratap Singh
    Mahroni, Lalitpur•
    17 hrs ago
  • *पलेरा के लहर बुजुर्गहार में किसानों को आवागमन में होती परेशानी* पलेरा: लहर बुजुर्गहार में किसानों और आम नागरिकों को बरसात के मौसम में आवागमन में काफी परेशानी होती है। सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है, जिससे किसानों के ट्रैक्टर और वाहन निकालने में व्यवधान आता है। इस मामले में शासन द्वारा अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लहर बुजुर्ग और पलेरा के लोगों ने खरगापुर विधायक चंदा सुरेंद्र सिंह गौर से इस समस्या का समाधान करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस सड़क के माध्यम से सुप्रसिद्ध गुरु महाराज मंदिर के श्रद्धालुओं का भी आना-जाना रहता है, जिससे श्रद्धालुओं और किसानों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लहर बुजुर्गहार में दो पुलियों का निर्माण भी किया जाने की मांग की जा रही है। केंद्रीय मंत्री सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक से दो पुलियों का निर्माण कराने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि पुलियों का निर्माण सांसद निधि के माध्यम से भी हो सकता है।
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    *पलेरा के लहर बुजुर्गहार में किसानों को आवागमन में होती परेशानी*
पलेरा: लहर बुजुर्गहार में किसानों और आम नागरिकों को बरसात के मौसम में आवागमन में काफी परेशानी होती है। सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है, जिससे किसानों के ट्रैक्टर और वाहन निकालने में व्यवधान आता है। इस मामले में शासन द्वारा अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
लहर बुजुर्ग और पलेरा के लोगों ने खरगापुर विधायक चंदा सुरेंद्र सिंह गौर से इस समस्या का समाधान करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस सड़क के माध्यम से सुप्रसिद्ध गुरु महाराज मंदिर के श्रद्धालुओं का भी आना-जाना रहता है, जिससे श्रद्धालुओं और किसानों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
लहर बुजुर्गहार में दो पुलियों का निर्माण भी किया जाने की मांग की जा रही है। केंद्रीय मंत्री सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक से दो पुलियों का निर्माण कराने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि पुलियों का निर्माण सांसद निधि के माध्यम से भी हो सकता है।
    user_Manish Yadav
    Manish Yadav
    पत्रकार पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • Post by Deepak Ahirwar
    1
    Post by Deepak Ahirwar
    user_Deepak Ahirwar
    Deepak Ahirwar
    Farmer बड़गाँव धसान, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    55 min ago
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