झालावाड़ जिले के खानपुर उपखंड की आकोदिया ग्राम पंचायत में स्थित भटवाड़ा गांव, आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी विकास की रोशनी से पूरी तरह वंचित है। पनवाड़-चलेट मुख्य मार्ग से महज 4 किलोमीटर दूर बसे इस गांव के करीब 300 भील समुदाय के लोग, जो 50 घरों में निवास करते हैं, ग्राम पंचायत की घोर उदासीनता के कारण बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सड़क के अभाव में बरसात आते ही यह गांव शेष दुनिया से कट जाता है, जिससे स्कूली बच्चों का स्कूल जाना, गर्भवती महिलाओं का अस्पताल पहुँचना और बुजुर्गों का इलाज करवाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीण आज भी मरीजों को चारपाई पर उठाकर अस्पताल ले जाते हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। गांव की समस्याएँ सिर्फ जीवित व्यक्तियों के आवागमन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मृतकों के सम्मान पर भी आफत आ गई है। ग्राम पंचायत की उपेक्षा के कारण गांव का 'मुक्तिधाम' भी जर्जर अवस्था में है। हाल ही में आए आंधी-तूफान ने मुक्तिधाम के टीन-शेड को उखाड़ फेंका है, जिससे अब वहाँ कोई छत नहीं बची है। बरसात का मौसम सिर पर होने के कारण ग्रामीणों के सामने यह मानवीय संकट खड़ा हो गया है कि यदि किसी की मृत्यु हो जाती है, तो कीचड़ भरी पगडंडियों से अर्थी ले जाकर बिना छत के खुले मैदान में अंतिम संस्कार कैसे किया जाए, जो किसी भी परिवार के लिए असहनीय पीड़ा है। चुनाव के समय वादे करने वाले नेता अब गायब हैं और प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद केवल कोरे आश्वासन मिले हैं। इस संबंध में, शुक्रवार को सांवरलाल भील, बनवारी लाल, चंद्रप्रकाश, विकास, विशाल, सुदामा, कमलेश, आरती बाई, अंकिता बाई सहित अन्य ग्रामीण ट्रैक्टर में भरकर खानपुर विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुँचे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि तत्काल पक्की सड़क बनाना संभव नहीं है, तो बारिश के मौसम को देखते हुए रास्ते पर कम से कम ग्रेवल (कंकड़-पत्थर) डलवाए जाएँ ताकि आवागमन सुगम हो सके। साथ ही, मुक्तिधाम के लिए भी तत्काल बजट स्वीकृत कर शेड का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे पनवाड़ कस्बे के गुलमोहर चौराहे पर चक्का जाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
झालावाड़ जिले के खानपुर उपखंड की आकोदिया ग्राम पंचायत में स्थित भटवाड़ा गांव, आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी विकास की रोशनी से पूरी तरह वंचित है। पनवाड़-चलेट मुख्य मार्ग से महज 4 किलोमीटर दूर बसे इस गांव के करीब 300 भील समुदाय के लोग, जो 50 घरों में निवास करते हैं, ग्राम पंचायत की घोर उदासीनता के कारण बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सड़क के अभाव में बरसात आते ही यह गांव शेष दुनिया से कट जाता है, जिससे स्कूली बच्चों का स्कूल जाना, गर्भवती महिलाओं का अस्पताल पहुँचना और बुजुर्गों का इलाज करवाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीण आज भी मरीजों को चारपाई पर उठाकर अस्पताल ले जाते हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। गांव की समस्याएँ सिर्फ जीवित व्यक्तियों के आवागमन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मृतकों के सम्मान पर भी आफत आ गई है। ग्राम पंचायत की उपेक्षा के कारण गांव का 'मुक्तिधाम' भी जर्जर अवस्था में है। हाल ही में आए आंधी-तूफान ने मुक्तिधाम के टीन-शेड को उखाड़ फेंका है, जिससे अब वहाँ कोई छत नहीं बची है। बरसात का मौसम सिर पर होने के कारण ग्रामीणों के सामने यह मानवीय संकट खड़ा हो गया है कि यदि किसी की मृत्यु हो जाती है, तो कीचड़ भरी पगडंडियों से अर्थी ले जाकर बिना छत के खुले मैदान में अंतिम संस्कार कैसे किया जाए, जो किसी भी परिवार के लिए असहनीय पीड़ा है। चुनाव के समय वादे करने वाले नेता अब गायब हैं और प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद केवल कोरे आश्वासन मिले हैं। इस संबंध में, शुक्रवार को सांवरलाल भील, बनवारी लाल, चंद्रप्रकाश, विकास, विशाल, सुदामा, कमलेश, आरती बाई, अंकिता बाई सहित अन्य ग्रामीण ट्रैक्टर में भरकर खानपुर विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुँचे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि तत्काल पक्की सड़क बनाना संभव नहीं है, तो बारिश के मौसम को देखते हुए रास्ते पर कम से कम ग्रेवल (कंकड़-पत्थर) डलवाए जाएँ ताकि आवागमन सुगम हो सके। साथ ही, मुक्तिधाम के लिए भी तत्काल बजट स्वीकृत कर शेड का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे पनवाड़ कस्बे के गुलमोहर चौराहे पर चक्का जाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
- खानपुर में विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को स्थानीय मुक्तिधाम परिसर में एक श्रमदान एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान में सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और नगरवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे परिसर की गहन साफ-सफाई की। सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से श्रमदान करते हुए आमजन को अपने आस-पास के वातावरण को साफ रखने और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उल्लेखनीय है कि मुक्तिधाम को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने का यह कार्य दो चरणों में पूरा किया गया है। पिछले सप्ताह शुरू हुए पहले चरण के अभियान के दौरान परिसर के एक बड़े हिस्से की सफाई कर दी गई थी, लेकिन कुछ हिस्सों में कार्य शेष रह गया था। इसी क्रम में शनिवार को दूसरे चरण के रूप में यह विशेष अभियान आयोजित किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने सुबह से ही तत्परता दिखाते हुए शेष बचे पूरे क्षेत्र की सफाई की और कचरा हटाकर परिसर को पूरी तरह व्यवस्थित बना दिया। आयोजकों ने इस सफल अभियान के लिए सभी नगरवासियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी सार्वजनिक स्थानों के रखरखाव में इसी तरह सहयोग देने की अपील की।1
- स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग के विषय में जानकारी दी गई है।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में छीपाबड़ौद के ब्लॉक खेल मैदान में आयोजित दो दिवसीय योग प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस कार्यक्रम के समापन के बाद, कस्बे में योग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक भव्य जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें पूरा कस्बा “करें योग, रहें निरोग” जैसे नारों से गूंज उठा। रैली में बड़ी संख्या में प्रशिक्षार्थियों, विद्यार्थियों, योग साधकों, विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों और गणमान्य नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी की। यह रैली कस्बे के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जहाँ प्रतिभागियों ने “योग अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं” और “योग है जीवन का आधार” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को योग का महत्वपूर्ण संदेश दिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के योग प्रोटोकॉल के अनुसार, योग विशेषज्ञों ने विभिन्न योगासनों, प्राणायाम, ध्यान और योग के वैज्ञानिक लाभों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षार्थियों ने इन आसनों का अभ्यास कर मुख्य कार्यक्रम 21 जून के लिए अपनी तैयारियाँ कीं। समापन समारोह में ब्लॉक योग नोडल अधिकारी डॉ. पवन मेघवाल ने जोर देते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए भी एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने सभी नागरिकों से नियमित योगाभ्यास करने और आगामी 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर सहायक ब्लॉक योग नोडल अधिकारी डॉ. मधुसूदन मीणा, डॉ. पी.डी. शर्मा, योग क्रियान्वयन समिति सदस्य डॉ. गुलाब चंद मीणा सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस रैली के माध्यम से आमजन को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।3
- छीपाबड़ौद के खेल मैदान में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व दो दिवसीय योग प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसका समापन भव्य जागरूकता रैली के साथ हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ाना था, जिसमें प्रशिक्षार्थियों, विद्यार्थियों, योग साधकों, विभागीय अधिकारी कर्मचारियों और गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के योग विशेषज्ञों ने योगा प्रोटोकॉल का अभ्यास कराते हुए विभिन्न योगासनों, प्राणायाम, ध्यान और योग के वैज्ञानिक लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। समापन समारोह में, ब्लॉक योग नोडल अधिकारी डॉ. पवन मेघवाल ने योग को न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास का भी एक सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने सभी नागरिकों से नियमित योगाभ्यास करने और विशेष रूप से 21 जून 2026 को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। जागरूकता रैली के माध्यम से आमजन को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर सहायक ब्लॉक योग नोडल अधिकारी डॉ. मधुसूदन मीणा, डॉ. पी.डी. शर्मा और योग क्रियान्वयन समिति के सदस्य डॉ. गुलाब चंद मीणा भी मौजूद थे।1
- ग्राम पंचायत राई के अंतर्गत आने वाला राई का तालाब, जो कि एक बहुत बड़ा तालाब है, उसकी पाल पर साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। पूर्व उप सरपंच भरत राज मीणा ने प्रशासन से इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि तालाब के दोनों तरफ झाड़ियां उग गई हैं, जिससे गांव वालों को आने-जाने में भारी परेशानी होती है। मोटरसाइकिल और जानवरों को भी इस रास्ते से निकलने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मुख्य रास्ते पर बबूल के पेड़ लटके हुए हैं, जिससे स्थिति और भी खराब हो गई है। भरत राज मीणा ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब की साफ-सफाई करवाई जाए और पाल के चारों ओर उगे हुए पेड़-पौधों, विशेषकर अंग्रेजी बबूल, की कटाई करवाकर क्षेत्र को स्वच्छ किया जाए।1
- यह बुढ़ापे के सहारे पर आधारित एक कहानी है, जो वृद्ध माता-पिता और उनके एकमात्र बेटे के संबंध को दर्शाती है।1
- दिल्ली पुलिस ने NEET UG 2026 री-एग्जामिनेशन से पहले सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में, पुलिस की टीमों ने फ्रिस्किंग यूनिट और डॉग स्क्वायड के साथ मिलकर विभिन्न परीक्षा केंद्रों का गहन निरीक्षण किया, जहाँ सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान, अधिकारियों ने विशेष रूप से परीक्षा केंद्रों के प्रवेश और निकास मार्गों, अभ्यर्थियों की जांच प्रक्रिया तथा संवेदनशील क्षेत्रों का आकलन किया। इस प्रक्रिया के तहत, परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या सुरक्षा चूक को रोकने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने इस बात पर जोर दिया है कि परीक्षा को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं।1
- भस्त्रिका प्राणायाम को फेफड़ों की क्षमता और शरीर तथा मन के कार्यों को बेहतर बनाने के लिए सबसे बेहतरीन प्राणायामों में से एक बताया गया है। इसे हर किसी के जीवन के लिए लाभकारी माना जाता है।1