अली विस्तार में फिर चला बुलडोजर, मकान टूटने से लोगों में आक्रोश दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली विस्तार में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। अली विस्तार में फिर चला बुलडोजर, मकान टूटने से लोगों में आक्रोश दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली विस्तार में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके पास जमीन से जुड़े खसरा नंबर समेत कई दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद उनके मकानों पर कार्रवाई की गई और मकानों को तोड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि ये मकान झुग्गी-झोपड़ी नहीं थे, बल्कि कई मकान तीन से चार मंजिल तक बने हुए थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी इन मकानों को बनाने में लगा दी थी। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जिस जमीन पर उनके मकान बने थे, उस जमीन को लेकर उनका मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके बावजूद कार्रवाई किए जाने से लोगों में रोष है। लोग प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि जब उनके पास जमीन से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और मामला अदालत में चल रहा है, तो कार्रवाई किस आधार पर की गई। फिलहाल स्थानीय लोग अपने मकानों के टूटने के बाद प्रशासन से कार्रवाई का आधार स्पष्ट करने और मामले में उचित समाधान की मांग कर रहे हैं।
अली विस्तार में फिर चला बुलडोजर, मकान टूटने से लोगों में आक्रोश दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली विस्तार में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। अली विस्तार में फिर चला बुलडोजर, मकान टूटने से लोगों में आक्रोश दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली विस्तार में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके पास जमीन से जुड़े खसरा नंबर समेत कई दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद उनके मकानों पर कार्रवाई की गई और मकानों को तोड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि ये मकान झुग्गी-झोपड़ी नहीं थे, बल्कि कई मकान तीन से चार मंजिल तक बने हुए थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी इन मकानों को बनाने में लगा दी थी। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जिस जमीन पर उनके मकान बने थे, उस जमीन को लेकर उनका मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके बावजूद कार्रवाई किए जाने से लोगों में रोष है। लोग प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि जब उनके पास जमीन से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और मामला अदालत में चल रहा है, तो कार्रवाई किस आधार पर की गई। फिलहाल स्थानीय लोग अपने मकानों के टूटने के बाद प्रशासन से कार्रवाई का आधार स्पष्ट करने और मामले में उचित समाधान की मांग कर रहे हैं।
- सरिता विहार, अली गांव वार्ड नंबर 186 ओखला विधानसभा, दिल्ली दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली गांव में मकानों पर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में डर और नाराजगी का माहौल है। लोगों का आरोप है कि जिन घरों में वे पिछले 40 से 50 वर्षों से रह रहे हैं, अब उन्हीं मकानों को खाली करने के नोटिस दिए जा रहे हैं और जल्द कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चार से पांच पीढ़ियां इसी जगह रहते हुए गुजर गईं। इसी जमीन पर परिवार बसे, बच्चे बड़े हुए, शादियां हुईं और लोगों ने अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाकर अपने आशियाने तैयार किए। लेकिन अब कार्रवाई की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर उनके मकान हटाए जाते हैं तो उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं बचेगा। लोगों का एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर यह जमीन उस समय उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में आती थी और उस दौरान यहां रहने वाले लोगों से दिल्ली के नाम पर वोट लिया जाता था, तो अब इतने वर्षों बाद उनके मकानों और जमीन को लेकर सवाल क्यों खड़े किए जा रहे हैं? यह स्थानीय लोगों का सवाल है, जिसका जवाब संबंधित प्रशासन और अधिकारियों से अपेक्षित है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें मकान खाली करने के लिए बेहद कम समय दिया गया है। उनका कहना है कि प्रशासन को पहले उनके दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए और प्रभावित परिवारों की बात सुननी चाहिए। महिलाओं में भी अपने घर को लेकर गहरी चिंता दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि उन्होंने घर बनाने में अपनी पूरी जिंदगी की पूंजी लगा दी। अगर मकान टूटता है तो परिवार सड़क पर आने की स्थिति में पहुंच सकता है। कुछ महिलाएं भावुक होकर अपने घर बचाने की गुहार लगाती नजर आईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से अपील है कि लोगों की बात सुनी जाए और किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों की स्थिति, दस्तावेजों और पुनर्वास की संभावनाओं पर स्पष्ट जानकारी दी जाए। स्थानीय लोगों का कहना है— “हमारी चार-पांच पीढ़ियां यहां रह चुकी हैं। हमारे बच्चे यहीं बड़े हुए हैं। हमने अपनी जिंदगी की पूरी कमाई इन घरों में लगा दी है। अब अगर घर टूट गया तो हम कहां जाएंगे?” फिलहाल अली गांव में लोगों के बीच अपने आशियाने को लेकर डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोग प्रशासन से न्याय, सुनवाई और उचित समाधान की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन स्थानीय लोगों की शिकायतों और दस्तावेजों की जांच के बाद क्या कदम उठाता है।1
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- दिल्ली पुलिस की वेस्टर्न रेंज में आज महिला जनप्रतिनिधियों के साथ ‘संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया ज्वाइंट सीपी वेस्टर्न रेंज सुमन गोयल और डीसीपी वेस्ट हर्षवर्धर वी. स्वामी ने महिला प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनके इलाकों में अपराध और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं सुनीं। पुलिस अधिकारियों ने हर थाने में उपलब्ध पिंक बूथ और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। आपात स्थिति में 112, महिला सहायता के लिए 181, बच्चों की सहायता के लिए 1098 और साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 पर संपर्क करने की अपील की गई।4
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- उसे देश की गरीबी कभी खत्म नहीं हो सकती जहां पर आरक्षण जाति को देखकर दिया जाता है गरीबी के आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए और सबका बराबर का अधिकार है क्योंकि गरीब हर जाति हर धर्म हर मजहब के लोगों में है.......1
- अली विस्तार में फिर चला बुलडोजर, मकान टूटने से लोगों में आक्रोश दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली विस्तार में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। अली विस्तार में फिर चला बुलडोजर, मकान टूटने से लोगों में आक्रोश दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली विस्तार में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके पास जमीन से जुड़े खसरा नंबर समेत कई दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद उनके मकानों पर कार्रवाई की गई और मकानों को तोड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि ये मकान झुग्गी-झोपड़ी नहीं थे, बल्कि कई मकान तीन से चार मंजिल तक बने हुए थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी इन मकानों को बनाने में लगा दी थी। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जिस जमीन पर उनके मकान बने थे, उस जमीन को लेकर उनका मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके बावजूद कार्रवाई किए जाने से लोगों में रोष है। लोग प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि जब उनके पास जमीन से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और मामला अदालत में चल रहा है, तो कार्रवाई किस आधार पर की गई। फिलहाल स्थानीय लोग अपने मकानों के टूटने के बाद प्रशासन से कार्रवाई का आधार स्पष्ट करने और मामले में उचित समाधान की मांग कर रहे हैं।1