समरसता का संदेश: ऊँच-नीच त्याग कर एक वृक्ष की भांति समान हैं सभी – पूज्य संत प्रांजल दास बाराबंकी। समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर समरस और संगठित हिंदू समाज के निर्माण का आह्वान करते हुए पूज्य संत प्रांजल दास ने कहा कि समस्त हिंदू समाज को ऊँच-नीच के विचारों को त्यागकर एक वृक्ष की तरह समान भाव से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे एक वृक्ष की जड़, तना, शाखाएँ और पत्तियाँ अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे के पूरक होते हैं, उसी प्रकार समाज के सभी वर्ग समान महत्व रखते हैं। यह संदेश हमें रामचरितमानस से मिलता है, जो समता, प्रेम और करुणा का मार्ग प्रशस्त करती है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाह सुधीर तिवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृति है। हमारी परंपरा में चींटी से लेकर हाथी तक, पृथ्वी, पर्वत, नदी, समुद्र, सूर्य, चंद्रमा, तारे, ऋषि-मुनि, पशु-पक्षी—सभी को पूज्य माना गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और जीव-जगत के प्रति सम्मान ही हमारी संस्कृति की मूल पहचान है, जिसे आज विदेशी भी अपनाने लगे हैं। ऐसे समय में हम सभी का दायित्व है कि संगठित रहकर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें और भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को समझें तथा समाज में समरसता, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करें। समाज की एकता ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है और इसी से राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। इस अवसर पर राकेश कश्यप, श्यामाचरण गुप्ता, महेश प्रसाद, अवधेश जायसवाल, अखिल गुप्ता, सुबोध श्रीवास्तव, सतीश, खंड कार्यवाह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, स्वयंसेवक एवं हिंदू समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम के समापन पर सामाजिक समरसता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समरसता भोज (खिचड़ी) का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और आपसी सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश दिया।
समरसता का संदेश: ऊँच-नीच त्याग कर एक वृक्ष की भांति समान हैं सभी – पूज्य संत प्रांजल दास बाराबंकी। समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर समरस और संगठित हिंदू समाज के निर्माण का आह्वान करते हुए पूज्य संत प्रांजल दास ने कहा कि समस्त हिंदू समाज को ऊँच-नीच के विचारों को त्यागकर एक वृक्ष की तरह समान भाव से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे एक वृक्ष की जड़, तना, शाखाएँ और पत्तियाँ अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे के पूरक होते हैं, उसी प्रकार समाज के सभी वर्ग समान महत्व रखते हैं। यह संदेश हमें रामचरितमानस से मिलता है, जो समता, प्रेम और करुणा का मार्ग प्रशस्त करती है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाह सुधीर तिवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृति है। हमारी परंपरा में चींटी से लेकर हाथी तक, पृथ्वी, पर्वत, नदी, समुद्र, सूर्य, चंद्रमा, तारे, ऋषि-मुनि, पशु-पक्षी—सभी को पूज्य माना गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और जीव-जगत के प्रति सम्मान ही हमारी संस्कृति की मूल पहचान है, जिसे आज विदेशी भी अपनाने लगे हैं। ऐसे समय में हम सभी का दायित्व है कि संगठित रहकर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें और भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को समझें तथा समाज में समरसता, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करें। समाज की एकता ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है और इसी से राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। इस अवसर पर राकेश कश्यप, श्यामाचरण गुप्ता, महेश प्रसाद, अवधेश जायसवाल, अखिल गुप्ता, सुबोध श्रीवास्तव, सतीश, खंड कार्यवाह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, स्वयंसेवक एवं हिंदू समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम के समापन पर सामाजिक समरसता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समरसता भोज (खिचड़ी) का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और आपसी सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश दिया।
- समरसता का संदेश: ऊँच-नीच त्याग कर एक वृक्ष की भांति समान हैं सभी – पूज्य संत प्रांजल दास बाराबंकी। समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर समरस और संगठित हिंदू समाज के निर्माण का आह्वान करते हुए पूज्य संत प्रांजल दास ने कहा कि समस्त हिंदू समाज को ऊँच-नीच के विचारों को त्यागकर एक वृक्ष की तरह समान भाव से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे एक वृक्ष की जड़, तना, शाखाएँ और पत्तियाँ अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे के पूरक होते हैं, उसी प्रकार समाज के सभी वर्ग समान महत्व रखते हैं। यह संदेश हमें रामचरितमानस से मिलता है, जो समता, प्रेम और करुणा का मार्ग प्रशस्त करती है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाह सुधीर तिवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृति है। हमारी परंपरा में चींटी से लेकर हाथी तक, पृथ्वी, पर्वत, नदी, समुद्र, सूर्य, चंद्रमा, तारे, ऋषि-मुनि, पशु-पक्षी—सभी को पूज्य माना गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और जीव-जगत के प्रति सम्मान ही हमारी संस्कृति की मूल पहचान है, जिसे आज विदेशी भी अपनाने लगे हैं। ऐसे समय में हम सभी का दायित्व है कि संगठित रहकर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें और भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को समझें तथा समाज में समरसता, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करें। समाज की एकता ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है और इसी से राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। इस अवसर पर राकेश कश्यप, श्यामाचरण गुप्ता, महेश प्रसाद, अवधेश जायसवाल, अखिल गुप्ता, सुबोध श्रीवास्तव, सतीश, खंड कार्यवाह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, स्वयंसेवक एवं हिंदू समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम के समापन पर सामाजिक समरसता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समरसता भोज (खिचड़ी) का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और आपसी सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश दिया।1
- बाराबंकी बाराबंकी के हनुमान मंदिर में चोरी, मुकुट-नगदी गायब:असंद्रा के जरौली गांव में चोरों ने वारदात को दिया अंजाम पत्रकार रामजी दीक्षित बाराबंकी जिले के असंद्रा थाना क्षेत्र में एक हनुमान मंदिर में चोरी की घटना सामने आई है। चोरों ने रविवार रात मंदिर से हनुमान जी की मूर्ति पर लगा चांदी का मुकुट और नगदी चुरा ली। मंदिर के पुजारी ने इसकी सूचना पुलिस को दी है, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है। यह घटना असंद्रा थाना क्षेत्र के जरौली गांव में हुई। गांव के बाहर असंद्रा पूरे पाठक मार्ग पर स्थित सागर दास बाबा के नाम से प्रसिद्ध हनुमान मंदिर को चोरों ने निशाना बनाया। मंदिर के पुजारी राजेंद्र दास के अनुसार, चोरों ने मंदिर का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। उन्होंने हनुमान जी की मूर्ति से चांदी का मुकुट और दानपात्र में रखी नगदी चुरा ली। सुबह घटना की जानकारी होने पर पुजारी राजेंद्र दास ने तत्काल डायल 112 पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची डायल 112 टीम ने जांच-पड़ताल की। आसपास तलाश करने पर वह दानपात्र, जिसमें नगदी रखी थी, मंदिर से कुछ दूरी पर खाली पड़ा मिला। डायल 112 पुलिस ने पुजारी को असंद्रा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने को कहा। पुजारी ने असंद्रा कोतवाली पुलिस को लिखित सूचना दी है। पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है4
- सुबह की राम-राम सुप्रभात आज का मौसम बड़ा सुहाना है ऐसे में सुबह-सुबह खुली हवा में टहलने स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होता है1
- कर्मयोगी बब्लू श्रीवास्तव राष्ट्रीय अध्यक्ष संयुक्त जनादेश पार्टी1
- पुलिस ने पुलिस पर किया मुकदमा.... 19 जनवरी 2026 को बिना किसी इजाजत के मुस्लिम अधिवक्ता गुफरान सिद्दीकी और अमीना को पकड़ने के लिए काकोरी पुलिस के दो दरोगा उस्मान खान, लखन सिंह और सिपाही पुष्पेंद्र सिंह हाई कोर्ट परिसर में दबिश देने पहुंच गए हाई कोर्ट में तैनात पुलिस ने दोनों दरोगा और सिपाही को पहले डाटा फिर खड़े रहने के लिए कहा, फिर FIR दर्ज किया, फिर तीनों को सस्पेंड किया और फिर जेल भेज दिया। हीरोपंती करने से पहले आप शायद कोई भी पुलिस वाले दो बार सोचेंगे, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेन्च परिसर का मामला1
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