चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र के ग्राम पचवनिया में छलका (जल नियंत्रण संरचना) के निर्माण को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन दिन-रात का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। पचवनिया, ठेकहा, केराडीह, मनसापुर और गणेशपुर सहित आसपास के गांवों के किसान बड़ी संख्या में इस आंदोलन में डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसानों की एकमात्र मांग है कि हाल ही में सिंचाई विभाग द्वारा नवनिर्मित छलका की ऊंचाई को लगभग डेढ़ फीट बढ़ाया जाए, ताकि पचवनिया, मनसापुर, केराडीह और ठेकहा माइनरों में पर्याप्त पानी पहुंच सके और धान की रोपाई समय पर पूरी की जा सके। किसानों का दावा है कि छलका की ऊंचाई कम होने से माइनरों में पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि पर सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। धान की नर्सरी पूरी तरह तैयार होने के बावजूद खेतों में पानी न होने के कारण रोपाई का काम लगातार पिछड़ रहा है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा, किसानों ने कई महीनों से अधूरे पड़े पुल निर्माण कार्य और नए निर्माण में छलका की ऊंचाई पहले की तुलना में कम किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच कराने की भी जोरदार मांग की है। आंदोलन के तीसरे दिन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने धरना स्थल पहुंचकर किसानों से बातचीत की और समाधान का आश्वासन दिया, जबकि इससे पहले पहले दिन जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी को भी मांग पत्र सौंपकर समस्या से अवगत कराया जा चुका है। इस प्रदर्शन को उत्तर प्रदेश किसान सभा का समर्थन मिला है, जिसके जिला मंत्री लालचंद सिंह एडवोकेट ने तकनीकी निरीक्षण कर जल्द समाधान की मांग की है। धरने में शंभूनाथ, लालमणि विश्वकर्मा, कन्हैया चौहान, सिपाही चौहान, संजय चौहान, गुप्तनाथ, रामजी, महाराजा राम और ठेकहा के ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सिंचाई समस्या का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वे चक्का जाम कर आंदोलन को और तेज करेंगे।
चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र के ग्राम पचवनिया में छलका (जल नियंत्रण संरचना) के निर्माण को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन दिन-रात का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। पचवनिया, ठेकहा, केराडीह, मनसापुर और गणेशपुर सहित आसपास के गांवों के किसान बड़ी संख्या में इस आंदोलन में डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसानों की एकमात्र मांग है कि हाल ही में सिंचाई विभाग द्वारा नवनिर्मित छलका की ऊंचाई को लगभग डेढ़ फीट बढ़ाया जाए, ताकि पचवनिया, मनसापुर, केराडीह और ठेकहा माइनरों में पर्याप्त पानी पहुंच सके और धान की रोपाई समय पर पूरी की जा सके। किसानों का दावा है कि छलका की ऊंचाई कम होने से माइनरों में पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि पर सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। धान की नर्सरी पूरी तरह तैयार होने के बावजूद खेतों में पानी न होने के कारण रोपाई का काम लगातार पिछड़ रहा है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा, किसानों ने कई महीनों से अधूरे पड़े पुल निर्माण कार्य और नए निर्माण में छलका की ऊंचाई पहले की तुलना में कम किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच कराने की भी जोरदार मांग की है। आंदोलन के तीसरे दिन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने धरना स्थल पहुंचकर किसानों से बातचीत की और समाधान का आश्वासन दिया, जबकि इससे पहले पहले दिन जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी को भी मांग पत्र सौंपकर समस्या से अवगत कराया जा चुका है। इस प्रदर्शन को उत्तर प्रदेश किसान सभा का समर्थन मिला है, जिसके जिला मंत्री लालचंद सिंह एडवोकेट ने तकनीकी निरीक्षण कर जल्द समाधान की मांग की है। धरने में शंभूनाथ, लालमणि विश्वकर्मा, कन्हैया चौहान, सिपाही चौहान, संजय चौहान, गुप्तनाथ, रामजी, महाराजा राम और ठेकहा के ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सिंचाई समस्या का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वे चक्का जाम कर आंदोलन को और तेज करेंगे।
- चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पचवनिया स्थित जल नियंत्रण संरचना (छलका) पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी दिन-रात लगातार जारी रहा। पचवनिया, ठेकहा, केराडीह, मनसापुर और गणेशपुर सहित आसपास के कई गांवों के किसान सिंचाई विभाग द्वारा हाल ही में निर्मित छलका को करीब डेढ़ फीट ऊंचा करने की एकसूत्रीय मांग पर डटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि ऐसा करने से ही पचवनिया, मनसापुर, केराडीह और ठेकहा माइनरों में पर्याप्त पानी पहुंच सकेगा और धान की समय पर रोपाई हो पाएगी। आंदोलनकारी किसानों का दावा है कि छलका की ऊंचाई कम होने से माइनरों में पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई ठप पड़ी है। धान की नर्सरी तैयार खड़ी है, लेकिन पानी के अभाव में रोपाई का कार्य लगातार पिछड़ता जा रहा है, जिससे फसल उत्पादन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि महीनों से चल रहा पुल निर्माण कार्य अब तक अधूरा है और नए निर्माण में छलका की ऊंचाई पहले से कम कर दी गई है। उन्होंने इस पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी मानकों और गुणवत्ता की जांच की भी मांग उठाई है। इस धरने को उत्तर प्रदेश किसान सभा का समर्थन मिला है, जिसके जिला मंत्री लालचंद सिंह एडवोकेट ने इसे किसानों की आजीविका से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन से शीघ्र तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। आंदोलन के दौरान किसानों ने पहले दिन जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी को मांग पत्र सौंपा था, जिसके बाद तीसरे दिन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने धरना स्थल पहुंचकर समाधान का आश्वासन दिया। हालांकि, किसान तकनीकी मानकों के अनुसार स्थाई समाधान पर अड़े हुए हैं। धरने में शंभूनाथ, लालमणि विश्वकर्मा, कन्हैया चौहान, सिपाही चौहान सहित ठेकहा के ग्राम प्रधान व भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन तेज करते हुए चक्का जाम करने पर मजबूर होंगे।4
- चन्दौली के चकिया कोतवाली क्षेत्र के पुरानाडीह ग्रामसभा स्थित कुंडा हीमैया में ग्रामीणों ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत बड़ी संख्या में पौधरोपण किया। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीणों ने हरित पर्यावरण को बढ़ावा देने का संदेश दिया। इस अवसर पर पहुंचे चकिया कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अर्जुन सिंह ने ग्रामीणों को जागरूक किया। उन्होंने पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में जहरीले जीव-जंतुओं से सतर्क रहने की सलाह दी। प्रभारी निरीक्षक ने विशेष रूप से अपील की कि सर्पदंश होने की स्थिति में झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें, बल्कि पीड़ित को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उसका इलाज कराएं। इसके अलावा, उन्होंने जमीन पर सोने से बचने की भी सलाह दी। इस कार्यक्रम के दौरान वन विभाग के रेंजर अखिलेश दुबे और ग्राम प्रधान ओमप्रकाश सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे।1
- बिहार के कैमूर जिले के चैनपुर में ग्रामीणों ने खुद अपनी समस्या का वीडियो बनाकर सीधे सरकार से मदद की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने अपनी परेशानी को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए खुद ही यह वीडियो तैयार किया है ताकि उनकी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान हो सके।1
- चंदौली के बरहनी विकासखंड के अंतर्गत भैंसऊर गांव में ग्राम सचिवालय के पास बने कूड़ा निस्तारण केंद्र से उठ रही तीव्र दुर्गंध के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम सचिवालय के निकट ही प्राथमिक विद्यालय भी स्थित है, जिससे वहां आने वाले बच्चों, कर्मचारियों तथा ग्रामीणों पर इसका अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीण चौथी गुप्ता, मंगू यादव, सोहन, राजेंद्र, मीता और गोपाल शुक्ला ने बताया कि इस कूड़ा निस्तारण केंद्र से लगातार दुर्गंध फैलने के कारण ग्राम सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों, अपनी फरियाद लेकर आने वाले लोगों तथा राहगीरों को भारी असुविधा हो रही है। वहीं, प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को भी इसी बदबू के बीच बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि कूड़ा निस्तारण केंद्र को आबादी और सार्वजनिक संस्थानों से दूर स्थापित किया जाना चाहिए था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस केंद्र को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने अथवा दुर्गंध और संक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी शरद चंद्र शुक्ला ने बताया कि जल्द ही ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत समिति के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श कर इस पर उचित निर्णय लिया जाएगा।2
- चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र के ग्राम पचवनिया में छलका (जल नियंत्रण संरचना) के निर्माण को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन दिन-रात का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। पचवनिया, ठेकहा, केराडीह, मनसापुर और गणेशपुर सहित आसपास के गांवों के किसान बड़ी संख्या में इस आंदोलन में डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसानों की एकमात्र मांग है कि हाल ही में सिंचाई विभाग द्वारा नवनिर्मित छलका की ऊंचाई को लगभग डेढ़ फीट बढ़ाया जाए, ताकि पचवनिया, मनसापुर, केराडीह और ठेकहा माइनरों में पर्याप्त पानी पहुंच सके और धान की रोपाई समय पर पूरी की जा सके। किसानों का दावा है कि छलका की ऊंचाई कम होने से माइनरों में पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि पर सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। धान की नर्सरी पूरी तरह तैयार होने के बावजूद खेतों में पानी न होने के कारण रोपाई का काम लगातार पिछड़ रहा है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा, किसानों ने कई महीनों से अधूरे पड़े पुल निर्माण कार्य और नए निर्माण में छलका की ऊंचाई पहले की तुलना में कम किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच कराने की भी जोरदार मांग की है। आंदोलन के तीसरे दिन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने धरना स्थल पहुंचकर किसानों से बातचीत की और समाधान का आश्वासन दिया, जबकि इससे पहले पहले दिन जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी को भी मांग पत्र सौंपकर समस्या से अवगत कराया जा चुका है। इस प्रदर्शन को उत्तर प्रदेश किसान सभा का समर्थन मिला है, जिसके जिला मंत्री लालचंद सिंह एडवोकेट ने तकनीकी निरीक्षण कर जल्द समाधान की मांग की है। धरने में शंभूनाथ, लालमणि विश्वकर्मा, कन्हैया चौहान, सिपाही चौहान, संजय चौहान, गुप्तनाथ, रामजी, महाराजा राम और ठेकहा के ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सिंचाई समस्या का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वे चक्का जाम कर आंदोलन को और तेज करेंगे।1
- बिहार के वैशाली जिले में महिला होमगार्ड जवान से जुड़ा मामला इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, और इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे लगातार वायरल हो रहे हैं। इस पूरे मामले में पुलिस के आधिकारिक बयान, पीड़िता के परिवार के आरोपों और अब तक सामने आए विभिन्न तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और घटना का अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच तथा मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।1