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गोरखपुर के बड़हलगंज में 4 साल से बंद पड़े सामुदायिक शौचालय को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस अव्यवस्था से नाराज होकर लोग सड़क पर उतर आए और उन्होंने बड़हलगंज नगर पंचायत के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी नागरिकों ने नगर पंचायत प्रशासन पर अतिक्रमण, लापरवाही और जनसुविधाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। चार साल से बंद पड़े इस सामुदायिक शौचालय के मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने मौके पर ही अपनी नाराजगी जताते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
Shreyash Pandey
गोरखपुर के बड़हलगंज में 4 साल से बंद पड़े सामुदायिक शौचालय को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस अव्यवस्था से नाराज होकर लोग सड़क पर उतर आए और उन्होंने बड़हलगंज नगर पंचायत के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी नागरिकों ने नगर पंचायत प्रशासन पर अतिक्रमण, लापरवाही और जनसुविधाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। चार साल से बंद पड़े इस सामुदायिक शौचालय के मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने मौके पर ही अपनी नाराजगी जताते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
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- गोरखपुर में पिछले कुछ दिनों से हो रही बरसात ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है और शहर में हुए गंभीर जलभराव को लेकर सोशल मीडिया पर अधिकारियों की जमकर आलोचना हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी स्थिति नहीं देखने को मिली थी, जिसके कारण जलभराव से निपटने की तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। यहाँ तक कि सदर सांसद रविकिशन गोरखपुर शहर की तुलना स्पेन जैसे देश से कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पिछले दौरे पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि किसी भी परिस्थिति में जलभराव नहीं होना चाहिए, जिस पर अधिकारियों ने उन्हें पूरी तैयारी का भरोसा भी दिलाया था। लेकिन बारिश होते ही पूरा शहर जलमग्न हो गया और इस विफलता की गूंज लखनऊ तक पहुँचने के बाद अब अधिकारी चौबीसों घंटे सड़कों पर नजर आ रहे हैं। शहर में नालों और नालियों का बड़े पैमाने पर निर्माण तो हुआ है, लेकिन उनके स्लोप (ढलान) को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। स्लोप की जाँच के लिए काफी शोर-शराबे के साथ लिडार सर्वे कराया गया था और दो साल तक इस पर खूब चर्चा चली थी कि सभी नालियों का स्लोप इसी सर्वे के अनुसार दुरुस्त किया जाएगा। हालांकि, आज तक इस सर्वे का क्या उपयोग हुआ यह स्पष्ट नहीं है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी आज पूरा गोरखपुर पानी में डूब चुका है और अधिकारी अब भी इस समस्या का स्थाई समाधान तलाश रहे हैं।1
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