आज महेश नवमी है, जिसे भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। यह माहेश्वरी समुदाय के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है और इसे ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर पूरे उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। भगवान शिव को अनेक नामों से जाना जाता है, जिनमें से एक महेश भी है, जो उनके प्रति गहरी भक्ति का प्रतीक है। इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि महेश नवमी पर भगवान शिव पहली बार अपने भक्तों के सामने प्रकट हुए थे। माहेश्वरी समुदाय के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसी दिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नौवीं तिथि पर माहेश्वरी समुदाय का अस्तित्व में आया था। भक्त, विशेषकर माहेश्वरियों का व्यापारिक समुदाय, इस दिन भगवान महेश और उनकी पत्नी देवी पार्वती की पूजा करते हैं। इसके अलावा, जो महिलाएं संतान की कामना करती हैं, वे विशेष प्रार्थनाएँ कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। आगामी वर्ष में, महेश नवमी 2026 में मंगलवार, 23 जून को मनाई जाएगी; नवमी तिथि 22 जून 2026 को अपराह्न 03:39 बजे आरंभ होकर 23 जून 2026 को अपराह्न 04:39 बजे समाप्त होगी। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भारत के कई हिस्सों में, विशेष रूप से राजस्थान में, बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। महेश नवमी के शुभ दिन भक्त सुबह जल्दी उठते हैं, तैयार होते हैं और मंदिरों को फूलों से सजाते हैं। इस दिन भगवान महेश और देवी पार्वती की पूजा की जाती है, और नवविवाहित जोड़े अपने जीवन में खुशियां लाने के लिए उनकी आराधना करते हैं। भक्त रात भर विशेष भगवान शिव मंत्रों का जाप करते हैं, और भगवान शिव की तस्वीरों वाली विशेष झांकियां घरों में ले जाई जाती हैं, जहाँ पूजा-अर्चना और यज्ञ किए जाते हैं। रुद्राभिषेक इस दिन का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। मंदिरों में भजन संध्या का आयोजन होता है, आरती की जाती है, और पूजा संपन्न होने के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है। महेश नवमी से जुड़ी किंवदंतियों में से एक के अनुसार, राजा खंडेलसन को भगवान शिव की अत्यंत भक्ति और समर्पण से पूजा करने पर सुजानसेन नामक पुत्र प्राप्त हुआ था। एक अन्य कहानी यह बताती है कि एक बार कई शिकारियों ने आश्रम पर हमला कर ऋषियों को परेशान किया, जिसके परिणामस्वरूप क्रोधित ऋषियों ने उन्हें पत्थर होने का श्राप दे दिया। शिकारियों की पत्नियों ने श्राप से मुक्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव ने इस शर्त पर उनकी मदद करने की सहमति दी कि वे शिकार करना बंद कर दें और किसी अन्य व्यवसाय में संलग्न हों। महिलाओं द्वारा शर्त स्वीकार करने के बाद सभी शिकारी बच गए। उन्होंने अन्य व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित किया और भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति प्रदर्शित करने के लिए अपने समुदाय का नाम भगवान महेश के नाम पर माहेश्वरी समुदाय रखा। तब से यह माना जाता है कि भगवान शिव इस समुदाय के पूर्वजों के तारणहार थे। भक्त भगवान महेश और देवी पार्वती के प्रति अत्यंत समर्पण और विश्वास के साथ यह त्योहार मनाते हैं, यह दिन उन्हें स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और खुशी का आशीर्वाद देता है।
आज महेश नवमी है, जिसे भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। यह माहेश्वरी समुदाय के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है और इसे ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर पूरे उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। भगवान शिव को अनेक नामों से जाना जाता है, जिनमें से एक महेश भी है, जो उनके प्रति गहरी भक्ति का प्रतीक है। इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि महेश नवमी पर भगवान शिव पहली बार अपने भक्तों के सामने प्रकट हुए थे। माहेश्वरी समुदाय के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसी दिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नौवीं तिथि पर माहेश्वरी समुदाय का अस्तित्व में आया था। भक्त, विशेषकर माहेश्वरियों का व्यापारिक समुदाय, इस दिन भगवान महेश और उनकी पत्नी देवी पार्वती की पूजा करते हैं। इसके अलावा, जो महिलाएं संतान की कामना करती हैं, वे विशेष प्रार्थनाएँ कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। आगामी वर्ष में, महेश नवमी 2026 में मंगलवार, 23 जून को मनाई जाएगी; नवमी तिथि 22 जून 2026 को अपराह्न 03:39 बजे आरंभ होकर 23 जून 2026 को अपराह्न 04:39 बजे समाप्त होगी। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भारत के कई हिस्सों में, विशेष रूप से राजस्थान में, बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। महेश नवमी के शुभ दिन भक्त सुबह जल्दी उठते हैं, तैयार होते हैं और मंदिरों को फूलों से सजाते हैं। इस दिन भगवान महेश और देवी पार्वती की पूजा की जाती है, और नवविवाहित जोड़े अपने जीवन में खुशियां लाने के लिए उनकी आराधना करते हैं। भक्त रात भर विशेष भगवान शिव मंत्रों का जाप करते हैं, और भगवान शिव की तस्वीरों वाली विशेष झांकियां घरों में ले जाई जाती हैं, जहाँ पूजा-अर्चना और यज्ञ किए जाते हैं। रुद्राभिषेक इस दिन का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। मंदिरों में भजन संध्या का आयोजन होता है, आरती की जाती है, और पूजा संपन्न होने के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है। महेश नवमी से जुड़ी किंवदंतियों में से एक के अनुसार, राजा खंडेलसन को भगवान शिव की अत्यंत भक्ति और समर्पण से पूजा करने पर सुजानसेन नामक पुत्र प्राप्त हुआ था। एक अन्य कहानी यह बताती है कि एक बार कई शिकारियों ने आश्रम पर हमला कर ऋषियों को परेशान किया, जिसके परिणामस्वरूप क्रोधित ऋषियों ने उन्हें पत्थर होने का श्राप दे दिया। शिकारियों की पत्नियों ने श्राप से मुक्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव ने इस शर्त पर उनकी मदद करने की सहमति दी कि वे शिकार करना बंद कर दें और किसी अन्य व्यवसाय में संलग्न हों। महिलाओं द्वारा शर्त स्वीकार करने के बाद सभी शिकारी बच गए। उन्होंने अन्य व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित किया और भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति प्रदर्शित करने के लिए अपने समुदाय का नाम भगवान महेश के नाम पर माहेश्वरी समुदाय रखा। तब से यह माना जाता है कि भगवान शिव इस समुदाय के पूर्वजों के तारणहार थे। भक्त भगवान महेश और देवी पार्वती के प्रति अत्यंत समर्पण और विश्वास के साथ यह त्योहार मनाते हैं, यह दिन उन्हें स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और खुशी का आशीर्वाद देता है।
- सापला में श्री केशव गोपाल मंदिर का भूमि पूजन एवं शिलान्यास समारोह बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और जनप्रतिनिधि शामिल हुए, जिससे पूरा सापला गांव गोपाल महाराज के जयकारों से गूंज उठा। समारोह के दौरान भव्य शिला पूजन, एक विशेष शिला भ्रमण यात्रा और शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कई जनप्रतिनिधियों ने मंदिर निर्माण के लिए सहयोग राशि की घोषणा भी की। आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण गोमती सागर पर काशी विश्वनाथ की तर्ज पर आयोजित भव्य महाआरती रही, जिसे देखने के लिए प्रदेश सहित देशभर से श्रद्धालु सापला पहुंचे। ड्रोन से हुई पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस आध्यात्मिक महोत्सव में संत समागम, सम्मान समारोह और महाप्रसादी का भी आयोजन किया गया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस जाब्ता भी तैनात रहा। यह महोत्सव क्षेत्र के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में से एक रहा।1
- ब्यावर में वीर हिन्दू आर्मी ने मालवा क्षेत्र के 14 गौरक्षकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के मामले में मानवीय आधार पर राहत और पुनर्विचार की मांग करते हुए महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रेषित किया है। संगठन के संस्थापक पंकज वर्मा के नेतृत्व में भेजे गए इस ज्ञापन में कहा गया है कि भारत में गौमाता करोड़ों लोगों की आस्था, सनातन संस्कृति और भारतीय सभ्यता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया कि 14 गौरक्षकों को आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद देशभर के गौभक्तों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों में चिंता एवं पीड़ा का माहौल है। वीर हिन्दू आर्मी ने न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हुए भी मामले के मानवीय, सामाजिक एवं परिस्थितिजन्य पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता जताई। संगठन के अनुसार, संबंधित गौरक्षकों के परिवार, जिनमें उनके माता-पिता, पत्नी, बच्चे एवं अन्य आश्रितजन शामिल हैं, इस समय आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसलिए मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से इस प्रकरण की समीक्षा आवश्यक है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि भारतीय संविधान न्याय, दया, करुणा और मानव गरिमा के मूल्यों पर आधारित है, और इसमें विशेष परिस्थितियों में मानवीय आधार पर राहत प्रदान करने के संवैधानिक प्रावधान मौजूद हैं। वीर हिन्दू आर्मी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि मालवा के 14 गौरक्षकों के मामले की निष्पक्ष एवं समुचित समीक्षा कराई जाए, और यदि संवैधानिक व विधिक प्रावधानों के तहत संभव हो तो दया याचिका, सजा में कमी अथवा अन्य उपयुक्त राहत पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी न्यायिक निर्णय पर टिप्पणी करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों की पीड़ा को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचाना है। इस अवसर पर मुकेश मानी, सुनील पालड़चा, शिवराज पांचरी, मनीष सिंह रावत, मयंक सेन सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी ज्ञापन का समर्थन किया, और संगठन ने इस विषय पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सकारात्मक निर्णय लिए जाने की आशा व्यक्त की है।1
- ब्यावर की वीर हिन्दू आर्मी ने मालवा क्षेत्र के 14 गोरक्षकों के लिए महामहिम राष्ट्रपति को एक प्रार्थना-पत्र सौंपा है। संगठन ने इस ज्ञापन के माध्यम से इन गोरक्षकों को मानवीय आधार पर राहत प्रदान करने और उनके प्रकरणों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। वीर हिन्दू आर्मी ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वे प्रभावित परिवारों की मौजूदा स्थिति पर विचार करते हुए इस मामले में एक संवेदनशील निर्णय लें।1
- नागौर जिले में अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थांवला पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस टीम बाड़ीघाटी टोल के पास नाकाबंदी कर रही थी, तभी एक संदिग्ध 12 चक्का डम्पर को रोककर उसकी जांच की गई। जांच के दौरान डम्पर चालक बजरी परिवहन से संबंधित ई-रवन्ना या अन्य कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद, पुलिस ने डम्पर की तलाशी ली, जिसमें भारी मात्रा में बजरी भरी हुई पाई गई। पुलिस ने तत्काल डम्पर को जब्त कर थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा करवा दिया है और मामले की सूचना अग्रिम कार्रवाई के लिए खनिज विभाग को भी दे दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- सूरत-गोडोदरा में घनश्याम दास जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर आयोजित गौ माता कार्यक्रम में राजपुरोहित समाज के लोग बड़ी संख्या में उमड़ पड़े, जिससे कार्यक्रम में उत्साहपूर्ण माहौल देखा गया।1
- अजमेर जिले के पीसांगन पुलिस थाना ने चोरी के एक मामले का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसके कब्जे से लगभग ₹3 लाख मूल्य का चोरी का माल बरामद किया गया है। पुलिस अधीक्षक अजमेर के निर्देश पर क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी, नकबजनी और अन्य संपत्ति संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए यह कार्रवाई की गई। घटना 6 अप्रैल 2026 की है, जब ग्राम मोवडिया, थाना पीसांगन निवासी रामस्वरूप पुत्र मांगीलाल रैगर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि अज्ञात चोर उनके मकान से सोने-चांदी के आभूषण और नकदी चोरी कर ले गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना पीसांगन में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस टीम ने तकनीकी सहायता और मुखबिर तंत्र के जरिए जांच करते हुए रोड मोहल्ला मेवड़िया, थाना पीसांगन निवासी 65 वर्षीय रामस्वरूप पुत्र भोजूजी रैगर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने घर में घुसकर चोरी की वारदात को कबूल किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक जोड़ी चांदी की पायजेब, चांदी की पातला जोड़ी, चांदी की पट्टी, चांदी की अंगूठियां, चांदी की बिछुड़ियां, चांदी के सिक्के और सोने के आभूषण बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹3 लाख बताई गई है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सुरेश चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम के एएसआई, कांस्टेबल सहित अन्य जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।1
- रियाँ बड़ी उपखंड क्षेत्र के ग्राम डुकिया के किसानों ने रेलवे द्वारा किए गए भूमि सर्वे में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उपखंड अधिकारी (एसडीएम) विनीत कुमार सुखाड़िया को एक ज्ञापन सौंपा है। किसानों ने इस सर्वे की निष्पक्ष जाँच करने, वास्तविक प्रभावित किसानों के लिए पुनः सर्वे कराने और उन्हें न्याय दिलाने की पुरजोर मांग की है। किसानों ने आरोप लगाया है कि रेलवे सर्वे में उन लोगों को भी प्रभावित दर्शाया गया है जिनकी भूमि परियोजना से वास्तव में प्रभावित नहीं हो रही है, जिससे उन्हें अधिक मुआवजा मिलने की संभावना है, जबकि वास्तविक प्रभावित किसान लाभ से वंचित रह रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि गांव के कई व्यक्तियों के कुओं, ट्यूबवेलों और पेड़-पौधों को फर्जी तरीके से सर्वे में शामिल किया गया है। उदाहरण के लिए, कई खेतों में जामुन जैसे पौधे बताए गए हैं जबकि पूरे गांव में जामुन के पेड़ नहीं हैं। किसानों का कहना है कि कुछ लोगों ने सर्वे टीम के साथ मिलीभगत कर अपने खेतों में 20 से 30 फीट गहरे गड्ढे खोदकर पाइपलाइन डाली और उन्हें ट्यूबवेल बताकर लाखों का मुआवजा उठाने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों के अनुसार, इससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है और वास्तविक प्रभावित लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है। किसानों ने डुकिया गांव में किए गए सर्वे को पुनः कराने की मांग की है ताकि सही स्थिति सामने आ सके। उन्होंने सर्वे में कथित रूप से शामिल कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की भी मांग की है। इसके अतिरिक्त, किसानों ने रेलवे लाइन के कारण खेतों में आने-जाने के रास्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की भी मांग उठाई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर नागौर और तहसीलदार रियाँ बड़ी को भी भेजी गई है। ज्ञापन सौंपते समय कई किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे। उपखंड अधिकारी विनीत कुमार सुखाड़िया ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस मामले में तुरंत जांच की जाएगी और पीड़ित किसानों को न्याय दिलाया जाएगा।1
- राजस्थान के मांगलियावास थाना क्षेत्र स्थित लामाना की एक फैक्ट्री में बकाया मजदूरी मांगना बिहार निवासी मजदूर जगदीश को भारी पड़ गया। रविवार रात करीब 10:30 बजे की इस घटना में फैक्ट्री के सुपरवाइजर आलोक दुबे और उनके तीन साथियों ने जगदीश को धारदार हथियार से पीटकर अधमरा कर दिया। विवाद तब शुरू हुआ जब जगदीश ने सुपरवाइजर आलोक दुबे से अपनी पिछली मजदूरी मांगी। आरोप है कि इसके बाद आलोक दुबे अपने तीन साथियों के साथ जगदीश को फैक्ट्री के ऊपर बने एक कमरे में ले गए, जहां कमरा बंद कर चारों ने मिलकर उस पर धारदार हथियार से हमला किया। हमले में गंभीर रूप से घायल जगदीश की हालत नाजुक बनी हुई है। उसे पहले ब्यावर के अमृत कौर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ हालत बिगड़ने पर जेएलएन अजमेर और फिर जयपुर रैफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, जगदीश की हालत अभी भी गंभीर है। मारपीट के बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आरोपी मजदूर को गंभीर हालत में ले जाते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में लोग उसकी जान बचाने की दुआ कर रहे हैं और घायल का भाई रोता-बिलखता नजर आ रहा है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि सुपरवाइजर ने जान से मारने की नीयत से हमला किया था। मांगलियावास थाने के एएसआई गोपाराम बिश्नोई ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में सुपरवाइजर आलोक दुबे (35 वर्षीय, पुत्र विद्याभूषण), विकास (32 वर्षीय, पुत्र दिलीप सिंह, निवासी उत्तर प्रदेश), ओम प्रताप (पुत्र समभेर बहादुर, निवासी मध्य प्रदेश) और बलवंत (पुत्र नूरा यादव, निवासी उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। सभी को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस वायरल वीडियो को सबूत के तौर पर जांच में शामिल कर रही है और मामले में हत्या के प्रयास की धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।1