सरायकेला: बार एसोसिएशन ने किया नवनिर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी का भव्य स्वागत* *सरायकेला व्यवहार न्यायालय स्थानांतरण रोकने के लिए अधिवक्ताओं ने मांगा पूर्ण समर्थन*; * *अध्यक्ष ने दिया हर संभव प्रयास का आश्वासन* *सरायकेला* - सरायकेला व्यवहार न्यायालय के बार एसोसिएशन सभा कक्ष में सोमवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बार एसोसिएशन द्वारा सरायकेला नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी का अधिवक्ताओं ने पुष्प गुच्छा देकर गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभात महतो ने मनोज चौधरी की सराहना करते हुए उन्हें एक जुझारू समाजसेवक बताया। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में अनुमंडल कार्यालय के स्थानांतरण को रोकने में मनोज चौधरी की आमरण अनशन वाली भूमिका सराहनीय रही थी। उन्होंने वर्तमान में व्यवहार न्यायालय के स्थानांतरण की समस्या पर भी उनसे पूर्ण समर्थन की मांग की। न्यायालय स्थानांतरण पर गंभीर चर्चा अपने संबोधन में मनोज चौधरी ने अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि विद्वान अधिवक्ताओं का समर्थन मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने न्यायालय स्थानांतरण के मुद्दे पर अपनी गंभीरता स्पष्ट करते हुए बताया कि उन्होंने इस विषय पर माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, क्षेत्र के मंत्री दीपक बिरवा और विधायक दशरथ गागराई से भी वार्ता की है। उन्होंने उपायुक्त (DC) महोदय से सरायकेला नगर में ही 10 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। इसके साथ ही सदर अस्पताल के सामने स्वर्णरेखा कॉलोनी की अनुपयोगी 14 एकड़ जमीन का विवरण भी नक्शे सहित प्रस्तुत किया है, जिसकी वर्तमान में विभागीय जांच चल रही है। मनोज चौधरी ने विश्वास जताया है कि व्यवहार न्यायालय पुलिस अधीक्षक कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के सरायकेला शहर के बीचो-बीच रहेगा।उन्होंने कहा सरायकेला की जनता ने काम करने वाले को चुना है और मैं काम करके दिखाऊंगा। शहर में रहना करीब 25% परिवारों की रोजी-रोटी और शहर की अस्मिता से जुड़ा मामला है। कार्यालय के वरिष्ठ अधिवक्ता केदार अग्रवाल और के पी दुबे और बार एसोसिएशन के महासचिव देवाशिष्ठ ज्योतिषी ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में न्यायालय स्थानांतरण को रोकने के लिए मनोज चौधरी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। इस कार्यक्रम से अधिवक्ताओं के बीच में खुशी की लहर दौड़ गई है।
सरायकेला: बार एसोसिएशन ने किया नवनिर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी का भव्य स्वागत* *सरायकेला व्यवहार न्यायालय स्थानांतरण रोकने के लिए अधिवक्ताओं ने मांगा पूर्ण समर्थन*; * *अध्यक्ष ने दिया हर संभव प्रयास का आश्वासन* *सरायकेला* - सरायकेला व्यवहार न्यायालय के बार एसोसिएशन सभा कक्ष में सोमवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बार एसोसिएशन द्वारा सरायकेला नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी का अधिवक्ताओं ने पुष्प गुच्छा देकर गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभात महतो ने मनोज चौधरी की सराहना करते हुए उन्हें एक जुझारू समाजसेवक बताया। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में अनुमंडल कार्यालय के स्थानांतरण को रोकने में मनोज चौधरी की आमरण अनशन वाली भूमिका सराहनीय रही थी। उन्होंने वर्तमान में व्यवहार न्यायालय के स्थानांतरण की समस्या पर भी उनसे पूर्ण समर्थन की मांग की। न्यायालय स्थानांतरण पर गंभीर चर्चा अपने संबोधन में मनोज चौधरी ने अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि विद्वान अधिवक्ताओं का समर्थन मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने न्यायालय स्थानांतरण के मुद्दे पर अपनी गंभीरता स्पष्ट करते
हुए बताया कि उन्होंने इस विषय पर माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, क्षेत्र के मंत्री दीपक बिरवा और विधायक दशरथ गागराई से भी वार्ता की है। उन्होंने उपायुक्त (DC) महोदय से सरायकेला नगर में ही 10 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। इसके साथ ही सदर अस्पताल के सामने स्वर्णरेखा कॉलोनी की अनुपयोगी 14 एकड़ जमीन का विवरण भी नक्शे सहित प्रस्तुत किया है, जिसकी वर्तमान में विभागीय जांच चल रही है। मनोज चौधरी ने विश्वास जताया है कि व्यवहार न्यायालय पुलिस अधीक्षक कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के सरायकेला शहर के बीचो-बीच रहेगा।उन्होंने कहा सरायकेला की जनता ने काम करने वाले को चुना है और मैं काम करके दिखाऊंगा। शहर में रहना करीब 25% परिवारों की रोजी-रोटी और शहर की अस्मिता से जुड़ा मामला है। कार्यालय के वरिष्ठ अधिवक्ता केदार अग्रवाल और के पी दुबे और बार एसोसिएशन के महासचिव देवाशिष्ठ ज्योतिषी ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में न्यायालय स्थानांतरण को रोकने के लिए मनोज चौधरी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। इस कार्यक्रम से अधिवक्ताओं के बीच में खुशी की लहर दौड़ गई है।
- Post by Ravi Gupta1
- राजनगर : श्री श्री बजरंगबली समिति रुतडीह के द्वारा आयोजित 24 प्रहर हरि संकीर्तन, रामलीला देव सभा एवं यज्ञ 29 मार्च 2026 को धूलोट के साथ हुआ समापन।1
- राँची के हर क्षेत्र में जोरों सोरों से मनाया गया राम नवमी का त्योहार #purasuchnews151
- सदर पद पर जावेद अख्तर का नामांकन। #anjumanislamiyachunaw20261
- राउरकेला। ओडिशा में चल रहे माओवादी विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सक्रिय सदस्य मोंगड़ी होनहागा ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए राउरकेला पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरकार की पुनर्वास नीति और संगठन के भीतर हो रहे उत्पीड़न से तंग आकर उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। जानकारी के अनुसार 19 वर्षीय मोंगड़ी होनहागा झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मारांगपोंगो गांव की निवासी है। वह माओवादी संगठन के एलजीएस (लोकल गुरिल्ला स्क्वाड) की सदस्य के रूप में एसवीएन (दक्षिण छोटानागरा) डिवीजन में सक्रिय रूप से कार्य कर रही थी। संगठन में रहते हुए वह विभिन्न गतिविधियों में शामिल रही और कई अभियानों में उसकी भूमिका बताई जा रही है। पुलिस पूछताछ के दौरान मोंगड़ी ने बताया कि माओवादी संगठन के अंदर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की घटनाओं के कारण उसका मोहभंग हो गया था। इसके साथ ही हिंसक विचारधारा से निराशा और लगातार बढ़ते सुरक्षा बलों के दबाव ने उसे संगठन छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। ओडिशा सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने भी उसे मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। पुलिस के अनुसार मोंगड़ी का नाम कई नक्सली गतिविधियों में सामने आया है। वह अनमोल उर्फ सुशांत के दस्ते की सदस्य रही है और संगठन के लिए रसद आपूर्ति तथा नए सदस्यों की भर्ती में सक्रिय भूमिका निभाती थी। वर्ष 2022 में कुमडीही जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान भी वह मौजूद थी, लेकिन उस समय वह मौके से फरार हो गई थी। राज्य सरकार ने उसे ‘बी’ श्रेणी के नक्सली कैडर के रूप में चिन्हित किया है। इसके तहत उसे ओडिशा सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत 2 लाख 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वह समाज की मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन शुरू कर सके। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य भटके हुए युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना है। वहीं प्रशासन ने अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाते हुए नई जिंदगी की शुरुआत करें।1
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- सिस्टम सो चुकी है पर हम भी जगाते रहेंगे !!1
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