घोड़ासहन-महदेवा मुख्य मार्ग के प्रवेश द्वार पर बना डायवर्जन स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण डायवर्जन पर बिछाई गई मिट्टी पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई है, जिससे राहगीरों का चलना दूभर हो गया है। स्थिति इतनी खराब है कि दोपहिया वाहन चालक, साइकिल सवार और ई-रिक्शा पलटने की घटनाएं आए दिन हो रही हैं, जिससे लोगों का चोटिल होना आम हो गया है। इस व्यस्त मोड़ पर न तो कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जिससे रात के समय हादसे का खतरा और भी बढ़ जाता है। स्थानीय युवाओं और राहगीरों का कहना है कि यह स्थान दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहा है, लेकिन संबंधित विभाग और ठेकेदार मूकदर्शक बने हुए हैं। निर्माण कार्य के नाम पर बनाए गए इस डायवर्जन को लेकर अब स्थानीय व्यवसायियों और यात्रियों ने जिला प्रशासन और निर्माण कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि डायवर्जन पर तुरंत ईंट के टुकड़े या रांगा डालकर इसे चलने योग्य बनाया जाए और दुर्घटनाओं से बचने के लिए उचित लाइटिंग व संकेतक लगाए जाएं। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और सड़क जाम करने के लिए बाध्य होंगे।
घोड़ासहन-महदेवा मुख्य मार्ग के प्रवेश द्वार पर बना डायवर्जन स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण डायवर्जन पर बिछाई गई मिट्टी पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई है, जिससे राहगीरों का चलना दूभर हो गया है। स्थिति इतनी खराब है कि दोपहिया वाहन चालक, साइकिल सवार और ई-रिक्शा पलटने की घटनाएं आए दिन हो रही हैं, जिससे लोगों का चोटिल होना आम हो गया है। इस व्यस्त मोड़ पर न तो कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जिससे रात के समय हादसे का खतरा और भी बढ़ जाता है। स्थानीय युवाओं और राहगीरों का कहना है कि यह स्थान दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहा है, लेकिन संबंधित विभाग और ठेकेदार मूकदर्शक बने हुए हैं। निर्माण कार्य के नाम पर बनाए गए इस डायवर्जन को लेकर अब स्थानीय व्यवसायियों और यात्रियों ने जिला प्रशासन और निर्माण कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि डायवर्जन पर तुरंत ईंट के टुकड़े या रांगा डालकर इसे चलने योग्य बनाया जाए और दुर्घटनाओं से बचने के लिए उचित लाइटिंग व संकेतक लगाए जाएं। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और सड़क जाम करने के लिए बाध्य होंगे।
- घोड़ासहन-महदेवा मुख्य मार्ग के प्रवेश द्वार पर बना डायवर्जन स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण डायवर्जन पर बिछाई गई मिट्टी पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई है, जिससे राहगीरों का चलना दूभर हो गया है। स्थिति इतनी खराब है कि दोपहिया वाहन चालक, साइकिल सवार और ई-रिक्शा पलटने की घटनाएं आए दिन हो रही हैं, जिससे लोगों का चोटिल होना आम हो गया है। इस व्यस्त मोड़ पर न तो कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जिससे रात के समय हादसे का खतरा और भी बढ़ जाता है। स्थानीय युवाओं और राहगीरों का कहना है कि यह स्थान दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहा है, लेकिन संबंधित विभाग और ठेकेदार मूकदर्शक बने हुए हैं। निर्माण कार्य के नाम पर बनाए गए इस डायवर्जन को लेकर अब स्थानीय व्यवसायियों और यात्रियों ने जिला प्रशासन और निर्माण कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि डायवर्जन पर तुरंत ईंट के टुकड़े या रांगा डालकर इसे चलने योग्य बनाया जाए और दुर्घटनाओं से बचने के लिए उचित लाइटिंग व संकेतक लगाए जाएं। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और सड़क जाम करने के लिए बाध्य होंगे।1
- मोतिहारी के DEO कैंपस में वकील अरविंद शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। अरविंद शर्मा अपनी शिक्षिका पत्नी को पिछले चार साल से पेमेंट नहीं मिलने के मामले को लेकर DEO ऑफिस में मुलाकात करने गए थे, जहां कैंपस में ही उनकी संदिग्ध मौत हो गई।1
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- बिहार में भरत तिवारी मामले में न्याय की उम्मीद लिए उनके पिता काशीनाथ तिवारी राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग के सामने पहुंचे। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष एवं पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया और घटना से जुड़े तमाम तथ्यों को विस्तार से रखा। काशीनाथ तिवारी ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए अपने परिवार की पीड़ा को साझा किया और इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इस भावुक बयान के बाद, अब सभी की निगाहें जांच आयोग की आने वाली रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।1
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- मोतिहारी के DEO साहब ने वकील अरविंद शर्मा की मौत के बाद अपनी सफाई पेश की है। दिवंगत वकील अपनी शिक्षिका पत्नी के रुके हुए पेमेंट के सिलसिले में पिछले चार सालों से लगातार DEO ऑफिस के चक्कर काट रहे थे।1
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