हम सब जानते हैं कि हमारे समाज में मृत्यु भोज एक पुरानी परंपरा है। इस परंपरा का मूल अर्थ था— गरीब को खाना, दान-पुण्य और दिवंगत आत्मा की शांति। लेकिन आज यह परंपरा बोझ बनती जा रही है। मरे हुए का घर रो रहा होता है, और समाज कहता है— ‘कितना बड़ा भोज किया? कितना खर्च किया?’ यह कैसा नियम है? जहाँ दुख के समय सहारा देना चाहिए, वहाँ बोझ डाल दिया जाता है।” --- ✅ “दिखावा नहीं, दान—यही सच्ची श्रद्धांजलि है” “मेरे भाइयों, आत्मा को शांति मिठाई और पूड़ी की प्लेटों से नहीं मिलती, शांति मिलती है सच्चे दान से— गरीब को अन्न देकर, किसी भूखे को भोजन देकर, किसी जरूरतमंद की मदद करके।” --- ✅ “गरीब परिवार पर यह परंपरा अत्याचार बन गई है” “कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास रोज़ का खर्च मुश्किल से चलता है। जब उनके घर कोई चला जाता है, तो वे शोक में होते हुए भी कर्ज लेकर भोज करते हैं, सिर्फ समाज के डर से। क्या यही हमारा समाज है? क्या मृतक की आत्मा को बोझ देखकर शांति मिलेगी?” --- ✅ “आज से हम परिवर्तन की शुरुआत करेंगे” “आज मैं आप सबके सामने एक निवेदन रखता हूँ— दुखी परिवार पर खाने का, दिखावे का, भीड़ का बोझ मत डालिए। जो भी श्रद्धांजलि हो, सादगी से हो। भोज की जगह दो-चार गरीबों को भोजन करा दीजिए। थोड़ा अनाज बाँट दीजिए। यही सच्ची मानवीयता है। यही असली हिंदुस्तानी संस्कार हैं।” --- ✅ “वचन लें कि किसी परिवार पर दबाव नहीं डालेंगे” “मैं आप सब से आग्रह करता हूँ— आज से कोई किसी से यह नहीं कहेगा कि ‘इतना छोटा भोज किया… कुछ किया ही नहीं।’ हम दुख में साथ खड़े होंगे, बोझ बढ़ाने में नहीं।” --- ✅ “मृत्यु भोज नहीं—श्रद्धा भोज” “हम इसे ‘मृत्यु भोज’ नहीं कहेंगे, हम इसे ‘श्रद्धा भोज’ कहेंगे— जहाँ भोज दिखावे का नहीं, बल्कि दान का हो।” --- ✅ अंतिम भावपूर्ण संदेश “भाइयों और बहनों, मरने वाला हमें खर्च नहीं, आशीर्वाद देकर जाए— और उसके परिवार के आंसुओं में हम बोझ नहीं, सहारा बनें। यही हमारी मानवता है, यही हमारी संस्कृति है, और यही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर संदेश है।”
हम सब जानते हैं कि हमारे समाज में मृत्यु भोज एक पुरानी परंपरा है। इस परंपरा का मूल अर्थ था— गरीब को खाना, दान-पुण्य और दिवंगत आत्मा की शांति। लेकिन आज यह परंपरा बोझ बनती जा रही है। मरे हुए का घर रो रहा होता है, और समाज कहता है— ‘कितना बड़ा भोज किया? कितना खर्च किया?’ यह कैसा नियम है? जहाँ दुख के समय सहारा देना चाहिए, वहाँ बोझ डाल दिया जाता है।” --- ✅ “दिखावा नहीं, दान—यही सच्ची श्रद्धांजलि है” “मेरे भाइयों, आत्मा को शांति मिठाई और पूड़ी की प्लेटों से नहीं मिलती, शांति मिलती है सच्चे दान से— गरीब को अन्न देकर, किसी भूखे को भोजन देकर, किसी जरूरतमंद की मदद करके।” --- ✅ “गरीब परिवार पर यह परंपरा अत्याचार बन गई है” “कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास रोज़ का खर्च मुश्किल से चलता है। जब उनके घर कोई चला जाता है, तो वे शोक में होते हुए भी कर्ज लेकर भोज करते हैं, सिर्फ समाज के डर से। क्या यही हमारा समाज है? क्या मृतक की आत्मा को बोझ देखकर शांति मिलेगी?” --- ✅ “आज से हम परिवर्तन की शुरुआत करेंगे” “आज मैं आप सबके सामने एक निवेदन रखता हूँ— दुखी परिवार पर खाने का, दिखावे का, भीड़ का बोझ मत डालिए। जो भी श्रद्धांजलि हो, सादगी से हो। भोज की जगह दो-चार गरीबों को भोजन करा दीजिए। थोड़ा अनाज बाँट दीजिए। यही सच्ची मानवीयता है। यही असली हिंदुस्तानी संस्कार हैं।” --- ✅ “वचन लें कि किसी परिवार पर दबाव नहीं डालेंगे” “मैं आप सब से आग्रह करता हूँ— आज से कोई किसी से यह नहीं कहेगा कि ‘इतना छोटा भोज किया… कुछ किया ही नहीं।’ हम दुख में साथ खड़े होंगे, बोझ बढ़ाने में नहीं।” --- ✅ “मृत्यु भोज नहीं—श्रद्धा भोज” “हम इसे ‘मृत्यु भोज’ नहीं कहेंगे, हम इसे ‘श्रद्धा भोज’ कहेंगे— जहाँ भोज दिखावे का नहीं, बल्कि दान का हो।” --- ✅ अंतिम भावपूर्ण संदेश “भाइयों और बहनों, मरने वाला हमें खर्च नहीं, आशीर्वाद देकर जाए— और उसके परिवार के आंसुओं में हम बोझ नहीं, सहारा बनें। यही हमारी मानवता है, यही हमारी संस्कृति है, और यही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर संदेश है।”
- User3426Zamania, Ghazipur💣on 8 November
- पटना / बख्तियारपुर फोरलेन पर मंगलवार को पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। पटना से खगड़िया जाते समय माधोपुर गांव के पास युवा समाजसेवी विद्या प्रकाश और आरएलएम जिला महासचिव पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में फूल-माला और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। मंत्री ने कहा कि बिहार में पंचायत चुनाव समय पर ही कराए जाएंगे और परिसीमन में कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही नया आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा। नालंदा की हालिया घटना पर दुख जताते हुए मंत्री ने कहा कि पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से हर संभव सहायता दी जाएगी।1
- मोगलपुरा पंचायत के विकास की स्थिति पर एक विशेष रिपोर्ट पर मुखिया से चर्चा1
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- बिहार के नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के मघड़ा गांव स्थित शीतला माता मंदिर में एक दर्दनाक हादसा हो गया। मंगलवार, 31 मार्च को भारी भीड़ के कारण मंदिर परिसर में भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 8 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। हादसे के बाद मौके पर पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और मृतकों के परिजनों के लिए 6 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है।1
- वैशाली जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। साइकिल सवार को बचाने के प्रयास में एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया, लेकिन राहत की बात ये रही कि सभी लोग सुरक्षित हैं।1
- बाइट..विजय कुमार चौधरी संसदीय कार्य मंत्री बिहार *नालंदा की घटना पर..8 लोगों की मौत की पुष्टि की मंत्री ने*1
- मैं मैं सरकार से मांग करता हूं कि मृतक के परिवार को मुआवजा मिले और जो घायल परिवार है उनको भी मुआवजा मिले और उचित इलाज हो यह जो घटना घटी है इसका जांच हो और जो दोषी है उस पर कार्रवाई किया जाए। यह घटना बहुत दुखद घटना है, मृतक को शांति मिले और परिवार जनों को दुख सहन करने की शक्ति दें अनिल पासवान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच1
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