चार पिकअप में 20 गौवंश पकड़ाए, पुलिस जांच में जुटी — कवरेज के दौरान पत्रकार को फोटो-वीडियो लेने से रोका धरमजयगढ़ - धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र में चार पिकअप वाहनों में करीब 20 नग गौवंश को ले जाते हुए पाए जाने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी वाहनों को थाने लाकर संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार प्रत्येक पिकअप वाहन में चार से पांच गौवंश को अत्यंत सघन तरीके से लादकर ले जाया जा रहा था। स्थानीय पत्रकारों एवं जागरूक नागरिकों ने जब यह दृश्य देखा तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए चारों पिकअप वाहनों को धरमजयगढ़ थाने लाकर जांच प्रारंभ कर दी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गौवंश को तस्करी के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था या किसान इन्हें निजी उपयोग के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान ले जा रहे थे। पुलिस द्वारा दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी। इसी दौरान मामले की कवरेज करने पहुंचे एक पत्रकार को थाने परिसर में फोटो और वीडियो लेने से रोके जाने की स्थिति भी बनी। बताया जाता है कि थाने के वीडियो और फोटो लेने के लिए अनुमति लेने की बात कही गई, जिस पर कुछ समय के लिए माहौल गर्म हो गया था। हालांकि बाद में सूझबूझ से स्थिति को शांत करा लिया गया। यहाँ बताना लाजिमी है कि पत्रकार द्वारा थाने के डिस्प्ले बोर्ड का वीडियो फोटो लिया जा रहा था न कि किसी पुलिस कर्मी या अधिकारी का, फिर भी मीडिया को रोका जाना समझ से परे है ! इस संबंध में उच्च अधिकारियों को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है, जिस पर संबंधित अधिकारी द्वारा मामले को संज्ञान में लेने का आश्वासन दिया गया है। गूगल फॉर्म में अनुभव किया साझा घटनाक्रम के बाद संबंधित पत्रकार ने अपने अनुभव को साझा करते हुए एक गूगल फॉर्म के माध्यम से अपना अनुभव दर्ज किया। इसमें उन्होंने समाचार कवरेज के दौरान उत्पन्न हुई स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार की परिस्थितियां मीडिया और प्रशासन के बीच अनावश्यक तनाव की स्थिति उत्पन्न करती हैं। नियम स्पष्ट करने का सुझाव पत्रकार ने सुझाव कॉलम में यह भी उल्लेख किया है कि यदि थाने परिसर में मीडिया द्वारा फोटो या वीडियो बनाने से संबंधित कोई नियमावली लागू है तो उसे स्पष्ट रूप से सूचना बोर्ड पर चस्पा किया जाना चाहिए, ताकि पत्रकारों और आम नागरिकों को पहले से इसकी जानकारी मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की स्थिति निर्मित न हो। कहाँ गये गौरक्षक? इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है कि गौवंश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध बताए जाने वाले गौरक्षक आखिर इस तरह के मामलों में कहाँ हैं। जिस प्रकार चार पिकअप वाहनों में ठूंस-ठूंस कर गौवंश को ले जाया जा रहा था, उसने कई शंकाओं को जन्म दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मीडिया और नागरिक सक्रिय न रहें तो इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रह सकती है। आरोप यह भी लग रहे हैं कि कई बार जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं या आवाज उठाने वालों को नियमों का हवाला देकर चुप कराने की कोशिश करते हैं।
चार पिकअप में 20 गौवंश पकड़ाए, पुलिस जांच में जुटी — कवरेज के दौरान पत्रकार को फोटो-वीडियो लेने से रोका धरमजयगढ़ - धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र में चार पिकअप वाहनों में करीब 20 नग गौवंश को ले जाते हुए पाए जाने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी वाहनों को थाने लाकर संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार प्रत्येक पिकअप वाहन में चार से पांच गौवंश को अत्यंत सघन तरीके से लादकर ले जाया जा रहा था। स्थानीय पत्रकारों एवं जागरूक नागरिकों ने जब यह दृश्य देखा तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए चारों पिकअप वाहनों को धरमजयगढ़ थाने लाकर जांच प्रारंभ कर दी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गौवंश को तस्करी के उद्देश्य से ले जाया जा
रहा था या किसान इन्हें निजी उपयोग के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान ले जा रहे थे। पुलिस द्वारा दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी। इसी दौरान मामले की कवरेज करने पहुंचे एक पत्रकार को थाने परिसर में फोटो और वीडियो लेने से रोके जाने की स्थिति भी बनी। बताया जाता है कि थाने के वीडियो और फोटो लेने के लिए अनुमति लेने की बात कही गई, जिस पर कुछ समय के लिए माहौल गर्म हो गया था। हालांकि बाद में सूझबूझ से स्थिति को शांत करा लिया गया। यहाँ बताना लाजिमी है कि पत्रकार द्वारा थाने के डिस्प्ले बोर्ड का वीडियो फोटो लिया जा रहा था न कि किसी पुलिस कर्मी या अधिकारी का, फिर भी
मीडिया को रोका जाना समझ से परे है ! इस संबंध में उच्च अधिकारियों को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है, जिस पर संबंधित अधिकारी द्वारा मामले को संज्ञान में लेने का आश्वासन दिया गया है। गूगल फॉर्म में अनुभव किया साझा घटनाक्रम के बाद संबंधित पत्रकार ने अपने अनुभव को साझा करते हुए एक गूगल फॉर्म के माध्यम से अपना अनुभव दर्ज किया। इसमें उन्होंने समाचार कवरेज के दौरान उत्पन्न हुई स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार की परिस्थितियां मीडिया और प्रशासन के बीच अनावश्यक तनाव की स्थिति उत्पन्न करती हैं। नियम स्पष्ट करने का सुझाव पत्रकार ने सुझाव कॉलम में यह भी उल्लेख किया है कि यदि थाने परिसर में मीडिया द्वारा फोटो या वीडियो बनाने से संबंधित कोई नियमावली लागू है तो उसे स्पष्ट रूप से सूचना बोर्ड पर चस्पा
किया जाना चाहिए, ताकि पत्रकारों और आम नागरिकों को पहले से इसकी जानकारी मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की स्थिति निर्मित न हो। कहाँ गये गौरक्षक? इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है कि गौवंश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध बताए जाने वाले गौरक्षक आखिर इस तरह के मामलों में कहाँ हैं। जिस प्रकार चार पिकअप वाहनों में ठूंस-ठूंस कर गौवंश को ले जाया जा रहा था, उसने कई शंकाओं को जन्म दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मीडिया और नागरिक सक्रिय न रहें तो इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रह सकती है। आरोप यह भी लग रहे हैं कि कई बार जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं या आवाज उठाने वालों को नियमों का हवाला देकर चुप कराने की कोशिश करते हैं।
- चार पिकअप में 20 गौवंश पकड़ाए, पुलिस जांच में जुटी — कवरेज के दौरान पत्रकार को फोटो-वीडियो लेने से रोका धरमजयगढ़ - धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र में चार पिकअप वाहनों में करीब 20 नग गौवंश को ले जाते हुए पाए जाने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी वाहनों को थाने लाकर संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार प्रत्येक पिकअप वाहन में चार से पांच गौवंश को अत्यंत सघन तरीके से लादकर ले जाया जा रहा था। स्थानीय पत्रकारों एवं जागरूक नागरिकों ने जब यह दृश्य देखा तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए चारों पिकअप वाहनों को धरमजयगढ़ थाने लाकर जांच प्रारंभ कर दी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गौवंश को तस्करी के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था या किसान इन्हें निजी उपयोग के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान ले जा रहे थे। पुलिस द्वारा दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी। इसी दौरान मामले की कवरेज करने पहुंचे एक पत्रकार को थाने परिसर में फोटो और वीडियो लेने से रोके जाने की स्थिति भी बनी। बताया जाता है कि थाने के वीडियो और फोटो लेने के लिए अनुमति लेने की बात कही गई, जिस पर कुछ समय के लिए माहौल गर्म हो गया था। हालांकि बाद में सूझबूझ से स्थिति को शांत करा लिया गया। यहाँ बताना लाजिमी है कि पत्रकार द्वारा थाने के डिस्प्ले बोर्ड का वीडियो फोटो लिया जा रहा था न कि किसी पुलिस कर्मी या अधिकारी का, फिर भी मीडिया को रोका जाना समझ से परे है ! इस संबंध में उच्च अधिकारियों को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है, जिस पर संबंधित अधिकारी द्वारा मामले को संज्ञान में लेने का आश्वासन दिया गया है। गूगल फॉर्म में अनुभव किया साझा घटनाक्रम के बाद संबंधित पत्रकार ने अपने अनुभव को साझा करते हुए एक गूगल फॉर्म के माध्यम से अपना अनुभव दर्ज किया। इसमें उन्होंने समाचार कवरेज के दौरान उत्पन्न हुई स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार की परिस्थितियां मीडिया और प्रशासन के बीच अनावश्यक तनाव की स्थिति उत्पन्न करती हैं। नियम स्पष्ट करने का सुझाव पत्रकार ने सुझाव कॉलम में यह भी उल्लेख किया है कि यदि थाने परिसर में मीडिया द्वारा फोटो या वीडियो बनाने से संबंधित कोई नियमावली लागू है तो उसे स्पष्ट रूप से सूचना बोर्ड पर चस्पा किया जाना चाहिए, ताकि पत्रकारों और आम नागरिकों को पहले से इसकी जानकारी मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की स्थिति निर्मित न हो। कहाँ गये गौरक्षक? इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है कि गौवंश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध बताए जाने वाले गौरक्षक आखिर इस तरह के मामलों में कहाँ हैं। जिस प्रकार चार पिकअप वाहनों में ठूंस-ठूंस कर गौवंश को ले जाया जा रहा था, उसने कई शंकाओं को जन्म दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मीडिया और नागरिक सक्रिय न रहें तो इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रह सकती है। आरोप यह भी लग रहे हैं कि कई बार जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं या आवाज उठाने वालों को नियमों का हवाला देकर चुप कराने की कोशिश करते हैं।4
- Post by Dhananajy jangde1
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- जनपद पंचायत मालखरौदा के कुल 15 ग्राम पंचायतों में पानी टैंकर वितरण किया गया।1
- “ऑपरेशन तलाश-ए-मुस्कान” तलाश भी और अंत में मुस्कान भी।1
- अपर कलेक्टर ने ली गैस एजेंसी संचालकों की बैठक; अब ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन और शहरी क्षेत्रों में 25 दिन बाद ही होगी अगली गैस बुकिंग अम्बिकापुर जिले में घरेलू गैस सिलेंडरों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने के उद्देश्य से आज अपर कलेक्टर सुनील कुमार नायक की अध्यक्षता में जिला कार्यालय के सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की सभी 17 गैस एजेंसियों के संचालकों को उपभोक्ताओं को समय पर और व्यवस्थित रूप से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बुकिंग के लिए निर्धारित की गई समय-सीमा बैठक के दौरान गैस एजेंसी संचालकों ने जानकारी दी कि नई सॉफ्टवेयर व्यवस्था के अनुसार अब उपभोक्ता एक निश्चित अंतराल के बाद ही अगली रिफिल बुक कर सकेंगे। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता अपनी पिछली रिफिल प्राप्ति के 45 दिन बाद ही अगली बुकिंग कर पाएंगे, जबकि शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए यह समय-सीमा 25 दिन निर्धारित की गई है। अपर कलेक्टर श्री नायक ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि से पहले की गई कोई भी बुकिंग सॉफ्टवेयर द्वारा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे इस समय-सीमा का पालन करते हुए ही अपनी अगली रिफिल की ऑनलाइन या ऑफलाइन बुकिंग कराएं, ताकि वितरण व्यवस्था सुचारू बनी रहे और सभी उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध हो सके। अवैध उपयोग पर रहेगी कड़ी नजर अपर कलेक्टर श्री नायक ने घरेलू गैस सिलेंडरों के अवैध व्यावसायिक उपयोग पर संबंधित अधिकारियों और गैस एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए कि इस प्रकार की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए। यदि कहीं भी घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शिता और स्टॉक प्रबंधन के निर्देश बैठक में पारदर्शिता और बेहतर स्टॉक प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। सभी गैस वितरक एजेंसियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने कार्यालय परिसर के बाहर गैस सिलेंडर के उपलब्ध स्टॉक तथा वर्तमान रिफिल दर का स्पष्ट रूप से प्रदर्शन करें, ताकि उपभोक्ताओं को सही और अद्यतन जानकारी प्राप्त हो सके। इसके साथ ही एजेंसी संचालकों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि ऑयल कंपनियों से गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक राशि समय पर प्रेषित की जाए, जिससे किसी भी स्थिति में स्टॉक की कमी या आपूर्ति में बाधा उत्पन्न न हो। अपर कलेक्टर ने उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी के माध्यम से तथा वितरण केंद्रों पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में जिला खाद्य विभाग के अधिकारी तथा जिले की सभी 17 गैस एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।1
- न्यूज स्क्रिप्ट: अंबिकापुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 5 गोधनपुर में बिजली विभाग की लापरवाही से वार्डवासी लंबे समय से अघोषित बिजली कटौती की मार झेल रहे हैं। कभी ट्रांसफार्मर खराब होने का बहाना बनाया जाता है तो कभी केबल खराब होने की बात कहकर बिजली आपूर्ति घंटों बंद कर दी जाती है। लगातार हो रही इस समस्या से आम लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भीषण गर्मी की शुरुआत हो चुकी है, ऐसे में बार-बार बिजली गुल होने से वार्डवासियों में बिजली विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। फिलहाल बिजली विभाग के कर्मचारी खराब केबल को बदलने का काम कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी समस्या को पहले क्यों नहीं सुधारा गया। बिजली विभाग की लापरवाही और लेटलतीफी का खामियाजा आखिर कब तक आम जनता भुगतती रहेगी? अब देखना होगा कि केबल बदलने के बाद वार्ड क्रमांक 5 गोधनपुर की बिजली व्यवस्था में कितना सुधार होता है या फिर वार्डवासियों को इसी तरह अघोषित कटौती से जूझना पड़ेगा। — हिमांशु राज वाइस ब्यूरो चीफ, एमडी न्यूज़ अंबिकापुर (छत्तीसगढ़)78058380761
- पर्यटन स्थल की सुविधाओं को लेकर सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने उठाया विधानसभा बजट सत्र में सवाल,, आज विधानसभा बजट सत्र के दौरान सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री जी से जानकारी मांगी है जिसमें उन्होंने सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित पर्यटन स्थलों पर उपलब्ध सुविधाओं को लेकर था , विधायक जी ने पर्यटन मंत्री जी से विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ब्लॉक वार और पंचायत वार कितने पर्यटन स्थल है उसकी जानकारी मांगी है उसके अलावा पर्यटन स्थलों पर उपलब्ध सुविधाओं एवं सड़क किनारे उपलब्ध सुविधाओं के विषय में जानकारी चाही है, जिसमें बैठक व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था ,पार्किंग व्यवस्था ,पर्यटन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था, घेराव,साफ सफाई की व्यवस्था , इन सभी विषयों पर स्थल वार एवं बिंदु वार जानकारी चाही है,, इन सभी प्रश्नों का मूल उद्देश है कि यहां जो सैलानी आते हैं उनको सुविधाएं मिल रही है कि नहीं, और यदि उनको यह सभी सुविधा उपलब्ध नहीं है तो कब तक इसकी व्यवस्था होगी,, ताकि क्षेत्र में सैलानियों की संख्या बढ़े और क्षेत्र में आए के स्रोत बढ़े,, और रोजगार सृजित हो सके,,1