पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने उचाना हलके के विभिन्न गांवों में पहुंचकर पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आगाह किया कि आने वाले 12 हफ्ते देश के लिए बेहद गंभीर (क्रिटिकल) हैं, और देश की अर्थव्यवस्था सबसे पहले कमजोर हुई है। चौटाला ने कहा कि महंगाई अब केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक हालात गंभीर स्थिति में पहुँच चुके हैं और सरकार को इस पर गहन चिंतन करने की आवश्यकता है। उन्होंने देश में यूरिया की किल्लत शुरू होने, डीएपी की अनुपलब्धता, खनन में प्रयोग होने वाले सल्फ्यूरिक एसिड की कमी, सीएनजी के दाम में ₹4 और डीजल-पेट्रोल में ₹8 की वृद्धि का उल्लेख किया। चौटाला ने बताया कि डॉलर ₹97 तक पहुँच चुका है, जो यह दर्शाता है कि जो लोग 'विश्व गुरु' होने का दावा कर रहे थे, उनके सामने सबसे पहले हमारी अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ी। प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचाने की अपील पर पूर्व डिप्टी सीएम ने पलटवार करते हुए कहा कि पीएम के काफिले से दो-चार गाड़ियां कम करने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत हर 10 मीटर पर तीन जवान खड़े होते हैं; यदि पीएम को 2 किलोमीटर जाना हो तो 600 जवान खड़े होंगे, और इन जवानों को लाने-ले जाने के लिए बसों की आवश्यकता पड़ेगी, जिनमें ईंधन का प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बिजली नहीं दे पाएगी, जिससे किसानों को धान की फसल में पानी लगाने के लिए ट्यूबवेल और खेतों में काम करने के लिए ट्रैक्टर में डीजल का उपयोग करना पड़ेगा। चौटाला ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत ने मिडिल ईस्ट की व्यवस्था पर अधिक ध्यान दिया, और जब वहां की व्यवस्था बिगड़ी तो हमने अपने पुराने साथी खो दिए। उन्होंने रूस से तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक लेने का जिक्र किया, और कहा कि नए साथी भी बुरे हालात में हमें छोड़कर चले गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'कॉकरोज जनता पार्टी' के आंदोलन पर उन्होंने कहा कि यह एक 'मूवमेंट' है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह देश के असली आर्थिक हालातों से लड़ने में सक्षम होगा। उन्होंने भाजपा के 'बिना खर्ची, बिना पर्ची' के नौकरी देने के दावों पर सवाल उठाते हुए नीट पेपर और सीबीएसई के परिणामों का हवाला दिया, और शिक्षा मंत्री के स्पष्टीकरण की बात कहकर सरकार की विफलता पर ध्यान दिलाया, जिससे बच्चों का हौसला टूटा है। पूर्व डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि अगले 12 हफ्तों में देश की अर्थव्यवस्था किस हालत में होगी, यह देखने वाली बात है; क्या डॉलर ₹100 पार करेगा, क्या पेट्रोल और डीजल ₹125 पार जाएंगे, और क्या किसानों को यूरिया व डीएपी समय पर मिल पाएगा।
पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने उचाना हलके के विभिन्न गांवों में पहुंचकर पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आगाह किया कि आने वाले 12 हफ्ते देश के लिए बेहद गंभीर (क्रिटिकल) हैं, और देश की अर्थव्यवस्था सबसे पहले कमजोर हुई है। चौटाला ने कहा कि महंगाई अब केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक हालात गंभीर स्थिति में पहुँच चुके हैं और सरकार को इस पर गहन चिंतन करने की आवश्यकता है। उन्होंने देश में यूरिया की किल्लत शुरू होने, डीएपी की अनुपलब्धता, खनन में प्रयोग होने वाले सल्फ्यूरिक एसिड की कमी, सीएनजी के दाम में ₹4 और डीजल-पेट्रोल में ₹8 की वृद्धि का उल्लेख किया। चौटाला ने बताया कि डॉलर ₹97 तक पहुँच चुका है, जो यह दर्शाता है कि जो लोग 'विश्व गुरु' होने का दावा कर रहे थे, उनके सामने सबसे पहले हमारी अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ी। प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचाने की अपील पर पूर्व डिप्टी सीएम ने पलटवार करते हुए कहा कि पीएम के काफिले से दो-चार गाड़ियां कम करने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत हर 10 मीटर पर तीन जवान खड़े होते हैं; यदि पीएम को 2 किलोमीटर जाना हो तो 600 जवान खड़े होंगे, और इन जवानों को लाने-ले जाने के लिए बसों की आवश्यकता पड़ेगी, जिनमें ईंधन का प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बिजली नहीं दे पाएगी, जिससे किसानों को धान की फसल में पानी लगाने के लिए ट्यूबवेल और खेतों में काम करने के लिए ट्रैक्टर में डीजल का उपयोग करना पड़ेगा। चौटाला ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत ने मिडिल ईस्ट की व्यवस्था पर अधिक ध्यान दिया, और जब वहां की व्यवस्था बिगड़ी तो हमने अपने पुराने साथी खो दिए। उन्होंने रूस से तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक लेने का जिक्र किया, और कहा कि नए साथी भी बुरे हालात में हमें छोड़कर चले गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'कॉकरोज जनता पार्टी' के आंदोलन पर उन्होंने कहा कि यह एक 'मूवमेंट' है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह देश के असली आर्थिक हालातों से लड़ने में सक्षम होगा। उन्होंने भाजपा के 'बिना खर्ची, बिना पर्ची' के नौकरी देने के दावों पर सवाल उठाते हुए नीट पेपर और सीबीएसई के परिणामों का हवाला दिया, और शिक्षा मंत्री के स्पष्टीकरण की बात कहकर सरकार की विफलता पर ध्यान दिलाया, जिससे बच्चों का हौसला टूटा है। पूर्व डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि अगले 12 हफ्तों में देश की अर्थव्यवस्था किस हालत में होगी, यह देखने वाली बात है; क्या डॉलर ₹100 पार करेगा, क्या पेट्रोल और डीजल ₹125 पार जाएंगे, और क्या किसानों को यूरिया व डीएपी समय पर मिल पाएगा।
- JAGDISH SAO - स्थानीय रिपोर्टरसरायकेला, सरायकेला खरसावां, झारखंड😡7 hrs ago
- पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने उचाना हलके के विभिन्न गांवों में पहुंचकर पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आगाह किया कि आने वाले 12 हफ्ते देश के लिए बेहद गंभीर (क्रिटिकल) हैं, और देश की अर्थव्यवस्था सबसे पहले कमजोर हुई है। चौटाला ने कहा कि महंगाई अब केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक हालात गंभीर स्थिति में पहुँच चुके हैं और सरकार को इस पर गहन चिंतन करने की आवश्यकता है। उन्होंने देश में यूरिया की किल्लत शुरू होने, डीएपी की अनुपलब्धता, खनन में प्रयोग होने वाले सल्फ्यूरिक एसिड की कमी, सीएनजी के दाम में ₹4 और डीजल-पेट्रोल में ₹8 की वृद्धि का उल्लेख किया। चौटाला ने बताया कि डॉलर ₹97 तक पहुँच चुका है, जो यह दर्शाता है कि जो लोग 'विश्व गुरु' होने का दावा कर रहे थे, उनके सामने सबसे पहले हमारी अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ी। प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचाने की अपील पर पूर्व डिप्टी सीएम ने पलटवार करते हुए कहा कि पीएम के काफिले से दो-चार गाड़ियां कम करने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत हर 10 मीटर पर तीन जवान खड़े होते हैं; यदि पीएम को 2 किलोमीटर जाना हो तो 600 जवान खड़े होंगे, और इन जवानों को लाने-ले जाने के लिए बसों की आवश्यकता पड़ेगी, जिनमें ईंधन का प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बिजली नहीं दे पाएगी, जिससे किसानों को धान की फसल में पानी लगाने के लिए ट्यूबवेल और खेतों में काम करने के लिए ट्रैक्टर में डीजल का उपयोग करना पड़ेगा। चौटाला ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत ने मिडिल ईस्ट की व्यवस्था पर अधिक ध्यान दिया, और जब वहां की व्यवस्था बिगड़ी तो हमने अपने पुराने साथी खो दिए। उन्होंने रूस से तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक लेने का जिक्र किया, और कहा कि नए साथी भी बुरे हालात में हमें छोड़कर चले गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'कॉकरोज जनता पार्टी' के आंदोलन पर उन्होंने कहा कि यह एक 'मूवमेंट' है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह देश के असली आर्थिक हालातों से लड़ने में सक्षम होगा। उन्होंने भाजपा के 'बिना खर्ची, बिना पर्ची' के नौकरी देने के दावों पर सवाल उठाते हुए नीट पेपर और सीबीएसई के परिणामों का हवाला दिया, और शिक्षा मंत्री के स्पष्टीकरण की बात कहकर सरकार की विफलता पर ध्यान दिलाया, जिससे बच्चों का हौसला टूटा है। पूर्व डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि अगले 12 हफ्तों में देश की अर्थव्यवस्था किस हालत में होगी, यह देखने वाली बात है; क्या डॉलर ₹100 पार करेगा, क्या पेट्रोल और डीजल ₹125 पार जाएंगे, और क्या किसानों को यूरिया व डीएपी समय पर मिल पाएगा।1
- आज का राशिफल जारी कर दिया गया है, जिसमें सभी बारह राशियों – मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन – के बारे में जानकारी दी गई है। शैलेंद्र पांडे के साथ आप यह जान सकते हैं कि आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा।1
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- एथलीट पूजा बोस्ती ने चीन में आयोजित जूनियर अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1.93 मीटर की जबरदस्त हाई जंप लगाकर 14 साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है, जिससे वह नई हाई-जंप क्वीन बन गई हैं। अब अंडर-20 आयु वर्ग में सबसे ऊंचा जंप लगाने का रिकॉर्ड पूजा के नाम दर्ज हो गया है। फतेहाबाद जिले के गांव बोस्ती की रहने वाली पूजा इस समय बेंगलुरु में एक कैंप के दौरान ट्रेनिंग ले रही हैं। पूजा के कोच बलवान के अनुसार, उन्होंने कर्नाटक की एथलीट साहना कुमारी द्वारा साल 2012 में सीनियर चैंपियनशिप में लगाए गए 1.92 मीटर के हाई जंप के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है, जबकि वह खुद अंडर-20 वर्ग में भाग ले रही थीं। हालांकि, पूजा साल 1999 में बने 1.95 मीटर के चैंपियनशिप रिकॉर्ड से मामूली अंतर से चूक गईं। पूजा ने मात्र 10 साल की उम्र में गांव पारता में कोच बलवान पारता के पास एथलेटिक्स ट्रेनिंग शुरू की थी। वह इससे पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं और अब एक रिकॉर्डधारी खिलाड़ी बन गई हैं।1
- पानीपत जिले के बापौली में हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान, वेल बीइंग संगठन ने पत्रकारों के लिए नई योजनाएं और एक एआई (AI) कार्यक्रम की शुरुआत की। हरियाणा वेल बीइंग संगठन के उपाध्यक्ष विनोद लाहोट ने जानकारी दी कि 29 मई को विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने पत्रकारों के लिए कैशलेस पॉलिसी और एआई कार्यक्रम का उद्घाटन किया था। वेल बीइंग संगठन द्वारा पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक बीमा पॉलिसी भी जारी की गई है। इस पॉलिसी के तहत पत्रकारों से कोई धनराशि नहीं ली जाती और उन्हें 10 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है, जिससे कई पत्रकारों को लाभ प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने अपने संबोधन में पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उनके जीवन के संघर्ष काल में पत्रकारिता ने उनका बहुत साथ दिया है, और यह देश का चौथा स्तंभ है जो देश की हर प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। एक अन्य मुख्य अतिथि, एडवोकेट रतन सिंह रावल ने कहा कि जहाँ वकील और अदालत व्यक्ति को न्याय दिलाने की प्रक्रिया करते हैं, वहीं पत्रकार सबकी बात सुनकर न्याय दिलाने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 30 मई, 1826 को हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी, जिसने देश की आज़ादी में अहम भूमिका निभाई। उनके अनुसार, सच्चा पत्रकार वही है जो समाज को सच्चाई का आइना दिखाए और न्याय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी राजू रावल ने की। इस अवसर पर मिडिया वैल बींइग संगठन के जिला प्रधान मदन बरेजा, इसराना मीडिया क्लब के प्रधान चंद्र सिंह जागलान, बलराज रावल, दैनिक जागरण के अजय जैन सहित इसराना, समालखा, पानीपत और बापौली के अनेक पत्रकार उपस्थित थे। यह सम्मेलन वेल बीइंग संगठन के अंतर्गत आयोजित किया गया था।2
- भिवानी में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की जिला कमेटी ने शहर में एक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पेट्रोल, डीजल और गैस के बढ़ते दामों के साथ-साथ किसानों के लिए खरीफ सीजन में उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था न होने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था।1
- भोले बाबा के भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि जब नंदी जी महाराज घर पर आते हैं, तो यह क्या संदेश लेकर आता है।1
- भिवानी में कामरेड ओमप्रकाश ने महंगाई के मुद्दे को लेकर जिला उपायुक्त (डीसी) को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन महंगाई के विरोध में दिया गया।1