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आज के व्यस्त और तनावपूर्ण दौर में खुद को स्वस्थ रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी पृष्ठभूमि में, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'योग' एक बेहतरीन संजीवनी साबित हो रहा है। नियमित योगाभ्यास से शरीर को कई अद्भुत फायदे होते हैं। योगाभ्यास शरीर की लचीलापन बढ़ाता है और मांसपेशियों को मजबूत करता है। प्रतिदिन प्राणायाम और ध्यान करने से मानसिक तनाव और अवसाद दूर होता है, जिससे मन शांत रहता है। साथ ही, योग शरीर में रक्त संचार प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे शरीर विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रहता है। आजकल की गतिहीन जीवनशैली से होने वाले पीठ दर्द, गर्दन दर्द और पेट संबंधी विकारों के लिए योग एक प्रभावी उपाय है। डॉक्टरों के अनुसार, केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय, रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट योग करने से हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। एक स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए सभी को अपने दैनिक जीवन में योग को शामिल करना बेहद जरूरी है, यह बात अब चिकित्सा क्षेत्र से सामने आ रही है।

10 hrs ago
user_Santossh Javare
Santossh Javare
India•
10 hrs ago
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आज के व्यस्त और तनावपूर्ण दौर में खुद को स्वस्थ रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी पृष्ठभूमि में, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'योग' एक बेहतरीन संजीवनी साबित हो रहा है। नियमित योगाभ्यास से शरीर को कई अद्भुत फायदे होते हैं। योगाभ्यास शरीर की लचीलापन बढ़ाता है और मांसपेशियों को मजबूत करता है। प्रतिदिन प्राणायाम और ध्यान करने से मानसिक तनाव और अवसाद दूर होता है, जिससे मन शांत रहता है। साथ ही, योग शरीर में रक्त संचार प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे शरीर विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रहता है। आजकल की गतिहीन जीवनशैली से होने वाले पीठ दर्द, गर्दन दर्द और पेट संबंधी विकारों के लिए योग एक प्रभावी उपाय है। डॉक्टरों के अनुसार, केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय, रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट योग करने से हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। एक स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए सभी को अपने दैनिक जीवन में योग को शामिल करना बेहद जरूरी है, यह बात अब चिकित्सा क्षेत्र से सामने आ रही है।

More news from बिहार and nearby areas
  • वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है। यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
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    वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है।

यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
    user_Zafar Rabbani
    Zafar Rabbani
    पोठिया, किशनगंज, बिहार•
    18 hrs ago
  • उधवा के राधानगर थाना क्षेत्र स्थित पूर्वी उधवा पंचायत में पंचायत सचिवालय के पास उर्दू प्राथमिक विद्यालय बाबू टोला का बंद पड़ा भवन इन दिनों नशेरियों का अड्डा बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां प्रतिदिन दिन-रात असामाजिक तत्व जमा होते हैं और विशेषकर ब्राउन शुगर जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। नशेड़ियों का कहना है कि यह भवन उनके लिए नशा करने की एक बहुत अच्छी जगह है, जबकि यह पंचायत सचिवालय के बगल में ही है। यह विद्यालय पूर्व की झारखंड की रघुवर सरकार के कार्यकाल के दौरान दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया गया था, जिसके चलते सभी बच्चे और शिक्षक स्थानांतरित हो गए और विद्यालय बंद हो गया। हालांकि, चुनाव आयोग इस भवन का उपयोग विधानसभा और पंचायत चुनावों के दौरान मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र के रूप में भी करता रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि युवा इस नशे की लत का शिकार हो रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है। राधानगर थाना प्रभारी अमर कुमार मिंज ने इस संबंध में बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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    उधवा के राधानगर थाना क्षेत्र स्थित पूर्वी उधवा पंचायत में पंचायत सचिवालय के पास उर्दू प्राथमिक विद्यालय बाबू टोला का बंद पड़ा भवन इन दिनों नशेरियों का अड्डा बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां प्रतिदिन दिन-रात असामाजिक तत्व जमा होते हैं और विशेषकर ब्राउन शुगर जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। नशेड़ियों का कहना है कि यह भवन उनके लिए नशा करने की एक बहुत अच्छी जगह है, जबकि यह पंचायत सचिवालय के बगल में ही है।

यह विद्यालय पूर्व की झारखंड की रघुवर सरकार के कार्यकाल के दौरान दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया गया था, जिसके चलते सभी बच्चे और शिक्षक स्थानांतरित हो गए और विद्यालय बंद हो गया। हालांकि, चुनाव आयोग इस भवन का उपयोग विधानसभा और पंचायत चुनावों के दौरान मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र के रूप में भी करता रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि युवा इस नशे की लत का शिकार हो रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।

राधानगर थाना प्रभारी अमर कुमार मिंज ने इस संबंध में बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
    user_पृथ्वीराज सरकार
    पृथ्वीराज सरकार
    Media house उधवा, साहेबगंज, झारखंड•
    4 hrs ago
  • कटिहार रेल मंडल के तहत कटिहार–कुमेदपुर एवं कटिहार–मुकुरिया रेल दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत कटिहार–कुरेठा और कटिहार–सोनैली के बीच नवनिर्मित ब्रॉड गेज रेल लाइन का वैधानिक निरीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। पूर्वोत्तर सीमांत परिमंडल (कोलकाता) के रेल संरक्षा आयुक्त सुमित सिंघल ने इस रेलखंड का तीन दिनों तक गहन निरीक्षण करने के साथ-साथ 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड ट्रायल का परीक्षण भी किया। निरीक्षण एवं परीक्षण में सफलता मिलने के बाद, उन्होंने इस रेलखंड पर ट्रेनों के 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से परिचालन की अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है। कटिहार रेल मंडल के डीआरएम किरेंद्र नरह ने इस परियोजना के संबंध में बताया कि लगभग 948 करोड़ रुपये की लागत से 64 किलोमीटर लंबी यह परियोजना तैयार हुई है, जिसमें कुल 16 रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इस मौके पर सीनियर डीसीएम सह पीआरओ अनूप कुमार सिंह सहित कई अन्य रेल अधिकारी भी उपस्थित थे। रेल दोहरीकरण कार्य के दौरान नॉन-इंटरलॉकिंग के कारण दो दर्जन से अधिक ट्रेनों को रद्द किया गया था, उनके समय में परिवर्तन किया गया था, अथवा उनके मार्ग बदले गए थे। अब फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के उपरांत रेल परिचालन के पूरी तरह सामान्य होने की आशा है। डीआरएम ने कहा कि दोहरी रेल लाइन शुरू होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों पर से दबाव कम होगा, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा, और सीमांचल के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत एवं सुगम बनेगी।
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    कटिहार रेल मंडल के तहत कटिहार–कुमेदपुर एवं कटिहार–मुकुरिया रेल दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत कटिहार–कुरेठा और कटिहार–सोनैली के बीच नवनिर्मित ब्रॉड गेज रेल लाइन का वैधानिक निरीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। पूर्वोत्तर सीमांत परिमंडल (कोलकाता) के रेल संरक्षा आयुक्त सुमित सिंघल ने इस रेलखंड का तीन दिनों तक गहन निरीक्षण करने के साथ-साथ 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड ट्रायल का परीक्षण भी किया। निरीक्षण एवं परीक्षण में सफलता मिलने के बाद, उन्होंने इस रेलखंड पर ट्रेनों के 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से परिचालन की अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है।

कटिहार रेल मंडल के डीआरएम किरेंद्र नरह ने इस परियोजना के संबंध में बताया कि लगभग 948 करोड़ रुपये की लागत से 64 किलोमीटर लंबी यह परियोजना तैयार हुई है, जिसमें कुल 16 रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इस मौके पर सीनियर डीसीएम सह पीआरओ अनूप कुमार सिंह सहित कई अन्य रेल अधिकारी भी उपस्थित थे।

रेल दोहरीकरण कार्य के दौरान नॉन-इंटरलॉकिंग के कारण दो दर्जन से अधिक ट्रेनों को रद्द किया गया था, उनके समय में परिवर्तन किया गया था, अथवा उनके मार्ग बदले गए थे। अब फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के उपरांत रेल परिचालन के पूरी तरह सामान्य होने की आशा है। डीआरएम ने कहा कि दोहरी रेल लाइन शुरू होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों पर से दबाव कम होगा, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा, और सीमांचल के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत एवं सुगम बनेगी।
    user_जयप्रकाश भगत
    जयप्रकाश भगत
    आज़मनगर, कटिहार, बिहार•
    20 hrs ago
  • पाकुड़ जिला अदालत ने मंतोष कुमार सिंह की निर्मम हत्या और अपहरण के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने इस मामले में राजन साह और मिलन कुमार साह नामक दो दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या की भयावह क्रूरता को देखते हुए एक विशेष आदेश भी दिया है। इसके तहत, दोनों दोषियों को उनकी सभी सजाएं एक के बाद एक, अलग-अलग भुगतनी होंगी, जिसे प्रभावी रूप से दोहरी उम्रकैद माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है। यह घटना मार्च 2024 में हुई थी, जब मंतोष को पत्थर से कुचलकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था।
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    पाकुड़ जिला अदालत ने मंतोष कुमार सिंह की निर्मम हत्या और अपहरण के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने इस मामले में राजन साह और मिलन कुमार साह नामक दो दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

न्यायालय ने हत्या की भयावह क्रूरता को देखते हुए एक विशेष आदेश भी दिया है। इसके तहत, दोनों दोषियों को उनकी सभी सजाएं एक के बाद एक, अलग-अलग भुगतनी होंगी, जिसे प्रभावी रूप से दोहरी उम्रकैद माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है।

यह घटना मार्च 2024 में हुई थी, जब मंतोष को पत्थर से कुचलकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था।
    user_Himanshi Singh
    Himanshi Singh
    पाकुड़, पाकुड़, झारखंड•
    23 hrs ago
  • महेशपुर प्रखंड के प्रतापपुर गाँव निवासी अरुणा टुडू का शव तमिलनाडु से उनके पैतृक गाँव तक पहुँचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जो झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी के विशेष प्रयासों के कारण संभव हो पाया। दुख की इस घड़ी में, उपासना मरांडी ने शोकाकुल परिवार के साथ खड़े होकर न सिर्फ अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं, बल्कि उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया। ग्रामीणों और परिजनों ने उनके इस सराहनीय और मानवीय कार्य के लिए आभार प्रकट किया, जिसने संवेदनशीलता की एक मिसाल कायम करते हुए मानवता की जिम्मेदारी निभाई।
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    महेशपुर प्रखंड के प्रतापपुर गाँव निवासी अरुणा टुडू का शव तमिलनाडु से उनके पैतृक गाँव तक पहुँचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जो झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी के विशेष प्रयासों के कारण संभव हो पाया। दुख की इस घड़ी में, उपासना मरांडी ने शोकाकुल परिवार के साथ खड़े होकर न सिर्फ अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं, बल्कि उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया। ग्रामीणों और परिजनों ने उनके इस सराहनीय और मानवीय कार्य के लिए आभार प्रकट किया, जिसने संवेदनशीलता की एक मिसाल कायम करते हुए मानवता की जिम्मेदारी निभाई।
    user_Jharkhand Maheshpur News
    Jharkhand Maheshpur News
    महेशपुर, पाकुड़, झारखंड•
    1 hr ago
  • झारखंड के साहिबगंज जिले में मदन साई रोड और मदन साहब रोड पर सड़क निर्माण का काम शुरू हो गया है। इस खबर से स्थानीय लोगों में खुशी और आश्चर्य का मिला-जुला माहौल देखा जा रहा है।
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    झारखंड के साहिबगंज जिले में मदन साई रोड और मदन साहब रोड पर सड़क निर्माण का काम शुरू हो गया है। इस खबर से स्थानीय लोगों में खुशी और आश्चर्य का मिला-जुला माहौल देखा जा रहा है।
    user_Md arbaj ansari
    Md arbaj ansari
    साहिबगंज, साहेबगंज, झारखंड•
    7 hrs ago
  • झारखंड के बड़ा तालबोना गांव से एक शिक्षिका ने दर्शकों से एक भावुक सवाल पूछा है। शिक्षिका ने इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब देने के लिए दर्शकों से कमेंट बॉक्स का उपयोग करने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने संदेश का समापन करते हुए सभी का धन्यवाद किया और अगले वीडियो में मिलने की बात कही।
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    झारखंड के बड़ा तालबोना गांव से एक शिक्षिका ने दर्शकों से एक भावुक सवाल पूछा है। शिक्षिका ने इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब देने के लिए दर्शकों से कमेंट बॉक्स का उपयोग करने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने संदेश का समापन करते हुए सभी का धन्यवाद किया और अगले वीडियो में मिलने की बात कही।
    user_Suraj Kumar
    Suraj Kumar
    Photographer Sahibganj, Sahebganj•
    11 hrs ago
  • बारसोई-कुमेदपुर रेलखंड के खुरियाल रेलवे स्टेशन पर एक गंभीर रूप से बीमार यात्री की इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। स्टेशन परिसर में बीमार पड़े एक व्यक्ति पर ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान कृष्ण कुमार साह की नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने मानवीयता दिखाते हुए उसे आजमनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की व्यवस्था की। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी जान चली गई। आरपीएफ इंस्पेक्टर शंकर कुमार दास ने बताया कि मृतक के पास से मिले आधार कार्ड के अनुसार, उसकी पहचान कृष्ण शाह (41 वर्ष) के रूप में हुई है, जो सुदर्शन शाह के पुत्र और दक्षिण त्रिपुरा के बिलोनिया स्थित सुकांता नगर के निवासी थे। खुरियाल पंचायत के सरपंच मोहतमिम आलम ने जानकारी दी कि मृतक को पिछले दो-तीन दिनों से स्टेशन पर बीमार हालत में देखा जा रहा था। फिलहाल, आरपीएफ और जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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    बारसोई-कुमेदपुर रेलखंड के खुरियाल रेलवे स्टेशन पर एक गंभीर रूप से बीमार यात्री की इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। स्टेशन परिसर में बीमार पड़े एक व्यक्ति पर ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान कृष्ण कुमार साह की नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने मानवीयता दिखाते हुए उसे आजमनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की व्यवस्था की। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी जान चली गई।

आरपीएफ इंस्पेक्टर शंकर कुमार दास ने बताया कि मृतक के पास से मिले आधार कार्ड के अनुसार, उसकी पहचान कृष्ण शाह (41 वर्ष) के रूप में हुई है, जो सुदर्शन शाह के पुत्र और दक्षिण त्रिपुरा के बिलोनिया स्थित सुकांता नगर के निवासी थे। खुरियाल पंचायत के सरपंच मोहतमिम आलम ने जानकारी दी कि मृतक को पिछले दो-तीन दिनों से स्टेशन पर बीमार हालत में देखा जा रहा था।

फिलहाल, आरपीएफ और जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
    user_जयप्रकाश भगत
    जयप्रकाश भगत
    आज़मनगर, कटिहार, बिहार•
    21 hrs ago
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