नेपाल में जलप्रलय: बाढ़ क्या छोड़ गई पीछे? नेपाल में कुदरत ने ऐसी तबाही मचाई है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठे। रासुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कुछ ही समय में घर, सड़कें, पुल और बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटेकोशी नदी में आई तेज बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ता गया और कई बस्तियों में भारी तबाही मचा दी। किसी ने अपनी आंखों के सामने अपना घर उजड़ते देखा... किसी ने जिंदगी भर की कमाई को मलबे में तब्दील होते देखा... और कई परिवार ऐसे हैं, जो अब अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि बाढ़ का पानी अपने साथ सिर्फ मिट्टी और पत्थर ही नहीं, बल्कि लोगों की पूरी जिंदगी बहाकर ले गया। कई इलाकों में मकान क्षतिग्रस्त हैं, सड़कें और पुल टूट चुके हैं और जगह-जगह मलबे का ढेर नजर आ रहा है। सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिनके सामने अब सवाल है—घर दोबारा कैसे बनेगा और बिछड़े हुए अपनों का क्या होगा? बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षाबल और बचाव दल मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी रासुवा और आसपास के प्रभावित इलाकों में जरूरी चिकित्सा सामग्री और टेंट भेजकर राहत प्रयासों में सहयोग शुरू किया है। लेकिन सवाल सिर्फ आज का नहीं है... कल जिन घरों में चूल्हा जल रहा था, आज वहां कीचड़ और मलबा है। जिन रास्तों पर जिंदगी दौड़ती थी, वहां अब तबाही के निशान हैं। जिन परिवारों के पास अपना आशियाना था, उनमें से कई अब खुले आसमान के नीचे हैं। ये तस्वीरें सिर्फ नेपाल में आई बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं... ये तस्वीरें बता रही हैं कि जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसान की बनाई मजबूत से मजबूत दीवार भी पलभर में ढह सकती है। देखिए नेपाल की तबाही की ये तस्वीरें... और दुआ कीजिए कि मलबे के बीच से ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां सुरक्षित बाहर निकलें। नेपाल में जलप्रलय: बाढ़ क्या छोड़ गई पीछे? नेपाल में कुदरत ने ऐसी तबाही मचाई है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठे। रासुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कुछ ही समय में घर, सड़कें, पुल और बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटेकोशी नदी में आई तेज बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ता गया और कई बस्तियों में भारी तबाही मचा दी। किसी ने अपनी आंखों के सामने अपना घर उजड़ते देखा... किसी ने जिंदगी भर की कमाई को मलबे में तब्दील होते देखा... और कई परिवार ऐसे हैं, जो अब अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि बाढ़ का पानी अपने साथ सिर्फ मिट्टी और पत्थर ही नहीं, बल्कि लोगों की पूरी जिंदगी बहाकर ले गया। कई इलाकों में मकान क्षतिग्रस्त हैं, सड़कें और पुल टूट चुके हैं और जगह-जगह मलबे का ढेर नजर आ रहा है। सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिनके सामने अब सवाल है—घर दोबारा कैसे बनेगा और बिछड़े हुए अपनों का क्या होगा? बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षाबल और बचाव दल मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी रासुवा और आसपास के प्रभावित इलाकों में जरूरी चिकित्सा सामग्री और टेंट भेजकर राहत प्रयासों में सहयोग शुरू किया है। लेकिन सवाल सिर्फ आज का नहीं है... कल जिन घरों में चूल्हा जल रहा था, आज वहां कीचड़ और मलबा है। जिन रास्तों पर जिंदगी दौड़ती थी, वहां अब तबाही के निशान हैं। जिन परिवारों के पास अपना आशियाना था, उनमें से कई अब खुले आसमान के नीचे हैं। ये तस्वीरें सिर्फ नेपाल में आई बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं... ये तस्वीरें बता रही हैं कि जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसान की बनाई मजबूत से मजबूत दीवार भी पलभर में ढह सकती है। देखिए नेपाल की तबाही की ये तस्वीरें... और दुआ कीजिए कि मलबे के बीच से ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां सुरक्षित बाहर निकलें।
नेपाल में जलप्रलय: बाढ़ क्या छोड़ गई पीछे? नेपाल में कुदरत ने ऐसी तबाही मचाई है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठे। रासुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कुछ ही समय में घर, सड़कें, पुल और बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटेकोशी नदी में आई तेज बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ता गया और कई बस्तियों में भारी तबाही मचा दी। किसी ने अपनी आंखों के सामने अपना घर उजड़ते देखा... किसी ने जिंदगी भर की कमाई को मलबे में तब्दील होते देखा... और कई परिवार ऐसे हैं, जो अब अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि बाढ़ का पानी अपने साथ सिर्फ मिट्टी और पत्थर ही नहीं, बल्कि लोगों की पूरी जिंदगी बहाकर ले गया। कई इलाकों में मकान क्षतिग्रस्त हैं, सड़कें और पुल टूट चुके हैं और जगह-जगह मलबे का ढेर नजर आ रहा है। सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिनके सामने अब सवाल है—घर दोबारा कैसे बनेगा और बिछड़े हुए अपनों का क्या होगा? बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षाबल और बचाव दल मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी रासुवा और आसपास के प्रभावित इलाकों में जरूरी चिकित्सा सामग्री और टेंट भेजकर राहत प्रयासों में सहयोग शुरू किया है। लेकिन सवाल सिर्फ आज का नहीं है... कल जिन घरों में चूल्हा जल रहा था, आज वहां कीचड़ और मलबा है। जिन रास्तों पर जिंदगी दौड़ती थी, वहां अब तबाही के निशान हैं। जिन परिवारों के पास अपना आशियाना था, उनमें से कई अब खुले आसमान के नीचे हैं। ये तस्वीरें सिर्फ नेपाल में आई बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं... ये तस्वीरें बता रही हैं कि जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसान की बनाई मजबूत से मजबूत दीवार भी पलभर में ढह सकती है। देखिए नेपाल की तबाही की ये तस्वीरें... और दुआ कीजिए कि मलबे के बीच से ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां सुरक्षित बाहर निकलें। नेपाल में जलप्रलय: बाढ़ क्या छोड़ गई पीछे? नेपाल में कुदरत ने ऐसी तबाही मचाई है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठे। रासुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कुछ ही समय में घर, सड़कें, पुल और बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटेकोशी नदी में आई तेज बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ता गया और कई बस्तियों में भारी तबाही मचा दी। किसी ने अपनी आंखों के सामने अपना घर उजड़ते देखा... किसी ने जिंदगी भर की कमाई को मलबे में तब्दील होते देखा... और कई परिवार ऐसे हैं, जो अब अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि बाढ़ का पानी अपने साथ सिर्फ मिट्टी और पत्थर ही नहीं, बल्कि लोगों की पूरी जिंदगी बहाकर ले गया। कई इलाकों में मकान क्षतिग्रस्त हैं, सड़कें और पुल टूट चुके हैं और जगह-जगह मलबे का ढेर नजर आ रहा है। सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिनके सामने अब सवाल है—घर दोबारा कैसे बनेगा और बिछड़े हुए अपनों का क्या होगा? बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षाबल और बचाव दल मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी रासुवा और आसपास के प्रभावित इलाकों में जरूरी चिकित्सा सामग्री और टेंट भेजकर राहत प्रयासों में सहयोग शुरू किया है। लेकिन सवाल सिर्फ आज का नहीं है... कल जिन घरों में चूल्हा जल रहा था, आज वहां कीचड़ और मलबा है। जिन रास्तों पर जिंदगी दौड़ती थी, वहां अब तबाही के निशान हैं। जिन परिवारों के पास अपना आशियाना था, उनमें से कई अब खुले आसमान के नीचे हैं। ये तस्वीरें सिर्फ नेपाल में आई बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं... ये तस्वीरें बता रही हैं कि जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसान की बनाई मजबूत से मजबूत दीवार भी पलभर में ढह सकती है। देखिए नेपाल की तबाही की ये तस्वीरें... और दुआ कीजिए कि मलबे के बीच से ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां सुरक्षित बाहर निकलें।
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- बहनों की नाराजगी हुई दूर! उपहार लेकर मोहम्मदपुर पहुंचे राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि | लक्सर लक्सर के जमदनी पब्लिक स्कूल में आयोजित रक्षा सूत्र कार्यक्रम के दौरान कुछ बहनें उपहार से वंचित रह गई थीं। इसके बाद बहनों में नाराजगी देखने को मिली। मामले की जानकारी मिलने पर दर्जाधारी राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि खुद उपहार लेकर मोहम्मदपुर गांव पहुंचे। राज्यमंत्री ने बहनों से मुलाकात कर उन्हें अपने हाथों से उपहार वितरित किए। उपहार पाकर बहनों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ नजर आया। वहीं कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में फैल रही अफवाहों पर राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि ने कहा कि अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र कार्यक्रम की सफलता से विरोधी बौखलाए हुए हैं। रिपोर्टर – सचिन कुमार लोकेशन – लक्सर, उत्तराखंड श्रद्धा टीवी | सच्ची खबर, साफ आवाज़ #Laksar #Mohammadpur #OmPrakashJamadagni #RakshaSutra #UttarakhandNews1
- लोकेशन लक्सर से है हुसैनपुर में 'मातृशक्ति आशीर्वाद अभियान': 1000 से अधिक महिलाओं ने भाजपा नेता सचिन अग्रवाल को बांधी राखी। (पत्रकार राजेश लाम्बा) खबर लक्सर से है रक्षाबंधन के पावन पर्व पर लक्सर के हुसैनपुर गांव में आयोजित 'मातृशक्ति आशीर्वाद अभियान' के तहत स्नेह और आत्मीयता की सुंदर तस्वीर देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी सचिन अग्रवाल द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंची लगभग 1,000 महिलाओं ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उन्हें भाई का स्नेह और आशीर्वाद दिया।मिठाई और शगुन राशि देकर किया मातृशक्ति का सम्मान कार्यक्रम के दौरान बहनों का स्वागत करते हुए सचिन अग्रवाल ने सभी महिलाओं को मिठाई और शगुन राशि भेंट कर सम्मानित किया। राखी बांधने के दौरान पूरे आयोजन स्थल पर भारी उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। महिलाओं ने भी अपने भाई सचिन अग्रवाल के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु होने की कामना की।1
- हरे भरे पेड़ों पर चल रहा आरा उत्तराखंड में आए दिन पर्यावरण को बचाने की वजह पर्यावरण को मिटाने में उतरे कुछ तस्कर पेड़1
- कलियर में युवती से छेड़छाड़ और युवक की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल कलियर क्षेत्र में युवती से कथित छेड़छाड़ और एक युवक की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग एक युवक के साथ मारपीट करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की वास्तविकता और पूरे मामले की पुष्टि अभी पुलिस स्तर से नहीं हुई है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।1
- बिजनौर महात्मा विदुर मेडिकल कालेज जिला अस्पताल के आउट सोर्सिंग कर्मचारियों को पिछले चार महीने से नहीं मिल रहा वेतन। नाराज कर्मियों ने दिया धरना। मेडिकल कालेज प्रशासन समझाने का कर रहा प्रयास। आउट सोर्सिंग कम्पनी कर रही कर्मचारियों का शोषण। कर्मियों ने लगाई सीएम से वेतन दिलाने की गुहार।1
- SIR पर सियासी संग्राम, भाजपा कांग्रेस आमने-सामने* उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासत गरमा गई है। SIR पर सियासी संग्राम, भाजपा कांग्रेस आमने-सामने* उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासत गरमा गई है।1
- पावर प्लांट-पुल बहे; 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के कारण भारी तबाही हुई है, जिसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 133 भारतीय पर्यटकों (105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई) सहित करीब 400 तीर्थयात्री और ट्रेकर्स लापता (संपर्क से बाहर) हो गए हैं। बुधवार सुबह करीब 9 बजे आई इस अचानक बाढ़ की वजह से नेपाल और चीन (तिब्बत) को जोड़ने वाला नेपाल-चीन मितेरी पुल (फ्रेंडशिप ब्रिज) बह गया है और लगभग 11 हाइड्रो पावर प्लांट, 19 पुल और 40 किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह तबाह हो गई है। लापता लोगों की संख्या: नेपाल पर्यटन बोर्ड (NTB) के अनुसार कुल 384 तीर्थयात्री लापता हैं, जिनमें 105 भारतीय, 37 एनआरआई (अनिवासी भारतीय), 93 नेपाली और अन्य देशों (जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया आदि) के नागरिक शामिल हैं।सद्गुरु के समूह के लोग भी फंसे: ईशा फाउंडेशन के प्रमुख सद्गुरु ने बताया कि उनके एक तीर्थयात्री समूह के 77 लोग चीनी आव्रजन (इमिग्रेशन) कार्यालय के पास फंसे हुए हैं और बाढ़ में इमारत बहने के बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।संपर्क पूरी तरह ठप: रसुवागढ़ी-केरुंग मार्ग (जो तिब्बत जाने का सबसे मुख्य निजी रास्ता है) पूरी तरह से बंद हो गया है। क्षेत्र में फाइबर और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो जाने के कारण यात्रियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।राहत और बचाव कार्य: नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए 14-15 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा दैनिक समाचार पत्र लखनऊ1