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नारहट के टोला इब्राहिमपुर में एक दुकान में काफी वर्षों से पानी भरने की समस्या बनी हुई है।

1 day ago
user_Sanjeev Kumar
Sanjeev Kumar
Grain Trader हिसुआ, नवादा, बिहार•
1 day ago

नारहट के टोला इब्राहिमपुर में एक दुकान में काफी वर्षों से पानी भरने की समस्या बनी हुई है।

More news from बिहार and nearby areas
  • शुक्रवार को बिहार के नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदल गया। सुबह से ही आसमान में बादल मंडरा रहे थे, जिसके बाद मंझवे तुंगी बेलदारी, चक धरमपुर उमराव बीघा, हसनपुर सहित दर्जनों गांवों में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हुई। इस बारिश से एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर गड्ढों और खेतों में पानी जमा हो गया है और गलियां कीचड़मय हो गई हैं।
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    शुक्रवार को बिहार के नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदल गया। सुबह से ही आसमान में बादल मंडरा रहे थे, जिसके बाद मंझवे तुंगी बेलदारी, चक धरमपुर उमराव बीघा, हसनपुर सहित दर्जनों गांवों में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हुई। इस बारिश से एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर गड्ढों और खेतों में पानी जमा हो गया है और गलियां कीचड़मय हो गई हैं।
    user_Imtiyaj A Fonwel
    Imtiyaj A Fonwel
    हिसुआ, नवादा, बिहार•
    22 hrs ago
  • बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधियों ने सम्राट चौधरी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को 'सैटेलाइट टाउनशिप' और 'ग्रीन फील्ड' के नाम पर बंद करके तथा अब अंचल की भूमिका शामिल करके इसे और अधिक जटिल बना रही है, जिससे यह 'घूस का घोंसला' बन जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार ने पहले राज्य के दर्जनों जिलों के सैकड़ों गांवों और नगर निकाय के वार्डों में जमीन रजिस्ट्री को एक साल के लिए रोक दिया था, और अब संपूर्ण बिहार में रजिस्ट्री विभाग के साथ-साथ अंचल को भी जमीन रजिस्ट्रीकरण पद्धति में शामिल करके बिहारवासियों को बड़े संकट में डाल दिया है। नेताओं के अनुसार, 'ग्रीन लैंड सैटेलाइट टाउनशिप' के अंतर्गत आने वाले गांवों और वार्डों के गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार पहले से ही अपनी बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई या गंभीर बीमारियों जैसे आवश्यक कार्यों के लिए जमीन बेचने में असमर्थ होने के कारण परेशान थे। अब रजिस्ट्री ऑफिस के साथ-साथ अंचल अधिकारी और उनके कार्यालय को जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में शामिल करने और उनसे रिपोर्ट लेने की पद्धति से लोगों को और अधिक संकट, देरी और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम किसान-मजदूरों और आमजनों को परेशान करने वाला है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जमीन रजिस्ट्री, जिसे 'विक्रय मनोबंध पत्र' कहा जाता है, वह जमीन का 'हकियत' (वास्तविक मालिकाना हक) नहीं है, न ही अंचल या म्युनिसिपल रसीदें हकियत दर्शाती हैं। ये सभी केवल रजिस्ट्रेशन और टैक्स संबंधी कागज़ात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन कागज़ातों का 'हौआ' बनाकर किसान-मजदूरों और आमजनों को तंग और तबाह करना चाहती है। नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को और जटिल बनाने के बजाय उसे आसान किया जाए, ताकि आम जनता को जमीन रजिस्ट्री के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें और पहले की तरह आसानी से कार्य संपन्न हो सकें। कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार जल्द से जल्द जमीन खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर लगी रोक को हटाती नहीं है और अंचल की भूमिका समाप्त नहीं करती है, तो पार्टी बाध्य होकर जिला रजिस्ट्रार (जिलाधिकारी कार्यालय) और उप-रजिस्ट्रार (रजिस्ट्री ऑफिस कार्यालय) का घेराव करेगी। यह बात बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि प्रो विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, विपिन बिहारी सिन्हा, इंटक जिला महासचिव टिंकू गिरी, विशाल कुमार, मोहम्मद शामिम आलम, और मुन्ना मांझी सहित अन्य नेताओं ने कही।
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    बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधियों ने सम्राट चौधरी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को 'सैटेलाइट टाउनशिप' और 'ग्रीन फील्ड' के नाम पर बंद करके तथा अब अंचल की भूमिका शामिल करके इसे और अधिक जटिल बना रही है, जिससे यह 'घूस का घोंसला' बन जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार ने पहले राज्य के दर्जनों जिलों के सैकड़ों गांवों और नगर निकाय के वार्डों में जमीन रजिस्ट्री को एक साल के लिए रोक दिया था, और अब संपूर्ण बिहार में रजिस्ट्री विभाग के साथ-साथ अंचल को भी जमीन रजिस्ट्रीकरण पद्धति में शामिल करके बिहारवासियों को बड़े संकट में डाल दिया है।

नेताओं के अनुसार, 'ग्रीन लैंड सैटेलाइट टाउनशिप' के अंतर्गत आने वाले गांवों और वार्डों के गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार पहले से ही अपनी बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई या गंभीर बीमारियों जैसे आवश्यक कार्यों के लिए जमीन बेचने में असमर्थ होने के कारण परेशान थे। अब रजिस्ट्री ऑफिस के साथ-साथ अंचल अधिकारी और उनके कार्यालय को जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में शामिल करने और उनसे रिपोर्ट लेने की पद्धति से लोगों को और अधिक संकट, देरी और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम किसान-मजदूरों और आमजनों को परेशान करने वाला है।

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जमीन रजिस्ट्री, जिसे 'विक्रय मनोबंध पत्र' कहा जाता है, वह जमीन का 'हकियत' (वास्तविक मालिकाना हक) नहीं है, न ही अंचल या म्युनिसिपल रसीदें हकियत दर्शाती हैं। ये सभी केवल रजिस्ट्रेशन और टैक्स संबंधी कागज़ात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन कागज़ातों का 'हौआ' बनाकर किसान-मजदूरों और आमजनों को तंग और तबाह करना चाहती है।

नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को और जटिल बनाने के बजाय उसे आसान किया जाए, ताकि आम जनता को जमीन रजिस्ट्री के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें और पहले की तरह आसानी से कार्य संपन्न हो सकें। कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार जल्द से जल्द जमीन खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर लगी रोक को हटाती नहीं है और अंचल की भूमिका समाप्त नहीं करती है, तो पार्टी बाध्य होकर जिला रजिस्ट्रार (जिलाधिकारी कार्यालय) और उप-रजिस्ट्रार (रजिस्ट्री ऑफिस कार्यालय) का घेराव करेगी। यह बात बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि प्रो विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, विपिन बिहारी सिन्हा, इंटक जिला महासचिव टिंकू गिरी, विशाल कुमार, मोहम्मद शामिम आलम, और मुन्ना मांझी सहित अन्य नेताओं ने कही।
    user_हेमन्त कुमार  सिंह
    हेमन्त कुमार सिंह
    जनहित मे समर्पित Wazirganj•
    2 hrs ago
  • ककोलत जलप्रपात पर लगने वाले शुल्क को कम करने की माँग को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मुलाकात की है।
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    ककोलत जलप्रपात पर लगने वाले शुल्क को कम करने की माँग को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मुलाकात की है।
    user_Aaj Ka Naya Bharat News
    Aaj Ka Naya Bharat News
    Newspaper publisher नवादा, नवादा, बिहार•
    6 hrs ago
  • नवादा में एक परिवार पुलिस को शराब कारोबारी के बारे में सूचना देने के बाद शराब माफिया के आतंक का शिकार हो गया है। बताया जा रहा है कि माफिया परिवार की बेटी के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और पूरे परिवार को लगातार धमकियाँ दे रहा है। इस उत्पीड़न और भय के कारण, परिवार शराब माफिया की कार्रवाई के डर से पलायन करने के लिए मजबूर है। नवादा में शराब माफिया का यह कहर जारी है और पीड़ित परिवार नवादा पुलिस से मदद की गुहार लगा रहा है।
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    नवादा में एक परिवार पुलिस को शराब कारोबारी के बारे में सूचना देने के बाद शराब माफिया के आतंक का शिकार हो गया है। बताया जा रहा है कि माफिया परिवार की बेटी के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और पूरे परिवार को लगातार धमकियाँ दे रहा है। इस उत्पीड़न और भय के कारण, परिवार शराब माफिया की कार्रवाई के डर से पलायन करने के लिए मजबूर है। नवादा में शराब माफिया का यह कहर जारी है और पीड़ित परिवार नवादा पुलिस से मदद की गुहार लगा रहा है।
    user_Mohammad Sohrab Ansari
    Mohammad Sohrab Ansari
    Voice of people Nawada, Bihar•
    17 hrs ago
  • एक सरकारी स्कूल की मैडम पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया गया है कि उनके पति ने अपनी जमीन बेचकर उन्हें शिक्षक बनाया था, लेकिन जैसे ही मैडम को सरकारी नौकरी मिली, उन्होंने अपने पति को छोड़कर एक बॉयफ्रेंड के साथ घूमना शुरू कर दिया।
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    एक सरकारी स्कूल की मैडम पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया गया है कि उनके पति ने अपनी जमीन बेचकर उन्हें शिक्षक बनाया था, लेकिन जैसे ही मैडम को सरकारी नौकरी मिली, उन्होंने अपने पति को छोड़कर एक बॉयफ्रेंड के साथ घूमना शुरू कर दिया।
    user_News Of Nawada
    News Of Nawada
    Local News Reporter सिरदला, नवादा, बिहार•
    19 hrs ago
  • बिहार की सियासत में 'पावर सेंटर' माने जाने वाले पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर लालू-राबड़ी परिवार और सम्राट चौधरी सरकार के बीच सीधी जंग छिड़ गई है। भवन निर्माण विभाग द्वारा तीसरी बार बंगला खाली करने का अल्टीमेटम मिलने के बाद, दिल्ली से पटना लौटीं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के तेवर बेहद उग्र नजर आए। इस नोटिस के कारण राज्य की राजनीति गरमा गई है, जिससे एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
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    बिहार की सियासत में 'पावर सेंटर' माने जाने वाले पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर लालू-राबड़ी परिवार और सम्राट चौधरी सरकार के बीच सीधी जंग छिड़ गई है। भवन निर्माण विभाग द्वारा तीसरी बार बंगला खाली करने का अल्टीमेटम मिलने के बाद, दिल्ली से पटना लौटीं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के तेवर बेहद उग्र नजर आए। इस नोटिस के कारण राज्य की राजनीति गरमा गई है, जिससे एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
    user_Journalist Rahul
    Journalist Rahul
    Local News Reporter नरदीगंज, नवादा, बिहार•
    2 hrs ago
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