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प्रदूषण से हो रही हर साल 90 लाख मौतें:  संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट: एयर पॉल्यूशन को हम जितना हल्के में ले रहे हैं, स्थिति इससे कहीं अधिक भयावह और गंभीर हो चली है।  संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की  रिपोर्ट जारी कर कहा है कि प्रदूषण (pollution) से हर साल लगभग 90 लाख मौत हो रही हैं। यह आंकड़ा मुख्य रूप से वायु, जल, मिट्टी , रासायनिक आदि प्रदूषण से लिया गया है। समय से पहले होने वाली मौतें दुनिया भर में सबसे बड़ा पर्यावरणीय स्वास्थ्य का जोखिम हो चला है। UNEP की आधिकारिक वेबसाइट में इस रिपोर्ट का विस्तृत उल्लेख है।  हाल ही में Global Environment Outlook-7 (GEO-7) रिपोर्ट में भी इस आंकड़े का उल्लेख है। जिसमे कहा गया कि प्रदूषण से सालाना 9 मिलियन मौतें होती हैं, और इनमें से 90 फीसद से अधिक कम-मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। UNEP के कई अन्य प्रकाशनों, जैसे "Pollution and Health" सेक्शन और "Beat Pollution" इंटरएक्टिव पेज में भी इसका उल्लेख किया है।  Lancet Planetary Health रिसर्च (2022) पर आधारित है। इस अध्ययन में 2019 में 9 मिलियन मौतों का अनुमान था।  केवल वायु प्रदूषण (air pollution) से मौतों का आंकड़ा थोड़ा अलग है। इधर State of Global Air 2024 में वायु प्रदूषण से 2021 में 8.1 मिलियन मौतें बताई गई हैं। UNEP ने मौतों के कारण में air,  water,  soil और chemicals को शामिल किया है।  इससे खतरनाक और क्या हो सकता है कि दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी हानिकारक प्रदूषण के साथ जीती है। प्रदूषण बढ़ने की वजह बढ़ती गर्मी भी है और जंगल की आग इसे परवान चढ़ाती है और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन सबसे बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। UNEP की  रिपोर्ट में दिल्ली, तेहरान और लागोस शहरों को विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इन शहरों में पीएम 2.5 की मात्रा खतरनाक उच्च दर पर बताई गई है। रिपोर्ट में कहा है कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी परिणामों के साथ दुष्चक्र में एक दूसरे को मजबूत बना रहे हैं। यही वजह है कि प्रदूषण से संबंधित जुड़ी बीमारियों से सर्वाधिक मौतें होने लगी है।  रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और अपशिष्ट उत्पादन के प्रभावों से जैव विविधता की हानि, भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण में बहुत तेजी आ रही है।

3 hrs ago
user_NTL
NTL
Nainital, Uttarakhand•
3 hrs ago
c0cf0538-2932-4a21-ac81-eb5ad0881d42

प्रदूषण से हो रही हर साल 90 लाख मौतें:  संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट: एयर पॉल्यूशन को हम जितना हल्के में ले रहे हैं, स्थिति इससे कहीं अधिक भयावह और गंभीर हो चली है।  संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की  रिपोर्ट जारी कर कहा है कि प्रदूषण (pollution) से हर साल लगभग 90 लाख मौत हो रही हैं। यह आंकड़ा मुख्य रूप से वायु, जल, मिट्टी , रासायनिक आदि प्रदूषण से लिया गया है। समय से पहले होने वाली मौतें दुनिया भर में सबसे बड़ा पर्यावरणीय स्वास्थ्य का जोखिम हो चला है। UNEP की आधिकारिक वेबसाइट में इस रिपोर्ट का विस्तृत उल्लेख है।  हाल ही में Global Environment Outlook-7 (GEO-7) रिपोर्ट में भी इस आंकड़े का उल्लेख है। जिसमे कहा गया कि प्रदूषण से सालाना 9 मिलियन मौतें होती हैं, और इनमें से 90 फीसद से अधिक कम-मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। UNEP के कई अन्य प्रकाशनों, जैसे "Pollution and Health" सेक्शन और "Beat Pollution" इंटरएक्टिव पेज में भी इसका उल्लेख किया है।  Lancet Planetary Health रिसर्च (2022) पर आधारित है। इस अध्ययन में 2019 में 9 मिलियन मौतों का अनुमान था।  केवल वायु प्रदूषण (air pollution) से मौतों का आंकड़ा थोड़ा अलग है। इधर State of Global Air 2024 में वायु प्रदूषण से 2021 में 8.1 मिलियन मौतें बताई गई हैं। UNEP ने मौतों के कारण में air,  water,  soil और chemicals को शामिल किया है।  इससे खतरनाक और क्या हो सकता है कि दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी हानिकारक प्रदूषण के साथ जीती है। प्रदूषण बढ़ने की वजह बढ़ती गर्मी भी है और जंगल की आग इसे परवान चढ़ाती है और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन सबसे बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। UNEP की  रिपोर्ट में दिल्ली, तेहरान और लागोस शहरों को विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इन शहरों में पीएम 2.5 की मात्रा खतरनाक उच्च दर पर बताई गई है। रिपोर्ट में कहा है कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी परिणामों के साथ दुष्चक्र में एक दूसरे को मजबूत बना रहे हैं। यही वजह है कि प्रदूषण से संबंधित जुड़ी बीमारियों से सर्वाधिक मौतें होने लगी है।  रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और अपशिष्ट उत्पादन के प्रभावों से जैव विविधता की हानि, भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण में बहुत तेजी आ रही है।

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  • अगर हम सोच रहे हैं कि धरती एक सुरक्षित ग्रह है तो यह गलतफहमी मन मस्तिष्क से निकाल दीजिए। वर्तमान भले ही सुरक्षित नजर आ रहा हो, लेकिन भविष्य की गारंटी नहीं की जा सकती है। जल, थल और नभ को लेकर पृथ्वी का अस्तित्व है और अतीत में इन्हीं तीन क्षेत्रों में कुछ कुछ ऐसा घटा है, जब पृथ्वी तबाह हुई है। एक ऐसी ही खतरनाक घटना की खोज हुई है। यह घटना ब्राज़ील की तबाही की है। जिसे वैज्ञानिकों ने हाल ही खोजा है। 63 लाख साल पहले ब्राज़ील के इलाके में एक बड़ा क्षुद्रग्रह (Asteroid) टकराया था। यह इतना भयंकर टकराव था कि इस टक्कर से पिघला देने वाली गर्मी के साथ इतना दबाव पैदा हुआ कि चट्टानें बर्फ की तरह पिघल गईं। साथ ही पिघलती चट्टानें हवा में उछलने लगीं और ठंडी होकर कांच जैसी (glass) की छोटी-छोटी बूंदों या टुकड़ों में बदल गईं। इन tektites कहते हैं। tektites को हिंदी में काचाभ उल्काश्म या प्राकृतिक काँच के पिंड कहा जाता है। प्राकृतिक काँच के ये टुकड़े ब्राजील पहले कभी नहीं देखे गए थे, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पहली बार खोज निकाले हैं। यह एक विशाल क्षेत्र है। यह देखकर हैरानी होती है कि यह क्षेत्र 900 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह एस्ट्रॉयड कितना बड़ा रहा होगा। जिसने 900 किमी भूभाग को तबाही में बदल दिया। वैज्ञानिकों ने अब तक 600 से ज्यादा प्राकृतिक कांच के टुकड़े ढूंढ निकाले हैं, जो आकार में छोटी छोटी बूंद, गोले या डंबल जैसी शक्ल में बने हुए हैं।
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    अगर हम सोच रहे हैं कि धरती एक सुरक्षित ग्रह है तो यह गलतफहमी मन मस्तिष्क से निकाल दीजिए। वर्तमान भले ही सुरक्षित नजर आ रहा हो, लेकिन भविष्य की गारंटी नहीं की जा सकती है। जल, थल और नभ को लेकर पृथ्वी का अस्तित्व है और अतीत में इन्हीं तीन क्षेत्रों में कुछ कुछ ऐसा घटा है, जब पृथ्वी तबाह हुई है। एक ऐसी ही खतरनाक घटना की खोज हुई है। यह घटना ब्राज़ील की तबाही की है। जिसे वैज्ञानिकों ने हाल ही खोजा है। 63 लाख साल पहले ब्राज़ील के इलाके में एक बड़ा क्षुद्रग्रह (Asteroid)  टकराया था। यह इतना भयंकर टकराव था कि इस टक्कर से पिघला देने वाली गर्मी के साथ इतना दबाव पैदा हुआ कि चट्टानें बर्फ की तरह पिघल गईं। साथ ही पिघलती चट्टानें हवा में उछलने लगीं  और ठंडी होकर कांच जैसी (glass) की छोटी-छोटी बूंदों या टुकड़ों में बदल गईं। इन tektites कहते हैं। tektites को हिंदी में काचाभ उल्काश्म या प्राकृतिक काँच के पिंड कहा जाता है। प्राकृतिक काँच के ये टुकड़े ब्राजील पहले कभी नहीं देखे गए थे,  लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पहली बार खोज निकाले हैं। यह एक विशाल क्षेत्र है। यह देखकर हैरानी होती है कि यह क्षेत्र 900 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह एस्ट्रॉयड कितना बड़ा रहा होगा। जिसने 900 किमी भूभाग को तबाही में बदल दिया। वैज्ञानिकों ने अब तक 600 से ज्यादा प्राकृतिक कांच के टुकड़े ढूंढ निकाले हैं, जो आकार में छोटी छोटी बूंद, गोले या डंबल जैसी शक्ल में बने हुए हैं।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    13 hrs ago
  • Post by नवीन चन्द्र आर्य
    1
    Post by नवीन चन्द्र आर्य
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    17 hrs ago
  • अल्मोड़ा। नगर निगम के पर्यावरण मित्रों ने देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के बैनर तले नगर निगम कार्यालय में धरना प्रदर्शन कर मेयर और नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने एक व्यक्ति पर सोशल मीडिया के माध्यम से नगर निगम और सफाई कर्मचारियों की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो 12 मार्च से सफाई कार्य बंद कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि जोहरी बाजार निवासी एक व्यक्ति द्वारा लगातार कूड़े के मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर सफाई कर्मचारियों और नगर निगम की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना था कि बाजार क्षेत्र में नियमित रूप से सफाई की जाती है और प्रतिदिन सुबह आठ से नौ बजे के बीच कूड़ा वाहन से हटा दिया जाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे उनमें आक्रोश है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा पहले भी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया है और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उनका अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से कर्मचारियों के स्वाभिमान को ठेस पहुंच रही है और नगर की शांति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन से मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं की गई तो कर्मचारी आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होंगे। धरना प्रदर्शन में दीपक चंदेल, राकेश टांक, सतीश कुमार, दीपक सैलानी, दर्शन चंदेल, राजेंद्र पवार, भूपेंद्र शक्ति, राजेश खत्री, शाहिद सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
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    अल्मोड़ा। नगर निगम के पर्यावरण मित्रों ने देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के बैनर तले नगर निगम कार्यालय में धरना प्रदर्शन कर मेयर और नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने एक व्यक्ति पर सोशल मीडिया के माध्यम से नगर निगम और सफाई कर्मचारियों की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो 12 मार्च से सफाई कार्य बंद कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि जोहरी बाजार निवासी एक व्यक्ति द्वारा लगातार कूड़े के मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर सफाई कर्मचारियों और नगर निगम की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना था कि बाजार क्षेत्र में नियमित रूप से सफाई की जाती है और प्रतिदिन सुबह आठ से नौ बजे के बीच कूड़ा वाहन से हटा दिया जाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे उनमें आक्रोश है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा पहले भी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया है और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उनका अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से कर्मचारियों के स्वाभिमान को ठेस पहुंच रही है और नगर की शांति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन से मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं की गई तो कर्मचारी आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होंगे। धरना प्रदर्शन में दीपक चंदेल, राकेश टांक, सतीश कुमार, दीपक सैलानी, दर्शन चंदेल, राजेंद्र पवार, भूपेंद्र शक्ति, राजेश खत्री, शाहिद सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
    user_Vinod Joshi
    Vinod Joshi
    Local News Reporter अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    14 hrs ago
  • रानीखेत तहसील के सुदूरवर्ती गांव खरकिया में वन विभाग की जमीन पर धड़ल्ले से अवैध खनन किए जाने का मामला सामने आया है। जंगल के बीचों-बीच भारी मात्रा में पत्थर निकाले जाने के बावजूद जिम्मेदार विभाग अब तक कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है। रानीखेत के दूरस्थ गांव खरकिया में वन विभाग के जंगलों में खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है। खनन माफियाओं ने जंगल के अंदर ही धरती का सीना चीरकर कई टन पत्थर निकाल लिए हैं। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग की नाक के नीचे यह पूरा खेल चल रहा है, लेकिन विभाग अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा। जब इस मामले में क्षेत्रीय राजस्व उप निरीक्षक से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। वहीं राजस्व विभाग का कहना है कि यह इलाका वन विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए कार्रवाई की जिम्मेदारी भी वन विभाग की ही है। अब बड़ा सवाल यह है कि विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने के इस खेल में आखिर कब तक जंगलों का दोहन होता रहेगा और क्या अवैध खनन करने वाले माफियाओं पर कोई सख्त कार्रवाई होगी। वन विभाग के उप वन संरक्षक दीपक सिंह ने कहा कि ये खनन नाप भूमि में है, वन पंचायत में है या फॉरेस्ट एरिया में इसकी जांच कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
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    रानीखेत तहसील के सुदूरवर्ती गांव खरकिया में वन विभाग की जमीन पर धड़ल्ले से अवैध खनन किए जाने का मामला सामने आया है। जंगल के बीचों-बीच भारी मात्रा में पत्थर निकाले जाने के बावजूद जिम्मेदार विभाग अब तक कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है। रानीखेत के दूरस्थ गांव खरकिया में वन विभाग के जंगलों में खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है। खनन माफियाओं ने जंगल के अंदर ही धरती का सीना चीरकर कई टन पत्थर निकाल लिए हैं। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग की नाक के नीचे यह पूरा खेल चल रहा है, लेकिन विभाग अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा। जब इस मामले में क्षेत्रीय राजस्व उप निरीक्षक से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। वहीं राजस्व विभाग का कहना है कि यह इलाका वन विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए कार्रवाई की जिम्मेदारी भी वन विभाग की ही है। अब बड़ा सवाल यह है कि विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने के इस खेल में आखिर कब तक जंगलों का दोहन होता रहेगा और क्या अवैध खनन करने वाले माफियाओं पर कोई सख्त कार्रवाई होगी। वन विभाग के उप वन संरक्षक दीपक सिंह ने कहा कि ये खनन नाप भूमि में है, वन पंचायत में है या फॉरेस्ट एरिया में इसकी जांच कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
    user_Gopal Bisht
    Gopal Bisht
    अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    19 hrs ago
  • Uday preet chopra lock Manpur. Harsh Yana Colony key road. Samvidhan karai or Sarkar Tak pose Bhai ye news.Chalsal iss road ka samvidhan nikal oil , bahut , dikkaten hoti storo per chal chalne ke baad
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    Uday preet chopra lock Manpur. Harsh Yana Colony key road. Samvidhan karai or Sarkar Tak pose Bhai ye news.Chalsal iss road ka samvidhan nikal oil , bahut , dikkaten hoti storo per chal chalne ke baad
    user_Sultan Khan
    Sultan Khan
    रामनगर, नैनीताल, उत्तराखंड•
    3 hrs ago
  • गुरुग्राम में दिल दहलाने वाला हादसा हुआ है। यहां एक निर्माणाधीन सोसाइटी की दीवार गिरने से 6 मजदूरों की मौत हो गई है और मलबे में कई के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय मजदूर दीवार के पास काम कर रहे थे। इसी दौरान दीवार जोरदार आवाज के साथ अचानक भरभरा कर गिरी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई है। भारी मशीनों से मलबा हटाने का काम और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस मौके पर तैनात हैं। वहीं, प्रशासन हादसे के कारणों की जांच में जुटा हुआ है
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    गुरुग्राम में दिल दहलाने वाला हादसा हुआ है। यहां एक निर्माणाधीन सोसाइटी की दीवार गिरने से 6 मजदूरों की मौत हो गई है और मलबे में कई के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
सामने आई जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय मजदूर दीवार के पास काम कर रहे थे। इसी दौरान दीवार जोरदार आवाज के साथ अचानक भरभरा कर गिरी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई है। भारी मशीनों से मलबा हटाने का काम और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस मौके पर तैनात हैं। वहीं, प्रशासन हादसे के कारणों की जांच में जुटा हुआ है
    user_Aasif News Network
    Aasif News Network
    Painter and Decorator बाजपुर, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड•
    4 hrs ago
  • क्रॉपवेल एग्रीजेन एल.एल.पी. के डायरेक्टर सुधीर चौधरी बोले..... मक्का उत्पादन कर दोहरा लाभ प्राप्त करें किसान बाजपुर।रामराज रोड स्थित बहु. प्रथम किसान सेवा सहकारी समिति लि. के मुख्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते यूसीएफ द्वारा अनुबंधित क्रॉपवेल एग्रीजेन एल.एल.पी. के डायरेक्टर सुधीर चौधरी ने कहा कि किसान मक्का का उत्पादन कर दोहरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं और सरकार के जल संरक्षण अभियान में सहयोगी बन सकते हैं। किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से सब्सिडी पर मक्का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है और यूसीएफ द्वारा इसकी खरीद भी सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को दोहरा लाभ होगा। मक्का किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुये क्रॉपवेल एग्रीजेन एल.एल.पी. ने अपने उन्नत हाईब्रिड मक्का बीज सीडब्लू 3105 के लिए विशेष प्रोत्साहन की घोषणा की है। यह किस्म अब न केवल जैद बल्कि खरीफ मौसम के लिए भी सबसे उपयुक्त पाई गई है। उच्च गुणवत्ता वाला यह बीज किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाने के लिए तैयार फसल को यूसीएफ द्वारा खरीदा जाएगा, जिससे किसानों का मुनाफा सुनिश्चित होगा। यह सफल मात्र 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है। साईलेज के लिए ये फसल मात्र 60-65 दिन में तैयार हो जाती है। अनाज के लिए 25-30 कुंतल और चारे के लिए 150-200 कुंतल प्रति एकड़ तक इसका उत्पादन है। डंठल सड़न और एनएलबी रोगों के प्रति यह अत्यधिक सहनशील है। इसके आकर्षक नारंगी-पीले दाने और ठोस शंक्काकार भुट्टे होते है। किसान इस हाईब्रिड किस्म को जैद तथा आने वाले खरीफ के मौसम में भी लगाकर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि पंजीकरण और बीज प्राप्ति के लिए अपनी नजदीकी सहकारी समिति से सम्पर्क करें। अधिक जानकारी के लिए हैल्प लाईन नंबर , पर कॉल कर सकते हैं। इस मौके पर बहु. प्रथम किसान सेवा सहकारी समिति लि. के प्रबंध निदेशक हेम काण्डपाल, क्रॉपवेल एग्रीजेन एल.एल.पी. के सेल्स मैनेजर अभिजीत सिंह व विक्रान्त चौधरी मौजूद रहे।
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    क्रॉपवेल एग्रीजेन एल.एल.पी. के डायरेक्टर सुधीर चौधरी बोले.....
मक्का उत्पादन कर दोहरा लाभ प्राप्त करें किसान
बाजपुर।रामराज रोड स्थित बहु. प्रथम किसान सेवा सहकारी समिति लि. के मुख्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते यूसीएफ द्वारा अनुबंधित क्रॉपवेल एग्रीजेन एल.एल.पी. के डायरेक्टर सुधीर चौधरी ने कहा कि किसान मक्का का उत्पादन कर दोहरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं और सरकार के जल संरक्षण अभियान में सहयोगी बन सकते हैं। किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से सब्सिडी पर मक्का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है और यूसीएफ द्वारा इसकी खरीद भी सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को दोहरा लाभ होगा। मक्का किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुये क्रॉपवेल एग्रीजेन एल.एल.पी. ने अपने उन्नत हाईब्रिड मक्का बीज सीडब्लू 3105 के लिए विशेष प्रोत्साहन की घोषणा की है। यह किस्म अब न केवल जैद बल्कि खरीफ मौसम के लिए भी सबसे उपयुक्त पाई गई है। उच्च गुणवत्ता वाला यह बीज किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाने के लिए तैयार फसल को यूसीएफ द्वारा खरीदा जाएगा, जिससे किसानों का मुनाफा सुनिश्चित होगा। यह सफल मात्र 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है। साईलेज के लिए ये फसल मात्र 60-65 दिन में तैयार हो जाती है। अनाज के लिए 25-30 कुंतल और चारे के लिए 150-200 कुंतल प्रति एकड़ तक इसका उत्पादन है। डंठल सड़न और एनएलबी रोगों के प्रति यह अत्यधिक सहनशील है। इसके आकर्षक नारंगी-पीले दाने और ठोस शंक्काकार भुट्टे होते है। किसान इस हाईब्रिड किस्म को जैद तथा आने वाले खरीफ के मौसम में भी लगाकर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि पंजीकरण और बीज प्राप्ति के लिए अपनी नजदीकी सहकारी समिति से सम्पर्क करें। अधिक जानकारी के लिए हैल्प लाईन नंबर , पर कॉल कर सकते हैं। इस मौके पर बहु. प्रथम किसान सेवा सहकारी समिति लि. के प्रबंध निदेशक हेम काण्डपाल, क्रॉपवेल एग्रीजेन एल.एल.पी. के सेल्स मैनेजर अभिजीत सिंह व विक्रान्त चौधरी मौजूद रहे।
    user_Kush BAZPUR
    Kush BAZPUR
    Bajpur, Udam Singh Nagar•
    16 hrs ago
  • Post by नवीन चन्द्र आर्य
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    Post by नवीन चन्द्र आर्य
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    22 hrs ago
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