Shuru
Apke Nagar Ki App…
भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद दिन, 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश भर में आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा की थी। इस दिन को एक 'काला दिन' बताया गया है, जब इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजेंसी थोपी थी। आपातकाल लागू करने के पीछे देश की एकता और अखंडता बचाने का तर्क दिया गया था। इस अवधि के दौरान, विपक्षी नेताओं को बड़े पैमाने पर जेल में ठूंसा गया और प्रेस पर सख्त सेंसरशिप लगा दी गई। हालांकि, भारतीय लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति 1977 के लोकसभा चुनावों में स्पष्ट रूप से सामने आई, जब देश की जनता ने तानाशाही को सिरे से नकार दिया। मतदाताओं ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, जिससे यह घटना भारतीय इतिहास में लोकतंत्र की ताकत का सबसे बड़ा सबक मानी जाती है।
Bitu Gupta
भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद दिन, 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश भर में आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा की थी। इस दिन को एक 'काला दिन' बताया गया है, जब इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजेंसी थोपी थी। आपातकाल लागू करने के पीछे देश की एकता और अखंडता बचाने का तर्क दिया गया था। इस अवधि के दौरान, विपक्षी नेताओं को बड़े पैमाने पर जेल में ठूंसा गया और प्रेस पर सख्त सेंसरशिप लगा दी गई। हालांकि, भारतीय लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति 1977 के लोकसभा चुनावों में स्पष्ट रूप से सामने आई, जब देश की जनता ने तानाशाही को सिरे से नकार दिया। मतदाताओं ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, जिससे यह घटना भारतीय इतिहास में लोकतंत्र की ताकत का सबसे बड़ा सबक मानी जाती है।
More news from बिहार and nearby areas
- पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कथित चोरी की घटना का जिक्र करते हुए भगवान राम पर ही सवाल उठा दिए हैं। मौर्य ने पूछा है कि अगर मंदिर से संपत्ति की चोरी हुई है, तो भगवान राम चोरों को सजा क्यों नहीं दे सके? उनके इस बयान के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। कई हिंदू और धार्मिक संगठनों ने मौर्य के इस बयान पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए उनका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।1
- भीषण गर्मी और निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर, आरा के श्री खाटू श्याम ट्रस्ट ने आरा रेलवे स्टेशन, भोजपुर में यात्रियों और राहगीरों के लिए शरबत, मुरब्बा और ठंडा पानी वितरित कर मानवता की एक मिसाल पेश की। इस सेवा कार्य का उद्घाटन आरपीएफ थाना अध्यक्ष दीपक कुमार और जीआरपी थाना अध्यक्ष रणधीर कुमार ने किया। अधिकारियों ने ट्रस्ट के इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों ने पूरे दिन इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, यह दर्शाते हुए कि "यात्रियों की सेवा ही सच्ची भक्ति" है।1
- पूरे भोजपुर जिले में 'नशा मुक्त सप्ताह' का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जा रहा है, जिसके तहत विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन हो रहा है। इसी क्रम में, आरा स्थित कृषि कार्यालय में सभी कर्मचारियों ने एकजुट होकर नशा न करने की शपथ ली। इस अवसर पर, जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नीरज कुमार ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि कृषि विभाग का कोई भी कर्मचारी नशे का सेवन नहीं करेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि यह पहल 'नशा मुक्त भारत' के निर्माण के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।1
- भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण में न्यायिक जांच की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। बिहार सरकार द्वारा नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा गुरुवार को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव पहुंचे, जहां उन्होंने 17 जून को हुए इस घटनाक्रम से जुड़े घटनास्थल और विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। इस दौरान शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी सत्य प्रकाश, भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया और पुलिस अधीक्षक राज सहित कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों की उपस्थिति में न्यायिक जांच को आगे बढ़ाया गया और घटना से संबंधित तथ्यों को संकलित किया गया। गौरतलब है कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण को लेकर लगातार सवाल उठते रहे थे, जिसके बाद बिहार सरकार ने इस मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया था। सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बिलौटी गांव पहुंचने के साथ ही इस बहुचर्चित मामले की जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, बिलौटी गांव और पूरे भोजपुर जिले की निगाहें इस जांच पर टिकी हुई हैं, यह देखने के लिए कि जांच रिपोर्ट में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और इस एनकाउंटर मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।1
- वेनेज़ुएला में एक भयानक भूकंप ने भारी तबाही मचाई है, जिसे पिछले 100 सालों का सबसे शक्तिशाली और खतरनाक भूकंप बताया गया है। इस विनाशकारी घटना ने, जो मात्र 39 सेकंड तक चली, 10,000 जिंदगियों को खत्म कर दिया। भूकंप के कारण पूरा वेनेज़ुएला तबाही के मलबे में तब्दील हो गया। हर तरफ चीख-पुकार मची थी, परिवार बिछड़ रहे थे और मौत का मंजर छाया हुआ था। इस भयावह त्रासदी के बाद यह सवाल उठता है कि क्या दुनिया इस घटना से कोई सबक लेगी।1
- सिवान जिले के हसनपुरा प्रखंड अंतर्गत फलपुरा में प्रतिष्ठात्मक शतचण्डी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। 18 जून 2026 को शुरू हुआ यह नौ दिवसीय महायज्ञ 26 जून 2026 को पूर्णाहुति और एक विशाल भंडारे के साथ संपन्न होगा। प्रतिदिन यज्ञाचार्य के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच गणपति पूजन, वेदि पूजन, स्वाभपुजन और पाठ का क्रम चल रहा है। इस दिव्य आयोजन में महामंडलेश्वर देवेंद्र दास जी महाराज विशेष रूप से सम्मिलित हुए हैं। अपने आशीर्वचन में महामंडलेश्वर ने बताया कि शतचण्डी महायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को एकता, शांति और सद्भाव का महत्वपूर्ण संदेश देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माँ भगवती की कृपा से क्षेत्र में सुख-समृद्धि के साथ-साथ रोग-मुक्ति का वातावरण भी बनेगा, क्योंकि मानव कल्याण धर्म के मार्ग पर चलकर ही संभव है। यज्ञ की यह विशेषता भी रही कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने अत्यंत उत्साह के साथ यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। श्रद्धालु वैदिक विधि-विधान से हो रहे पूजन-अर्चन और रात्रि के प्रवचन व राम लीला में देर रात तक लीन रहे।1
- भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद दिन, 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश भर में आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा की थी। इस दिन को एक 'काला दिन' बताया गया है, जब इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजेंसी थोपी थी। आपातकाल लागू करने के पीछे देश की एकता और अखंडता बचाने का तर्क दिया गया था। इस अवधि के दौरान, विपक्षी नेताओं को बड़े पैमाने पर जेल में ठूंसा गया और प्रेस पर सख्त सेंसरशिप लगा दी गई। हालांकि, भारतीय लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति 1977 के लोकसभा चुनावों में स्पष्ट रूप से सामने आई, जब देश की जनता ने तानाशाही को सिरे से नकार दिया। मतदाताओं ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, जिससे यह घटना भारतीय इतिहास में लोकतंत्र की ताकत का सबसे बड़ा सबक मानी जाती है।1
- सारण जिले के लहलादपुर प्रखंड कार्यालय के प्रखंड विकास पदाधिकारी निलेश कुमार ने 26 जून को मनाए जाने वाले मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्वक ढंग से मनाने की अपील की है।1