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बाराबंकी के न्यू सहारा हॉस्पिटल में कथित चिकित्सीय लापरवाही के एक मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पक्ष ने हाल ही में नियुक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को दोबारा प्रार्थना पत्र सौंपकर दोषी चिकित्सकों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि विभागीय जांच प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने और लीपापोती करने का प्रयास कर रही है। प्रार्थी अजय पांडेय ने बताया कि उन्होंने पहले भी सभी साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनके अनुसार, विभागीय स्तर पर अस्पताल को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि उनकी बेटी का इलाज अभी भी जारी है और उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज व साक्ष्य उपलब्ध करा दिए हैं। शिकायत में कहा गया है कि उनकी पुत्री शालू पांडेय को 2 मार्च को प्रसव के लिए न्यू सहारा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 5 मार्च को ऑपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ और 13 मार्च को उन्हें छुट्टी दे दी गई। इसके बाद शालू पांडेय को लगातार पेट दर्द, बुखार और पेशाब में जलन की शिकायत बनी रही। यह कथित चिकित्सीय लापरवाही तब सामने आई जब 19 मई को यूरिन के रास्ते कॉटन (गॉज) का एक बड़ा टुकड़ा बाहर निकला। पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि यह गॉज समय पर बाहर नहीं निकलता तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था, फिर भी कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अजय पांडेय ने नए सीएमओ से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला तो वह लोकतांत्रिक और विधिसम्मत आंदोलन करेंगे, और अंतिम विकल्प के रूप में आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने के लिए विवश होंगे। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गए ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं। संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

18 hrs ago
user_खबरों का रणक्षेत्र
खबरों का रणक्षेत्र
Teacher रामनगर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
18 hrs ago
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बाराबंकी के न्यू सहारा हॉस्पिटल में कथित चिकित्सीय लापरवाही के एक मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पक्ष ने हाल ही में नियुक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को दोबारा प्रार्थना पत्र सौंपकर दोषी चिकित्सकों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि विभागीय जांच प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने और लीपापोती करने का प्रयास कर रही है। प्रार्थी अजय पांडेय ने बताया कि उन्होंने पहले भी सभी साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनके अनुसार, विभागीय स्तर पर अस्पताल को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि उनकी बेटी का इलाज अभी भी जारी है और उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज व साक्ष्य उपलब्ध करा दिए हैं। शिकायत में कहा गया है कि उनकी पुत्री शालू पांडेय को 2 मार्च को प्रसव के लिए न्यू सहारा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 5 मार्च को ऑपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ और 13 मार्च को उन्हें छुट्टी दे दी गई। इसके बाद शालू पांडेय को लगातार पेट दर्द, बुखार और पेशाब में जलन की शिकायत बनी रही। यह कथित चिकित्सीय लापरवाही तब सामने आई जब 19 मई को यूरिन के रास्ते कॉटन (गॉज) का एक बड़ा टुकड़ा बाहर निकला। पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि यह गॉज समय पर बाहर नहीं निकलता तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था, फिर भी कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अजय पांडेय ने नए सीएमओ से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला तो वह लोकतांत्रिक और विधिसम्मत आंदोलन करेंगे, और अंतिम विकल्प के रूप में आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने के लिए विवश होंगे। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गए ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं। संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

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  • बाराबंकी के रामनगर तहसील क्षेत्र में लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजय क्षेत्र के पास बनाए गए पीपा पुल को हटाने का काम शुरू हो गया है। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की देखरेख में इस पीपा पुल के आठ पीपों को क्रेन की मदद से बड़े वाहनों पर लादकर प्रयागराज (इलाहाबाद) भेज दिया गया। लगभग ₹6 करोड़ 18 लाख की लागत से तैयार किया गया यह पीपा पुल नदी पर आवागमन को सुचारु रखने के लिए बनाया गया था। अब संजय सेतु का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के कारण इस पीपा पुल की उपयोगिता समाप्त हो गई है, जिसके चलते विभाग ने इसे हटाने की कार्रवाई शुरू की है। लोधेश्वर क्रेन सर्विस की मदद से नदी किनारे पड़े पीपों को उठाकर सुरक्षित तरीके से प्रयागराज के लिए रवाना किया गया। इस कार्य की निगरानी तिलक राम लोधी और रामशंकर लोधी ने की। लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर सद्दाम ने बताया कि संजय सेतु का निर्माण अब पूरा हो चुका है और छोटे वाहनों का आवागमन भी शुरू हो गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बड़े वाहनों के संचालन के लिए भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और 15 जून तक संजय सेतु को सभी वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। पीपा पुल हटाए जाने से स्थायी पुल के संचालन की प्रक्रिया में तेजी आई है, जिससे स्थानीय लोगों को लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। संजय सेतु के पूरी तरह चालू होने के बाद क्षेत्र के लोगों, व्यापारियों और वाहन चालकों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी।
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    बाराबंकी के रामनगर तहसील क्षेत्र में लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजय क्षेत्र के पास बनाए गए पीपा पुल को हटाने का काम शुरू हो गया है। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की देखरेख में इस पीपा पुल के आठ पीपों को क्रेन की मदद से बड़े वाहनों पर लादकर प्रयागराज (इलाहाबाद) भेज दिया गया।

लगभग ₹6 करोड़ 18 लाख की लागत से तैयार किया गया यह पीपा पुल नदी पर आवागमन को सुचारु रखने के लिए बनाया गया था। अब संजय सेतु का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के कारण इस पीपा पुल की उपयोगिता समाप्त हो गई है, जिसके चलते विभाग ने इसे हटाने की कार्रवाई शुरू की है। लोधेश्वर क्रेन सर्विस की मदद से नदी किनारे पड़े पीपों को उठाकर सुरक्षित तरीके से प्रयागराज के लिए रवाना किया गया। इस कार्य की निगरानी तिलक राम लोधी और रामशंकर लोधी ने की।

लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर सद्दाम ने बताया कि संजय सेतु का निर्माण अब पूरा हो चुका है और छोटे वाहनों का आवागमन भी शुरू हो गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बड़े वाहनों के संचालन के लिए भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और 15 जून तक संजय सेतु को सभी वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।

पीपा पुल हटाए जाने से स्थायी पुल के संचालन की प्रक्रिया में तेजी आई है, जिससे स्थानीय लोगों को लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। संजय सेतु के पूरी तरह चालू होने के बाद क्षेत्र के लोगों, व्यापारियों और वाहन चालकों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी।
    user_Krishna Kumar
    Krishna Kumar
    Advertising Photographer रामनगर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • ओमान के तट के पास अमेरिकी नौसेना द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर की गई सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई है। इस घटना से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है, और भारत सरकार ने अमेरिका के समक्ष इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मारे गए भारतीय नाविकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के रूप में हुई है, जिनकी मौत 'एमटी सेत्तेबेल्लो' नामक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में हुई थी। पिछले कुछ दिनों में ओमान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन अलग-अलग वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। इनमें 8 जून को 'एमटी मारिवेक्स' पर भी अमेरिकी बल द्वारा कार्रवाई की गई थी, जिसमें सवार सभी 24 भारतीय नाविक सुरक्षित बचा लिए गए थे। इसके अलावा, 11 जून को 'एमटी जलवीर' पर भी हमले की खबर आई, जिसमें सवार 20 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन हमलों पर अपनी गहरी चिंता और कड़ा विरोध व्यक्त करने के लिए इस सप्ताह दो बार अमेरिकी 'चार्ज डी अफेयर्स' को तलब किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को निशाना बनाने वाली ये कार्रवाई तुरंत बंद होनी चाहिए। भारत सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। 'सीमैन वेलफेयर फंड सोसाइटी' को प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया गया है।
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    ओमान के तट के पास अमेरिकी नौसेना द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर की गई सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई है। इस घटना से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है, और भारत सरकार ने अमेरिका के समक्ष इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मारे गए भारतीय नाविकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के रूप में हुई है, जिनकी मौत 'एमटी सेत्तेबेल्लो' नामक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में हुई थी।

पिछले कुछ दिनों में ओमान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन अलग-अलग वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। इनमें 8 जून को 'एमटी मारिवेक्स' पर भी अमेरिकी बल द्वारा कार्रवाई की गई थी, जिसमें सवार सभी 24 भारतीय नाविक सुरक्षित बचा लिए गए थे। इसके अलावा, 11 जून को 'एमटी जलवीर' पर भी हमले की खबर आई, जिसमें सवार 20 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन हमलों पर अपनी गहरी चिंता और कड़ा विरोध व्यक्त करने के लिए इस सप्ताह दो बार अमेरिकी 'चार्ज डी अफेयर्स' को तलब किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को निशाना बनाने वाली ये कार्रवाई तुरंत बंद होनी चाहिए।

भारत सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। 'सीमैन वेलफेयर फंड सोसाइटी' को प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया गया है।
    user_रामानंद सागर
    रामानंद सागर
    Photographer रामनगर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • सिरौलीगौसपुर के बदोसराय थाना क्षेत्र के बरदरी मरकामऊ गांव में शुक्रवार सुबह एक 25 वर्षीय युवक का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान मोहियाद्दीन के पुत्र चाँद बाबू (उम्र करीब 25 वर्ष) के रूप में हुई है। यह घटना सुबह लगभग 9 बजे सामने आई, जब घर में मौजूद चाँद बाबू की वृद्ध दादी और दो छोटी बहनें (8 और 5 वर्ष) ने चीख-पुकार सुनकर शव को फंदे से नीचे उतारा। सूचना मिलने पर बदोसराय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचायत नामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने आगे की जांच के लिए मृतक का मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया है। परिजनों ने बताया कि चाँद बाबू के पिता का लगभग एक साल पहले बीमारी से निधन हो गया था। वह परिवार का इकलौता बेटा था और अविवाहित था, जिस पर अपनी दो छोटी बहनों की जिम्मेदारी थी। उसकी विधवा मां रोजगार के लिए लखनऊ में रहती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, चाँद बाबू मिलनसार स्वभाव का था, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद से वह गुमसुम रहने लगा था। गांव में इस घटना को लेकर प्रेम प्रसंग सहित विभिन्न तरह की चर्चाएं हैं, हालांकि आत्महत्या का वास्तविक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। बदोसराय थाना के वरिष्ठ उपनिरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा।
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    सिरौलीगौसपुर के बदोसराय थाना क्षेत्र के बरदरी मरकामऊ गांव में शुक्रवार सुबह एक 25 वर्षीय युवक का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान मोहियाद्दीन के पुत्र चाँद बाबू (उम्र करीब 25 वर्ष) के रूप में हुई है। यह घटना सुबह लगभग 9 बजे सामने आई, जब घर में मौजूद चाँद बाबू की वृद्ध दादी और दो छोटी बहनें (8 और 5 वर्ष) ने चीख-पुकार सुनकर शव को फंदे से नीचे उतारा।

सूचना मिलने पर बदोसराय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचायत नामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने आगे की जांच के लिए मृतक का मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया है। परिजनों ने बताया कि चाँद बाबू के पिता का लगभग एक साल पहले बीमारी से निधन हो गया था। वह परिवार का इकलौता बेटा था और अविवाहित था, जिस पर अपनी दो छोटी बहनों की जिम्मेदारी थी। उसकी विधवा मां रोजगार के लिए लखनऊ में रहती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, चाँद बाबू मिलनसार स्वभाव का था, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद से वह गुमसुम रहने लगा था।

गांव में इस घटना को लेकर प्रेम प्रसंग सहित विभिन्न तरह की चर्चाएं हैं, हालांकि आत्महत्या का वास्तविक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। बदोसराय थाना के वरिष्ठ उपनिरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा।
    user_श्याम मनोरथ रावत
    श्याम मनोरथ रावत
    सिरौली गौसपुर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के एक जवान ने पुलिस विभाग में पोस्टिंग को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। जवान के मुताबिक, विभाग में 'जैसा पैसा, वैसी पोस्टिंग' का चलन है, यानी पोस्टिंग के लिए पैसे देना अनिवार्य है। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर 'साहब' को रिश्वत नहीं दी जाती, तो उन्हें बाथरूम धोने जैसे अवांछित काम करने पड़ते हैं। यह बयान पुलिस अधिकारियों के रवैये पर सीधा सवाल उठाता है और पूछ रहा है कि क्या वे वाकई 'काले अंग्रेज' हैं।
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    उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के एक जवान ने पुलिस विभाग में पोस्टिंग को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। जवान के मुताबिक, विभाग में 'जैसा पैसा, वैसी पोस्टिंग' का चलन है, यानी पोस्टिंग के लिए पैसे देना अनिवार्य है। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर 'साहब' को रिश्वत नहीं दी जाती, तो उन्हें बाथरूम धोने जैसे अवांछित काम करने पड़ते हैं। यह बयान पुलिस अधिकारियों के रवैये पर सीधा सवाल उठाता है और पूछ रहा है कि क्या वे वाकई 'काले अंग्रेज' हैं।
    user_Anoop singh
    Anoop singh
    फतेहपुर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के शिवधारा गांव में शनिवार को प्लॉटिंग एरिया में चोरी के आरोप में ग्रामीणों ने एक युवक को पकड़ लिया। पकड़े गए युवक की पहचान निजामपुर मझगवां थाना गोल्फ सिटी निवासी जगदीश के पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई है। उसके पास से एक साइकिल और आरी ब्लेड भी बरामद हुआ है, जबकि उसके दो साथी मौके से फरार हो गए। ग्रामीणों के अनुसार, मनीष अपने दो अन्य साथियों के साथ चोरी की नीयत से प्लॉटिंग एरिया में आया था। ग्रामीणों के इकट्ठा होने पर दो आरोपी भाग निकले, लेकिन मनीष को पकड़ लिया गया और सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची मोहनलालगंज पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस पकड़े गए युवक से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस ने बताया है कि तहरीर मिलने पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, साथ ही चोरी के प्रयास में क्या सामान निशाने पर था, इसकी भी जांच की जा रही है।
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    लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के शिवधारा गांव में शनिवार को प्लॉटिंग एरिया में चोरी के आरोप में ग्रामीणों ने एक युवक को पकड़ लिया। पकड़े गए युवक की पहचान निजामपुर मझगवां थाना गोल्फ सिटी निवासी जगदीश के पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई है। उसके पास से एक साइकिल और आरी ब्लेड भी बरामद हुआ है, जबकि उसके दो साथी मौके से फरार हो गए।

ग्रामीणों के अनुसार, मनीष अपने दो अन्य साथियों के साथ चोरी की नीयत से प्लॉटिंग एरिया में आया था। ग्रामीणों के इकट्ठा होने पर दो आरोपी भाग निकले, लेकिन मनीष को पकड़ लिया गया और सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची मोहनलालगंज पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस पकड़े गए युवक से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस ने बताया है कि तहरीर मिलने पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, साथ ही चोरी के प्रयास में क्या सामान निशाने पर था, इसकी भी जांच की जा रही है।
    user_राम जी दीक्षित पत्रकार
    राम जी दीक्षित पत्रकार
    Voice of people नवाबगंज, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात एक परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं, जब उत्सर्ग एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे में पति की मौत हो गई और पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। इस हृदय विदारक घटना के बाद, दंपति के तीन मासूम बच्चे अपने माता-पिता को पुकारते हुए बिलखते रहे, जिससे मौके पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। लखनऊ के गोमती नगर में एक निजी कंपनी में कार्यरत मनोज कुमार (32) और उनकी पत्नी वंदना (28), अपने तीन बच्चों - हिमांशी (7), स्नेहा (4) और छह माह के आंशिक - के साथ आजमगढ़ स्थित अपने पैतृक गांव मुहम्मदपुर, पोस्ट तरौका, थाना लाटघाट जा रहे थे। लखनऊ में ट्रेन न मिलने पर वे बस से बाराबंकी पहुंचे थे और वहां से ट्रेन संख्या 15084 उत्सर्ग एक्सप्रेस में सवार होने का प्रयास कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दंपति ने सबसे पहले अपने बच्चों को ट्रेन में चढ़ाया। इसके बाद मनोज ने अपनी पत्नी वंदना को ट्रेन में चढ़ने में मदद की और जब वह खुद चढ़ने लगे, तो उनका पैर फिसल गया और वे ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच जा गिरे। पति को बचाने की कोशिश में वंदना ने उनका हाथ पकड़ा, लेकिन इस प्रयास में वह भी असंतुलित होकर नीचे गिर गईं। यह हादसा इतना भयावह था कि आसपास के यात्री भी दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही जीआरपी और रेलवे पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने मनोज कुमार को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल वंदना को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद तीनों मासूम बच्चे लगातार अपने माता-पिता को पुकारते रहे, उनकी बेबसी देख प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। इस दुखद घटना के बाद हर किसी के मन में यह सवाल था कि आखिर इन बच्चों का भविष्य अब किसके सहारे होगा।
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    बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात एक परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं, जब उत्सर्ग एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे में पति की मौत हो गई और पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। इस हृदय विदारक घटना के बाद, दंपति के तीन मासूम बच्चे अपने माता-पिता को पुकारते हुए बिलखते रहे, जिससे मौके पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।

लखनऊ के गोमती नगर में एक निजी कंपनी में कार्यरत मनोज कुमार (32) और उनकी पत्नी वंदना (28), अपने तीन बच्चों - हिमांशी (7), स्नेहा (4) और छह माह के आंशिक - के साथ आजमगढ़ स्थित अपने पैतृक गांव मुहम्मदपुर, पोस्ट तरौका, थाना लाटघाट जा रहे थे। लखनऊ में ट्रेन न मिलने पर वे बस से बाराबंकी पहुंचे थे और वहां से ट्रेन संख्या 15084 उत्सर्ग एक्सप्रेस में सवार होने का प्रयास कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दंपति ने सबसे पहले अपने बच्चों को ट्रेन में चढ़ाया। इसके बाद मनोज ने अपनी पत्नी वंदना को ट्रेन में चढ़ने में मदद की और जब वह खुद चढ़ने लगे, तो उनका पैर फिसल गया और वे ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच जा गिरे। पति को बचाने की कोशिश में वंदना ने उनका हाथ पकड़ा, लेकिन इस प्रयास में वह भी असंतुलित होकर नीचे गिर गईं। यह हादसा इतना भयावह था कि आसपास के यात्री भी दहशत में आ गए।

सूचना मिलते ही जीआरपी और रेलवे पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने मनोज कुमार को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल वंदना को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद तीनों मासूम बच्चे लगातार अपने माता-पिता को पुकारते रहे, उनकी बेबसी देख प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। इस दुखद घटना के बाद हर किसी के मन में यह सवाल था कि आखिर इन बच्चों का भविष्य अब किसके सहारे होगा।
    user_Aakash Deep
    Aakash Deep
    Photographer नवाबगंज, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार रात एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को स्तब्ध कर दिया। आजमगढ़ निवासी मनोज (32 वर्ष) अपनी पत्नी वंदना (28 वर्ष) और तीन मासूम बच्चों हिमांशी (7 वर्ष), स्नेहा (4 वर्ष) तथा छह माह के दुधमुंहे आंशिक के साथ उत्सर्ग एक्सप्रेस पकड़ने स्टेशन पहुंचे थे, तभी ट्रेन में चढ़ते समय उनका पैर फिसल गया। इस हृदय विदारक दुर्घटना में मनोज की तत्काल मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी वंदना गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है, जहाँ वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। यह घटना एक खुशहाल परिवार के लिए मातम में बदल गई, जिसने उनकी दुनिया उजाड़ दी। हादसे के बाद स्टेशन पर सबसे मार्मिक दृश्य सामने आया, जब तीन मासूम बच्चे अपने माता-पिता के बिना बेसहारा होकर बिलख रहे थे। सात साल की हिमांशी और चार साल की स्नेहा अपने माता-पिता को खोजते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, वहीं छह माह का मासूम आंशिक अपनी माँ की गोद के लिए तड़प रहा था। बच्चों की चीखों और सिसकियों ने वहाँ मौजूद लोगों का कलेजा कंपा दिया और कई लोगों की आँखें नम हो गईं। मौके पर पहुँचे जीआरपी थानाध्यक्ष चंद्रमणि पांडेय, हेड कांस्टेबल रेखा सैनी और उषा कुमारी भी बच्चों की हालत देखकर भावुक हो गईं। पुलिसकर्मियों ने बच्चों को दुलारा, उन्हें चुप कराने की कोशिश की और सुरक्षित अपनी देखरेख में ले लिया। बताया गया कि मनोज लखनऊ के गोमती नगर में निजी नौकरी करते थे और पूरे परिवार के एकमात्र सहारा थे। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। मनोज के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में रखते हुए उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार की बिखरती दुनिया की कहानी बन गई है, जिसे देखकर हर आँख नम और हर दिल भारी हो गया।
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    बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार रात एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को स्तब्ध कर दिया। आजमगढ़ निवासी मनोज (32 वर्ष) अपनी पत्नी वंदना (28 वर्ष) और तीन मासूम बच्चों हिमांशी (7 वर्ष), स्नेहा (4 वर्ष) तथा छह माह के दुधमुंहे आंशिक के साथ उत्सर्ग एक्सप्रेस पकड़ने स्टेशन पहुंचे थे, तभी ट्रेन में चढ़ते समय उनका पैर फिसल गया।

इस हृदय विदारक दुर्घटना में मनोज की तत्काल मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी वंदना गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है, जहाँ वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। यह घटना एक खुशहाल परिवार के लिए मातम में बदल गई, जिसने उनकी दुनिया उजाड़ दी।

हादसे के बाद स्टेशन पर सबसे मार्मिक दृश्य सामने आया, जब तीन मासूम बच्चे अपने माता-पिता के बिना बेसहारा होकर बिलख रहे थे। सात साल की हिमांशी और चार साल की स्नेहा अपने माता-पिता को खोजते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, वहीं छह माह का मासूम आंशिक अपनी माँ की गोद के लिए तड़प रहा था। बच्चों की चीखों और सिसकियों ने वहाँ मौजूद लोगों का कलेजा कंपा दिया और कई लोगों की आँखें नम हो गईं।

मौके पर पहुँचे जीआरपी थानाध्यक्ष चंद्रमणि पांडेय, हेड कांस्टेबल रेखा सैनी और उषा कुमारी भी बच्चों की हालत देखकर भावुक हो गईं। पुलिसकर्मियों ने बच्चों को दुलारा, उन्हें चुप कराने की कोशिश की और सुरक्षित अपनी देखरेख में ले लिया। बताया गया कि मनोज लखनऊ के गोमती नगर में निजी नौकरी करते थे और पूरे परिवार के एकमात्र सहारा थे। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। मनोज के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में रखते हुए उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है।

बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार की बिखरती दुनिया की कहानी बन गई है, जिसे देखकर हर आँख नम और हर दिल भारी हो गया।
    user_फखरे आलम
    फखरे आलम
    नवाबगंज, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • जनपद बाराबंकी की तहसील रामनगर क्षेत्र के भवानी पैलेस में शनिवार को आयोजित सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के कार्यक्रम के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव डॉ. अरविंद राजभर ने फेफड़ों की गंभीर बीमारी से पीड़ित छेदू पुत्र रामप्रसाद से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पीड़ित का हाल-चाल जाना और इलाज के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। डॉ. राजभर को रामनगर विधानसभा क्षेत्र-267 के कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान ग्राम पंचायत बेहटा निवासी छेदू की बीमारी की जानकारी मिली थी। छेदू लंबे समय से फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और वर्तमान में उन्हें ऑक्सीजन के सहारे रखा जा रहा है, जिससे उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिवार लगातार अलग-अलग स्थानों पर इलाज करा रहा है और बेहतर उपचार के लिए प्रयासरत है। पीड़ित की स्थिति को देखते हुए डॉ. अरविंद राजभर ने मौके पर ही आर्थिक सहायता प्रदान की और परिवार को भरोसा दिलाया कि इलाज में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। डॉ. अरविंद राजभर ने आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर छेदू को बड़े अस्पताल में भर्ती कराकर बेहतर उपचार कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सरकार स्तर से भी इलाज में हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिया और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही। सहायता मिलने पर पीड़ित परिवार के सदस्यों ने डॉ. राजभर का आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि उपचार के लिए आगे भी सहयोग मिलता रहेगा। स्थानीय लोगों ने भी डॉ. अरविंद राजभर द्वारा पीड़ित की मदद किए जाने के प्रयास की सराहना की, यह कहते हुए कि जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता मिलना उनके इलाज और जीवन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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    जनपद बाराबंकी की तहसील रामनगर क्षेत्र के भवानी पैलेस में शनिवार को आयोजित सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के कार्यक्रम के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव डॉ. अरविंद राजभर ने फेफड़ों की गंभीर बीमारी से पीड़ित छेदू पुत्र रामप्रसाद से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पीड़ित का हाल-चाल जाना और इलाज के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। डॉ. राजभर को रामनगर विधानसभा क्षेत्र-267 के कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान ग्राम पंचायत बेहटा निवासी छेदू की बीमारी की जानकारी मिली थी।

छेदू लंबे समय से फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और वर्तमान में उन्हें ऑक्सीजन के सहारे रखा जा रहा है, जिससे उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिवार लगातार अलग-अलग स्थानों पर इलाज करा रहा है और बेहतर उपचार के लिए प्रयासरत है। पीड़ित की स्थिति को देखते हुए डॉ. अरविंद राजभर ने मौके पर ही आर्थिक सहायता प्रदान की और परिवार को भरोसा दिलाया कि इलाज में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।

डॉ. अरविंद राजभर ने आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर छेदू को बड़े अस्पताल में भर्ती कराकर बेहतर उपचार कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सरकार स्तर से भी इलाज में हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिया और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही। सहायता मिलने पर पीड़ित परिवार के सदस्यों ने डॉ. राजभर का आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि उपचार के लिए आगे भी सहयोग मिलता रहेगा। स्थानीय लोगों ने भी डॉ. अरविंद राजभर द्वारा पीड़ित की मदद किए जाने के प्रयास की सराहना की, यह कहते हुए कि जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता मिलना उनके इलाज और जीवन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
    user_Krishna Kumar
    Krishna Kumar
    Advertising Photographer रामनगर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
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